Love Life - 7 shimbha Verma द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Love Life - 7


रात के करीब 9 बजे थे।

ऑफिस की ज्यादातर लाइटें बंद हो चुकी थीं।

जैन अभी भी अपने लैपटॉप के सामने बैठी थी। उसके पास म्याओ बैठी प्रोजेक्ट की फाइल देख रही थी।

कुछ देर पहले आरव वहाँ से जा चुका था।

लेकिन म्याओ का ध्यान अभी भी उसी बात पर था।

आरव की वो मुस्कान...

जैन के साथ उसका इतना घुल-मिल जाना...

और फिर उसका ये कहना—

"शायद तुम्हें अभी तक पता ही नहीं कि मैं तुम्हारे लिए क्या महसूस करता हूँ।"

म्याओ ने मन ही मन सोचा—

"आखिर आरव जैन के लिए क्या महसूस करता है?"

जैन ने उसकी तरफ देखा।

"क्या सोच रही हो?"

म्याओ चौंक गई।

"कुछ नहीं।"

"तुम पिछले दस मिनट से एक ही पेज देख रही हो।"

म्याओ ने फाइल बंद कर दी।

"बस थोड़ी थक गई हूँ।"

जैन ने मुस्कुराकर कहा—

"चलो, आज इतना ही करते हैं।"

दोनों ऑफिस से बाहर निकलने लगीं।

ऑफिस के बाहर पहुँचते ही जैन का फोन बजा।

स्क्रीन पर फिर आरव का नाम था।

जैन ने तुरंत फोन उठाया।

"हाँ आरव?"

दूसरी तरफ आरव ने पूछा—

"घर पहुँच गई?"

"अभी ऑफिस से निकली हूँ।"

"इतनी देर तक ऑफिस में क्या कर रही थी?"

"काम था।"

आरव कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला—

"खाना खाया?"

जैन हँस पड़ी।

"नहीं।"

"मुझे पता था।"

"तुम्हें कैसे पता?"

"क्योंकि तुम काम में इतनी खो जाती हो कि खाना भूल जाती हो।"

जैन मुस्कुरा दी।

"अब क्या करूँ?"

"मैं खाना भेज रहा हूँ।"

"नहीं, रहने दो।"

"जैन, बहस मत करो।"

कॉल कट गई।

म्याओ चुपचाप ये सब सुन रही थी।

उसने पूछा—

"वो तुम्हारा इतना ख्याल रखता है?"

जैन ने सहजता से कहा—

"हाँ। बचपन से ऐसा ही है।"

म्याओ ने कुछ नहीं कहा।

लेकिन उसके दिल में एक अजीब सी चुभन हुई।

करीब आधे घंटे बाद जैन और म्याओ घर जाने के लिए अलग हुईं।

म्याओ अपने कमरे में पहुँची तो उसने फोन उठाया।

उसने जैन को मैसेज किया—

"घर पहुँच गई?"

कुछ देर बाद जवाब आया—

"हाँ 😊"

म्याओ के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

फिर उसने लिखा—

"Good night."

जैन का जवाब आया—

"Good night, कल मिलते हैं ❤️"

म्याओ उस छोटे से दिल वाले emoji को कुछ सेकंड तक देखती रही।

उसके चेहरे पर खुशी आ गई।

"काश ये दिल सिर्फ मेरे लिए होता..."

फिर उसे खुद पर ही हँसी आ गई।

"पागल मत बनो म्याओ।"

लेकिन दिल अब उसकी बात सुनने वाला नहीं था।

उधर आरव अपने घर में बैठा था।

उसने जैन को भेजे गए खाने की delivery का notification देखा।

फिर उसने अपने फोन में जैन की फोटो खोली।

कुछ देर तक फोटो देखता रहा।

आरव की आँखों में प्यार साफ दिखाई दे रहा था।

"जैन..."

वो धीरे से बोला—

"तुम मुझे अपना सबसे अच्छा दोस्त समझती हो।"

उसने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा—

"लेकिन मेरे लिए तुम उससे कहीं ज्यादा हो।"

आरव ने अपना फोन बंद कर दिया।

वो जैन को अपनी feelings बताना चाहता था।

बहुत पहले से।

लेकिन हर बार डर उसे रोक देता था।

उसे डर था कि अगर जैन ने उसे मना कर दिया...

तो वो अपनी सबसे अच्छी दोस्त भी खो देगा।

अगली सुबह ऑफिस में जैन काफी खुश थी।

म्याओ ने पूछा—

"आज इतनी खुश क्यों हो?"

जैन ने अपने हाथ में रखा छोटा सा gift दिखाया।

"आरव ने भेजा है।"

म्याओ ने gift देखा।

"क्या है?"

