अध्याय 2: नई शुरुआत और एक अनकहा अहसास
पिछले अध्याय में हमने देखा कि मैं मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज (MCC) के विशाल प्रांगण में पहुँच गया था। कॉलेज इतना विशाल था कि हॉस्टल ढूंढने में ही मुझे घंटों लग गए। जब मैं अपने हॉस्टल के कमरे में पहुँचा, तो देखा कि वहाँ पहले से ही तीन लड़के मौजूद थे। कमरे में चार बेड का एक बड़ा सेक्शन था, जो ऊपर-नीचे (Bunk beds) बना हुआ था।
सब कुछ व्यवस्थित करने के बाद, मैंने अपने रूममेट्स से बात करना शुरू किया। चारों लड़के स्वभाव से बहुत अच्छे थे। एक का नाम रवि था, दूसरे का श्याम, तीसरे का विजय और चौथा मैं—जय। बातचीत के दौरान पता चला कि हम सभी अलग-अलग राज्यों से आए थे। रवि कोलकाता से था, श्याम चेन्नई का ही रहने वाला था, और विजय हैदराबाद से आया था। खुशी की बात यह थी कि रवि और श्याम मेरी ही क्लास के थे। हम तीनों ने एक ही विषय (Subject) का चुनाव किया था, जबकि विजय दूसरे सेक्शन में था।
बातचीत आगे बढ़ी, तो श्याम ने मुझसे पूछा, "क्या तुम चेन्नई पहली बार आए हो?"
मैंने उत्साह में कहा, "हाँ, पहली बार!"
श्याम मुस्कुराते हुए बोला, "चलो फिर, आज शाम को मैं तुम सबको चेन्नई की सैर करवाता हूँ।"
मैंने और रवि ने तुरंत हामी भर दी, लेकिन विजय का कुछ अलग ही प्लान था। उसने मना करते हुए कहा कि वह अभी नहीं आ सकता। पर हम तीनों को लगा कि अगर साथ में नहीं घूमेंगे तो मज़ा क्या आएगा! हमने जिद की, "भाई, अगर तू नहीं आएगा तो फिर मजा नहीं आएगा।" हमारी जिद के आगे विजय को झुकना पड़ा और वह मान गया।
हम चारों दोस्त चेन्नई घूमने निकल पड़े। श्याम ने हमें बहुत सी खूबसूरत जगहें दिखाईं—शानदार मॉल, सिनेमाघर, सुंदर बगीचे और शहर के वे सभी प्रसिद्ध स्थान, जो चेन्नई की पहचान हैं। हमारा कॉलेज अभी शुरू नहीं हुआ था; एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और कक्षाएं शुरू होने में अभी एक-दो हफ्ते का समय बाकी था। मैं जल्दी इसलिए आ गया था ताकि क्लास शुरू होने से पहले अपने सहपाठियों और रूममेट्स के साथ तालमेल बिठा सकूँ।
..हम सब जानते थे कि एक बार कॉलेज की पढ़ाई शुरू हो गई, तो घूमने-फिरने का समय नहीं मिलेगा। कॉलेज शुरू होने से ठीक दो दिन पहले, जब हम चेन्नई घूमकर वापस कॉलेज लौटे और उसके विशाल प्रांगण से गुजर रहे थे, तभी शाम के उस वक्त मैंने कुछ ऐसा देखा जिसकी कल्पना भी मैंने नहीं की थी।
कॉलेज के उस हरे-भरे रास्ते पर कदम रखते ही, पता नहीं क्यों, उसे देखते ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मुझे उस पल ऐसा लगा कि मेरी जिंदगी में अब तक जो कुछ भी हुआ, वह शायद इसी खूबसूरत मोड़ के लिए हुआ था। मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि मैं क्या करूँ, बस मंत्रमुग्ध होकर वहीं ठहर गया और उसे देखता ही रह गया। कॉलेज के उस कैंपस की हवा में अचानक एक अजीब सी हलचल सी भर गई। मुझे कुछ भी ध्यान नहीं रहा कि आसपास क्या हो रहा है। दूसरों के लिए शायद वह एक आम बात रही हो, लेकिन मेरे लिए वह सब कुछ बहुत खास था। उस दिन जो मैंने देखा, जाना और महसूस किया—वह सच में एक अलौकिक और जादुई अहसास था।"