Fouji ki Adhuri Prem Kahani - 3 Mawaskar Pratigya द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

Fouji ki Adhuri Prem Kahani - 3

पता नहीं क्यों... कभी-कभी सच्चा प्यार भी हर किसी के नसीब में नहीं होता। सच्चा प्यार करने वाले अक्सर खाली हाथ ही रह जाते हैं।

कुछ दिन बाद से अमन और जानवी एक दूसरे से बात करने लगे। एक दूसरे को समझने लगे, पर ये समझना कैसा? अमन जानवी से बात करता था, पर उसके कान तो बस एक ही आवाज के इंतजार में रहते थ था - निशा की। बॉर्डर पर खड़ा एक फौजी, जो दुश्मन की गोली से नहीं डरता, वो एक लड़की की आवाज सुनने के लिए रोज खुद से हार जाता था। उसे बस ये जानना था... क्या उसकी निशा की दुनिया में अब कोई और आ गया है? क्या उसकी जगह भर चुकी है? प्यार तो वो आज भी सिर्फ और सिर्फ निशा से करता था... जानवी तो बस एक बहाना थी, निशा तक पहुँचने का एक बेजान सा रास्ता।

एक दिन, कॉलेज के गार्डन में...

तीनों बैठी थीं। निशा, जानवी और काव्या। धूप थी, पर निशा के चेहरे पर कोई रौशनी नहीं थी। वो हँस रही थी, पर वो हँसी जो होंठों तक ही रह जाती है, आँखों तक कभी नहीं पहुँचती।

तभी जानवी का फोन बजा - अमन।

जानवी थोड़ा सा दूर जाकर धीरे से बोली जानवी :) हेलो...

और उधर सैकड़ों किलोमीटर दूर, एक तंग सी बैरक में, वर्दी पहने अमन ने जैसे ही पीछे से निशा की हँसी सुनी, उसकी आँखें भर आईं। कितने हफ्तों बाद ये हँसी सुनी थी।

अमन की आवाज में एक सिसकी दबाते हुए अमन:) मेरी हँसी छीन कर... देखो कितने मजे से मुस्कुरा रही है। जैसे कभी कुछ हुआ ही ना हो... जैसे मैं कभी था ही नहीं।

जानवी - :)कौन अमन?

अमन आँसू छिपाते हुए -  अमन:) कोई नहीं... कोई भी नहीं...

तभी निशा के फोन की स्क्रीन जली। अनजान नंबर। निशा ने नाम देखा और उसके मुरझाए चेहरे पर अचानक एक अजीब सी चमक आ गई। वो हड़बड़ा कर उठी और सबसे दूर जाकर, होंठों को दांतों से दबा कर मुस्कुराते हुए बात करने लगी।

उस मुस्कान ने अमन को फोन के अंदर ही मार दिया।

अमन का हाथ काँपने लगा। जिस हाथ ने राइफल संभाल रखी थी, वो हाथ आज एक कॉल से काँप रहा था।

अमन टूटती हुई आवाज में - अमन:) जानवी... प्लीज... प्लीज पता करो... किससे बात कर रही है वो इतना खुश होकर? कौन है वो... जिसने मेरी जगह ले ली?

जानवी का दिल बैठ गया। एक लड़का जो देश के लिए लड़ता है, वो आज एक लड़की के लिए टूट रहा था।

जानवी निशा के पास गई -

जानवी - :)निशा... किसका फोन है जो इतने खुश हो कर मुस्कुरा कर बात कर रही है?

निशा ने पलट कर जानवी को देखा। उसकी आँखों में नफरत नहीं थी, बेबसी थी। ऐसी बेबसी जो सिर्फ वही समझ सकता है जिसने अपना प्यार खुद अपने हाथों से खोया हो।

निशा आँखें लाल करके - निशा:)तुमसे मतलब? तुम्हें क्या लेना देना? तुम अपने बॉयफ्रेंड पर ध्यान दो मुझ पर नहीं, समझी? मैं जो करूँ, जिससे बात करूँ... तुम्हें इससे क्या... चलो काव्या घर चलते हैं।

और वो घसीटते हुए काव्या को ले गई। एक बार भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। क्योंकि वो जानती थी, अगर पीछे देखा तो जो आँसू इतने दिनों से रोक रखे हैं, वो सबके सामने बह जाएंगे।

