पुरुष की दुर्बलता prity द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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पुरुष की दुर्बलता

समाज में एक सामाजिक प्राणी की तरह जीना आसान है, लेकिन अपनी भावनाओं को छिपाकर, मुस्कान के पीछे अपने दर्द को दबाकर जीना—यही एक पुरुष की सबसे बड़ी कमजोरी है।


सुबह के सात बजे थे। घड़ी का अलार्म खामोशी को तोड़ते हुए तेज़ आवाज़ में बज उठा। जैसे वह किसी को गहरी नींद से वापस लाने के लिए बेचैन हो।


अलार्म की आवाज़ सुनकर विजय ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं। गोरा साफ़ रंग, स्वस्थ और मजबूत शरीर, घुंघराले काले बाल, चेहरे पर कुछ पिंपल्स और होंठों के पास एक छोटा-सा डिंपल उसके व्यक्तित्व को और भी आकर्षक बना रहे थे। लेकिन आज उसकी आँखों में कोई चमक नहीं थी; ऐसा लग रहा था जैसे वह पूरी रात किसी अनजानी याद से लड़ता रहा हो।


जैसे ही उसने बेड से उठने की कोशिश की, अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर पड़ा।


"ये क्या! इतना स्वस्थ और मजबूत लड़का अचानक ऐसे कैसे गिर गया?"


मुश्किल से उठकर जब वह दोबारा बेड पर बैठा, तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। उसकी माँ हाथ में गर्म कॉफी का कप लेकर अंदर आईं।


"बाबा बिजू, तूने कल फिर ड्रिंक किया था क्या? देख रही हूँ, तेरा चेहरा दिन-ब-दिन सूखता जा रहा है।"


विजय ने कोई जवाब नहीं दिया। माँ कॉफी रखकर चली गईं। उसने कॉफी को छुआ तक नहीं और सीधे बाथरूम चला गया।


शॉवर से पानी गिर रहा था। ठंडा पानी उसके शरीर को छू रहा था, लेकिन उसका मन कहीं और खोया हुआ था। अचानक पिछली रात वाली उस लड़की का चेहरा उसकी आँखों के सामने तैर उठा। उसकी गहरी आँखें, लाल होंठ और छाती के पास मौजूद छोटा-सा काला तिल—सब कुछ उसके मन पर गहरी छाप छोड़ चुका था। उस याद से बाहर निकलना चाहता था, फिर भी निकल नहीं पा रहा था।


तभी उसकी बहन प्रीति ने दरवाज़ा खोला और पुकारा—


"भैया... भैया..."


विजय बाथरूम से बाहर आया और गुस्से में बोला—


"तुझे कितनी बार कहा है, बिना परमिशन के मेरे कमरे में मत आया कर!"


प्रीति हँसते हुए बोली—


"वरना क्या मुझे कोई और काम नहीं है जो तेरे कमरे में आऊँ? मर रही हूँ क्या! माँ ने भेजा था देखने के लिए कि तूने कॉफी पी है या नहीं। अच्छा हुआ, तूने नहीं पी। अब मैं पी लूँगी।"


विजय ने गंभीर आवाज़ में कहा—


"मेरा मूड अच्छा नहीं है। मज़ाक करने का समय नहीं है। ऑफिस जाने का समय हो गया है।"


इतना कहकर उसने प्रीति को बाहर भेज दिया, शर्ट और पैंट पहनकर तैयार हुआ और नीचे आया। उसने देखा कि उसकी सान माँ ने उसके लिए उसका पसंदीदा खाना बनाया था। लेकिन वह अपनी माँ को देख नहीं पाया। नीचे अपने पिता को देखकर उसे गुस्सा आ गया। बिना कुछ खाए वह ऑफिस के लिए निकल गया।


रास्ते में वह अपने दोस्त शुभ को साथ लेकर ऑफिस की तरफ निकल पड़ा। दोनों हँसते-बातें करते हुए जा रहे थे कि तभी विजय की नज़र फिर उसी लड़की पर पड़ी। लेकिन गाड़ी की रफ्तार ज्यादा होने के कारण वह उसका चेहरा साफ़ नहीं देख पाया। बस उसकी हल्की-सी मुस्कान दिखाई दी और वह आगे बढ़ गया।


लगभग तीस मिनट बाद वे ऑफिस पहुँच गए। लेकिन ऑफिस में कदम रखते ही विजय के चेहरे का रंग बदल गया...


क्योंकि उसके सामने खड़ा था उसका अतीत—उसकी एक्स (jyoti।