BLACK MONKEY - THE UNYIELDING - 3 MK Tiger द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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BLACK MONKEY - THE UNYIELDING - 3

BLACK MONKEY — THE UNYIELDING

EPISODE 3
THE TEMPLE OF THE UNYIELDING

सुबह के करीब चार बजे थे।
शहर अभी सो रहा था।
लेकिन आरव की आँखों में नींद नहीं थी।
वह अपने पिता की पुरानी workshop में बैठा था।
सामने वही पुरानी डायरी खुली हुई थी।
उसके आखिरी पन्ने पर सिर्फ एक नक्शा बना था।
एक घना जंगल।
उसके बीच एक मंदिर।
और मंदिर के नीचे एक निशान—
एक काला बंदर।
आरव ने डायरी का आखिरी पन्ना फिर पढ़ा।
“अगर कभी शक्ति जाग जाए, तो मंदिर तक जाना।
वहाँ तुम्हें जवाब मिलेंगे।
लेकिन याद रखना…
मंदिर तुम्हारी शक्ति को नहीं परखेगा।
वो तुम्हें परखेगा।”
आरव ने डायरी बंद कर दी।
उसने अपने पिता की तस्वीर उठाई।
“आपने मुझसे इतना बड़ा सच क्यों छुपाया, पापा?”
कोई जवाब नहीं था।
लेकिन अब आरव के पास इंतजार करने का समय नहीं था।
उसने अपनी जैकेट पहनी।
और workshop से बाहर निकल गया।
उसका अगला रास्ता था—
वही प्राचीन मंदिर।
वही जगह जहाँ से उसके पिता की कहानी शुरू हुई थी।
और शायद…

Black Monkey की भी।

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कुछ घंटे बाद।
शहर से बहुत दूर एक घना जंगल।
आरव अपनी बाइक से वहाँ पहुँचा।
सड़क वहीं खत्म हो गई।
उसके आगे सिर्फ जंगल था।
उसने बाइक रोक दी।
चारों तरफ देखा।
पेड़ों के बीच अजीब सी खामोशी थी।
इतनी खामोशी कि उसे अपनी साँस तक सुनाई दे रही थी।
आरव ने डायरी में बने नक्शे को देखा।
“यहीं कहीं है।”
वह जंगल के अंदर चल पड़ा।
करीब आधे घंटे बाद उसे एक पुराना पत्थर दिखाई दिया।
उस पर वही काले बंदर का निशान बना था।
आरव ने पत्थर को छुआ।
अचानक जमीन के नीचे से हल्की कंपन महसूस हुई।
पेड़ों के बीच से एक रास्ता दिखाई देने लगा।
आरव हैरान होकर उस रास्ते पर चल पड़ा।
कुछ दूर जाने के बाद…
वह रुक गया।
उसके सामने एक विशाल प्राचीन मंदिर था।
पत्थरों से बना हुआ।
दीवारों पर हजारों साल पुराने चित्र।
और मंदिर के मुख्य द्वार पर एक विशाल काले बंदर की मूर्ति।
आरव धीरे-धीरे उसके पास गया।
मूर्ति की आँखें अचानक चमक उठीं।
आरव पीछे हट गया।
तभी मंदिर के अंदर से एक आवाज आई—
“आरव।”
वह जम गया।
“कौन है?”
कोई दिखाई नहीं दिया।
आवाज फिर आई—
“तुम्हारे पिता यहाँ आए थे।”
आरव की आँखें फैल गईं।
“मेरे पिता कहाँ हैं?”
कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।
फिर मंदिर का दरवाजा अपने आप खुल गया।
अंदर पूरा अंधेरा था।
आरव ने अपनी जेब से फोन निकाला।
लेकिन फोन बंद हो चुका था।
उसने गहरी साँस ली।
और अंदर चला गया।
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मंदिर के अंदर दीवारों पर पुराने चित्र बने थे।
पहले चित्र में एक काला बंदर दिखाई दे रहा था।
उसके सामने सैकड़ों लोग घुटनों के बल बैठे थे।
दूसरे चित्र में वही बंदर एक विशाल सेना से लड़ रहा था।
तीसरे चित्र में…
वह बंदर गायब था।
और उसके स्थान पर एक इंसान खड़ा था।
आरव उस चित्र को ध्यान से देखने लगा।
उस इंसान के शरीर पर बिल्कुल वही निशान थे…
जो आज उसके शरीर पर थे।
आरव धीरे से बोला—

“तो मैं पहला नहीं हूँ।”