गार्डन खाली हो गया।

जानवी -:) निशा ने नहीं बताया वो किससे बात कर रही थी।

अमन ने एक लंबी सांस ली, ऐसी सांस जैसे सीने में कुछ चुभ रहा हो।

अमन - :)कोई बात नहीं... जाने दो। उसे भी तो पता चले कि उसने क्या ठुकराया है। एक दिन... एक दिन उसे जरूर एहसास होगा कि उसने एक फौजी का दिल तोड़ा है, जो उसके लिए दुनिया से लड़ सकता था। मुझे खो कर वो बहुत पछतायेगी... बहुत। चलो मैं फोन रखता हूँ, ड्यूटी पर जाना है... बाय।

फोन कट गया। अमन ने फोन को सीने से लगा लिया। बाहर तोपों की आवाज थी, पर उसके अंदर सन्नाटा था।

दूसरी तरफ सड़क पर -

काव्या - :)निशा तुम्हें तकलीफ नहीं होती?

निशा चुप रही।

काव्या -:) यहीं की जानवी ने तुमसे तुम्हारा प्यार तुमसे छीन लिया। तुम्हारा अमन...

निशा  के आंखों मैं आंसू था पर निशा पत्थर दिल  बन कर - निशा:) नहीं काव्या... किसी ने कुछ नहीं छीना। ये मेरी गलती की सजा है। मैंने ही उसे धक्का दिया था अपनी जिंदगी से। अब अगर वो किसी और का हो रहा है तो इसमें किसी की कोई गलती नहीं। ये सजा तो मुझे ही भुगतनी है ना। गलती तो मेरी है तो सजा भी मुझे मिलनी चाहिए।

काव्या - तुम्हें दर्द नहीं होता? मैं होती तो उन दोनों को साथ देख कर वहीं टूट कर बिखर जाती।

निशा ने आसमान की तरफ देखा, आँखों में आँसू थे पर वो गिरने से डर रहे थे।

निशा -:) दर्द...? काव्या दर्द क्या होता है पता है? जब तुम्हारा दिल हर पल किसी का नाम पुकारे और तुम्हें उसे जबरदस्ती चुप कराना पड़े उसे खुद से दूर जाने को कहे। दर्द तब होता है, जब तुम जिसे सबसे ज्यादा प्यार करो, उसे किसी और के साथ खुश देखो और फिर भी उसके लिए दुआ करो।  तब बहुत दर्द होता है काव्या... इतना कि रात को तकिया भी मेरे आँसुओं से भीग जाता है, पर सुबह मैं फिर से मुस्कुरा लेती हूँ। ताकी किसी को ये ना पता चले कि मैं दर्द मैं हु,मुझे तो दर्द के साथ खुश रहना है,अब तो आदत सी बन गई तो दर्द कैसा? काव्या हर रिश्ता समय के साथ बदल जाता है। कभी ना कभी ठोकर लग ही जाती है और सबसे अच्छा रिश्ता, सबसे सच्चा प्यार बिखर जाता है। कांच की तरह... जो फिर जुड़ता ही नहीं।

काव्या चुप हो गई।
काव्या:) तुम क्या बोल रही हो मुझे समझ नहीं आया।
निशा:) पता नहीं मैं कुछ भी बोल देती हु लॉजिक ही नहीं है किसी बात का  चलो घर आ गया तुम भी आराम से जाओ। बाय।      दोनों अपने घर पहुँच गईं।

रात को निशा ने अपने कमरे का दरवाजा बंद किया, दीवार से पीठ टिका कर नीचे बैठ गई और अपने घुटनों में मुंह छिपा कर आखिरकार वो रोई... खुल कर रोई...

निशा सिसकते हुए, अकेले में  - निशा:) अच्छा है... बहुत अच्छा है कि तुम दोनों बात करने लगे। तू अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए है अमन... इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है मेरे लिए। आप खुश हो ना... बस। मेरी सजा तो यही है कि मैं आपको खुश देखूं, पर वो खुशी मैं कभी ना बन सकूँ। मेरा प्यार अधूरा ही सही... पर सच्चा था... बहुत सच्चा था।

