Episode 1: द ट्रैप (The Trap)
काले बादलों ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले रखा था। मूसलाधार बारिश और बादलों की कड़कड़ाहट के बीच हाईवे से दूर, पहाड़ियों पर बना वह आलीशान सेफ़हाउस बिल्कुल वीरान नज़र आ रहा था।
ज़ोया अपनी गाड़ी की ख़राब स्टीयरिंग से परेशान होकर किसी तरह उस इमारत के गैराज तक पहुँची थी। नेटवर्क गायब था, और कार का बोनट पूरी तरह गर्म हो चुका था।
"कोई है?" ज़ोया ने भीगते हुए सेफ़हाउस के मुख्य भारी दरवाज़े पर दस्तक दी। दरवाज़ा अजीब तरीके से आधा खुला हुआ था।
जैसे ही उसने अंदर कदम रखा, एक खामोश सन्नाटे ने उसका स्वागत किया। हॉल में केवल मंद डिम लाइट्स जल रही थीं। ज़ोया ने आगे बढ़ते हुए पुकारा, "एक्सक्यूज़ मी? मेरी कार ख़राब हो गई है... क्या मुझे थोड़ा शेल्टर मिल सकता है?"
अभी वह कुछ और समझ पाती कि अचानक—क्लिक!—पूरी बिल्डिंग की बिजली चली गई। चारों तरफ घना अंधेरा छा गया।
ज़ोया घबराकर पीछे मुड़ने ही वाली थी कि अंधेरे में से एक गर्म, भारी हाथ ने उसकी कलाई को कसकर जकड़ लिया। इससे पहले कि उसके हलक से कोई चीख निकलती, एक चौड़े सीने ने उसे दीवार से सटा दिया और एक ठंडी, नुकीली धातु—एक गन का बैरल—उसकी गर्दन पर आ टिका।
"एक लफ़्ज़ भी नहीं।" एक भारी, रफ और रोबदार आवाज़ उसके कान के पास गूंजी।
ज़ोया की सांसें अटक गईं। अंधेरे में उसे सिर्फ़ उस अजनबी—देवांश—की सुलगती हुई आँखें और उसकी गहरी सांसें महसूस हो रही थीं।
"त-तुम कौन हो? छोड़ो मुझे! मैं सिर्फ़ बारिश से बचने आई थी..." ज़ोया ने कांपती आवाज़ में कहा, अपने हाथों से उसकी सख्त छाती को पीछे धकेलने की कोशिश करते हुए।
"गलत जगह, गलत वक्त पर आ गई हो तुम," देवांश ने उसके और करीब आते हुए फुसफुसाया। उसकी पकड़ में कोई नरमी नहीं थी, लेकिन एक अजीब सी सुरक्षात्मक जकड़न थी। "बाहर मेरे दुश्मन घूम रहे हैं... और मुझे नहीं पता कि तुम सच बोल रही हो या उनकी कोई चाल हो।"
धड़ाम!
अचानक एक भारी मेटल शटर गिरने की आवाज़ आई। सेफ़हाउस का सिक्योरिटी सिस्टम ऑटो-लॉक मोड पर चला गया था। बाहर जाने के सारे रास्ते बंद हो चुके थे।
ज़ोया ने घबराकर दरवाज़े की तरफ देखा, "ये क्या हुआ? दरवाज़ा खोलो!"
देवांश ने गन को नीचे किया, लेकिन ज़ोया के बेहद करीब खड़े रहते हुए उसकी आँखों में आँखें डालकर देखा। "अब सुबह तक कोई बाहर नहीं जा सकता। तुम मेरे साथ इस कमरे में बंद हो... और अगर जान प्यारी है, तो जैसा मैं कहूँ, चुपचाप वही करो।"
ज़ोया की धड़कनें बेकाबू हो चुकी थीं। वह एक पूरी तरह से अनजान, खतरनाक और बेहद आकर्षक आदमी के साथ उस वीरान सेफ़हाउस में कैद हो चुकी थी।
अब फैसला पूरी तरह आपके हाथों में है!
आप लोग ही डिसाइड कीजिए कि मैं इस कहानी को यहीं सिर्फ़ 4 छोटे एपिसोड्स की एक शार्ट स्टोरी (Short Story) में ख़त्म कर दूँ... या फिर अगर आप इसकी एक-एक डिटेल, गहरा सस्पेंस और इंटेंस लव स्टोरी पढ़ना चाहते हैं, तो इसके ऊपर एक पूरा नॉवेल (Novel) लिखना शुरू करूँ?
आप जैसा फैसला करेंगे, कमेंट्स में आपकी पसंद देखने के बाद मैं अगला पार्ट उसी हिसाब से लिखूंगी।
तो जल्दी से कमेंट करके बताइए—आपको 4 एपिसोड्स की शार्ट स्टोरी चाहिए या एक फुल-लेंथ नॉवेल?
Author's Note
दोस्तों, ज़ोया और देवांश की यह सिचुएशनल लव स्टोरी का पहला पार्ट आपको कैसा लगा?
अंधेरे कमरे में बंद ज़ोया की बेकाबू धड़कनें और देवांश का वो खौफनाक अंदाज़... क्या ज़ोया देवांश पर भरोसा कर पाएगी? और बाहर जो खतरा मंडरा रहा है, उससे देवांश उसे कैसे बचाएगा?