काफ़ी है... Kunal द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

काफ़ी है...

कोई ऐसी शाम, जिसकी हर किसी को चाह होती है… जैसे रोज़ के तनाव भरे जीवन से कहीं दूर जाके, समंदर किनारे, लहरों के पास, तेज़ चलती हवा में उँगलियाँ फैलाके, पसंद के कपड़ों में उड़ते बालों में और हवा में घुली हुई आसमानी महक के साथ सूर्य के ढलने के बाद वाला थोड़ा केसरी थोड़ा लाल आसमान देखने की चाह।

और आज बिल्कुल वैसी ही शाम थी, एकदम वैसी जैसी श्रवण ने सोची थी।

लहरें उसके पैरों को चूमके वापस जा रही थीं, सूर्यास्त के बाद वाली लाली उसके सफेद चेहरे पर पड़ रही थी…

उसके अंदर की वो सारी थकान जिसने पिछले कई दिनों में उसे परेशान किया, जिसमें नौकरी की टेंशन, घर का खर्च, खुद की हेल्थ और काफी कुछ, वो सब पल में छूमंतर हो गया…

इस सुंदर नजारे को देख श्रवण ने सोचा काश ऐसी शाम रोज़ नसीब में हो…

आज ही के दिन 27 साल का हुआ… एक साधारण सा दिखने वाला, सॉफ्ट-हार्टेड, घुंघराले बालों वाला, नशीली आँखों वाला, मुँह पर तेज़ और छोटी दाढ़ी वाला एक सीधा-साधा लड़का श्रवण… समंदर के किनारे सफेद रंग की लिनेन शर्ट, आसमानी रंग की जीन्स जिसे दोनों टांगों पर ऊपर सरकाके किनारे बैठा हुआ यह नौजवान।

नॉर्थ गोवा के किसी अनजान बीच के किनारे अपने बर्थडे को अकेले अपने तरीके से सेलिब्रेट करता हुआ श्रवण…

पिछले कई दिनों से बहुत सी परेशानियों से जूझता हुआ यह अंदर से टूटा हुआ बंदा हाथ में बीयर का कैन लेके बीच पर शाम के समय बैठा हुआ यह सोच रहा था…

"अगर कुदरत सही में इतनी खूबसूरत है तो उसके बनाये लोग क्यों नहीं?"

दरअसल यह लाइन श्रवण ज़्यादा ही ज़ोर से बोला क्योंकि उस अनजान बीच पर और कोई नहीं था…

पर इतने में पीछे से आवाज़ आयी…

"क्योंकि तुम बेवकूफ हो!" कोई लड़की बोली।

उसने अपने दायें-बायें देखा, कोई नहीं था।

लड़की के हँसने की आवाज़ आयी तो वो पीछे मुड़ा और देखा तो कोई सुंदर सी लड़की अपने व्हाइट वन-पीस में, हाथ में हील्स पकड़े, सूजी हुई शक्ल लेके उसके पीछे खड़ी थी। मानो बहुत रोयी हो…

श्रवण बोला, "एक्सक्यूज़ मी, हाउ डेयर यू!", वो गुस्से और अजीब सी शक्ल बनाके बोला!

"हाहाहाहा," लड़की ज़ोर से हँसी, "अरे चिल करना मैन… देख आसपास कोई नहीं है, मुझे तू दिखा तो मैं चली आयी, साथ में चिल करते हैं ना।"

बिना कुछ पूछे वो लड़की बस बोलने ही लगी… मानो कई दिनों से कुछ बोली ही नहीं… और आज मौका मिला हो।

"मैं अपने बर्थडे के लिए आयी थी गोवा, जिसके साथ आयी उसको मेरा फायदा उठाना था तो मैं उसके पिछवाड़े लात मारके निकल पड़ी। यहाँ से गुज़री तो व्यू अच्छा दिखा तो चली आयी…" एक ही सांस में सब बोलके फिर बोली,

"बाय द वे मैं रितिका! यू?"

"अहह…" थोड़ा हिचकिचाके श्रवण बोला, "मैं श्रवण।"

दोनों ने हाथ मिलाया।

रितिका बोली कन्विंसिंग आवाज़ के साथ, "यार प्लीज, आज मेरा बर्थडे है, चिल करने के लिए कोई नहीं, प्लीज मेरे साथ चिल करेगा!"

श्रवण ज़ोर-ज़ोर से हँसा और चिल्ला के बोला,

"हैप्पी बर्थडे टू अस!"

"नो वे!" रितिका ने कहा।

"यस!"

"हाउ इज़ दैट पॉसिबल?"

"वो तो मुझे नहीं पता!"

और दोनों हँसने लगे।

श्रवण थोड़ा कम बोलने वालों में से था और रितिका टॉकेटिव पर थोड़ी सेंसिटिव। उसने कहा, "चल किनारे पर वॉक मारते हैं और फिर साथ में डिनर करते हैं? क्या तुम्हें यह क़बूल है!" थोड़े नौटंकी अंदाज़ में वो बोली।

और श्रवण ने कहा, "व्हाइ नॉट!"