और उस रात, एक फौजी बॉर्डर पर जाग रहा था और एक लड़की अपने कमरे में, दोनों अलग-अलग जगह... पर एक ही दर्द में रो रहे थे।बैरक में सब सो चुके थे, और  एक कोने में अमन की आँखों में नींद नहीं थी। उसके हाथ में उसका पुराना फोन था, जिसमें आज भी निशा की एक ही फोटो थी - कॉलेज फंक्शन वाली, जिसमें निशा ने नीला सूट पहना था और खुले बालों में हँस रही थी।

अमन ने धीरे से फोटो को छुआ।

अमन खुद से कहता है -  अमन:)देख रही है निशा... तेरा अमन आज फौजी हो कर भी रो रहा है। सब कहते हैं मैं बहुत बहादुर हूँ, दुश्मन के सामने सीना तान कर खड़ा रहता हूँ। पर किसी को क्या पता कि जो लड़का बॉर्डर पर गोलियों से नहीं डरता, वो  तुझे खोने से डरता है।

उसने फोन को उल्टा रख दिया। आँखों से एक आँसू टपका और सीधा वर्दी पर गिरा।


उधर...

निशा अभी भी उसी दीवार से लगी बैठी थी। उसके सामने उसकी डायरी खुली पड़ी थी, जिसका हर पन्ना सिर्फ अमन के नाम था।

उसने काँपते हाथों से लिखा -
• "आज फिर आपकी आवाज सुनी, किसी और के फोन से।  आप जानते हो? जब जानवी आपसे  बात करती है तो मैं हँसने का नाटक कर रही थी आप दोनों को साथ देखकर मुझे कितनी तकलीफ होती है कितना दर्द  होता, इस लिए मुझे हंसने का नाटक करना पड़ा।ताकि किसी को पता ना चले कि मेरी साँसे वहीं अटक जाती हैं जहां आप हो।"  • "लोग कहते हैं जानवी ने आपको मुझसे छीन लिया। कोई किसी से कुछ नहीं छीनता । मैंने खुद  आपको अपनी जिंदगी से धकेला था। 
आखिरी लाइन लिखते-लिखते उसकी कलम रुक गई, स्याही आँसुओं में बह गई।

निशा डायरी को सीने से लगाते हुए - निशा:)आप जानते है अमन, वो कॉल किसी और लड़के का नहीं था... वो मेरी बड़ी बहन  की कॉल थीं। मैं खुश नहीं थी, मैं तो बस आंसू रोकने के लिए मुस्कुरा रही थी। पर आपको कौन बताए? आप  तो समझ बैठें कि मैं आगे बढ़ गई।मैने फिर एक और गलत फ़मी बड़ा दी

"काश मैं आपको बता पाती कि मैं आज भी रोज आपकी फोटो को सीने से लगा कर  सोती हूँ। काश मैं आपको बता पाती कि मैंने आपको  ठुकराया नहीं था, खुद को सजा दी थी।"

वो डायरी को बंद कर के खिड़की से बाहर देखने लगी। चाँद पूरा था, पर उसकी जिंदगी की तरह आधा नहीं था... 

दोनों को नहीं पता था कि...

एक ही चाँद को देख कर, दो लोग, दो अलग शहरों में, एक ही दुआ मांग रहे थे -

"बस एक बार... एक बार फिर से मिलवा दे, चाहे आखिरी बार ही सही।"

और इस दुआ में इतना दर्द था कि अगर भगवान भी सुन लेता तो उसकी भी आँखें भर आतीं।...... रात के ,अगली सुबह वही दिन वही दर्द वही बात से शुरू होती है। निशा रोज की तरह कॉलेज जाती है,जानवी रोज की तरह अमन से बात करती है और और रोज की तरह चुप चाप घर आती हैं खाना खाती हैं और अपने आप को रूम पर लॉक कर देती है। लेकिन आज उसने सोच लिया था कि अब बस अब और अपने आपको दर्द नहीं देंगी,अभी से नई शुरुआत करनी पड़ेगी ये कह कर वो फोन देखने लगी ,फोन पर सबका व्हाट्सएप स्टोरी देख ने लगी

। काव्या का -  फनी  स्टेटस, जानवी की रोमांटिक  स्टेटस  और कुछ दोस्त के स्टेटस देखने लगी".

और फिर अचानक...

