मितिक्षा एक बहुत ही अमीर परिवार की इकलौती बेटी थी। बचपन से उसे हर चीज़ बिना मेहनत के मिल जाती थी। इसी वजह से वह बेहद खर्चीली, घमंडी, चालाक और बदतमीज़ बन गई थी। उसे लगता था कि दुनिया उसकी मर्ज़ी से चलती है।
कॉलेज के दिनों में उसे एक लड़के से प्यार हो गया। वह लड़का एक छोटी-सी दुकान पर नौकरी करता था। लड़का ईमानदार और मेहनती था, लेकिन आर्थिक रूप से साधारण परिवार से था।
जब मितिक्षा के परिवार को इस रिश्ते के बारे में पता चला, तो घर में तूफ़ान आ गया।
"हमारी बेटी उस लड़के से शादी नहीं करेगी। उसका स्टेटस हमारे बराबर नहीं है।" उसके पिता ने सख्त लहजे में कहा।
मितिक्षा ने अपने परिवार को बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। कुछ ही दिनों बाद उसके लिए एक बड़े कारोबारी परिवार का रिश्ता तय कर दिया गया।
मितिक्षा ने शादी से इंकार किया, रोई, चिल्लाई, लेकिन उसके पिता ने साफ़ कह दिया,
"अगर तुमने यह शादी नहीं की, तो फिर हमारा मरा हुआ मुँह देखोगी।"
पिता की बात सुनकर मितिक्षा टूट गई। परिवार के दबाव में आकर उसने शादी के लिए हाँ कर दी। शादी के बाद आर्यन और उसके परिवार ने मितिक्षा का दिल से स्वागत किया। उसकी सास उसे बेटी की तरह मानती थीं और आर्यन भी उसकी हर छोटी-बड़ी ज़रूरत का ध्यान रखता था। पूरे परिवार ने कोशिश की कि मितिक्षा को नए घर में कभी परायापन महसूस न हो।
लेकिन मितिक्षा का मन वहाँ बिल्कुल नहीं लगता था। उसका दिल अब भी अपने पुराने प्यार में ही अटका हुआ था। वह हर पल यही सोचती रहती कि किसी तरह इस शादी से छुटकारा मिल जाए।
शादी के कुछ दिनों बाद पहली बार मितिक्षा अपने मायके आई। उसे उम्मीद थी कि शायद उसके माता-पिता अब उसकी बात समझेंगे और उसे इस रिश्ते से बाहर निकालने में मदद करेंगे।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
उसके पिता ने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और सख्त लहजे में कहा,
"ध्यान से सुनो... तुम्हारे अतीत के बारे में आर्यन या उसके परिवार को कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए। अगर उन्हें ज़रा-सी भी भनक लगी, तो उसके परिणाम बहुत बुरे होंगे।"
मितिक्षा चुपचाप उनकी बातें सुनती रही।
फिर उसके पिता ने एक और चेतावनी दी,
"और एक बात... दोबारा इस घर में वापस आने के बारे में सोचना भी मत। अब वही तुम्हारा घर है। अगर तुमने हमारी बात नहीं मानी या अपने पुराने प्रेमी से मिलने की कोशिश की, तो याद रखना... उसे ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे।"
अपने पिता की यह बात सुनकर मितिक्षा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह अपने प्रेमी की जान को खतरे में नहीं डालना चाहती थी। आँखों में आँसू लिए उसने बिना कुछ कहे सिर झुका लिया।
अगले ही दिन वह भारी मन से अपने ससुराल लौट गई।
उसके चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन उसके भीतर डर, गुस्सा और बेबसी का तूफ़ान चल रहा था। उसी पल उसने ठान लिया कि अगर वह अपनी मर्ज़ी से इस शादी से बाहर नहीं निकल सकती, तो वह ऐसा रास्ता चुनेगी जिससे यह रिश्ता खुद ही टूट जाए।उसने ठान लिया कि वह किसी भी तरह इस शादी को खत्म कर देगी।
एक दिन उसने नींद की गोलियाँ खा लीं। समय रहते परिवार वालों ने उसे अस्पताल पहुँचाया और उसकी जान बच गई।
इसके बाद भी उसका गुस्सा कम नहीं हुआ।
कुछ दिनों बाद उसने खुद ही अपने शरीर पर चोट के निशान बना लिए। फिर रोते हुए घर से बाहर निकलकर पड़ोसियों के सामने चिल्लाने लगी,
"मुझे बचाइए... मेरे पति और मेरी सास मुझे मारते हैं। दहेज के लिए परेशान करते हैं। मुझे जला कर मार देने की धमकी देते हैं।"
पड़ोसी यह सुनकर घबरा गए। उन्होंने तुरंत पुलिस को फोन कर दिया।
पुलिस मौके पर पहुँची और मितिक्षा से पूछताछ की। उसने रोते हुए वही आरोप दोहराए कि उसके पति और सास दहेज की माँग करते हैं और उसके साथ मारपीट करते हैं।
पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज कर ली और आगे की जाँच शुरू कर दी।
लेकिन किसी को भी यह अंदाज़ा नहीं था कि सच्चाई कुछ और ही थी...
क्या मितिक्षा अपने झूठ में सफल हो जाएगी?
या फिर सच सामने आकर कई ज़िंदगियाँ बदल देगा?