BLACK MONKEY - THE UNYIELDING - 2 MK Tiger द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

BLACK MONKEY - THE UNYIELDING - 2

BLACK MONKEY — THE UNYIELDING
CHAPTER 2
THE MAN WHO COULDN'T BREAK

जब रुद्र को इसके बारे में पता चलता है, वह आरव के पीछे अपने लोगों को भेज देता है।
एक रात आरव घर लौटता है।
दरवाजा खुला हुआ है।
अंदर सब कुछ बिखरा पड़ा है।
वह घबराकर अपने पिता को खोजता है।
“पापा?”
कोई जवाब नहीं आता।
आरव तेजी से पूरे घर में देखता है।
रसोई खाली थी।
कमरा खाली था।
उसके पिता की दवाइयाँ फर्श पर पड़ी थीं।
आरव का दिल तेजी से धड़कने लगा।
तभी पीछे से आवाज आती है—
“तुम्हें पता भी है तुम्हारे अंदर क्या है?”
आरव धीरे-धीरे मुड़ता है।
अंधेरे में रुद्र खड़ा होता है।
उसका चेहरा आधा अंधेरे में छिपा था।
“वो शक्ति मेरी है।”
आरव उसकी तरफ देखता है।
“तो आकर ले लो।”
रुद्र मुस्कुराता है।
“तुम्हें लगता है ताकत तुम्हें hero बना देती है?”
आरव अपने हाथों की तरफ देखता है।
उसकी उंगलियों के बीच काली ऊर्जा की हल्की लहर दौड़ती है।
फिर उसकी आँखें रुद्र पर टिक जाती हैं।
“नहीं।”
वह मुट्ठी बंद करता है।
“Hero वो होता है जो ताकत मिलने के बाद भी इंसान रहना चुने।”
और पहली बार…
उसके पीछे एक विशाल काले बंदर की परछाईं दिखाई देती है।
रुद्र के चेहरे की मुस्कान गायब हो जाती है।
आरव आगे बढ़ता है।
“मेरा नाम आरव है।”
एक पल रुककर वह कहता है—
“लेकिन आज से… लोग मुझे BLACK MONKEY कहेंगे।”
कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर रुद्र ने धीरे से सिर झुका दिया।
“तो आखिरकार…”
उसने कहा।
“वो जाग गया।”
आरव रुक गया।
“क्या?”
रुद्र ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने बस अपनी उंगलियां चटकाईं।
अचानक अंधेरे से चार आदमी बाहर निकल आए।
उनके हाथों में बंदूकें थीं।
आरव ने चारों तरफ देखा।
“तुम अकेले नहीं आए थे।”
रुद्र मुस्कुराया।
“मैं कभी अकेला नहीं आता।”
पहली गोली चली।
धाँय!
गोली आरव के सीने से टकराई।
लेकिन आरव पीछे नहीं हटा।
गोली नीचे फर्श पर गिर गई।
एक पल के लिए सब शांत हो गया।
आरव ने अपनी छाती को देखा।
फिर रुद्र को।
“अब समझ आया?”
उसने धीरे से कहा।
“तुम्हारी ताकत तुम्हें बचा सकती है।”
रुद्र पीछे हटते हुए बोला।
“लेकिन तुम्हारे अंदर जो है…”
उसकी नजर आरव के हाथों पर गई।
“…वो तुम्हें मारेगा।”
आरव कुछ समझ पाता, उससे पहले पहला आदमी उस पर टूट पड़ा।
आरव ने उसका मुक्का रोक लिया।
उसकी कलाई से काली ऊर्जा की एक लहर निकली।
धड़ाम!