अमन का नाम।

दिल एक सेकंड के लिए धड़कना भूल गया।

उसने क्लिक किया।

वर्दी में अमन, वही आँखें जिसे देख कर वो कभी अपना पूरा भविष्य देख लेती थी। और साथ मैं जानवी की फोटो attach की थी  और ऊपर लिखा था -

"thank you Jaanvi mere life me aane ke liye... miss u so much 😘"

बस। इतना ही काफी था।

फोन हाथ में ही था, पर निशा को लगा जैसे किसी ने जमीन खींच ली हो पैरों के नीचे से।

आँखों से आँसू नहीं गिरे, गले में आ कर अटक गए।

वो मुस्कुराई... ऐसी मुस्कान जो रोने से भी ज्यादा दर्दनाक होती है।

निशा:)"तो अब miss भी उसे ही करता है... thank you भी उसे ही। मेरे लिए तो कभी दो शब्द भी नहीं लिखे अमन। कभी एक स्टोरी पर मेरा नाम तक नहीं। क्या इतनी पराई हो गई मैं? क्या मेरा प्यार इतना छोटा था कि उसकी एक स्टोरी में भी जगह नहीं मिली?"जब हम साथ थे एक बार मेरी स्टोरी अपने फोन पर भी नहीं लगाया फिर जानवी की कियू,

उसने फोन को उल्टा कर दिया, पर वो लाइन आँखों के सामने से नहीं गई।

और फिर उसी टूटे हुए दिल ने एक गलत फैसला लिया। दर्द में अक्सर फैसले गलत ही होते हैं।

उसने गूगल खोला, हाथ काँप रहे थे।

"fauji ki  photo" - सर्च किया।

पहली फोटो जो आई, बिना देखे सेव कर ली। एक अनजान फौजी, जिसका चेहरा भी साफ नहीं था।

उसने अपनी स्टोरी पर लगा दी -

"my real hero 😍"

उसे लगा, शायद अब अमन को भी वही दर्द हो जो उसे हो रहा है। शायद अब उसे भी पता चले कि किसी और के नाम का स्टेटस देख कर कैसा लगता है।

पाँच मिनट भी नहीं बीते थे।

उधर बैरक में...

अमन की आँखें लाल थीं। नींद तो कई दिनों से रूठी हुई थी। उसने जैसे ही निशा का स्टेटस देखा, वो बिस्तर से उठ कर बैठ गया।

"Real hero?" उसकी आवाज टूट गई। अमन:)"वाह निशा वाह... इतनी जल्दी? इतनी जल्दी किसी और को hero बना लिया? वो कॉल... वो मुस्कान... सब सच था क्या?"

उसे जलन नहीं हो रही थी, उसे लग रहा था जैसे किसी ने उसकी वर्दी नहीं, उसका दिल चीर दिया हो।

फिर उसने ध्यान से फोटो देखी। दिल और जोर से धड़का।

ये फोटो... ये तो आकाश की है!

उसने तुरंत स्क्रीनशॉट लिया और आकाश को भेजा, उंगलियां गुस्से से नहीं, दर्द से काँप रही थीं।

अमन - "आकाश!!! ये लड़की कौन है? इसका नाम निशा है। इसने तेरी फोटो अपनी स्टोरी पर hero बोल कर लगाई है। तू जानता है इसे? सच-सच बता, कोई चक्कर है क्या तेरा?"

आकाश हड़बड़ा गया आकाश :)"अबे पागल है क्या? ये मेरी पुरानी फोटो है, गूगल पर मैने डाली थी पिछले  साल ।पता नहीं। मैं नहीं जानता भाई इस लड़की को, कसम से! कौन है ये?"

अमन - "पूछ उससे! अभी पूछ! क्यों लगाई है तेरी फोटो? मैं ID भेज रहा हूँ। और सुन... जो भी बोले, मुझे एक-एक शब्द बताना। काटना मत  कुछ भी

आकाश समझ गया, ये गुस्सा नहीं है, ये टूटा हुआ दिल बोल रहा है।

आकाश ने निशा को Instagram पर मैसेज किया -

आकाश - "Miss, please... urgent बात करनी है, reply दीजिए ना।"

निशा ने देखा - अनजान लड़का।

निशा - "कौन हो आप? मुझसे क्या बात करनी है?"

आकाश ने अपनी फोटो भेजी - आकाश:)"आप इसे जानती हो? आपने इसकी फोटो WhatsApp story पर क्यों लगाई है, जान सकता हूँ?"

निशा डर गई 

निशा - :) "हाँ... मैंने लगाई है। मुझे अच्छी लगी तो लगा दी!"

