क्या सच में हमारी परछाई हमें सुन सकती है? अगर ऐसा होता, तो क्या दुनिया के सारे लोग अपने आप में ही व्यस्त रहते? और एक वक्त आने पर वे भी निराश हो जाते, क्योंकि जिस परछाई से वे बात कर रहे होते हैं, वह रात में गायब हो जाती है। असल में लोगों को उसकी सबसे ज्यादा जरूरत रात को ही होती है, क्योंकि दिनभर काम करके थक जाने के बाद अगर कोई साथ में बैठकर बात करने वाला मिल जाए, तो उस इंसान की आधी थकान कम हो जाएगी।
लेकिन ये सब कहने और सुनने की बातें हैं, क्योंकि ऐसा हकीकत में नहीं है। और दुनिया के लोग अगर सच में यह चाहते हैं कि वे अपनी परछाई से बात करें, तो पहले उन्हें अपने आप से बात करनी होगी; क्योंकि जो अपने आप से बात नहीं कर सकता, वह अपनी परछाई से कैसे बात करेगा?
क्या यह जरूरी नहीं कि दूसरों के चक्कर में हम अपना वक्त और अपनी खुशी, दोनों जाया (बर्बाद) कर रहे हैं?
मेरा यह कहना है कि तुम अपनी परछाई से बात करने से पहले अपने आप से बात करना सीखो। यह कोई पागलपन नहीं है, क्योंकि जब कोई तुम्हारी नहीं सुनता, तो तुम खुद अपने आप की सुनते हो और समझते हो कि तुम्हें किसी की जरूरत नहीं है।
इस दुनिया में हर कोई अकेला है। किसी गली में १०, तो किसी शहर में १००, या किसी देश में हजारों-लाखों लोग अकेले हैं और वे ज्यादातर यही तरीका अपनाते हैं ताकि जिंदगी में खुश रहा जा सके। इस दुनिया में कोई किसी का नहीं है, सब अपने स्वार्थ के लिए लोगों से अपनापन जताते हैं ताकि उनका काम निकल सके। मैं यह नहीं कहता कि दुनिया में अच्छे लोग नहीं हैं, मैं यह कहता हूँ कि दुनिया में अच्छी सोच की कमी है, जिसकी सच में जरूरत है।
आज की इस दुनिया में लोगों की सोच इतनी गिर चुकी है कि वे किसी का भला नहीं चाहते। यह कोई द्वापरयुग नहीं है, यह कलयुग है। इस कलयुग में आगे क्या होने वाला है, किसी को कुछ पता नहीं है। लेकिन क्या सच में इस कलयुग में आने वाला समय इतना खराब हो जाएगा? किसे जीना चाहिए, किसे मरना चाहिए, कौन किसका है और कौन किसका नहीं—लेकिन यह जरूर कह सकते हैं कि कलयुग के आने वाले समय को कोई नहीं बदल पाएगा।
कलयुग का समय अमर है, और वह इसलिए क्योंकि कलयुग के समय को अमर करने वाला और कोई नहीं, बल्कि खुद इंसान है। इंसान अनजाने में नहीं, बल्कि जानबूझकर पाप करता है। ना यह इंसान जानता है कि पाप करने का परिणाम क्या होगा, और ना ही (पाप) सहने वाले को पता है कि पाप का परिणाम क्या होगा।
मनुष्य अपने ही वर्तमान के समय में पाप करके अपने भविष्य की भविष्यवाणी करता है। अगर तुम अपने वर्तमान को नहीं सुधार सकते, तो तुम कभी अपने भविष्य को नहीं बदल सकते; क्योंकि जो समय तुम्हें मिला है, अगर तुम उसका ही सही इस्तेमाल नहीं कर पाए, तो भविष्य क्या ही बदल दोगे?
भविष्य तो श्री कृष्ण को भी पता था, क्या वो बदल पाए? नहीं ना! तो तुम क्या चीज़ हो जो भविष्य को बदलने चले हो?