सुबह की हल्की धूप गाँव के पुराने घरों पर चमक रही थी।
18 साल की आशी वर्मा, हल्के गुलाबी सूट में, आँगन में झाड़ू लगा रही थी।
चेहरे पर मासूमियत, दिल में दर्द—और ज़िन्दगी में न कोई अपना।
माँ-बाप की मौत के बाद
वो अपने चाचा–चाची के साथ रह रही थी,
जो उसे बेटी नहीं, बोझ समझते थे।
“आशी! काम खत्म हुआ कि नहीं?”
चाची की कड़क आवाज़ ने सुबह की शांति तोड़ दी।
“जी चाची… बस कर लिया।”
चाची ने घूरकर कहा,
“पुरा दिन काम करवाउँगी तब ही कुछ सीखेगी तेरी माँ ने तो तुझे कुछ सिखाया नही!”आशी चुपचाप सर झुका लेती है। और उसकी आँखो से आँसू गिरने लगते है वो अपने माँ बाप के बारे मे ऐसा नही सुन सकती थी | (भला कोन बेटी सुन सकती है)
ये उसकी रोज़ की ज़िन्दगी बन चुकी थी—
प्यार की कमी, दर्द की आदत।
उसे नहीं पता था कि उसकी किस्मत
धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रही है।
मुंबई का सबसे महंगा पॉश इलाका—सी-फेसिंग बंगलो।
और उसी में रहता था—
हमारा हीरो रयान मल्होत्रा।
30 साल का, करोड़ों की प्रॉपर्टी का मालिक,
देश का सबसे कम उम्र का बिज़नेस टाइकून,
और अपनी रूडनेस के लिए मशहूर।
उसकी personality इतनी strong थी कि
लोग सामने आते ही दबाव महसूस करते थे।
सांवला रंग, जो उसकी sharp jawline को और उभारता था
काली, गहरी आँखें, जो किसी की भी धड़कन रोक सकती थीं
चौड़े कंधे, एथलेटिक body
हल्की दाढ़ी, जो उसे और भी mature बनाती थी
और चाल ऐसी… जैसे कि जो देखे वो खुद को उसे वापस देखने से रोक ही ना पाए|
उसे दुनिया की हर luxury पसंद थी, और वो afford भी कर सकता था।
बंगलो में स्टाफ की कोई कमी नही थी
हर morning उसके सामने कारों की लाइन होती थी
Rolls Royce, Lamborghini, Ferrari, Mercedes G-Wagon, BMW i7, Audi R8…
चारो तरफ black–uniform वाले bodyguards,
जिनके बिना वो बाहर निकलता ही नहीं था
रयान की दुनिया power, money और attitude से भरी थी।
वो rude इसलिए नहीं था कि उसे आदत थी—
वो rude इसलिए था कि उसके पास emotions के लिए जगह ही नहीं बची थी।
👥 उसका छोटा भाई — रोहन मल्होत्रा
19 साल का रोहन अभी कॉलेज में था—
खुशमिजाज, बातें करने वाला,
रयान के बिल्कुल उलट।
भाई आज कॉलेज मे fresher पार्टी है मुझे आने मे थोड़ा लेट हो जायेगा पर आप जल्दी घर आजाना रोहन ने हँसते हुए कहा।
रयान ने बस हल्की सी नजर डाली—
“Enjoy. और कोई प्रॉब्लम हो तो कॉल करना.”
रयान के चाहे कितने भी layers हों,
पर अपने भाई के लिए उसके दिल में softness हमेशा रहती थी।
👔 उसके दो सबसे करीबी दोस्त — विवान और आरव
दोनों रयान की ही उम्र के,
और उसकी कंपनी में उसके साथ काम करते थे।
हर सुबह दोनों उसकी गाड़ी में
उसके साथ ऑफिस जाते थे।
आज भी वही हुआ—
रयान अपनी black color की Lamborghini से बाहर निकला,
bodyguards तुरंत उसके आसपास फैल गए।
विवान बोला,
“bro नई डील finalize हो गयी है आज मीटिंग टाईट होगी.”
आरव ने हँसकर कहा,
“रयान को तो सबका attitude संभालना आता है. टेंशन उसकी dictionary मे नही है.”
रयान ने sunglasses पहने और सीधा ऑफिस की तरफ बढ़ गया—
बिना मुस्कुराए, बिना जवाब दिए।पसंद ऐसा ही था वो
उसे बातें पसंद नही थीं…
बस काम।
रयान का दिन हमेशा की तरह तेज़-तर्रार रहा — मीटिंग, फ़ोन कॉल, डील्स।
तभी उसके कैबिन का डोर नोक हुआ और रयान का सेक्रेटरी अंदर आया और बोला सर वो, गाँव के उस पुराने ज़मीन वाले प्रोजेक्ट में तालाब के आसपास कुछ कानूनी अड़चनें आ रही हैं। हमें वहाँ पर खुद जाकर मुआयना करना होगा, लोकल अधिकारियों से मिलना होगा।”
रयान ने अपनी काली आँखों से फ़ाइलों में झाँका, फिर धीरज से कहा—
“ठीक है। मैं कल जाऊँगा। विवान, तुम्हें टीम को संभालना होगा इस प्रोजेक्ट को जल्द ही हमे पुरा करना है । आरव, मेरी ईमेल्स देख लो। और रोहन को कॉल करके बोल दो आज मे घर नही जाऊँगा मुझे कुछ ज़रूरी काम निपटांने हैं तो कल शाम को वो रेडी रहे उसे भी मेरे साथ जाना है।”विवान और आरव ने सिर हिला कर कहा हम यहाँ सब संभाल लेंगे इतना कह कर रयान वहाँ से चला गया|
रोहन जो कॉलेज की थकी-हुई किताबों और मस्ती से भरा लहजा लिए था, थोड़ा हैरान हुआ—
फिर उसने जल्दी से रयान को कॉल किया.......Bhai… गाँव? लेकिन तुम्हे वहाँ जाने की क्या ज़रूरत है? हम अपने lawyers को भेज सकते है.”
रयान ने बिना मुस्कुराए कहा—
“वहाँ जाना ज़रूरी है वो ज़मीन मोम के नाम पर है मे नही चाहता उसमे कोई झंझट हो?”
उसकी आवाज़ में जो ठंडक थी, रोहन उससे और कोई सवाल नहीं करना चाहता था।
वहीं गाँव मे- आशी के चाचा ने आशी से कहा
बाजार जाओ और मेले से कुछ सामान ले आओ — और जल्दी वापस आजाना, फिर उसकी चाची पीछे से चिल्लाते हुए बोली अब जाओ जल्दी तुम्हारा दिमाग़ धीरे-धीरे चलता है क्या।”
आशी ने बिना जवाब दिए जल्दी से सामान की लिस्ट ली और बाहर निकल गई।
हवा में खेतों की खुशबू थी, और उसके साथ चलने वाली यादें—माँ की हँसी, पिता की सीख—सब कहीं उसके दिल में दबे थे।
उसने अपनी छोटी सी झोली उठाई और रास्ते पर चल पड़ी ये सोचते हुए कि क्या सचमुच उसकी ज़िन्दगी में कभी खुशी आएगी?
जानिए आगे क्या होता है क्या सच मे आशी की ज़िंदगी एसी ही रह जाएगी या उसकी ज़िंदगी मे भी खुशियाँ आएगी कभी...