आकाश -:)  "अच्छा... वो मेरा दोस्त है अमन, उसी ने मुझे। कहा,साले देख, किसी लड़की ने तेरी फोटो लगा रखी है, व्हाट्सएप पर जानता है क्या तू?' बहुत गुस्से में था। बहुत परेशान है वो आजकल।"
इसलिए पूछना पड़ा, sorry।"


निशा -:) "ok sir I am sorry... मुझे किसी की फोटो बिना permission के नहीं लगानी चाहिए थी। गलती हो गई।"

आकाश -:) "कोई बात नहीं मैडम... आपको अच्छी लगी तो लगा दी। होता है, it's ok।" मैं यहां आपको कुछ सुनाने नहीं आया हु बस पूछ रहा हु तो आप मुझसे डरीएगा नहीं ओके maam 

निशा - "ok sir  bye..."

चैट खत्म।

निशा खुद पर हँसते हुए,  निशा :- )वाह निशा वाह... इतनी बड़ी दुनिया में तुझे मिला भी तो अमन का ही दोस्त। करोड़ों फोटो थीं गूगल पर, पर तेरी किस्मत ने उसी की फोटो उठाई जो तेरे दिल के सबसे करीब है। अब अमन क्या सोचेगा? यही कि मैं किसी भी अनजान लड़के की फोटो स्टेटस पर लगा देती हूँ? कितनी cheap लगूंगी मैं उसकी नजरों में... हद है निशा, तू जब भी अमन को भूलने की कोशिश करती है, किस्मत तुझे उसी के और करीब कियू ले आती है। अमन का नाम सुनकर मुझे रोना कियू आ रहा है वो खुश है तेरे बिना तू भी खुश रह निशा अपने आपको संभालो जाने दे उसे भूल जा सब कुछ......

और उधर अमन...

बैरक की ठंडी दीवार से पीठ टिकाए, आकाश के मैसेज का इंतजार कर रहा था, उस फोटो को बार-बार देख रहा था, जो उसकी नहीं थी, पर उस लड़की ने लगाई थी जो कभी सिर्फ उसकी थी।

दोनों ने एक-दूसरे को दुख पहुँचाने के लिए स्टोरी लगाई थी और दर्द का एहसास भी दोनों को उतना ही हुआ।

और दोनों ही उसी रात, उसी दर्द में, अंदर तक टूट चुके थे। दोनों को लगता था कि वो अब अपने लाइफ मैं आगे बढ़  गए है।उधर आकाश ने अमन को कॉल किया।

आकाश - भाई वो लड़की कह रही थी फोटो अच्छी लगी तो लगा दी, और कुछ नहीं।

ये सुनते ही अमन के चेहरे पर जो उदासी थी, वो एक पल के लिए खुशी बन गई। जैसे मरते हुए को पानी मिल गया हो।

अमन (हल्की सी हंसी के साथ) - अच्छा... तो निशा मुझे जलाना चाहती थी 🤦‍♂️ और मैं पागल कुछ और ही समझ रहा था। Thanks यार दोस्त।

आकाश - भाई इस लड़की से सेटिंग करा दे मेरी, बड़ी क्यूट है।

अमन का चेहरा फिर सख्त हो गया, आवाज में दर्द और हक दोनों आ गए।

अमन - चुप साले... भाभी है तेरी। ये वही लड़की है जिसे मैं आज भी अपनी हर सांस से ज्यादा प्यार करता हूँ।

आकाश - अच्छा भाभी है? बड़ी sweet है, अच्छी लड़की है कहाँ से मिली तुझे?

अमन (आँखें कहीं दूर देखते हुए) - बस... मिल गई थी एक बार किस्मत से... और फिर किस्मत ने ही छीन ली। चल ठीक है, ड्यूटी लगी है मेरी, जाना है।

आकाश - ठीक है भाई bye।

3 महीने बीत गए।
3 महीने... . जिसमें अमन ने खुद को ड्यूटी में इतना घिस दिया कि दर्द महसूस ही ना हो, और निशा ने खुद को इतना अकेला कर लिया कि  याद ही ना आए।

फिर एक दिन अमन का छोटा भाई आदित्य, अमन के फोन से जानवी की WhatsApp प्रोफाइल देख लेता है। और उसमें जानवी के साथ खड़ी निशा को देख कर उसका दिल फिसल जाता है।

