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चारू पर्दे के पीछे से पाले देख रही थी। उसकी भंवे सिकुडी हुई थी। होंठ भींच हुए थे। और अपलक सामने देख रही थी।
स्टेज पर शशांक और नव्या आमने सामने खडे थे। नव्या के चेहरे के भाव बता रहे थे वो अभी रो पडेगी। वही शशांक के भाव ऐसे थे मानो वो अपना दिल पत्थर का कर चुका हो। नव्या ने एक्ट करना शुरू किया।
उसने एक कदम आगे बढाया , " अभी..अभी तो हमारी सगाई हुई है और तुम जा रहे हो। "
वो लरज्ती आवाज मे बोली।
शशांक ने आंखे बंद की और भरसक खुद शांत करता हुआ बोला ," काम है, बुलाया है । जाना पडेगा । समझो तुम!"
नव्या ने ना मे सर हिला दिया। शशांक आगे बडा और उसके हाथो को अपने हाथ मे ले लिया।
नव्या रोते हुए बोली , " क्या मै कुछ मायने नही रखती ? क्यो हर बार मेरे हिस्से ये इंतजार ही आता है। क्यो तुम नही रूक सकते ? देखो मै अब और इंतजार नही कर सकती। मुझसे सहन नही.होता । "
" तुमने एक आर्मी ऑफिसर को चुना है। इंतजार को स्वंय चुना है। मै जाना नही चाहता । पर क्या मै बस तुम्हारा हूं ? मेरा इस मातृभूमि के प्रति भी एक कर्तव्य है। अगर हर कोई ऐसे कमजोर पड गया तो इस भारत माता की रक्षा कौन करेगा। यू हैव टू वेट कॉज योर वेटिंग इज द प्रोफेसर दैट कंट्री इज नोट अबडंड! " ,शशांक उसे समझाते हुए बोला।
रोते हुए नव्या ने हां मे सर हिला दिया। शशांक ने पास मे रखा बैग उठाया और चला गया । नव्या अपने दुपट्टे को सीने से लगाए उसे स्टेज से गायब होते देखती रही ।
तभी चारू ने आगे का सीन नरेट करना शुरू किया , " शी वेटिड एंड वेटिड लाइक आ मेड वुमन । हर उस मन्नत का तरह जो ईश्वर तक ना पहुंची। हर उस आस की तरह जो अधुरी रह गई। किसी दिवानी की तरह प्रित कर जोगन हो गई। "
जैसे ही चकरू चुप हुई गाना शुरू हो गया। नव्या ने नाचना शुरू कर दिया।
नव्या आगे बडी और दो चक्कर लेकर अपनी जगह पर आ गई। उसके भाव किसी जोगन के थे । हर ताल पर , शब्द पर वो ऐसे थिरक रही थी मानो अपनी रग रग मे अपने प्रियतम को महसूस कर पा रही हो।
प्रीत की लत मोहे ऐसी लागी
हो गई मैं मतवारी
बल-बल जाऊँ अपने पिया को
मैं जाऊँ वारी-वारी
उसने अपने हाथ खुद से दूर ले जाकर लहराए । फिर खुद की कनपटी के पास नजाकत से हाथो को घुमाया फिर दूर ले गई।
मोहे सुध-बुध ना रही तन-मन की
उसने सामने हाथ घुमाए मानो ऑडियंस को देख बथानरही हो कि उन्हे पता है की वो प्रिय से कितनी प्रित लगा बैठी है।
ये तो जाने दुनिया सारी
बेबस और लाचार फिरूँ मैं
हारी मैं, दिल हारी, हारी मैं, दिल हारी
उसने धीरे से चक्कर बांधने शुरू करे । आंखे बंद , हाथ साने पर मानो बता रही हो वो लाचार है..अपनी ही भावनाओं के हाथो।
तूने क्या कर डाला? मर गई मैं, मिट गई मैं
हो जी, हाँ-हाँ जी, हो गई मैं
तेरी दीवानी, दीवानी, तेरी दीवानी, दीवानी
तूने क्या कर डाला? मर गई मैं, मिट गई मैं
हो जी, हाँ-हाँ जी, हो गई मैं
तेरी दीवानी, दीवानी, तेरी दीवानी, दीवानी
उसने अब पूरे मंच को कवर करते हुए चक्कर बांधने शुरू कर दिए।
इश्क़ जुनूँ जब हद से बढ़ जाए
इश्क़ जुनूँ जब हद से बढ़ जाए
हँसते-हँसते आशिक़ सूली चढ़ जाए
इश्क़ का जादू सर चढ़कर बोले
इश्क़ का जादू सर चढ़कर बोले
खूब लगा लो पहरे, रस्ते रब खोले
वो घूमते हुए स्टेज के बीच मे आई। हाथो को सामने ले जाकर उंगली सी इशारा करती मानो दर्शा रही.हो कि जब प्रेम आत्मा मे रच बस जाता है। तो मृत्यु उपहार लगती है। नव्या ने अपने आस पास अपनी बांहो लपेट ली मानो कह रही हो..चाहे जितना बंधन मे बांध लो...प्रेम का सर्मथन स्वंय इश्वर करते है।
यही इश्क़ दी मर्ज़ी हैं, यही रब दी मर्ज़ी हैं
यही इश्क़ दी मर्ज़ी हैं, यही रब दी मर्ज़ी हैं
तेरे बिन जीना कैसा, हाँ, ख़ुदग़र्ज़ी है
वो एक धीमे से घुमी , हाथो को हवा मे कर क्धो को एक बार पीछे ले जाते फिर दूसरे कंधे को। साथ ही धीरे से घूमती ।
तूने क्या कर डाला? मर गई मैं, मिट गई मैं
हो जी, हाँ-हाँ जी, हो गई मैं
तेरी दीवानी, दीवानी, तेरी दीवानी, दीवानी
नव्या ने अपने सीने पर हाथ रखे और पुरी तत्परता से पीछे सामने की तरफ झुक गई।.
