भैंस, बाल्टी और स्मार्ट सोनू का सिस्टम sukhvinder Singh Rai द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

भैंस, बाल्टी और स्मार्ट सोनू का सिस्टम

गाँव की सोंधी खुशबू वाली उस पगडंडी पर धूल उड़ रही थी। शाम का वक्त था, और गाँव के माहौल में अजीब सा सुस्ती भरा सुकून था। यहाँ ज़्यादातर लोगों के पास पैसे की तंगी रहती थी, कुछ गिने-चुने लोग ही थे जिनके पास खेती-बाड़ी या थोड़ी बहुत पूँजी थी। बाकी लोग या तो दिहाड़ी मजदूरी करते थे या फिर दूसरों के खेतों में पसीना बहाते थे। लेकिन सोनू इन सबसे अलग सोचता था।सोनू ने एक दिन अपने पक्के दोस्तों के बीच छाती फुलाकर ऐलान कर दिया कि अब वह मजدूरी या छोटे-मोटे काम छोड़कर दूध का बड़ा व्यापार करेगा। सोनू का गहरा और अटूट विश्वास था कि— *"मेहनत सिर्फ वो लोग करते हैं जिनके पास दिमाग नहीं होता, बाकी असली अकलमंद लोग तो सिर्फ 'दिमाग' से राज करते हैं।"*अगली सुबह, गाँव के कच्चे रास्ते से होते हुए सोनू सीधे शहर की बड़ी पशु मंडी जा पहुँचा। मंडी में चारों तरफ मवेशियों की भीड़ थी, धूल उड़ रही थी और दलालों की आवाज़ें गूँज रही थीं। सोनू ने वहाँ जाकर एक सबसे भारी-भरकम, तगड़ी, काले रंग की और ऊँचे कद की भैंस पसंद की। उसके सींग लंबे और शरीर ऐसा था जैसे कोई पहलवान हो। मोल-भाव करके उसने अच्छी-खासी रकम चुकाई और उस भैंस को खरीदकर अपने साथ गाँव ले आया। 🐃💵गाँव पहुँचते ही उसने भैंस को अपने घर के बाहर बने छप्पर के नीचे बाँधा। सोनू का मानना था कि भैंस लाना मतलब घर बैठे नोट छापने की मशीन ले आना है। उसने कंजूसी करने के बजाय सीधे बाजार से सबसे महंगा और प्रीमियम सूखा-हरा चारा और खल मँगवाई और भैंस के आगे ढेर लगा दिया। उसने मन ही मन सोचा, *"जब इनपुट राजाओं वाला होगा, तो दूध भी तो अपने आप बाल्टी फाड़कर बहेगा। भला कौन मूर्ख सुबह-सुबह उठकर ठंडे पानी से हाथ गलाए और खुद बाल्टी लेकर बैठे।"*सोनू ने अपने 'सुपर स्मार्ट' दिमाग का इस्तेमाल करते हुए एक चमचमाती हुई बड़ी स्टील की बाल्टी उठाई और उसे ठीक भैंस के थनों के नीचे रख दिया। इसके बाद उसने अपनी पुरानी, जर्जर चारपाई खींची और ठीक भैंस के पास ही बिछा दी। उसने एक पुराना गंदा तकिया सिर के नीचे लगाया और बड़े ठाठ से, टाँग पर टाँग रखकर उस पर लेट गया। ठंडी हवा चल रही थी और वह आसमान की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा कि बस अब कुछ ही पलों में दूध टपक-टपक कर बाल्टी भर देगा। 🛏️😌तभी वहाँ से उसका जिगरी यार बबलू निकला। बबलू ने जब यह नजारा देखा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। भैंस आराम से छप्पर के नीचे मस्त होकर मँहगा चारा चबा रही थी, नीचे स्टील की बाल्टी बिल्कुल खाली और सूखी पड़ी थी, और उसका ज्ञानी दोस्त सोनू चारपाई पर तानकर मजे से लेटा हुआ था।