आदित्य - भाई ये जानवी भाभी के साथ ये लड़की कौन है? कितनी प्यारी है... मेरी सेटिंग करवा दो ना भाई प्लीज।

अमन का दिल एक बार फिर टूटा। वही लड़की... फिर से।

अमन - कौन निशा? भाई ये लड़की नहीं मानेगी तू रहने दे बेटा। ये तेरे बस की नहीं है।

आदित्य - भाई बोल कर देख ले एक बार, कोशिश करने में क्या जाता है।

अमन - ठीक है... मैं बात करता हूँ। (दिल में - एक बार फिर खुद अपने प्यार को किसी और के हाथों में सौंपने जा रहा हूँ... वाह अमन)

फिर अमन ने  निशा को कॉल किया। वही नंबर जिसे उसने कभी delete ही नहीं किया था।

निशा - हेलो...

अमन की सांसें तेज हो गईं, पर आवाज सख्त रखी।

अमन - सारी... कॉल के लिए। मेरे छोटे भाई को तुम बहुत पसंद आई हो। गर्लफ्रेंड बनाना चाहता है तुमको।

निशा को लगा जैसे किसी ने फिर से उसी जख्म पर हाथ रख दिया हो।

निशा - मुझे किसी की gf बनने में कोई इंटरेस्ट नहीं है।

अमन दर्द को गुस्से में छुपाते हुए... अमन - क्यों? जब मैंने gf बना रखी है तो तुम क्यों नहीं bf बना लेती? तुम्हें क्या फर्क पड़ता है?

निशा - क्योंकि मुझे bf की जरूरत नहीं है।

अमन - जरूरत नहीं है या तुम किसी और को बहुत चाहती हो... तुम मुझे बहुत चाहती हो इसलिए नहीं बनाना चाहती ना किसी को bf? बोलो... आज भी करती हो ना प्यार मुझसे?

निशा की आँखें भर आईं, पर उसने खुद को रोक लिया।

निशा - मैं अब आपसे प्यार नहीं करती। मर चुका है वो प्यार मेरे लिए।

अमन का दिल चीर दिया इस एक लाइन ने।

अमन - तो प्रूफ करो... मेरे भाई का प्यार अपना के ये प्रूफ करो कि अब तुम मुझसे प्यार नहीं करती हो। कर सकती हो तो करो।

निशा (रोते हुए दिल से, पर टूटती हुई आवाज में) - आप यही चाहते हो तो ठीक है। मैं अपनाऊँगी आपके भाई का प्यार। इससे आपको यकीन हो जाएगा ना कि अब मैं आपसे प्यार नहीं करती... तो यही सही। आप खुश रहना अमन... यही तो चाहते हो ना आप तो ऐसा ही होगा।

अमन - हाँ...

निशा - ठीक है बाय...

फोन कटा। और दोनों तरफ सिर्फ सन्नाटा और आँसू बचे।

निशा फर्श पर बैठ गई, फोन को सीने से लगा कर चीख पड़ी।

निशा - ये लड़का मुझसे चाहता क्या है? क्यों बार-बार आ जाता है मेरी जिंदगी में? क्यों हर बार मेरे ठीक होने से पहले मुझे फिर तोड़ जाता है? कितना मुश्किल होता है भूलना... ओह गॉड मैं पागल हो जाऊँगी... मैं पागल हो जाऊँगी...

फिर आदित्य निशा से बात करने लगा और दोनों की लव स्टोरी स्टार्ट हो गई। पर ये लव स्टोरी ज्यादा दिन तक नहीं चली। बहुत जल्दी ब्रेकअप हो गया क्योंकि अमन का भाई दो लड़कियों को घुमा रहा था अपने प्यार में।

जब निशा को पता चला तो निशा ने ब्रेकअप कर लिया।
और इस बार निशा को कोई फर्क नहीं पड़ा। क्योंकि जिसका दिल पहले ही एक फौजी के नाम हो चुका हो, जो रोज बॉर्डर पर मौत से खेलता हो... वो दिल अब किसी और के छोटे से धोखे से कैसे टूटता?



उसका दिल तो उसी दिन टूट गया था, जिस दिन अमन और जानवी साथ हो गए। आदित्य ने अमन को बता दिया था भाई निशा ने मुझसे ब्रेकअप कर ली,अमन ने निशा को कॉल किया,
निशा का फोन फिर से वाइब्रेट हुआ। स्क्रीन पर नाम - Aman Calling...

