काफला यूँ ही चलता रहा - 7 Neeraj Sharma द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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काफला यूँ ही चलता रहा - 7

गहरे राज ---- बड़े दुखदायी होते है, भुगतने पड़ते है। क्यूंकि राज तभी बनते है ज़ब हम कोई मन की खुशी या किसी को दर्द देने के लिए करते है वह राज बड़े कुशल कारा गिरी के संकेत होते है। यही गहरे राज कभी दुखदायी बन जाते है।

शुरू करे।.......... 🌹🌹(1)............. 🌹🌹

                             मानिक इस कड़ी को धयान से देखता है... कुछ सोचता है। आखिर उस मे कौन सी ऐसी बात है जो मै उसकी और खींचा चला गया। ये तो मैंने कभी सोचा ही नहीं। "हाँ कुछ तो होगा " ---- आज कितना फर्क दीखता है उसमे और मुझ मे, कयो लोग उसके दीवाने हो जाते है... कया खास राज की बात है उसमे... "ओह ठीक वो खरचीला है!!" नहीं ये तो कोई जरुरी नहीं... फिर लोग उसे इतने प्रभावित कयो... "हाँ उसमे कोई कला जरूर है " वो अंत तक छोड़ती नहीं किसी की यादगार को... " बिताये पल हमेशा पीछा करते रहते है। " कितना जरूरी होता है किसी को समझना। उसके साथ बिताये पल किसी की फेक प्रोफ़ाइल का नतीजा ये निकला कि वो आज मेरी पड़ोसी बन कर आ गयी। "मै निकलना चाहता था , उसकी हर गति मे से।" मानिक आपने दोस्त की पुलिस प्रोफइल चेक कर रहा होता है " -------- और सोचता है इतना गहरे जाने की जरूरत कया थी। कयो इतना गहरा गया, कयो भुत सवार हो गया था उस पे --- केथलीना का। बता दू वो जर्मन की लेडी दिल्ली मे दस साल से केबरे डासर थी... लेकिन उसने कभी केबरे डास किया नहीं था। वो बदनाम थी आपनी सहेलियों मे, कि पता नहीं उसके फिगर और नीली आँखो मे कया था, हर कोई उसका हो जाना चाहता था। वो बड़े आदमिओ की सगति मे अक्सर वहना चाहती थी। वो निशाना बनाना चाहती थी हर बड़े व्यक्ति के हौसलों और जज्बातो को... खेल खेलती थी.... पैसो की कमी नहीं थी उसे, हर क़ीमत थी उसके पास, एक नहीं थी तो आलस उसके पास। आलसी कोई भी हो, वो खत्म हो ही जाता है... कहने को कुछ भी कह सकते हो... कितनी देर चलती है बनावटी पहचान।

                                      ज़ब उसे पता चला उसका फेक प्रोफ़ाइल प्रेमी युसफ उसे पका रहा है.. लेकिन उसकी सहेली कर बर्थ डे पार्टी मे मजूद नहीं, आपनी बहन का एक्सीडेंट होने का कह कर निकल गया है... "पुणे से फोन आया कि बहन अमरजेंसी मे है " ये सोच कर देखो तो ----" कितना घाटा होता है आपनी सेहलिओ मे जो तीन उसकी पकी सहेलिया थी। " एक ने मुस्करा कर कहा था " वह झूठा इंसान है हर आदमी ऐसा ही होता है " वो फिर हस पड़ी। दूसरी बोली ---" सब एक जैसे ही होते है। " केथलीना को गुस्सा लगा काफ़ी, जो वो समझती थी, ऐसा नहीं था। 

                       जिसको वो छोड़ चुकी थी वो उसे नहीं छोड़ना चाहता था। वो भी एक ज़िन्दगी का दर्दनाक हिस्सा था, वो उसे भूल जाना चाहती थी लेकिन वो उसे भुला नहीं था। उसने घड़ीस कर कहा था, मेरे सिवा तुझे कोई नहीं अपना सकता.. समझ लो मेरी बात धयान से। " अजीब मंजर पर ख़डी हो गयी थी... ये वो चूरसता था जिस पर तूफान के इलावा कुछ भी नहीं था --------आगे उपन्यास धरावयिक जारी रहेगा... अगर आपको अच्छा लगे तो...... नीरज शर्मा 144702 

इंतजार करे अभी। 👎