अचानक पीछे से आवाज आई।
“नहीं।”
आरव पलटा।
एक बूढ़ा साधु अंधेरे से बाहर आया।
सफेद बाल।
लंबी दाढ़ी।
और हाथ में लकड़ी की पुरानी छड़ी।
“तुम पहले नहीं हो।”
आरव ने पूछा—
“फिर मुझसे पहले कौन था?”
साधु ने उसकी आँखों में देखा।
“तुम्हारे पिता।”
आरव जैसे पत्थर का हो गया।
“क्या?”
साधु धीरे-धीरे उसके पास आया।
“तुम्हारे पिता भी इस शक्ति के चुने हुए थे।”
आरव की आवाज काँप गई।
“फिर उन्होंने इसे मुझे क्यों दिया?”
साधु ने सिर हिलाया।
“उन्होंने तुम्हें शक्ति नहीं दी।”

वह रुका।

“शक्ति ने तुम्हें खुद चुना।”
आरव ने अपने हाथों की तरफ देखा।
“लेकिन क्यों?”
साधु ने जवाब दिया—
“क्योंकि तुम्हारे अंदर वो चीज है जो तुम्हारे पिता के अंदर नहीं थी।”

“क्या?”

साधु ने कहा—
“तुम्हारे अंदर गुस्सा है…”
आरव चुप रहा।
“दर्द है…”
साधु आगे बोला।
“लेकिन सबसे ज्यादा…”
उसने आरव की आँखों में देखा।
“…तुम्हारे अंदर हार न मानने की जिद है।”

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अचानक मंदिर की जमीन हिलने लगी।
धड़ाम!
दीवार का एक हिस्सा टूट गया।
आरव पीछे हट गया।
साधु ने ऊपर देखा।

“वो आ गए।”

“कौन?”
साधु ने सिर्फ एक नाम कहा—

“रुद्र।”

मंदिर के बाहर कई गाड़ियों के रुकने की आवाज आई।
हथियारों से लैस लोग मंदिर में घुसने लगे।
उनके पीछे रुद्र था।
इस बार उसके हाथ में कोई हथियार नहीं था।
वह अकेला आगे बढ़ रहा था।
उसने आरव को देखा।
“मैं जानता था तुम यहाँ आओगे।”
आरव ने गुस्से में कहा—
“मेरे पिता कहाँ हैं?”
रुद्र कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
फिर बोला—
“यही सवाल तुम्हारे पिता ने भी मुझसे पूछा था।”
आरव की मुट्ठी कस गई।
“तुमने उनके साथ क्या किया?”
रुद्र ने जवाब देने के बजाय साधु की तरफ देखा।
“अब भी जिंदा हो?”
साधु ने कहा—
“और तुम अब भी डरते हो।”
रुद्र का चेहरा बदल गया।
“मैं किसी से नहीं डरता।”
साधु मुस्कुराया।
“तुम्हें शक्ति से डर लगता है, रुद्र।”
रुद्र ने अपनी नजर आरव पर डाल दी।
“मुझे शक्ति से नहीं…”
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
“…उस इंसान से डर लगता है जो उसे नियंत्रित कर सके।”
आरव ने पूछा—
“मेरे पिता?”
रुद्र ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
वह आरव के सामने आकर रुक गया।

“तुम।”

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रुद्र ने अचानक आरव पर हमला किया।
आरव ने उसका वार रोक लिया।
लेकिन इस बार कुछ अलग था।
रुद्र की ताकत भी असाधारण थी।
दोनों एक-दूसरे को पीछे धकेलने लगे।
मंदिर की दीवारें हिलने लगीं।
आरव ने पूरी ताकत से मुक्का मारा।
रुद्र कई फीट दूर जाकर गिरा।
लेकिन वह तुरंत उठ खड़ा हुआ।
उसने अपना कोट उतारा।
उसकी बाँह पर वही काले निशान थे।
आरव की आँखें फैल गईं।
“तुम्हारे पास भी ये निशान हैं…”
रुद्र मुस्कुराया।

“हाँ।”

“लेकिन मेरे निशान…”
उसने अपनी बाँह उठाई।
“…पूरे नहीं हैं।”
आरव ने ध्यान से देखा।
रुद्र के निशान आधे शरीर तक थे।
“मैंने शक्ति को पाने की कोशिश की थी।”
रुद्र बोला।
“लेकिन उसने मुझे स्वीकार नहीं किया।”
उसकी आँखों में गुस्सा भर गया।
“इसलिए मैंने तय किया…”
“…अगर शक्ति मुझे नहीं चुनेगी…”
“…तो मैं उसे मजबूर करूँगा।”
अचानक रुद्र ने जमीन पर हाथ रखा।
काली ऊर्जा पूरे मंदिर में फैल गई।
आरव घुटनों पर गिर गया।
उसकी साँसें भारी होने लगीं।
उसके शरीर के काले निशान तेजी से फैलने लगे।

साधु चिल्लाया—

“आरव! अपनी शक्ति के खिलाफ मत लड़ो!”
आरव ने दाँत भींच लिए।

“तो क्या करूँ?”