वह आदमी कई फीट दूर जाकर दीवार से टकराया।
दूसरे ने पीछे से हमला किया।
आरव ने मुड़कर उसके पेट पर मुक्का मारा।
वह आदमी जमीन पर गिर पड़ा।
तीसरे ने चाकू निकाला।
आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।
चाकू उसकी हथेली में घुस गया।
खून निकल आया।
लेकिन आरव ने हाथ नहीं छोड़ा।
उसने धीरे से चाकू बाहर निकाला।
और कहा—
“मुझे दर्द हो रहा है।”
उसकी आँखें लाल हो गईं।
“लेकिन दर्द मुझे रोक नहीं सकता।”
उसने आदमी को दूर फेंक दिया।
चौथा आदमी डरकर पीछे हट गया।
रुद्र उसे देख रहा था।
पहली बार उसके चेहरे पर चिंता दिखाई दी।
आरव उसकी तरफ बढ़ा।
“अब बताओ…”
उसने कहा।
“मेरे पिता कहाँ हैं?”
रुद्र कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर बोला—
“अगर सच जानना चाहते हो…”
उसने अपनी जेब से एक पुराना धातु का टुकड़ा निकाला।
उस पर वही काला बंदर बना था।
“…तो अपने पिता की पुरानी workshop में जाना।”
आरव की आँखें सिकुड़ गईं।
“वहाँ क्या है?”
रुद्र मुस्कुराया।
“तुम्हारे पिता ने बीस साल से जो छुपाया है।”
आरव आगे बढ़ा।
लेकिन रुद्र ने अपने हाथ में एक छोटा-सा काला पत्थर दबाया।
अचानक पूरे कमरे की लाइटें बंद हो गईं।
अंधेरे में रुद्र की आवाज गूँजी—
“हम फिर मिलेंगे, Black Monkey।”
जब लाइट वापस आई…
रुद्र गायब था।
आरव कुछ सेकंड तक वहीं खड़ा रहा।
फिर उसकी नजर अपने हाथ पर गई।
चाकू का घाव…
कुछ ही सेकंड में बंद हो रहा था।
लेकिन काले निशान उसकी कलाई से ऊपर फैल चुके थे।
आरव डर गया।
उसने अपनी बाँह को कसकर पकड़ लिया।
“ये मेरे साथ क्या हो रहा है?”
तभी उसके दिमाग में एक आवाज गूँजी।
बहुत धीमी।
बहुत पुरानी।
“ताकत…”
आरव ने चारों तरफ देखा।
कमरे में कोई नहीं था।
“कौन है?”
आवाज फिर आई।
“तुमने मुझे जगाया है…”
आरव की आँखों के सामने अचानक अंधेरा छा गया।
उसे एक जंगल दिखाई दिया।
हजारों साल पुराना जंगल।
पेड़ों के बीच एक विशाल पत्थर का मंदिर खड़ा था।
मंदिर के सामने सैकड़ों योद्धा घुटनों के बल बैठे थे।
और उनके सामने…
एक विशाल काले बंदर की पत्थर की मूर्ति थी।
मूर्ति की आँखों में लाल रोशनी जल रही थी।
फिर दृश्य बदल गया।
मंदिर जल रहा था।
योद्धा भाग रहे थे।
और एक आदमी मंदिर के अंदर से कुछ लेकर बाहर निकल रहा था।
उस आदमी का चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था।
लेकिन उसकी कलाई पर वही निशान था…
जो आज आरव की कलाई पर था।
आरव अचानक अपनी आँखें खोल देता है।
वह जमीन पर पड़ा था।
उसकी साँसें तेज थीं।
“ये सपना नहीं था…”
उसने धीरे से कहा।
तभी उसे अपने पिता की एक बात याद आई।
बचपन में उसके पिता हमेशा उसे एक ही बात कहते थे—
“कुछ चीजों को जानना जरूरी नहीं होता, बेटा।”
तब आरव कभी समझ नहीं पाया था कि वो किस बारे में बात कर रहे थे।
आज समझ आ गया।
उसके पिता सब जानते थे।
और शायद…
उसी वजह से रुद्र ने उन्हें उठा लिया था।
आरव ने अपने पिता की पुरानी workshop की तरफ देखा।
