क्या नसीब है यार Ankit Khatri द्वारा ज्योतिष शास्त्र में हिंदी पीडीएफ

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क्या नसीब है यार



सुबह के करीब छह बज रहे थे।

गाँव की गलियों में अभी पूरी तरह चहल-पहल शुरू नहीं हुई थी। कहीं दूर किसी घर से चूल्हे पर चाय चढ़ने की खुशबू आ रही थी, तो कहीं आँगन में बंधे जानवरों की आवाजें सुनाई दे रही थीं।

पहाड़ों के पीछे से सूरज धीरे-धीरे ऊपर आ रहा था।

लेकिन आरव की आँखें उससे पहले ही खुल चुकी थीं।

वह कुछ देर तक छत को देखता रहा।

हर सुबह की तरह आज भी उसके मन में कोई खास योजना नहीं थी।

न कोई बड़ा सपना।

न कोई बड़ी मंजिल।

बस जिंदगी चल रही थी।

आरव की उम्र ज्यादा नहीं थी, लेकिन उसके चेहरे पर उम्र से ज्यादा गंभीरता दिखाई देती थी। वह ज्यादा बोलने वाला लड़का नहीं था। गाँव में लोग उसे जानते थे, मगर बहुत कम लोग उसके मन की बात जानते थे।

उसे अकेले बैठना पसंद था।

कभी खेतों के किनारे।

कभी गाँव से थोड़ी दूर बहने वाली नदी के पास।

और कभी अपने घर की छत पर बैठकर आसमान को देखते रहना।

उसकी माँ कई बार उससे पूछती—

“बेटा, इतना चुप-चुप क्यों रहता है?”

आरव मुस्कुराकर जवाब देता—

“कुछ नहीं माँ, बस सोच रहा था।”

“क्या सोच रहा था?”

“यही कि बड़ा होकर क्या बनूँगा।”

माँ हँस देती।

“पहले बड़ा तो हो जा।”

आरव भी हँस देता।

लेकिन सच यह था कि वह अपने भविष्य को लेकर अंदर से काफी उलझा हुआ था।

उसे नहीं पता था कि जिंदगी उसे कहाँ ले जाएगी।

बस इतना पता था कि वह कुछ अलग करना चाहता था।

क्या?

यह उसे खुद नहीं पता था।

उस दिन भी वह घर से निकलकर गाँव की सड़क की तरफ चला गया।

सड़क के किनारे एक छोटी सी चाय की दुकान थी। वहाँ गाँव के कुछ लड़के रोज सुबह बैठते थे।

आरव भी कभी-कभी वहाँ जाकर चाय पी लिया करता था।

वह दुकान के पास पहुँचा ही था कि तभी सामने से कुछ लड़कियाँ स्कूल की तरफ जाती हुई दिखाई दीं।

आरव ने ध्यान नहीं दिया।

वह चाय वाले से बोला—

“भैया, एक चाय देना।”

“अभी देता हूँ।”

आरव वहीं खड़ा हो गया।

तभी उसकी नजर अचानक एक लड़की पर जाकर रुक गई।

वह बाकी लड़कियों से थोड़ी पीछे चल रही थी।

उसके हाथ में किताबें थीं।

चेहरे पर कोई बनावटी मुस्कान नहीं थी।

वह रास्ते में अपनी सहेली से कुछ कह रही थी और बीच-बीच में हँस रही थी।

आरव बस उसे देखता रह गया।

उसे खुद समझ नहीं आया कि वह अचानक इतना शांत क्यों हो गया।

चाय वाला गिलास सामने रखते हुए बोला—

“ले बेटा।”

आरव ने गिलास उठा लिया।

लेकिन उसकी नजर अब भी उसी लड़की पर थी।

लड़की आगे निकल गई।

आरव कुछ सेकंड तक उसी दिशा में देखता रहा।

फिर उसने खुद से कहा—

“मुझे क्या हो गया?”

उसने सिर झटका और चाय पीने लगा।

लेकिन मन चाय में नहीं था।

वह बार-बार उसी लड़की के बारे में सोच रहा था।

उसने पहली बार महसूस किया कि किसी अनजान इंसान को देखकर भी दिल के अंदर कुछ बदल सकता है।

उसे उसका नाम नहीं पता था।

वह कहाँ रहती है, यह नहीं पता था।

उसकी पसंद क्या है, यह भी नहीं पता था।

फिर भी उसके मन में एक अजीब सी उत्सुकता पैदा हो चुकी थी।

अगले दिन आरव फिर उसी समय चाय की दुकान पर पहुँच गया।

चाय वाले ने उसे देखते ही पूछा—

“आज जल्दी आ गया?”

आरव ने सामान्य बनने की कोशिश की।

“हाँ, ऐसे ही।”

“रोज तो इतनी सुबह नहीं आता।”

आरव मुस्कुरा दिया।

“आज नींद जल्दी खुल गई।”

असल वजह वह खुद जानता था।

कुछ देर बाद वही लड़कियाँ फिर उसी रास्ते से गुजरीं।

आरव की नजर उसे ढूँढने लगी।

और जैसे ही वह लड़की दिखाई दी, आरव के चेहरे पर अनजाने में मुस्कान आ गई।

अब उसे समझ आ गया था कि वह कल क्यों रुका था।

वह लड़की रोज इसी रास्ते से जाती थी।

और आरव को अब उसका इंतजार रहने लगा था।

यह इंतजार बहुत छोटा था।

सिर्फ कुछ मिनट का।

लेकिन उन कुछ मिनटों में उसका पूरा दिन बदल जाता था।

एक दिन लड़की ने चलते-चलते अचानक आरव की तरफ देखा।

बस एक पल के लिए।

आरव की नजर उससे मिली।

वह घबरा गया।

उसने तुरंत दूसरी तरफ देख लिया।

लड़की आगे बढ़ गई।

आरव का दिल तेजी से धड़क रहा था।

वह खुद पर हँस पड़ा।

“एक नजर देखकर इतना परेशान?”

