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चारू जल्दी से अपार्टमेंट मे आ जाती है। उसकी धडकने तेज थी। गीले बाल चेहरे से लेकर गर्दन तक चिपक गए थे।
अमर की करीबी उसके अंदर कंपन पैदा कर रही थी।
अमर की आवाज ' ब्रीथ प्रोफेसर..ब्रीथ ! " उसके कानो मे गूंज रही थी। चारू के गाल गर्म होने लगे। वो दरवाजे से टिक कर खडी हो गई।
अमर की बदमाशी याद कर चारू की सिहर उठी । उसे लगा मानो अभी भी अमर उसकी करीब खडा..उसी शरारती मुस्कान से उसे देख रहा है।
" बद्तमीज ! ", चारू हथेलियो से अपने गाल रगडती हुई बुदबुदाई।
उसने अपने आप कौ देखा तो पाया की वो बारिश मे भ्ग गई थी। उसने अपना सर पर हाथ मारा और कपडे बदलने जकने ही लगी थी की कुछ सोच कर वो बाल्कनी मे चली.गई।
उसने बाल्कनी से बाहर देखा तो अमर की गाडी अभी भी खडी थी.।.और.अमर गाडी से टिक कर खडा उसकी बाल्कनी की तरफ ही देख रहा था।
वो भाग चुका था। शर्ट बदन पर गीली होकर चिपक गई थी। उसके बाइसेबस एलीगेंटली फ्लेक्स कर रही थी। बाल बिखर कर माथे पर चिपक रहे थे।
चारू को लगा मानो आस पास का माहोल गर्म हो गया हो। उसने एक नजर अमर पर डाली जो हाथ बांधे उसे ही देख रहा था। अमर मुस्कुरा दिया तो चारू ने नजरे फेर ली।
उसकी हरकत पर अमर हँस पडा। चारू ने अमर के हँसते हुए चेहरे को देखा तो उसे एहसास हुआ की वो कबसे बस इस मुस्कुराहट को देखने को तडप रही थी। वो अभी और अमर की हँसी मे खोती की अमर ने उसे देख अपनी एक आँख दबाई । और तिरछी मुस्कान देते हुए गाडी के अंदर चला गया।
चारू हडबडा गई। उसका पूरा चेहरा गर्म होने लगा। उसकी आंखो के सामने से अमर की कार ओझल हो गई। चकरू ने गहरी सांस भरी और हॉल मे आ गई।
" आप ऐसा क्यो कर रहे हो अमर ? " , उसने मानो हवा से सवाल किया। चारू की आंखे नम हो गई।
" बडी कठिनाई से स्वंय को सभांला था। आपके आने से एक बार फिर अपना कंट्रोल गवां रही हूं मै। माना की आपका मुझे मना करने के पीछे कारण था । लेकिन इतनी तकलीफ..इतनी तकलीफ देने का भी तो कोई मतलब नही थी। " , भराए गले से चारू बोली।
वो जमीन पर बैठ गई। उसका भींगा आंचल जमीन पर फैल गया । चारू अपने पैर सिकोड़कर , घुटनो पर सर रख सिसक उठी।
" आप नही थे तब भी अकेली थी । आपके बारे मे सोचा नही था तब भी मै अकेली ही थी। मगर..अमर मै उतनी अकेली भी स्वंय को नही पाती थी जितना आपके बारे मे सोचकर , आपके आने के बाद महसूस कर रही।." चारू बुदबुदाई।
उसका दिल दर्द से भर उठा था। आंखे लाल हो गई थी। वो रोना चाहती थी मगर जानती थी की अगर रोई तो ये दर्द खत्म हो जाएगा । और वो स्वंय को अमर के पास जाने से फिर नही.रोक पाएगी इसलिए अपने तिरस्कार को वो भूलना नही चाहती थी ।
चारू अभी सोच ही रही थी कि उसका फोन बजा । उसने अपने आंसू पोंछे और इधर उधर देखने लगी। उसका पर्स अपार्टमेंट के दरवाजे के पास पडा था और उसके अंदर हा चारू का फोन बज रहा था।
चारू उठी , और दरवाजे के पास से बैग उठा लिया। उसने बैग से फोन निकाला तो स्क्रीन पर नव्या कॉलिंग दिखा रहा था।
चारू ने अपनी सांसो को संयत किया और कॉल पिक कर लिया।
वो अभी कुछ कहती की सामने से आवाज आई , " कहा थी तुम ? फोन उठाने मे इतना समय कौन लगाता है। "
चारू नव्या की चिढ भरी आवाज सुनकर मुस्कुरा दी। ये आवाज वो बडे दिन बाद सुन रही थी। और एक लंबे अरसे के बाद वो कुछ अपना सा महसूस कर रही थी। नव्या का ये व्यावहार उसकु लिए अपना था।
" मै युनिवर्सिटी मे थी। आज एक फंकशन था तो उस मे बिजी थी। " , चारू भरसक अपनी आवाज को सभांलती हुई बोली। .गर अंत मे आकर उहकी आवाझ कांप गई।
मोबाइल पर दो पल की खामोशी छा गई । फिर नव्या धीरे से बोली , " आर्दश का फोन आया था। उसने बताया तुम बीच फंकशन से चली गई थी। " थोडा रूककर , " सब ठीक है ना श्रीवास्तव? "
नव्या की आवाज चारू की फिक्र से लबालब भरी थी। चारू उसके अपनेपन से कांप गई। अब कैसे वो उससे झूठ बोले !
" मै..मै ठीक हूं । ", चारू बोली।
थोडी देर फोन पर शांती रही फिर नव्या की स्थिर आवाज आई , " मुझे पता है की जिस युनिवर्सिटी मे तू काम करती है उसकी फ्रेंचाइजी द पृथ्वी ने खरीद ली है। "
चारू कि सांसे मानो थम गई हो। नव्या..को कैसे पता ? ये लडकी हर बात की खबर रखती है। चारू चिढ गई।
" तुम ना राजवंशी...मेरी जासूसी करना बंद करो । " , चारू मुंह फुला कर बोली।
" और तुम.अपना दर्द गुस्से और चुप्पी के पीछे छिपाना बंद करो। " , नव्या तीखे लहजे मे बोली तो चारू शांत पड गई।
उसने गहरी सांस भरी और बोली , " अमर..अमर से मिली मै । "
सामने से ऐही आवाज आई मानो नव्या ने एक लंबी सांस छोडी हो ।
चारू से अब रहा नही गया। वो किसी से बात करना चाहती थी। अपने मन का हाल बताना चाहती थी।
" नव्या..क्या तुम..जयपुर आ सकती हो ? मुझसे यहां अकेले नही रहा जाता । आज फिर पैनिक अटैक आया था। मै..मै..सभंल नही पा रही। कुख दिन के लिए आ जाओ। " , चारू की आंखे एक बार फिर नम पड गई ।
फोन पर दो मिनट की चुप्पी छा गई। चारू को लगा नव्या मना कर देगी । उसने मना करने के लिए मुंह खोलकर ही था कि नव्या बोल पडी , " कल.सुबह तक तेरे अपार्टमेंट मे पहुंच जाउंगी। कमरा सेट कर देना तुम । "
इतना कहकर नव्या ने फोन रख दिया। चारू भौचक्की सी फोन देखती रही ।
क्रमशः
इस भाग मे इतना ही। अगले भाग के लिए पांच कम्ट का टार्गेट पूरा करे । और थोडा हाथो को जोर दे और उससे ज्यादा भी कमेंट कर दे। लेखिका खुश हो जाएगी ।