वहाँ कई सालों से कोई नहीं गया था।
वह अंदर गया।
धूल से ढकी मशीनों के बीच उसे एक पुराना लकड़ी का संदूक दिखाई दिया।
उसने संदूक खोला।
अंदर कुछ पुरानी तस्वीरें थीं।
एक पुरानी डायरी थी।
और एक धातु का छोटा-सा लॉकेट।
आरव ने तस्वीरें उठाईं।
पहली तस्वीर में उसके पिता कुछ लोगों के साथ खड़े थे।
दूसरी तस्वीर में वही लोग एक प्राचीन मंदिर के सामने थे।
आरव की साँस रुक गई।
वही मंदिर…
जो उसने अपने vision में देखा था।
उसने डायरी खोली।
पहले पन्ने पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
“अगर ये डायरी कभी आरव के हाथ लगे, तो इसका मतलब है कि मैं उसे बचाने में असफल रहा।”
आरव के हाथ काँपने लगे।
उसने अगला पन्ना खोला।
“उस शक्ति का नाम Black Monkey नहीं है।”
आरव पढ़ता रहा।
“Black Monkey उस इंसान का नाम है जो उस शक्ति को अपने अंदर रखकर भी खुद को नहीं खोता।”
आरव ने डायरी बंद कर दी।
उसी वक्त पीछे से किसी के चलने की आवाज आई।
आरव तुरंत मुड़ा।
कोई नहीं था।
फिर अचानक workshop की खिड़की टूट गई।
एक काली गाड़ी बाहर आकर रुकी।
कई हथियारबंद लोग गाड़ी से बाहर निकले।
आरव ने गहरी साँस ली।
“रुद्र…”
लेकिन इस बार वह भागा नहीं।
उसने अपनी मुट्ठियाँ बंद कीं।
काली ऊर्जा उसके पूरे शरीर में फैलने लगी।
उसकी आँखों में पहली बार डर नहीं था।
सिर्फ गुस्सा था।
बाहर से एक आदमी चिल्लाया—
“आरव! बाहर आओ!”
आरव दरवाजे के सामने खड़ा हो गया।
“मैं आरव हूँ…”
उसने धीरे से कहा।
फिर उसकी छाती पर बना काला बंदर का निशान चमकने लगा।
“…लेकिन तुम लोग जिस आदमी को ढूँढ रहे हो…”
उसने दरवाजा खोल दिया।
“…वो अब आरव नहीं रहा।”
बाहर खड़े सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे।
आरव की परछाईं जमीन पर पड़ी।
लेकिन उसकी परछाईं…
आरव जैसी नहीं थी।
उसके पीछे एक विशाल काले बंदर की आकृति खड़ी थी।
आरव ने पहला कदम बाहर रखा।
और पहली बार…
शहर ने Black Monkey को देखा।
उस रात किसी ने उसे hero नहीं कहा।
किसी ने उसे monster भी नहीं कहा।
लेकिन अगली सुबह पूरे शहर में एक ही खबर थी—
“एक अज्ञात आदमी ने हथियारबंद गिरोह को अकेले हरा दिया।”
और उसी सुबह…
रुद्र ने अपने कमरे में वह खबर देखी।
उसने स्क्रीन बंद की।
फिर सामने रखे पुराने नक्शे को खोला।
नक्शे पर आठ अलग-अलग निशान बने थे।
एक निशान अब चमक रहा था।
BLACK MONKEY.
रुद्र ने बाकी सात निशानों को देखा।
“एक जाग चुका है।”
उसने धीरे से कहा।
फिर सबसे आखिरी निशान पर उसकी नजर रुकी।
उस निशान के नीचे सिर्फ एक नाम लिखा था—
KALKI.
रुद्र का चेहरा गंभीर हो गया।
“लेकिन अगर ये आठों जाग गए…”
वह कुछ पल चुप रहा।
“…तो इस दुनिया को बचाने वाला कोई नहीं होगा।”
कमरे की लाइट बंद हो गई।
अंधेरे में रुद्र की आखिरी आवाज सुनाई दी—
“क्योंकि उस दिन…”
“युद्ध शुरू होगा।”

BLACK MONKEY WILL RETURN.
NEXT CHAPTER:
“THE TEMPLE OF THE UNYIELDING”