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मेरे पास माँ है - 2 - बीस साल पुराना राज़

# मेरे पास माँ है

## Episode 2 — बीस साल पुराना राज़

**[SFX: तेज़ बारिश… खिड़की पर गिरती बूंदें… धीमी heartbeat]**

**Narrator:**

बीस साल…

एक इंसान की पूरी जिंदगी बदलने के लिए बीस साल काफी होते हैं।

लेकिन कुछ राज़ ऐसे होते हैं…

जो बीस साल बाद भी जिंदा रहते हैं।

और आज…

आरव के सामने उसके अतीत का वही राज़ खड़ा था।

उसकी माँ के हाथ में वह चिट्ठी थी…

जिस पर लिखा था—

**“आरव को कभी मत बताना।”**

आरव की आँखें अपनी माँ पर टिकी थीं।

**आरव:**
माँ… ये पापा ने लिखी थी?

माँ की आँखों से आँसू गिरने लगे।

**माँ:**
हाँ बेटा…

**आरव:**
लेकिन पापा तो बीस साल पहले मर गए थे!

माँ चुप रही।

**आरव:**
तो फिर ये चिट्ठी आज यहाँ कैसे आई?

कोई जवाब नहीं।

**आरव:**
माँ, मैं तुमसे पूछ रहा हूँ!

माँ ने काँपते हाथों से चिट्ठी आरव की तरफ बढ़ा दी।

**माँ:**
अब समय आ गया है…

कि तुझे कुछ सच्चाइयाँ पता चलनी चाहिए।

आरव ने लिफाफा खोला।

अंदर सिर्फ एक पुराना कागज़ था।

उस पर उसके पिता की लिखावट थी।

आरव ने पढ़ना शुरू किया—

**पिता की आवाज़:**
“अगर कभी यह चिट्ठी आरव तक पहुँचे…

तो उसे मुझसे नफरत करने देना।

लेकिन उसे मेरी मौत का सच मत बताना।

क्योंकि जिस दिन उसे सच पता चलेगा…

उस दिन उसकी जान खतरे में पड़ जाएगी।”

**[SFX: अचानक suspense hit]**

आरव के हाथ काँपने लगे।

**आरव:**
पापा को किससे डर था?

माँ ने धीरे से सिर उठाया।

**माँ:**
एक आदमी से…

आरव की आँखें सिकुड़ गईं।

**आरव:**
कौन आदमी?

माँ कुछ बोलने ही वाली थी कि—

**[SFX: बाहर कार के अचानक रुकने की आवाज़]**

दोनों चौंक गए।

माँ खिड़की की तरफ दौड़ी।

बाहर एक काली कार खड़ी थी।

**आरव:**
कौन है?

माँ का चेहरा अचानक सफेद पड़ गया।

**आरव:**
माँ… क्या हुआ?

माँ ने आरव का हाथ पकड़ लिया।

**माँ:**
दरवाज़े के पास मत जाना।

**आरव:**
लेकिन—

**माँ:**
मैंने कहा ना!

उसकी आवाज़ में ऐसा डर था जो आरव ने अपनी माँ की आँखों में कभी नहीं देखा था।

अचानक—

**[SFX: दरवाज़े पर तीन धीमी दस्तक]**

**ठक… ठक… ठक…**

दोनों खामोश हो गए।

फिर एक आवाज़ आई—

**अजनबी:**
दरवाज़ा खोलो।

माँ ने आरव के मुँह पर हाथ रख दिया।

कुछ सेकंड बाद बाहर से आवाज़ फिर आई—

**अजनबी:**
हमें पता है कि चिट्ठी तुम्हारे पास पहुँच चुकी है।

आरव की आँखें फैल गईं।

माँ ने उसे इशारे से पीछे हटने को कहा।

लेकिन तभी—

**धड़ाम!**

दरवाज़ा टूटकर जमीन पर गिर गया।

**[SFX: तेज़ dramatic music]**

तीन आदमी घर में घुस आए।

उनमें से एक ने सीधे आरव की माँ की तरफ देखा।

**अजनबी:**
बीस साल पहले भी तुमने यही गलती की थी…

और आज फिर वही गलती कर दी।

**आरव:**
तुम लोग कौन हो?

अजनबी मुस्कुराया।

**अजनबी:**
तुम्हें सच में कुछ भी नहीं पता?

आरव आगे बढ़ा।

**आरव:**
मेरी माँ से दूर रहो!

अजनबी ने जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली और आरव के सामने फेंक दी।