ये आज की130 वी कॉल थी। सुबह से आदित्या कॉल कर के परेशान कर रहा रहा तो निशा इरिटेट हो गई थी।

उसने इरिटेट होकर फोन उठाया,  अमन:)"हेलो, निशा?"

"अमन, फिर से?" निशा लगभग चीख पड़ी,  निशा;)"क्यों बार-बार कॉल कर रहे हो? क्या चाहते हो आप लोग आखिर?"

दूसरी तरफ से अमन की आवाज आई, गुस्से से भरी हुई।

अमन:)"मैं क्या चाहता हूँ? Wow! मेरा भाई पिछले दो दिन से कमरे से बाहर नहीं निकला और तुम पूछ रही हो मैं क्या चाहता हूँ? आखिर तोड़ ही दिया ना तुमने उसका दिल?"

निशा की आँखें भर आईं। वो थक चुकी थी सफाई देते-देते।

निशा:)"आपको कोई हक नहीं है मुझे इस तरह जज करने का, ओके? प्लीज मुझे कॉल करना बंद करो। मैं सच में बहुत थक गई हूँ, बहुत परेशान हूँ। मुझसे अब और नहीं होता, मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो, प्लीज।"

अमन:)"Oh just shut up! Just shut up, Nisha!"  अमन दहाड़ा।

अमन:) "समझती क्या हो तुम खुद को? कोई ब्यूटी क्वीन हो? दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हो? इतना घमंड किस बात का है तुम्हें?"

निशा:) "अमन, मेरी बात सुनो..."

अमन:) "नहीं, तुम सुनो! तुम्हें कोई हक नहीं है किसी की फीलिंग्स के साथ खेलने का। पसंद नहीं था तो उसी वक्त मना कर देती। हाँ बोलकर, उम्मीदें देकर, फिर दिल तोड़ने का क्या मतलब है? ये गेम खेलना बंद करो।"

अब निशा का सब्र भी टूट गया। उसके आंसू गुस्से में बदल गए।

निशा:) "GAME? मैं गेम खेल रही हूँ? आपका लेक्चर सुनने में मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं है, समझे आप? और किस मुंह से मुझे लेक्चर दे रहे हो? उसे लेकर आप ही आए थे मेरे पास!"

उसकी आवाज कांप रही थी।
"आप ही ने कहा था - 'निशा, मेरा भाई बहुत अच्छा है, उसे बॉयफ्रेंड बना ले'। मुझे तो आपका भाई पसंद भी नहीं था लेकिन आपने मजबूर किया मुझे  इस लिए मैने आदित्या को bf बनाने के लिए हां कहा ।

एक पल के लिए सन्नाटा।

फिर अमन का जवाब और भी जहरीला था।

अमन:)"तो? मैंने बॉयफ्रेंड बनाने को कहा तो तुम दिल तोड़ दोगी उसका? आज तक तो तुमने मेरी एक बात नहीं मानी, तो ये बात कैसे मान ली? बोलो?"

निशा कुछ नहीं बोली।

अमन की आवाज अब धमकी बन गई, बिल्कुल धीमी और ठंडी।

अमन:)"याद रखना, निशा। जो तुम कर रही हो ना, इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी तुम्हें। बहुत भारी।"प्यार के लिए तुम लोगो को तड़पा रही हो ना उसी प्यार के लिए तुम भी कभी तड़पोगी,फिर भी तुम्हारे नसीब मैं प्यार नहीं आएगा सिवाय दर्द के याद रखना मेरी बात। 

निशा ने फोन को कसकर पकड़ा, और धीरे से, पर एक-एक शब्द पर जोर देकर कहा -

निशा:)"जब सच का पता ना हो ना, अमन... तो अपनी ये घटिया सोच अपने पास ही रखा करो। आपको कुछ नहीं पता।"



कॉल कट।

अमन वहीं फ्रीज हो गया।

कौन सा सच?
ऐसा कौन सा सच था जो निशा जानती थी और मैं नहीं?..... आगे की कहानी सुने के लिए मुझे फॉलो करे और कमेंट मैं जरूर बताए स्टोरी कैसी लगी आपको plesse मेरे मेहनत को स्पोर्ट करे🙏