"लेकिन यह विवाह आप क्यों नहीं करना चाहते ? महाराज भविष्यण चंद्र ने सख्त आवाज में बोला। "
लेकिन !हमें अपने राज्य में ही रहना है। हम यही बहुत खुश है और रही बात भैया की तो हम उनके लिए भी बहुत खुश है। वह इस राजगद्दी के योग्य है । हमे उनसे कोई शिकायत नहीं है और ना ही हमें इस राजगद्दी का , ना ही किसी ओर राजगद्दी का मोह हैं । "राजकुमार अक्षतयम ने नाराज़ स्वर में बोले।
बस कीजिए! राजकुमार अक्षतयम जो होना था वह होगया अब हम कुछ नहीं कर सकते । हमने आपका रिश्ता भेज दिया है। महाराज भविष्यण चंद्र ने सख्त आवाज में बोला।
"लेकिन! हमें यह विवाह नहीं करना। अब राजकुमार अक्षतयम चिढ़कर बोले। "
"आप यही चाहते हैं ना यह रिश्ता ना होए । इसके लिए आपको उनकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी । अगर वह यह रिश्ता को मंजूर करते हैं । तभी हम उनसे मिलने जाएंगे और सारी बातें विस्तार में कर पाएंगे।
आप हमारे साथ उनके राज्य में चलेंगे और एक बार भी हमें बार मना नहीं करेंगे। आप एक बार तो राजकुमारी नेत्रा से मिलकर देखिए। फिर भी आपका निर्णय नहीं बदला तो हम ख़ुद उनसे से श्रमा मांग कर वापस आ जाएंगे। उसके बाद आपका जो मन करें वही होगा । यही हमारा आखरी निर्णय है इस पर अब कोई भैंस नहीं होगी । अब हम चलते हैं रानी साहिबा।" ' महाराज भविष्यण चंद्र इतना कहकर कक्ष से बाहर चलेंगे।
"लेकिन राजकुमार अक्षतयम को सोच में डूबा गए। अब वह क्या करें उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था। ना हीं वह अपने पिता श्री को मना कर सकते थे ना ही यह विवाह करना चाहते थे। वह चुपचाप अपने कक्ष में चलेंगे।"
कौशल राज्य से
अपने कक्ष में जाकर वह मन ही मन सोचने लगे कि उनके पास प्रतीक्षा करने के अलावा कोई समाधान नहीं है।' इसी सोच में डूबे राजकुमार अक्षतयम निंद्रा वास में चले गए। '
( अगली सुबह स्वर्णिम राज्य में )
पूरा राज भवन सजा हुआ था। सभी मंत्रिमंडल और रानी सुलोचना राज्य भवन में किसी विशेष विश्य पर चर्चा
कर रहे थे। 'के तभी एक सैनिक संदेश लेकर आया ।
सैनिक के लिए बोलना शुरू किया -" रानी सा की जय हो रानी सा को इस दास का प्रणाम। रानी सा हमें अपने गुप्त चरों से सूचना मिली है कि कौशल राज्य के राजा ने अपने दूसरे पुत्र राजकुमार अक्षतयम के रिश्ते के लिए अपने दूत को भेजा है।
सैनिक ने अपनी बात खत्म की और सर झुका कर रानी साहिबा से आगया लेकर वापस चला गया।
' रानी सुलोचना अपने स्थान से उठकर बोली- "कौशल राज्य एक बड़ा और भव्य राज्य है। उनके स्वागत में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए । उनके दूत जब आए तब उनका अच्छे से स्वागत किया जाए । यह हमारा आदेश है।" रानी सुलोचना ने अपनी बात खत्म की और राजभवन से चली गई।
उनके दूत के स्वागत का सारा प्रतिबंध बड़े वजीर जी ने किया । क्योंकि रानी साहिबा को सबसे ज्यादा विश्वास उन पर ही था ।
(दो दिवस बाद कौशल राज्य के दूत का आगमन स्वर्णिम राज्य में हो गया )
दूत जी को अपना स्वागत देखकर बेहद प्रशंसा हुई । स्वागत होने के कुछ समय विश्राम करने के कुछ पल बाद रानी सुलोचना का बुलावा आ गया। राजभवन में कुछ लोग ही मौजूद थे, इसमें से कुछ खास मंत्री और बड़े वजीर मौजूद थे। रानी सुलोचना के साथ उनकी पुत्री राजकुमारी नेत्रा भी मौजूद थी ।
दूत जी राज भवन में आए और सबके सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करके कहना शुरू किया उनके सामान के लिए सभी लोगों ने अपना सर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया।
अब आगे -सबसे पहले रानी सुलोचना ने बोला -आपको कोई तकलीफ तो नहीं हुई दूत जी।
" नहीं! रानी साहिबा हमें कोई तकलीफ नहीं हुई। अब यहां आकर बेहद प्रशंसा सा हुई है । हम आपके लिए कौशल राज्य के राजा भविष्यण चंद्र जी का संदेश लेकर आए हैं। जी रानी साहिबा संदेश यह है कि आपने जब राजकुमारी नेत्रा जी का रिश्ता भेजा तो हमारे राजा भविष्यण चंद्र जी को यह रिश्ता बेहद पसंद आया।
उन्होंने अपने दूसरे पुत्र राजकुमार अक्षतयम जी का रिश्ता राजकुमारी नेत्रा जी के लिए भेजा है। उन्होंने राजकुमारी जी के लिए 21 थालों में सोने और हीरा ,मोती के सुंदर जवाहारात के साथ सिंगार का सामान और कुछ अन्य वस्तुएं जैसे की फल फूल और हमारे राज्य के विशेष मीशठाण राजकुमारी जी के लिए विशेष वस्त्र महाराज ने भेट में भिजवाएं है ।
इनके साथ महाराज ने राजकुमार अक्षतयम एक बड़ा सा चित्र आप सबके लिए भिजवाया है। हमें आशा है कि आप कौशल राज्य की इन भेंटों को स्वीकार करें।" दूत जी ने अपनी बात खत्म की और वहीं स्थीर से होगे ।
रानी सुलोचना ने अपने सेवकों को आदेश दिया कि हमें राजकुमार अक्षतयम का चित्र दिखाया जाए। बहुत सारे सेवकों को ने मिलकर चित्र को खोला। जैसे ही चित्र सबने देखा तो उनकी आंखें दंग रह गई। उनके मुख्य पर इतना तेज था कि राजकुमारी नेत्रा की नजर उन पर से हट ही नहीं रही थी।
लेकिन ! उन्हें ज्ञात था कि अभी उनका रिश्ता तय हुआ नहीं है। इसलिए उन्होंने अपने आप को संभाला और शांत भाव से बैठ गई।
क्या? रानी सुलोचना कौशल राज्य के यह भेंट स्वीकार करेंगी। क्या रानी सुलोचना यह रिश्ते को स्वीकार करेंगी ? यह जानने के लिए पढ़ते रहिए - "स्वर्णिम राज्य का रहस्य" अध्याय 4
आपको यह दास्तान कैसी लगी कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताइयेगा । कहानी पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।
लेखिका कहानियों की लहर