मेरे पास माँ है
Episode 3 — वो लड़की कौन थी?
[SFX: धीमी बारिश… घड़ी की टिक-टिक… दूर कहीं कुत्ते के भौंकने की आवाज़]
Narrator:
कुछ सवालों के जवाब इंसान को सुकून देते हैं…
लेकिन कुछ जवाब…
पूरी जिंदगी छीन लेते हैं।
आरव के लिए ऐसा ही एक जवाब उसकी माँ ने दिया था—
“वो लड़की… तुम्हारी बहन थी।”
लेकिन आरव की कोई बहन थी ही नहीं।
कम से कम…
उसे तो यही बताया गया था।
आरव:
माँ… मेरी कोई बहन नहीं थी।
माँ:
थी बेटा…
आरव:
तो फिर वो कहाँ है?
माँ की आँखों से आँसू बहने लगे।
माँ:
मुझे नहीं पता।
आरव:
आपको नहीं पता?
आरव की आवाज़ में दर्द था।
आरव:
एक माँ को कैसे नहीं पता हो सकता कि उसकी बेटी कहाँ है?
माँ ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।
माँ:
कुछ बातें ऐसी होती हैं बेटा…
जिन्हें जानने से बेहतर है कि इंसान उन्हें भूल जाए।
आरव:
लेकिन मैं नहीं भूल सकता!
आरव ने वह पुरानी तस्वीर माँ के सामने रख दी।
आरव:
मुझे सब जानना है।
माँ:
नहीं!
माँ की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि आरव भी चौंक गया।
कुछ पल तक दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर माँ धीरे से बोली—
माँ:
अगर तूने उसकी तलाश शुरू की…
तो वो लोग तुझे भी नहीं छोड़ेंगे।
आरव:
कौन लोग?
माँ ने जवाब नहीं दिया।
बीस साल पहले…
[SFX: अस्पताल का माहौल… बच्चे के रोने की आवाज़]
एक जवान औरत अस्पताल के कमरे में लेटी थी।
वही औरत…
जो आज आरव की माँ थी।
उसकी गोद में एक नवजात बच्ची थी।
और उसके पास खड़ा था आरव का पिता।
पिता:
हमारी बेटी बहुत खूबसूरत है।
माँ मुस्कुराई।
माँ:
इसका नाम क्या रखेंगे?
पिता ने बच्ची की तरफ देखा।
पिता:
“अनाया।”
माँ की आँखें खुशी से भर गईं।
माँ:
अनाया…
कितना प्यारा नाम है।
लेकिन तभी कमरे का दरवाज़ा खुला।
एक आदमी अंदर आया।
उसके चेहरे पर गुस्सा था।
आदमी:
तुम दोनों ने बहुत बड़ी गलती की है।
पिता ने उसे देखते ही बच्ची को माँ से दूर कर दिया।
पिता:
तुम यहाँ कैसे आए?
आदमी ने ठंडी आवाज़ में कहा—
आदमी:
अब यह बच्ची मेरे लिए मुसीबत है।
माँ:
मेरी बेटी को हाथ मत लगाना!
आदमी मुस्कुराया।
आदमी:
अगर इसे बचाना है…
तो तुम्हें मेरी बात माननी होगी।
[SFX: heartbeat]
वर्तमान समय…
आरव अचानक अपनी माँ के सामने बैठ गया।
आरव:
माँ…
मेरी बहन का नाम क्या था?
माँ की आँखें भर आईं।
बहुत धीमी आवाज़ में उसने कहा—
माँ:
अनाया।
आरव ने यह नाम दोहराया।
आरव:
अनाया…
उसे जैसे कुछ याद आने लगा।
एक बहुत पुरानी याद…
एक छोटी बच्ची…
एक लाल रंग की गुड़िया…
और एक आवाज़—
“भैया…”
आरव अचानक अपना सिर पकड़ लेता है।
आरव:
आह!
माँ:
क्या हुआ बेटा?
आरव:
मुझे…
कुछ याद आया।
माँ घबरा गई।
माँ:
क्या?
आरव:
एक छोटी लड़की…
वो मुझे भैया कह रही थी।
माँ की आँखों में आँसू आ गए।
माँ:
तुझे याद आ गया?
आरव:
माँ… वो मुझे कब मिली थी?