ए मैं रंग-रंगीली दीवानी
ए मैं रंग-रंगीली दीवानी, ए मैं अलबेली, मैं मस्तानी
गाऊँ-बजाऊँ, सब को रिझाऊँ
ए मैं दीन-धरम से बेगानी, ए मैं दीवानी, मैं दीवानी
फिर आसमान की तरफ ऐसे देखी मानो वहा उहका प्रियतम खडा हो । उसने पैरो को आधे चक्कर मे घुमाया और खुद कुद कर घूम गई।
तेरे नाम से जी लूँ, तेरे नाम से मर जाऊँ
तेरे नाम से जी लूँ, तेरे नाम से मर जाऊँ
तेरी जान के सदक़े में कुछ ऐसा कर जाऊँ
इसी के साथ उसने लगातार पुरे स्टेज को घूमते हुए चक्कर बांधने शुरू कर दिए।
तूने क्या कर डाला? मर गई मैं, मिट गई मैं
हो जी, हाँ-हाँ जी, हो गई मैं
तेरी दीवानी, दीवानी, तेरी दीवानी, दीवानी
अंत मे वो जीमन पर बैठ गई। उसकी अनारकली का घेर किसी खिले हुए फुल की तरह उसके आस पास जमीन पर फैल गया। तभी हवा चली और एक खत नव्या के आगे आकर रूका । उसने वो खत उठाया ।
तभी वो चीख पडी। इसी के साथ चारू की आवाज माइक से आई , " कैप्टन डाइड इन आ मिशन ! "
तभी लाइट दोबारा नव्या पर आ गई । गाना शुरू हुआ और नव्या ने आंखे बडी कर ऐसे भाव जताए की उहके प्राण निकल रहे ।.वो खडी हुई और घूमते हुए जमीन पर आ गिरी।
तेरी दीवानी, दीवानी
तेरी दीवानी, दीवानी
तेरी दीवानी, दीवानी
तेरी दीवानी, दीवानी
तेरी दीवानी, दीवानी
प्ले के खत्म होते ही ग्राउंड पुरा तालियो से गूंज उठा। चीफ गेस्ट के रूप मे आई महारानी अमृत राजवंशी इतनी प्रभावित थी की उनकी आंखो मे आंसू थे। उनकी दाए और दो कुर्सिया लगी थी जिनपर अन्वी सिंह राजपूत और विक्रांत सिंह राजपूत गंभीर मुद्रा मे बैठे थे।
" ये प्ले मेरी.चारू ने लिखा है विक्रांत । ", अन्वी नम आंखो से विक्रांत से.बोली।
विक्रांत ने अन्वी को देख फिर उहका हाथ अपने हाथ मे.ले.लिया ," मै भी मर जाउंगा तुमसे अलग होकर अन्वी ।. कभी जाना मत मुझे छोडकर। "
विक्रांत भावुकता से बोला। अन्वी मुस्कुरा दी।
" कही नही जा रही मै। तुम बंध गए इस जीवन मे.मेरे.साथ । ", अन्वी विक्रा के हाथ के ऊपर अंगूठा सहलाते हुए बोली। विक्रांत भी मुस्कुरा दिया।
" उफ्फ..लव बर्ड्स ! ", अमृत जी आंखे मटका कर बोली। हलांकि उनकी आंखे लाल पड गई थी।
विक्रांत और अन्वी हँस पडे।
क्रमशः