"पता नहीं। अभी खोला नहीं।"

जैन ने वहीं gift खोल दिया।

अंदर एक खूबसूरत डायरी थी।

पहले पन्ने पर लिखा था—

"उन सारी यादों के लिए जो हमने साथ बनाई हैं। — आरव"

जैन की आँखों में खुशी आ गई।

"कितना अच्छा है।"

म्याओ चुपचाप उसे देख रही थी।

जैन ने डायरी उसके सामने रख दी।

"देखो।"

म्याओ ने डायरी खोली।

पहले पन्ने पर जैन और आरव की बचपन की एक फोटो लगी थी।

दोनों स्कूल की ड्रेस में थे।

नीचे तारीख लिखी थी।

म्याओ ने फोटो को देखा।

फिर जैन को देखा।

उसके मन में पहली बार एक सवाल आया—

"क्या आरव के लिए जैन सिर्फ दोस्त है?"

लेकिन इससे पहले कि वो कुछ पूछती, जैन ने कहा—

"आज शाम आरव से मिलना है।"

म्याओ ने पूछा—

"क्यों?"

"उसने कहा है कि उसे मुझसे कुछ जरूरी बात करनी है।"

म्याओ के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।

"जरूरी बात?"

"हाँ। पता नहीं क्या।"

शाम को जैन ऑफिस से बाहर निकली।

आरव पहले से ही बाहर उसका इंतजार कर रहा था।

इस बार उसके हाथ में कोई gift नहीं था।

बस चेहरे पर गंभीरता थी।

जैन कार में बैठी।

"क्या हुआ? इतने serious क्यों हो?"

आरव ने कार स्टार्ट नहीं की।

कुछ सेकंड तक वो चुप रहा।

फिर बोला—

"जैन, मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ।"

जैन ने उसकी तरफ देखा।

"हाँ, बोलो।"

आरव ने उसकी आँखों में देखा।

उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।

वो आज सब कुछ कह देना चाहता था।

पंद्रह साल से दिल में छुपी हुई बात।

लेकिन तभी उसका फोन बज गया।

आरव ने फोन देखा।

Business से जरूरी कॉल था।

उसने मजबूरी में कॉल उठाई।

"हाँ, बोलो..."

जैन चुपचाप उसे देखती रही।

कुछ मिनट बाद आरव ने फोन रखा।

उसने गहरी सांस ली।

"Sorry... अभी एक जरूरी काम आ गया।"

जैन मुस्कुराई।

"कोई बात नहीं। तुम अपना काम कर लो।"

आरव ने उसे देखा।

उसकी आँखों में निराशा थी।

आज भी वो अपने दिल की बात नहीं कह पाया।

उसी समय जैन के फोन पर म्याओ का मैसेज आया।

"तुम कहाँ हो?"

जैन ने जवाब दिया—

"आरव के साथ हूँ।"

कुछ सेकंड बाद म्याओ ने सिर्फ इतना लिखा—

"ओके।"

फोन की स्क्रीन बंद करते हुए म्याओ ने आँखें बंद कर लीं।

उसके दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी।

वो जैन को रोकना चाहती थी।

कहना चाहती थी—

"उसके साथ मत जाओ।"

लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकती थी।

क्योंकि जैन ने उसे कभी ये हक दिया ही नहीं था।

म्याओ की आँखों में आँसू आ गए।

उसने खुद से कहा—

"मैं जैन से प्यार करती हूँ... लेकिन शायद जैन को कभी पता ही नहीं चलेगा।"

अगले दिन सुबह जैन ऑफिस पहुँची तो म्याओ अपनी सीट पर नहीं थी।

जैन ने आसपास देखा।

"म्याओ कहाँ है?"

एक कर्मचारी ने बताया—

"वो सुबह से मीटिंग रूम में है।"

जैन तुरंत वहाँ पहुँची।

दरवाजा खोला तो म्याओ अकेली बैठी थी।

उसकी आँखें लाल थीं।

जैन उसके पास गई।

"तुम रोई हो?"

म्याओ ने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

"नहीं।"

जैन उसके सामने बैठ गई।

"मुझसे झूठ मत बोलो।"

म्याओ कुछ नहीं बोली।

जैन ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।

"मुझे बताओ क्या हुआ?"

म्याओ ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में बहुत सारी बातें थीं।

वो चाहती थी कि आज सब कुछ कह दे।

कि वो जैन से प्यार करती है।

कि जब जैन किसी और के साथ होती है तो उसे अच्छा नहीं लगता।

कि वो जैन को खोने से डरती है।

लेकिन आखिरी पल में उसने सिर्फ इतना कहा—

"मुझे डर लगता है..."

जैन ने पूछा—

"किससे?"

म्याओ ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

"तुम्हें खोने से।"

जैन कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।

म्याओ ने तुरंत नजरें झुका लीं।

कमरे में खामोशी छा गई।

जैन के मन में पहली बार एक सवाल उठा—

"म्याओ को मुझे खोने का इतना डर क्यों है?"

और शायद...

यहीं से जैन के दिल में भी कुछ बदलना शुरू हो चुका था।

[PART 7 समाप्त]

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