माँ ने कोई जवाब नहीं दिया।
आरव समझ गया…
उसकी माँ अभी भी कुछ छिपा रही है।
[SFX: मोबाइल की घंटी]
आरव का फोन बजा।
अनजान नंबर था।
आरव:
हैलो?
दूसरी तरफ कुछ सेकंड खामोशी रही।
फिर एक लड़की की धीमी आवाज़ आई—
लड़की:
आरव…
आरव के चेहरे पर हैरानी छा गई।
आरव:
कौन?
लड़की:
तुम मुझे नहीं पहचानोगे।
आरव:
तुम मेरा नाम कैसे जानती हो?
लड़की कुछ पल चुप रही।
फिर बोली—
लड़की:
क्योंकि…
मैं तुम्हें बचपन से जानती हूँ।
आरव की धड़कन तेज़ हो गई।
आरव:
तुम हो कौन?
लड़की ने सिर्फ एक शब्द कहा—
लड़की:
अनाया।
[SFX: तेज़ dramatic hit]
कॉल कट गई।
आरव कुछ सेकंड तक फोन को देखता रहा।
फिर उसकी नजर माँ पर गई।
आरव:
माँ…
अभी फोन पर…
अनाया थी।
माँ के हाथ से पानी का गिलास गिर गया।
[SFX: काँच टूटने की आवाज़]
माँ:
नहीं…
आरव आगे बढ़ा।
आरव:
आपने कहा था कि आपको नहीं पता वो कहाँ है!
माँ रोने लगी।
आरव:
माँ, वो जिंदा है!
माँ ने काँपती आवाज़ में कहा—
माँ:
हाँ बेटा…
वो जिंदा है।
आरव:
तो फिर वो हमसे दूर क्यों है?
माँ ने उसकी तरफ देखा।
और धीरे से बोली—
माँ:
क्योंकि…
उसे हमसे दूर रखने वाला इंसान…
आज भी उसके साथ है।
आरव:
कौन?
माँ ने जवाब देने के लिए जैसे ही मुँह खोला—
[SFX: दरवाज़े पर दस्तक]
ठक… ठक… ठक…
दोनों चुप हो गए।
आरव दरवाज़े की तरफ बढ़ा।
माँ:
आरव… रुक जा!
लेकिन आरव ने दरवाज़ा खोल दिया।
बाहर कोई नहीं था।
सिर्फ जमीन पर एक छोटा-सा पैकेट पड़ा था।
आरव ने उसे उठाया।
पैकेट के अंदर एक पुरानी लाल गुड़िया थी।
आरव के हाथ काँपने लगे।
क्योंकि वही गुड़िया…
उसे अपनी बचपन की उस धुंधली याद में दिखाई दी थी।
गुड़िया के अंदर एक छोटा कागज़ छिपा था।
आरव ने उसे खोला।
उस पर लिखा था—
“अगर अपनी बहन को जिंदा देखना चाहते हो… तो कल रात 12 बजे पुराने रेलवे स्टेशन पर अकेले आना।”
आरव ने कागज़ को मुट्ठी में दबा लिया।
माँ ने उसे रोकने की कोशिश की।
माँ:
तू वहाँ नहीं जाएगा।
आरव:
क्यों?
माँ की आँखों में डर था।
माँ:
क्योंकि…
वही जगह है…
जहाँ मैंने तुम्हारी बहन को आखिरी बार देखा था।
[SFX: suspense music rises]
Narrator:
लेकिन आरव को अभी नहीं पता था…
कि यह सिर्फ उसकी बहन से मिलने का बुलावा नहीं था।
किसी ने उसे वहाँ इसलिए बुलाया था…
क्योंकि उसी रात…
बीस साल पुराना एक और राज़ खुलने वाला था।
और उस राज़ में शामिल था…
आरव का सबसे करीबी इंसान।
जारी रहेगा…
❤️ Episode 4 में…
आरव आधी रात पुराने रेलवे स्टेशन पहुँचता है।
वहाँ उसे एक लड़की दिखाई देती है…
लेकिन जैसे ही वह उसके करीब जाता है—
वो लड़की आरव को देखकर कहती है:
“भैया… मुझे यहाँ से बचाकर ले चलो। वो आदमी मुझे मार देगा।”
और आरव पीछे मुड़कर देखता है…
तो उसके पीछे वही आदमी खड़ा होता है, जिस पर उसके पिता की हत्या का शक है।