The Dark Safehouse - 2 Sipra Mohanty द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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The Dark Safehouse - 2

Episode 2: (Forced Proximity & Tension)


देवांश के कहे शब्द अभी भी कमरे में गूंज रहे थे। बाहर मूसलाधार बारिश का शोर और थंडरस्टॉर्म की गड़गड़ाहट और तेज़ हो चुकी थी।

ऑटो-लॉक शटर गिरते ही सेफ़हाउस की हवा में एक अजीब सा खिंचाव और भारीपन छा गया था। देवांश ने अपनी गन नीचे की और उसे अपनी बेल्ट में खोस लिया, लेकिन उसकी नज़रें एक पल के लिए भी ज़ोया के चेहरे से नहीं हटीं।

अंधेरे में सिर्फ़ खिड़की से छनकर आती बिजली की नीली चमक उनके चेहरों को रोशन कर रही थी।

"म-मुझे जाने दो... तुम समझ नहीं रहे हो, मैं यहाँ किसी मकसद से नहीं आई थी," ज़ोया ने अपनी कांपती हुई आवाज़ को संभालने की कोशिश की। वह दीवार से सटी खड़ी थी, और देवांश का विशाल वजूद उसके बिल्कुल सामने था—इतना करीब कि वह उसकी तेज़ होती सांसों की गर्मी अपनी त्वचा पर महसूस कर सकती थी।

"खामोश," देवांश ने एक सख्त, रफ आवाज़ में कहा। उसने अपना एक हाथ ज़ोया के सिर के ठीक पीछे दीवार पर टिका दिया, जिससे उसका भागने का बचा-कुचा रास्ता भी बंद हो गया। "तुम चाहे जो भी कहो, इस वक्त बाहर जाना मौत को दावत देना है। मेरे आदमी बाहर की स्थिति को संभाल रहे हैं, लेकिन जब तक मुझे क्लियर सिग्नल नहीं मिलता, तुम एक इंच भी यहाँ से नहीं हिलोगी।"

"तुम मुझ पर हुकुम नहीं चला सकते!" ज़ोया ने हिम्मत जुटाकर उसके सीने पर अपने दोनों हाथ रखे और उसे पीछे धकेलने की कोशिश की।

लेकिन देवांश अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ। ज़ोया के छुअन से देवांश की सुलगती हुई आँखों में एक अजीब सा जुनून तैरा। उसने झटके से ज़ोया की दोनों कलाइयों को एक ही हाथ से जकड़ लिया और उन्हें उसके सिर के ऊपर दीवार से सटा दिया।
"ज़्यादा ज़िद मत करो, ज़ोया," देवांश उसकी तरफ थोड़ा और झुका। उसकी भारी, पसेसिव आवाज़ सीधे ज़ोया की धड़कनों में उतर गई। "मुझे मजबूर मत करो कि मैं तुम्हारे साथ वो सख्ती करूँ जो मैं अपने दुश्मनों के साथ करता हूँ।"

ज़ोया की सांसें पूरी तरह अटक गईं। देवांश की डार्क, प्रोटेक्टिव जकड़न में एक अजीब सी कशिश थी जिसने ज़ोया को अंदर तक हिलाकर रख दिया। नफ़रत और डर के बीच एक अनजाना, पैशनेट अट्रैक्शन जन्म ले रहा था।

अचानक बाहर से एक ज़ोरदार धमाके की आवाज़ आई—जैसे किसी ने सेफ़हाउस के बाहरी गेट को तोड़ने की कोशिश की हो!
देवांश के चेहरे के भाव एक सेकंड में बदल गए। उसकी आँखों में एक खतरनाक दरिंदगी उतर आई। उसने तुरंत ज़ोया की कलाई छोड़ी और उसे अपने पीछे खींचते हुए उसकी कमर में हाथ डालकर खुद से चिपका लिया।

"वे यहाँ पहुँच चुके हैं," देवांश ने फुसफुसाया, उसकी गन एक बार फिर उसके हाथ में थी। "मेरे पीछे रहो और अपनी एक चीख भी बाहर मत निकलने देना... समझे?"

ज़ोया ने बिना कुछ कहे सिर्फ़ मुंडी हिला दी। उसने अनजाने में ही देवांश की शर्ट को पीछे से कसकर पकड़ लिया। उस डार्क और खौफनाक रात में, वह खतरनाक अजनबी ही अब उसकी इकलौती ढाल था।

Author's Note:

​दोस्तों, ज़ोया और देवांश के बीच बढ़ते इस भारी तनाव और खतरे का यह दूसरा एपिसोड आपको कैसा लगा?
​अंधेरे में देवांश का वो पसेसिव और प्रोटेक्टिव अवतार... और बाहर मंडराता खौफनाक खतरा! क्या देवांश ज़ोया को दुश्मनों की नज़र से बचा पाएगा?