कल्याणी ने धीरे से अपना दूसरा हाथ अपने पेट पर रखा। उसकी आँखों में अपने अजन्मे बच्चे की चिंता साफ़ झलक रही थी। रणजीत ने उसकी आँखों में देखते हुए दृढ़ स्वर में कहा—"में तुम दोनों को कुछ नहीं होने दूंगा
में वादा करता हूँ! उसके आदमियो ने श्री मलोत्रा के अधजले शरीर को उठाकर दूसरी गाड़ी में लिटाया गया। दूसरी ओर रणजीत ने कल्याणी को अपनी बाँहों में उठाकर कार की पिछली सीट पर लिटाया।
"पूरा रास्ता खाली करवाओ!" रणजीत गरजा I तीनों गाड़ियाँ तेज़ रफ़्तार से शहर की ओर दौड़ पड़ीं।
अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टर और नर्सें स्ट्रेचर लेकर बाहर आ गये "जल्दी! एक मरीज की हालत बेहद गंभीर है, और महिला गर्भवती भी है!" रणजीत चिल्लाया। दोनों को तुरंत ऑपरेशन थिएटर की ओर ले जाया गया।
रणजीत अस्पताल के गलियारे में खड़ा था। उसके कपड़ों पर धूल और खून के निशान थे। कुछ देर बाद ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा खुला। मुख्य डॉक्टर बाहर आए। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा—"हमें बहुत अफ़सोस है... हमने श्री मलोत्रा को बचाने की पूरी कोशिश की... लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उनकी सांसे बहुत ही धीमी पड़ चुकी थी I यह सुनते ही रणजीत की दुनिया जैसे थम गई। इससे पहले वो कोई प्रक्रिया कर पाता डॉक्टर फिर बोले और आपकी पत्नी की हालत नाज़ुक है। गोली निकाल दी गई है, पर अभी ख़तरा टला नहीं है। हमें माँ और बच्चे—दोनों को बचाने की पूरी कोशिश करनी होगी।"रणजीत ने लड़खड़ाते काँपते हाथों से दीवार का सहारा लिया। उसके शरीर जवाब दे रहा था आज वह मानसिक और शारिरिक रूप से पूरी तरह खत्म हो गया था I एक ओर पिता को खोने का दर्द...और दूसरी ओर पत्नी और अजन्मे बच्चे की ज़िंदगी के लिए दुआ...यही वह रात थी जिसने उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी।ऑपरेशन थिएटर के बाहर...रणजीत बेचैनी से चहलकदमी कर रहा था।उसकी आँखें बार-बार उस लाल बत्ती पर टिक जातीं, जो अभी भी जल रही थी। हर बीतता पल उसे एक युग जैसा लग रहा था।आख़िरकार...एक बच्चे की रोने की आवाज आई,साथ ही ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा खुला। मुख्य डॉक्टर बाहर आए। उनके चेहरे की गंभीरता देखकर रणजीत का दिल बैठ गया। वह दौड़कर डॉक्टर के सामने पहुँचा।
"डॉक्टर... कल्याणी कैसी है?" डॉक्टर ने गहरी साँस ली। हमने पूरी कोशिश की..."गोली निकाल दी गई...""लेकिन..." कुछ पल रुककर उन्होंने कहा—"हमें माँ और बच्चे में से किसी एक को बचाने का निर्णय लेना पड़ा।" रणजीत की साँस जैसे थम गई। डॉक्टर ने धीमे स्वर में कहा— "हम बच्चे को बचाने में सफल रहे.."लेकिन...""हम कल्याणी को नहीं बचा सके।" रणजीत कुछ पल तक डॉक्टर को देखता रह गया। मानो उसने सुना ही न हो। "न... नहीं..." "ये... ये नहीं हो सकता..."उसके घुटने जवाब दे गए। वह वहीं फ़र्श पर घुटनों के बल गिर पड़ा । उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे। डॉक्टर ने धीरे से एक नर्स को इशारा किया। नर्स सफ़ेद कपड़े में लिपटा एक नन्हा-सा शिशु लेकर आई। बच्चा हल्के-हल्के रो रहा था। नर्स ने बच्चे को रणजीत की गोद में रखा। रणजीत काँपते हाथों से उसे थामे रहा।उसकी आँखों से आँसू बच्चे के माथे पर गिर पड़े। उसी समय डॉक्टर ने धीरे से कहा— "ऑपरेशन से पहले... कल्याणी कुछ कहना चाहती थीं।" उन्होंने रणजीत को एक मुड़ा हुआ कागज़ दिया। रणजीत ने काँपते हाथों से उसे खोला। उसमें लिखा था—"अगर मैं न बचूँ... तो हमारे बच्चे को कभी यह महसूस मत होने देना कि उसकी माँ उसे छोड़कर चली गई। उसे बताना कि उसकी माँ ने आख़िरी साँस तक उससे और तुमसे प्यार किया। उसे एक अच्छा इंसान बनाना... ताकि उसे कभी उस अँधेरे से न गुजरना पड़े जिससे हम गुज़रे।" रणजीत ने उस चिट्ठी को सीने से लगा लिया। उसने अपनी बाँहों में सोए हुए बच्चे को देखा... और पहली बार महसूस किया कि एक ही रात में उसने अपने पिता और अपनी पत्नी—दोनों को खो दिया था। लेकिन उसी रात...उसकी बाँहों में उसकी ज़िंदगी की आख़िरी उम्मीद भी आ गई थी। उस एक रात ने सब कुछ बदल दिया।
एक ही दिन में रणजीत ने अपने पिता को खो दिया...
