जंगल का खजाना - 1 Sandeep Bind द्वारा रोमांचक कहानियाँ में हिंदी पीडीएफ

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जंगल का खजाना - 1

*अध्याय 1: पुराना नक्शा*गर्मियों की छुट्टियां थीं। *विक्रम* लखनऊ से नानी के गांव बस्ती गया था। गांव के पीछे घना जंगल था। बड़े बोलते थे - "उस जंगल में मत जाना, वहां रात को अजीब आवाज़ें आती हैं।"एक दिन विक्रम छत पर पतंग उड़ाते समय पुराने टीन के डब्बे में कुछ ढूंढ रहा था। तभी उसके हाथ एक फटी-पुरानी डायरी लगी। डायरी के अंदर पीले कागज पर हाथ से बना *नक्शा* था। नक्शे पर लाल स्याही से लिखा था:  *"पीपल के पेड़ के नीचे... जहां 3 चट्टानें हैं... वहीं दबा है राजा का खजाना"*विक्रम की धड़कन तेज हो गई। क्या ये सच में खजाने का नक्शा था? उस रात वो सो नहीं पाया। अगले दिन सुबह-सुबह वो बैग में टॉर्च, पानी और रोटी रखकर जंगल की तरफ निकल पड़ा।जंगल के गेट पर एक बूढ़ा बाबा बैठा था। उसने विक्रम को रोककर कहा -  *"बेटा, वहां मत जाओ। खजाने के साथ एक शाप भी है..."*ठीक है! चलो आगे बढ़ते हैं 🔥---*अध्याय 2: शाप वाला जंगल*विक्रम ने बाबा की बात सुनी, पर खजाने का नाम सुनकर उसकी आंखों में चमक आ गई थी। वो बोला - *"बाबा, मैं बस देखकर आ जाऊंगा।"* और जंगल में भाग गया।जंगल में घुसते ही हवा ठंडी हो गई। पेड़ इतने घने थे कि धूप भी अंदर नहीं आ रही थी। विक्रम ने नक्शा निकाला। नक्शे पर 3 निशान थे। पहला निशान था *"टूटा हुआ कुआं"*।20 मिनट चलने के बाद उसे सच में एक टूटा कुआं मिला। कुएं के पास कीचड़ में पैरों के निशान थे... पर वो निशान इंसान के नहीं थे। बहुत बड़े थे। तभी झाड़ियों से सरसराहट की आवाज़ आई। विक्रम ने टॉर्च जलाई। सामने एक *काला बंदर* बैठा था। पर ये आम बंदर नहीं था। उसके गले में एक पुराना लॉकेट था। लॉकेट पर वही निशान था जो नक्शे पर था।बंदर ने लॉकेट हिलाया और जंगल के अंदर की तरफ इशारा किया। फिर पेड़ पर चढ़कर गायब हो गया।विक्रम समझ गया। *ये बंदर उसे रास्ता दिखा रहा है।* वो नक्शे वाला दूसरा निशान चेक किया - *"3 चट्टानें"*।वो बंदर के पीछे-पीछे भागा। आधे घंटे बाद उसे सच में 3 बड़ी-बड़ी चट्टानें मिलीं। चट्टानों के बीच में एक छोटा सा गड्ढा था। गड्ढे में मिट्टी नई-नई खोदी हुई लग रही थी।विक्रम ने डंडे से मिट्टी हटाई... और तभी...*धड़ाम!* ज़मीन के नीचे से एक ज़ोर की आवाज़ आई। और चट्टानें हिलने लगीं।वाह विक्रम! सबसे बहादुर वाला ऑप्शन चुना 🔥---*अध्याय 4: नदी का भंवर*विक्रम ने बैग उतारा और बोला - *"मैं जाता हूँ। आप लोग ऊपर से रस्सी पकड़े रहना।"*अनु घबरा गई - *"पानी बहुत तेज है विक्रम!"*  बूढ़ा ठाकुर बोला - *"बेटा, भंवर के बीच में एक बड़ी चट्टान है। लॉकेट उसी के नीचे फंसा होगा।"*विक्रम ने गहरी सांस ली और *छपाक* करके नदी में कूद गया।पानी बर्फ जैसा ठंडा था। धारा उसे खींच रही थी। उसने आंखें बंद करके तैरना शुरू किया। 10 सेकंड... 20 सेकंड... सांस घुट रही थी।तभी उसे नीचे *काली चट्टान* दिखी। और चट्टान के पास कीचड़ में कुछ चमक रहा था।विक्रम ने गोता लगाया। कीचड़ हटाया... और हां! *दूसरा लॉकेट* मिल गया। बिल्कुल पहले वाले जैसा।पर तभी पैर फंस गया! कीचड़ में पैर धंस गया था। ऊपर से राजू चिल्ला रहा था - *"रस्सी पकड़ो!"*विक्रम ने एक हाथ से लॉकेट कसकर पकड़ा और दूसरे हाथ से रस्सी पकड़ी। सबने मिलकर उसे खींचा।*धड़ाम!* विक्रम पानी से बाहर आया। कांप रहा था, पर हाथ में लॉकेट था।बूढ़े की आंखों में आंसू आ गए। उसने दोनों लॉकेट लिए और विक्रम के माथे पर हाथ रखा - *"तुम सच्चे विक्रम हो बेटा।"*---*अध्याय 5: ग्रंथ का राज*दोनों लॉकेट पत्थर के दरवाजे में लगे। *घर्रर्र...* दरवाजा खुला।अंदर सोना नहीं था। अंदर था - *ताड़ के पत्तों पर लिखा एक मोटा ग्रंथ*। और उसके साथ नक्शे।ग्रंथ में लिखा था कि 200 साल पहले इस इलाके में *बांध और नहरें* कैसे बनती थीं। जिससे हर साल बाढ़ और सूखा दोनों रुक जाएं।अगले 6 महीने में गांव वालों ने मिलकर उसी ज्ञान से *छोटा बांध* बना दिया। अब न बाढ़ आती है, न पानी की कमी।स्कूल में उस ग्रंथ की कॉपी रख दी गई। और वो बूढ़ा ठाकुर? अब वो पाठशाला में बच्चों को इतिहास पढ़ाता है। उसका तोता क्लास में सबसे शरारती स्टूडेंट है 😂*The End*---*कैसी लगी "विक्रम और गुफा का रहस्य"?* अब विक्रम का *पार्ट 3* करें? जैसे "विक्रम और पहाड़ों का खोया शहर" या कोई नई एडवेंचर चाहिए?