पहला प्यार - 3 ashwin द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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पहला प्यार - 3


अधूरी याद

अगली सुबह आरव की आँखें खुलीं तो उसके दिमाग में पिछली रात की वही बात घूम रही थी।

“अगर तुम्हारे बेटे को मीरा से प्यार हो गया… तो वही पुरानी कहानी फिर शुरू होगी।”

आरव बिस्तर से उठा और सीधे अपने पिता के कमरे में गया।

“पापा।”

उसके पिता अखबार पढ़ रहे थे।

उन्होंने अखबार नीचे रखा।

“क्या हुआ?”

आरव ने सीधे पूछा,

“आप मीरा के परिवार को जानते हैं?”

कमरे में अचानक खामोशी छा गई।

उसके पिता ने कुछ सेकंड तक आरव को देखा।

“तुमने ये नाम कहाँ से सुना?”

“बस इतना बताइए कि आप जानते हैं या नहीं।”

“आरव, इस बारे में बात मत करो।”

“क्यों?”

“क्योंकि ये बहुत पुरानी बात है।”

आरव ने कहा,

“पुरानी बात है तो मुझे बताने में दिक्कत क्या है?”

उसके पिता ने गहरी साँस ली।

“कुछ बातें जितनी पुरानी होती हैं, उतनी ही खतरनाक हो जाती हैं।”

आरव को कोई जवाब नहीं मिला।

लेकिन अब उसका शक और बढ़ चुका था।

---

कॉलेज में मीरा अकेली बैठी थी।

उसके सामने वही खाली पन्ना था।

वह बार-बार एक ही सवाल लिख रही थी—

“मैं आरव को कब से जानती हूँ?”

तभी आरव उसके सामने आकर बैठ गया।

“मीरा।”

मीरा ने सिर उठाया।

“हाँ?”

“कल तुमने कहा था कि अगर तुमने सच बताया तो मैं तुमसे दूर हो जाऊँगा।”

मीरा चुप रही।

आरव ने पूछा,

“वो सच क्या है?”

मीरा ने नजरें झुका लीं।

“मुझे खुद नहीं पता।”

“लेकिन तुम्हारी माँ जानती हैं।”

मीरा ने तुरंत उसकी तरफ देखा।

“तुम्हें कैसे पता?”

“कल रात मेरे घर भी कोई आया था।”

मीरा का चेहरा बदल गया।

“कौन?”

“एक बुजुर्ग आदमी।”

मीरा कुछ सोचने लगी।

“क्या उसने कुछ कहा?”

आरव ने धीरे से कहा,

“उसने तुम्हारा नाम लिया।”

मीरा कुछ बोल नहीं पाई।

---

उसी समय कॉलेज के गेट पर एक कार आकर रुकी।

कार से वही बुजुर्ग आदमी बाहर निकला।

उसने दूर से आरव और मीरा को देखा।

फिर फोन निकाला।

“वे दोनों साथ हैं।”

दूसरी तरफ से किसी ने पूछा,

“क्या उन्हें कुछ याद आया?”

बुजुर्ग ने कहा,

“अभी नहीं।”

“तो उन्हें याद आने से पहले हमें वह चीज़ ढूँढनी होगी।”

“और अगर उन्होंने उसे ढूँढ लिया?”

फोन के दूसरी तरफ कुछ सेकंड चुप्पी रही।

फिर आवाज आई—

“तो बारह साल पुराना सच सबके सामने आ जाएगा।”

फोन कट गया।

---

शाम को मीरा अपनी माँ के कमरे में गई।

“माँ, मुझे सब जानना है।”

माँ ने कहा,

“मीरा…”

“नहीं माँ। अब नहीं।”

मीरा की आँखों में आँसू थे।

“मैंने क्या खोया था? आरव का नाम सुनकर आप डर क्यों जाती हैं?”

उसकी माँ ने अलमारी खोली।

उन्होंने अंदर से एक पुराना लकड़ी का डिब्बा निकाला।

डिब्बा मीरा के सामने रख दिया।

“इसे तुम्हें बहुत पहले देना चाहिए था।”

मीरा ने डिब्बा खोला।

अंदर कुछ पुरानी तस्वीरें थीं।

एक छोटी-सी लाल रिबन।

और एक टूटा हुआ खिलौना।

मीरा ने खिलौना उठाया।

उसे देखते ही उसके दिमाग में अचानक एक दृश्य चमका।

एक छोटा-सा घर।

बाहर बारिश।

एक छोटा लड़का उसके सामने खड़ा था।

लड़का कह रहा था—

“मीरा, मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा।”

मीरा ने आँखें खोल दीं।

उसकी साँस तेज़ हो गई।

“माँ…”

माँ रोने लगीं।

“तुम्हें याद आ गया?”

मीरा ने काँपती आवाज़ में पूछा,

“वो लड़का… आरव था?”

माँ ने कोई जवाब नहीं दिया।

लेकिन उनकी चुप्पी ही जवाब थी।

---

उधर आरव भी अपने कमरे में पुरानी चीज़ें खोज रहा था।

उसे एक पुरानी डायरी मिली।

डायरी के आखिरी पन्ने पर बच्चे जैसी लिखावट थी—

“मैं मीरा को कभी नहीं भूलूँगा।”

आरव की उँगलियाँ काँपने लगीं।

उसने पन्ना दोबारा पढ़ा।

फिर अचानक उसे बचपन का एक दृश्य याद आया।

एक छोटी लड़की।

बारिश।

एक लाल रिबन।

और दोनों बच्चों का एक साथ भागना।

आरव ने धीरे से कहा,

“मीरा…”

तभी उसके कमरे का दरवाजा खुला।

उसके पिता अंदर आए।

उन्होंने आरव के हाथ में डायरी देखी।

उनके चेहरे का रंग बदल गया।

“ये डायरी तुम्हें कहाँ मिली?”

आरव ने कहा,

“मेरी पुरानी चीज़ों में।”

पिता ने डायरी उसके हाथ से लेने की कोशिश की।

आरव पीछे हट गया।

“पापा, इसमें मीरा का नाम क्यों है?”

पिता चुप रहे।

आरव ने फिर पूछा,

“हम दोनों बचपन में एक-दूसरे को जानते थे?”

काफी देर बाद उसके पिता ने धीरे से कहा—

“हाँ।”

आरव की आँखें फैल गईं।

“तो फिर आपने मुझे कभी बताया क्यों नहीं?”

पिता ने जवाब दिया—

“क्योंकि तुम्हें उससे दोबारा कभी नहीं मिलना था।”

आरव ने पूछा,

“लेकिन क्यों?”

उसके पिता ने दरवाजे की तरफ देखा।

फिर बहुत धीमी आवाज में बोले—

“क्योंकि बारह साल पहले मीरा गायब नहीं हुई थी… उसे हमसे छिपाया गया था।”

आरव सन्न रह गया।

“किसने?”

उसके पिता ने जवाब देने से पहले ही बाहर किसी चीज़ के गिरने की आवाज आई।

दोनों ने दरवाजे की तरफ देखा।

दरवाजा आधा खुला था।

और बाहर कोई नहीं था।

लेकिन फर्श पर एक पुरानी तस्वीर पड़ी थी।

तस्वीर में आरव और मीरा बच्चे थे।

और उनके पीछे एक तीसरा व्यक्ति खड़ा था।

जिसे आरव और मीरा में से कोई भी पहचानता नहीं था।

जारी रहेगा…