साधु ने कहा—
“उसे स्वीकार करो!”
आरव ने आँखें बंद कर लीं।
उसने अपने पिता को देखा।

वो दिन देखा जब उसके पिता उसे साइकिल चलाना सिखा रहे थे।

फिर अस्पताल।
फिर workshop।
फिर वो रात…
जब उसके पिता गायब हुए।
आरव की आँखों से आँसू निकल आए।
उसने धीरे से कहा—
“मैं अपने दर्द से नहीं भागूँगा।”
काली ऊर्जा उसके शरीर से बाहर निकलने लगी।
“मैं अपने गुस्से से भी नहीं भागूँगा।”
उसके पीछे विशाल काले बंदर की आकृति प्रकट हुई।
“लेकिन…”
आरव ने आँखें खोलीं।
“…मैं उसका गुलाम भी नहीं बनूँगा।”
पूरे मंदिर में जोरदार ऊर्जा का विस्फोट हुआ।
रुद्र पीछे जा गिरा।
आरव धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
अब उसकी शक्ति पहले से कहीं ज्यादा नियंत्रित थी।
उसके हाथों में काली ऊर्जा जल रही थी।
रुद्र पहली बार सच में डर गया।

“ये संभव नहीं…”

आरव उसकी तरफ बढ़ा।
“तुम शक्ति को पाना चाहते थे।”
उसने मुट्ठी बंद की।
“मैं सिर्फ अपने पिता को बचाना चाहता हूँ।”

धड़ाम!

आरव का मुक्का रुद्र के सीने पर लगा।
रुद्र मंदिर की विशाल दीवार तोड़ते हुए बाहर जा गिरा।
उसके आदमी भागने लगे।
लेकिन रुद्र ने जमीन से उठते हुए आखिरी बार आरव को देखा।
“तुम्हें लगता है तुम जीत गए?”
आरव उसकी तरफ बढ़ा।
रुद्र मुस्कुराया।
“तुम्हारे पिता मेरे पास नहीं हैं।”
आरव रुक गया।
“क्या?”
रुद्र ने कहा—
“वो खुद वहाँ गए हैं…”
वह मंदिर के पीछे पहाड़ों की तरफ देखने लगा।
“…जहाँ बाकी सात शक्ति-स्रोत जागने वाले हैं।”
आरव ने पूछा—
“कहाँ?”
रुद्र ने जवाब दिया—
“जब पहला सूरज उस पहाड़ को छुएगा…”
उसने आरव की तरफ देखा।
“…तुम्हें रास्ता खुद दिखाई देगा।”
इतना कहकर रुद्र धुएँ के बीच गायब हो गया।
आरव कुछ सेकंड वहीं खड़ा रहा।
साधु उसके पास आया।
“अब तुम्हें जाना होगा।”
“कहाँ?”
साधु ने मंदिर के पीछे की दीवार की तरफ इशारा किया।

दीवार पर धीरे-धीरे आठ निशान चमकने लगे।

पहला—
BLACK MONKEY.
दूसरा—
DJINN.
तीसरा—
WICCAN.
चौथा—
AAVEG.
पाँचवाँ—
PISCHAACH.
छठा—
ASTRA.
सातवाँ—
SHAKTI.
और आठवाँ…
एक तलवार का निशान।
KALKI.
आरव ने उन आठ निशानों को देखा।
साधु ने कहा—
“तुम सोचते हो तुम अपने पिता को ढूँढ रहे हो।”
आरव उसकी तरफ मुड़ा।

साधु ने धीरे से कहा—

“लेकिन असल में…”

“…तुम उन आठ लोगों को ढूँढ रहे हो जो आने वाली लड़ाई में दुनिया का फैसला करेंगे।”
आरव ने आखिरी बार मंदिर की तरफ देखा।
फिर मुट्ठी बंद की।
“तो मैं सबको ढूँढूँगा।”
साधु ने पूछा—
“और अगर उनमें से कोई तुम्हारा दुश्मन निकला?”
आरव ने जवाब दिया—
“तो पहले उसे समझाऊँगा।”
वह दरवाजे की तरफ बढ़ा।
“और अगर वो नहीं समझा?”
आरव रुका।
पीछे मुड़कर मुस्कुराया।
“फिर Black Monkey उसे रोक देगा।”
आरव मंदिर से बाहर निकल गया।
दूर पहाड़ों के पीछे सूरज उग रहा था।
लेकिन उसी समय…
एक अंधेरी underground laboratory में रुद्र एक बड़े काँच के chamber के सामने खड़ा था।
चamber के अंदर एक आदमी बेहोश पड़ा था।
रुद्र ने स्क्रीन पर उसकी तस्वीर देखी।
नाम था—

“ARAV'S FATHER.”

रुद्र मुस्कुराया।
“अब खेल शुरू होगा।”
और chamber के अंदर पड़े आदमी की आँखें अचानक खुल गईं।
CUT TO BLACK.

BLACK MONKEY WILL RETURN.
NEXT CHAPTER:
“THE MAN INSIDE THE CAGE”