उस दिन पहली बार उसने अपने दोस्त विवेक से इस लड़की के बारे में बात की।

दोनों नदी के किनारे बैठे थे।

विवेक ने आरव की बात सुनकर पूछा—

“नाम पता है?”

“नहीं।”

“घर?”

“नहीं।”

“कहाँ पढ़ती है?”

“शायद स्कूल में।”

विवेक ने माथे पर हाथ रख लिया।

“तू प्यार कर बैठा है या पहेली हल कर रहा है?”

आरव हँस पड़ा।

“पता नहीं यार।”

विवेक ने उसे गौर से देखा।

“देख आरव, किसी को पसंद करना गलत नहीं है। लेकिन पहले उसे जान तो ले।”

आरव कुछ देर चुप रहा।

फिर बोला—

“मैं भी यही सोच रहा हूँ।”

उसके बाद कई दिन तक आरव और उस लड़की के बीच सिर्फ नजरों का रिश्ता रहा।

कभी वह लड़की उसे देखकर हल्का सा मुस्कुरा देती।

कभी आरव मुस्कुराने की कोशिश करता और घबराकर नजरें झुका लेता।

कभी दोनों एक ही रास्ते पर कुछ दूर तक चलते।

लेकिन बात नहीं होती।

आरव के लिए इतना ही काफी था।

वह अपनी डायरी में कभी-कभी कुछ लिखने लगा।

उसने एक दिन लिखा—

“आज फिर वह सामने से गुजरी।
बात नहीं हुई, लेकिन पता नहीं क्यों पूरा दिन अच्छा रहा।”

उसे खुद नहीं पता था कि वह कब उस लड़की के बारे में सोचते-सोचते अपने दिन का हिस्सा बना चुका था।

एक शाम अचानक बारिश शुरू हो गई।

आरव बाजार से वापस लौट रहा था।

रास्ते में उसने देखा कि वही लड़की सड़क के किनारे खड़ी थी।

उसके पास छाता नहीं था।

बारिश तेज होती जा रही थी।

आरव कुछ कदम आगे निकल गया।

फिर रुक गया।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

लड़की अभी भी वहीं थी।

आरव वापस उसके पास गया।

उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि उसे लग रहा था लड़की उसकी धड़कन सुन लेगी।

उसने अपनी छतरी उसकी तरफ बढ़ाई।

“आप चाहें तो... इसके नीचे आ सकती हैं।”

लड़की ने पहली बार सीधे उससे बात की।

“और आप?”

आरव कुछ पल चुप रहा।

“मैं... मैं भी आ जाऊँगा।”

लड़की मुस्कुरा दी।

“छतरी तो छोटी है।”

आरव भी हँस पड़ा।

“तो बारिश खत्म होने तक थोड़ा भीग लेते हैं।”

लड़की ने पहली बार अपना नाम बताया।

“मैं काव्या हूँ।”

आरव जैसे उस नाम को याद कर लेना चाहता था।

“मैं आरव।”

“मुझे पता है।”

आरव चौंक गया।

“आपको मेरा नाम पता है?”

काव्या मुस्कुराई।

“गाँव छोटा है।”

दोनों कुछ देर छतरी के नीचे खड़े रहे।

बारिश लगातार हो रही थी।

लेकिन आरव को उस समय बारिश की आवाज भी अलग लग रही थी।

काव्या ने पूछा—

“आप रोज सुबह चाय की दुकान पर क्यों खड़े रहते हो?”

आरव के पास इस सवाल का सच्चा जवाब था।

लेकिन वह उसे बता नहीं सकता था।

उसने हँसकर कहा—

“चाय अच्छी मिलती है।”

काव्या ने उसे देखा।

फिर मुस्कुराते हुए बोली—

“अच्छा... सिर्फ चाय के लिए?”

आरव कुछ नहीं बोला।

काव्या आगे बढ़ गई।

आरव वहीं खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा।

उस दिन पहली बार उसे महसूस हुआ कि शायद उसके दिल में कुछ सच में जन्म ले चुका है।

घर लौटते समय उसके चेहरे पर लगातार मुस्कान थी।

माँ ने उसे देखते ही पूछा—

“क्या हुआ? आज बहुत खुश लग रहा है।”

आरव ने जूते उतारते हुए कहा—

“कुछ नहीं।”

“लॉटरी लग गई क्या?”

आरव हँस पड़ा।

“नहीं माँ।”

वह अपने कमरे में चला गया।

बिस्तर पर बैठकर उसने डायरी खोली।

कुछ देर खाली पन्ने को देखता रहा।

फिर लिखा—

“आज उसका नाम पता चल गया।
काव्या।
पता नहीं यह सिर्फ एक मुलाकात थी या किसी कहानी की शुरुआत।”

आरव ने डायरी बंद कर दी।

उसे नहीं पता था कि आने वाले दिनों में यही लड़की उसकी जिंदगी की सबसे खूबसूरत याद भी बनेगी और सबसे गहरा दर्द भी।

फिलहाल उसके पास सिर्फ एक नाम था—

काव्या।

और दिल में एक नया एहसास।

शायद प्यार का।

लेकिन आरव को यह नहीं पता था कि उसकी जिंदगी में प्यार की कहानी शुरू तो हो गई है...

मगर उसका नसीब पहले से ही कुछ और लिख चुका है।