तस्वीर में चार लोग खड़े थे।

एक था आरव का पिता।

दूसरी उसकी माँ।

तीसरा आदमी अनजान था।

और चौथी…

एक छोटी बच्ची।

आरव तस्वीर को देखते ही रुक गया।

**आरव:**
ये बच्ची कौन है?

माँ ने तुरंत तस्वीर छीन ली।

**माँ:**
आरव… इसे मत देख।

**आरव:**
क्यों?

माँ की आँखों में डर लौट आया।

**आरव:**
माँ, मुझे सच जानना है!

अजनबी धीरे से हँसा।

**अजनबी:**
सच?

ठीक है…

मैं तुम्हें सच बताता हूँ।

उसने आरव की तरफ देखते हुए कहा—

**अजनबी:**
तुम्हारे पिता की मौत कोई हादसा नहीं थी।

**आरव:**
क्या?

**अजनबी:**
उनकी हत्या हुई थी।

कमरे में सन्नाटा छा गया।

आरव ने अपनी माँ की तरफ देखा।

**आरव:**
माँ… क्या ये सच है?

माँ ने आँखें बंद कर लीं।

और फिर…

धीरे से सिर हिला दिया।

**आरव:**
तुम्हें पता था?

**माँ:**
हाँ…

**आरव:**
तो तुमने मुझसे बीस साल तक झूठ बोला?

माँ रोते हुए बोली—

**माँ:**
मैंने झूठ नहीं बोला बेटा…

मैंने तुझे जिंदा रखा।

आरव की आँखों से आँसू निकल पड़े।

**आरव:**
पापा को किसने मारा?

माँ ने उस अजनबी की तरफ देखा।

अजनबी मुस्कुराया।

**अजनबी:**
यह सवाल अपनी माँ से मत पूछो…

क्योंकि जिस आदमी ने तुम्हारे पिता को मरवाया था…

**वह आज भी जिंदा है।**

**[SFX: तेज़ heartbeat]**

आरव ने तुरंत पूछा—

**आरव:**
कौन है वो?

अजनबी ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला।

स्क्रीन पर एक तस्वीर दिखाई।

आरव ने तस्वीर देखी…

और उसके चेहरे से सारी रंगत गायब हो गई।

क्योंकि तस्वीर में वही आदमी था…

जिसे आरव पिछले कई सालों से अपना सबसे करीबी इंसान समझता था।

**आरव:**
नहीं…

ये नहीं हो सकता।

माँ ने घबराकर कहा—

**माँ:**
आरव… मेरी बात सुन!

लेकिन आरव पीछे हट चुका था।

उसकी आँखों में सिर्फ एक सवाल था—

**“जिस इंसान पर मैंने सबसे ज्यादा भरोसा किया… क्या वही मेरे पिता का कातिल है?”**

अजनबी दरवाज़े की तरफ बढ़ा।

जाते-जाते उसने पीछे मुड़कर कहा—

**अजनबी:**
और हाँ…

तुम्हें जो तस्वीर मिली है…

उसमें जो छोटी बच्ची है ना…

**वही तुम्हारे पूरे अतीत की चाबी है।**

दरवाज़ा बंद हो गया।

आरव तस्वीर को घूरता रहा।

फिर उसने माँ की तरफ देखा।

**आरव:**
माँ…

**वो लड़की कौन थी?**

माँ के होंठ काँपने लगे।

और फिर उसने ऐसा जवाब दिया…

जिसे सुनकर आरव की पूरी दुनिया हिल गई।

**माँ:**
वो लड़की…

**तुम्हारी बहन थी।**

**[SFX: तेज़ dramatic hit]**

**Narrator:**

लेकिन आरव की तो…

**कोई बहन थी ही नहीं।**

या फिर…

उसे बीस साल से यही बताया गया था?

**जानने के लिए सुनते रहिए—**

# ❤️ मेरे पास माँ है ❤️

### Episode 3 में…

आरव अपनी उस “बहन” की तलाश शुरू करेगा, जिसका नाम उसके घर में बीस साल से लेना भी मना था।

लेकिन उसे एक ऐसा सबूत मिलेगा…

जिससे पता चलेगा कि उसकी बहन सिर्फ जिंदा ही नहीं…

**बल्कि आरव के बेहद करीब है।**