दोनों को नहीं पता था कि वो यहाँ कर क्या रहे हैं, ऐसी अनजानी जगह जहाँ मुश्किल से 2-4 लोग दिख रहे हैं, ऐसा सुनसान किनारा?

रितिका ने पूछा, "सो श्रवण टेल मी, व्हाइ हियर? ऐसे अकेले वो भी बर्थडे के दिन? आई मीन व्हाइ?!"

उसने जवाब में कहा बड़ी ही कामनेस के साथ, "27 का हुआ हूँ, ये कोई नॉर्मल एज तो है नहीं कि सब की तरह केक काटके, खाना खाके सो गये… उम्र बढ़ रही है, ज़िम्मेदारियाँ आयेंगी, घरवाले शादी का प्रेशर देंगे जो मुझे पता है, करियर में अभी कुछ कर नहीं पाया हूँ, मम्मी-पापा बूढ़े हो रहे हैं! और कोई भाई-बहन भी नहीं है! तो ज़ाहिर है सब मुझे ही देखना पड़ेगा और जैसे एक उम्र के बाद सब छूट जाता है, मेरे भी दोस्त छूट गये, कोई 12 बजे बर्थडे विश करने के लिए भी नहीं है, तो इंसान अपनी खुशी कहीं तो ढूँढेगा? राइट!

तो सोचा ऑफिस से छुट्टी लेके थोड़े दिन गुम हो जाते हैं… तो बस बैग पैक करके मैं निकल गया घर से और यहाँ से गुज़रा, सनसेट का टाइम था और स्पॉट भी परफेक्ट था। किसी लोकल ने एड्रेस बताया तो आके बैठ गया अपने अंदर की चीखों को शांत करने।"

"ओ ओ ओ ओ मिस्टर श्रवण, दैट्स डीप!"

"हाहाहा इट इज़, बट तुम… किसके साथ थी और वो कहाँ गया?"

"आई डोंट केयर, उसे चाहिए था मेरा शरीर, नॉट माय आत्मा, तो मैं निकल गयी……" चलते-चलते दोनों इस बात पर इतने हँसे कि इधर ही बैठ गये।

रितिका को काफी समय के बाद कोई डिसेंट, इनोसेंट सा लड़का मिला जो सही मायने में सच्चा और अच्छा लग रहा था। उसने पूछा, "चलना साथ में डिनर करते हैं?"

"डिनर!"

शाम का उजाला धीरे-धीरे ढल रहा था, लहरें मदहोशी में थीं… ठंडी हवा में दोनों के बाल लहरा रहे थे। श्रवण ने कहा, "मैं जिस चीज़ के लिए आया हूँ वो तो कर लूँ।" श्रवण ने बेशर्म होके अपना शर्ट उतारा, हवा में घुमाया और किनारे पर फेंका और दौड़के समंदर की लहरों में डुबकियाँ लगाने लगा… और चिल्लाया,

"हैप्पी!"

"बर्थडे!"

"श्रवण!"

"आई ऑलवेज लव यू…………"

श्रवण इतना खुश था मानो कोई छोटा बच्चा पानी को देख के उछलने-कूदने लगा हो। रितिका किनारे से उसे देख रही थी, अपनी लटों को कान के पीछे सरकाके रितिका हँसने लगी।

उसने आवाज़ लगायी, "रितिका, कम ऑन, तू भी आ जा बेवकूफ के साथ!"

😁😁 वो मुस्कुरायी और बोली, "पानी बहुत ठंडा होगा," चिल्लाके उसे जवाब दिया।

"नहीं नहीं, तू आजा, मैं हूँ ना…"

रितिका ने अपने हाथों में पकड़ी हील्स को किनारे पर उछालके फेंका और दौड़ पड़ी श्रवण की ओर। अँधेरा होने लगा, दोनों समंदर की कश्ती में अपना सब दर्द भूल बैठे,

हँसी उनके गालों से हट नहीं रही थी मानो दोनों आज तक इतना खुश कभी नहीं हुए। अकेलेपन में किसी का साथ इतना अच्छा लगता है जैसे भटके हुए किसी राही को दूर कहीं रोशनी का दिखना,

श्रवण बहुत ख़ुश लग रहा था ऐसा नहीं था कि आज के बाद उसकी सारी पीड़ा चली जायेगी, बस उसका आज उसे बड़ा हसीन लग रहा था, उसने सोचा था उससे कहीं ज़्यादा

…उसका कारण शायद अकेलेपन में रितिका की मौजूदगी।

श्रवण थोड़े नशे में था, रितिका अचानक उसके पास आयी और बोली,

"कैन आई किस यू, श्रवण?"

"व्हाट!" हँसके थोड़ा ज़ोर से लहरों की आवाज़ में दबी हुई आवाज़ के साथ फिर से वो बोली, "कैन आई किस यू, श्रवण!!"

श्रवण ने छोटी सी स्माइल दी!

चाँद माथे पर था, श्रवण ने बहती लहरों में उसे गोद में उठाया और कहा,

"तुम आज मिलीं उतना काफ़ी है!"