अपनी पत्नी को खो दिया...और अपनी पुरानी ज़िंदगी भी खो दी। उसकी बाँहों में उसका नवजात बेटा था...
और दिल में जल रही थी बदले की आग। उसने अस्पताल की खिड़की से बाहर देखा।
आसमान पर सुबह हो चुकी थी... लेकिन उसकी ज़िंदगी में अब कभी सवेरा नहीं होना था। उसने मन ही मन एक कसम खाई—"जिसने मुझसे मेरा परिवार छीना है... मैं उससे उसका सब कुछ छीन लूँगा।"
उस दिन से...मलोत्रा परिवार की कहानी बदल गई। जो परिवार कभी अपनी ईमानदारी और सम्मान के लिए जाना जाता था...वही धीरे-धीरे अंडरवर्ल्ड का सबसे ख़ौफ़नाक नाम बन गया। रणजीत ने एक-एक करके अपने दुश्मनों को ढूँढ़ना शुरू किया। किसी ने शहर छोड़ा...कोई कानून के पीछे छिपा...कोई दूसरे गिरोहों की शरण में चला गया...लेकिन रणजीत के बदले से कोई नहीं बच सका। उसने काली दुनिया में कदम रखा...पहले सिर्फ़ बदला लेने के लिए। फिर अपने बेटे की सुरक्षा के लिए। और फिर... वह उसी अँधेरे का हिस्सा बन गया। लोग कहते हैं—"इस काली दुनिया में आने का रास्ता तो होता है... लेकिन बाहर जाने का नहीं।" शुरुआत में रणजीत इस दुनिया का इस्तेमाल अपने बदले के लिए करना चाहता था... लेकिन धीरे-धीरे...यही दुनिया रणजीत का इस्तेमाल करने लगी।
ईमानदार व्यापारी का दामाद...अब अंडरवर्ल्ड का सबसे ख़ौफ़नाक नाम बन चुका था।
रणजीत मलोत्रा। एक ऐसा नाम...बना जिसे सुनकर बड़े-बड़े अपराधी भी अपनी पैंट गीली कर लेते थे। क्योंकि अब वह एक इंसान नहीं था...वह अपने परिवार की राख से जन्मी एक ऐसी आग था, जो बुझना नहीं जानता था।एक बदले से शुरू हुआ यह सिलसिला... पीढ़ी दर पीढ़ी चलता ही रहा। रणजीत ने अँधेरी दुनिया में कदम रखा था...बदले के लिए। उसके हाथों पर अपराध का बोझ था, लेकिन उसके दिल में अब भी अपने परिवार की आख़िरी यादें ज़िंदा थीं। उसने कभी इस साम्राज्य को अपनी मंज़िल नहीं बनाया था...यह तो उसके दर्द का रास्ता था I
समय बीतता गया। नई पीढ़ी आई। रणजीत के बाद उसके बेटे ने उसी साम्राज्य को संभाला।
मगर उसके लिए यह बदले की लड़ाई नहीं थी। उसके लिए यह ताक़त, दौलत और सत्ता का खेल बन चुका था।
जो साम्राज्य कभी मजबूरी में बना था...वह अब लालच की नींव पर खड़ा होने लगा। और फिर...तीसरी पीढ़ी आई।
तब तक "मलोत्रा" सिर्फ़ एक परिवार का नाम नहीं रहा था...वह ख़ौफ़ का दूसरा नाम बन चुका था।
लोग कहते थे—"उस हवेली में सूरज की पहली किरण नहीं... गोलियों की आवाज़ गूँजती है।"
वहाँ बच्चों के खिलौनों से ज़्यादा हथियार थे। वफ़ादारी खरीदी जाती थी... और गद्दारी की सज़ा मौत नहीं, बल्कि ऐसी मिसाल होती थी जिसे देखकर बाकी लोग डर जाएँ। पूरे शहर में एक ही बात मशहूर थी—"अगर अपराध की कोई राजधानी है... तो वह मलोत्रा साम्राज्य है।"और उस साम्राज्य का हर नया वारिस...अपने साथ एक नई जंग, एक नया ख़ून और एक नया अँधेरा लेकर पैदा होता है। क्योंकि एक बदले से शुरू हुई कहानी... अब सिर्फ़ बदले की नहीं रही थी। वह एक ऐसे परिवार की कहानी बन चुकी थी... जिसने अँधेरे को अपना वंश बना लिया था।