बबलू अपना माथा पीटते हुए आगे आया और हँसी रोकते हुए बोला, *"ओए सोनू! ये क्या तमाशा लगा रखा है? भैंस के नीचे बाल्टी तो रख दी, पर भाई... दूध निकालेगा कौन?"* 📱🤨सोनू ने अपनी चारपाई पर लेटे-लेटे ही एक हाथ हवा में लहराया और बड़े रौब से जवाब दिया, *"अरे बबलू! तू सदियों पुरानी सोच से बाहर निकल। इसे कहते हैं ऑटोमेशन और मॉडर्न बिजनेस! मैंने पूरा सिस्टम सेट कर दिया है—भैंस आराम से चारा खा रही है, नीचे बाल्टी अपनी जगह पर बिल्कुल फिक्स है। बस, जैसे ही अंदर का प्रोसेस पूरा होगा, दूध अपने आप टपककर बाल्टी में भरने लगेगा। फालतू हाथ-पैर हिलाने की क्या जरूरत है!"* 📈😎बबलू से अब और नहीं रहा गया। उसका पेट हँसी के मारे फूलने लगा और वह खुलकर ठाठ मारकर हँसने लगा। उसने जोर से कहा,*"ओए सोनू! तू सच में किसी और ही दुनिया में जी रहा है। अरे मूर्ख, ये कोई एटीएम मशीन या फैक्ट्री का ऑटोमैटिक पाइप नहीं है, ये एक जिंदा भैंस है! अगर सिर्फ चारपाई पर लेटकर सोचने भर से बाल्टी दूध से भर जाती, तो आज गाँव का एक-एक आदमी काम-धंधा छोड़कर गहरी नींद में सो रहा होता। भाई, इसके लिए हाथों की उंगलियों पर जोर डालना पड़ता है, नसों में ताकत लगानी पड़ती है, तब जाकर धार निकलती है! वरना ये बाल्टी उम्रभर खाली रहेगी और अगर इस बेचारी मवेशी ने एक बार मूड बना लिया, तो तुझे लात मारकर चारपाई समेत सीधे नाले में गिरा देगी!"* 🤣👋सोनू ने बबलू की बात पर एक गहरी झिड़की देते हुए हाथ झटक दिया, *"चल-चल, तू ज्यादा ज्ञानी मत बन। मुझे मेरे 'सिस्टम' पर पूरा भरोसा है, तू अपना रास्ता नाप।"* 🙄लेकिन कुदरत और उस भैंस का मिजाज कुछ और ही कह रहा था। सोनू की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि तभी उस तगड़ी भैंस ने अपना धैर्य खो दिया। उसे शायद सोनू की हरकत पर गुस्सा आ गया या मक्खियों ने परेशान किया हो, उसने अचानक अपना पिछला भारी-भरकम पैर उठाया और हवा में एक ऐसा जोरदार दुलत्ती (लात) झाड़ी कि वह सीधा जाकर चमकती हुई बाल्टी पर लगा!*धड़ाम!*वह चमकती हुई बाल्टी हवा में कलाबाजियाँ खाती हुई पास के कीचड़ और गंदे नाले में जा गिरी और उसकी खड़खड़ाहट से पूरा मोहल्ला गूँज उठा। इससे पहले कि सोनू अपनी चारपाई से संभलकर उठ पाता, भैंस के एक और झटके ने उसकी चारपाई के चारों पायों को हिला दिया और सोनू सीधे औंधे मुँह जमीन पर धूल और कीचड़ में जा लुढ़का। 🐽💦🤕सोनू ने उठकर अपने बदन से धूल और कीचड़ झाड़ी, अपना दर्द से कराहता हुआ घुटना सहलाया और बड़बड़ाते हुए समझा—जिंदगी में बाल्टी भरने के लिए सिर्फ सपने देखने और चारपाई पर लेटने से काम नहीं चलता, असली मैदान में उतरकर हाथ गंदे करने ही पड़ते हैं! 🌾🚶‍♂️