द मिस्टीरियस क्वीन - Chapter 1 - भाग 2 kanta द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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द मिस्टीरियस क्वीन - Chapter 1 - भाग 2

द मिस्टीरियस क्वीन (The Mysterious Queen)

अध्याय 1: अनाथ आश्रम की रहस्यमयी लड़की

भाग 2

ब्लैक ब्रिज पर अचानक आई गाड़ी की आवाज ने माहौल बदल दिया।

आरुषि की नजर तुरंत उस काली गाड़ी पर गई। उसकी छठी इंद्रिय उसे बता रही थी कि कुछ ठीक नहीं है।

आरव ने धीमी आवाज में कहा—

"तुम्हें यहां नहीं आना चाहिए था।"

आरुषि ने उसकी तरफ देखा।

"क्यों? क्योंकि कोई मेरा पीछा कर रहा है या क्योंकि तुम मेरे बारे में कुछ छुपा रहे हो?"

आरव कुछ पल शांत रहा।

वह समझ चुका था कि आरुषि कोई साधारण लड़की नहीं है।

गाड़ी धीरे-धीरे उनके पास आकर रुकी। उसमें से दो लोग उतरे। उनके चेहरे पर नकाब था।

एक आदमी ने कहा—

"लॉकेट हमारे हवाले कर दो।"

आरुषि की आंखों में ठंडापन आ गया।

"जिस चीज का मतलब मुझे नहीं पता, उसे मैं किसी अजनबी को क्यों दूंगी?"

वह आदमी आगे बढ़ा, लेकिन आरुषि पहले ही सतर्क हो चुकी थी।

उसने बिना घबराए आसपास का जायजा लिया। उसके लिए खतरा नया नहीं था। बचपन से ही उसने खुद को मजबूत बनाना सीखा था।

आरव दूर खड़ा सब देख रहा था।

उसके चेहरे पर पहली बार हैरानी थी।

"तो ये सिर्फ एक अनाथ लड़की नहीं है..."


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कुछ ही देर में नकाब पहने लोग वहां से भागने लगे।

आरुषि ने उनका पीछा करने की कोशिश की, लेकिन आरव ने उसे रोक दिया।

"हर जवाब के पीछे भागना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी जवाब खुद तुम्हारे पास आता है।"

आरुषि ने उसकी तरफ देखा।

"तुम कौन हो आरव राठौर? और तुम्हें मेरे बारे में इतना सब कैसे पता?"

आरव ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—

"क्योंकि तुम्हारा अतीत मेरी कहानी से जुड़ा हुआ है।"

यह सुनकर आरुषि कुछ पल के लिए चुप हो गई।

"मतलब?"

आरव ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला, लेकिन तभी उसका फोन बजा।

एक जरूरी संदेश था।

उसके चेहरे का भाव बदल गया।

"मुझे जाना होगा।"

आरुषि ने उसका रास्ता रोक लिया।

"तुम मुझे अधूरी बातें बताकर नहीं जा सकते।"

आरव ने पहली बार हल्की मुस्कान दी।

"तुम्हारे अंदर सवाल बहुत हैं, आरुषि। लेकिन याद रखना... हर सच की एक कीमत होती है।"

इतना कहकर वह वहां से चला गया।

आरुषि उसे जाते हुए देखती रही।

उसके मन में अब एक नया सवाल था—

आरव राठौर मेरे अतीत से कैसे जुड़ा है?


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अगली सुबह...

नई उम्मीद आश्रम में आरुषि वापस आई।

माधवी माँ उसे देखते ही समझ गईं कि कुछ हुआ है।

"क्या बात है बेटा? तुम्हारी आंखें बता रही हैं कि तुम कुछ जान गई हो।"

आरुषि कुछ देर चुप रही।

फिर उसने अपना लॉकेट निकालकर माधवी माँ के सामने रखा।

"माँ... क्या आप जानती हैं कि मैं कौन हूं?"

माधवी माँ के हाथ कांप गए।

उन्होंने पहली बार आरुषि से नजरें चुरा लीं।

आरुषि हैरान रह गई।

"माँ... आप कुछ छुपा रही हैं?"

माधवी माँ की आंखों में आंसू आ गए।

"आरुषि, कुछ सच ऐसे होते हैं जिन्हें बताने से पहले इंसान को तैयार होना पड़ता है।"

"किस सच के लिए?"

माधवी माँ ने धीरे से कहा—

"तुम्हारा जन्म किसी साधारण परिवार में नहीं हुआ था।"

आरुषि का दिल तेज धड़कने लगा।

"तो मेरा परिवार कौन है?"

माधवी माँ जवाब देने ही वाली थीं कि अचानक आश्रम की बिजली चली गई।

अंधेरा छा गया।

और उसी समय एक आवाज आई—

"आरुषि... तुम्हें सच जानने का हक नहीं है।"

आरुषि तुरंत उस दिशा में मुड़ी।

लेकिन वहां कोई नहीं था।

सिर्फ जमीन पर एक कागज पड़ा था।

उस कागज पर लिखा था—

"अगर अपनी असली पहचान जाननी है, तो राठौर परिवार से दूर रहना।"

आरुषि ने वह संदेश पढ़ा।

अब उसके सामने दो नाम थे—

राठौर परिवार... और आरव राठौर।

लेकिन उसे नहीं पता था कि आने वाले दिनों में यही परिवार उसके जीवन का सबसे बड़ा रहस्य बनने वाला है।

अध्याय 2: राठौर परिवार का छुपा हुआ सच — जारी...