रेशमाई शहजादों - अग्नि परी - 2 kanta द्वारा पत्रिका में हिंदी पीडीएफ

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रेशमाई शहजादों - अग्नि परी - 2



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*Chapter 2: पानी वाली शक्ति ~ 1200 शब्द*

जंगल। रात। चांद पूरा।

अर्जुन की तलवार रेशमा की गर्दन पर थी।  
"आत्मसमर्पण करो।"

रेशमा हंसी: "राजकुमार, तलवार से आग नहीं बुझती।"

तभी बादल गरजे। बारिश शुरू।  
रेशमा की आंखों से आंसू नहीं, पानी की धारा निकली।

*सपक!*  
जमीन से पानी का फव्वारा निकला। अर्जुन 10 फीट पीछे उड़ गया।

रेशमा: "ये मेरी दूसरी शक्ति है। आग के बाद पानी।"

अर्जुन उठा। भीग गया। "तुम... तुम इंसान नहीं हो।"  
रेशमा: "और तुम इंसान होकर भी पत्थर हो।"

तभी 5 सिपाही आए। "पकड़ो इसे!"

रेशमा ने हाथ घुमाया। हवा + पानी मिलकर बवंडर बना। 
सब उड़ गए।

बूढ़ी औरत: "बेटी भाग। तेरी तीसरी शक्ति अभी जागनी बाकी है।"

रेशमा उड़ गई। आग के पंख।

पीछे अर्जुन देखता रहा। उसके हाथ में रेशमा का 1 बाल था - रेशम जैसा। 
वो बुदबुदाया: "पकड़ना पड़ेगा।"

*End Hook:* महल में राजा को खबर मिली। "राजकुमार हार गया।" राजा गुस्सा: "अब मैं खुद जाऊंगा।"

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*Chapter 3: राजकुमार का धोखा ~ 1100 शब्द*

3 दिन बाद।

रेशमा एक गुफा में। बूढ़ी उसे ट्रेनिंग दे रही।  
"तीसरी शक्ति हवा है। सांस रोक। फिर छोड़।"

रेशमा ने फूंक मारी। पेड़ उड़ गए।

तभी गुफा के बाहर आवाज: "रेशमा, मैं अर्जुन। अकेले बात करनी है।"

रेशमा बाहर आई। अर्जुन बिना हथियार।  
"झूठ बोलूंगा तो मार देना।" अर्जुन: "मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मेरे पिता गलत हैं। वो जादूगरनी को मारना चाहते हैं।"

रेशमा: "क्यों भरोसा करूं?"  
अर्जुन ने अपना हाथ काटा। खून निकला: "ये देख। मैं इंसान हूं। तुम्हारा दुश्मन नहीं।"

रेशमा का दिल पिघला। पहली बार।

वो पास आई। अचानक अर्जुन ने जाल फेंका। रेशमा बंध गई।  
"सॉरी।" अर्जुन: "राजा का हुक्म है।"

रेशमा की आंखों में आंसू + आग। 
"प्यार का नाटक?" 
अर्जुन: "हां।"

रेशमा चिल्लाई। गुफा हिल गई। *तीसरी शक्ति जागी - हवा* 
जाल फट गया।

रेशमा: "अब तुम मेरे दुश्मन हो अर्जुन। हमेशा के लिए।"

*End Hook:* अर्जुन घायल। बुदबुदाया: "मुझे सच में प्यार हो गया था।"

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*Chapter 4: चौथी शक्ति का खतरा ~ 1300 शब्द*

1 महीना बीत गया।

रेशमा ने 3 गांव बचाए। आग से, बाढ़ से। 
लोग अब "देवी" कहने लगे।

पर रात को उसे बुरे सपने। एक काली परछाई: "प्यार करोगी तो मर जाओगी।"

बूढ़ी: "चौथी शक्ति सबसे खतरनाक है। प्यार। एक बार प्यार किया तो या तो तुम दुनिया बचाओगी या खुद खत्म।"

उसी रात हमला। राजा की सेना। 500 सिपाही। तोप।

रेशमा अकेली। उसने आग, पानी, हवा तीनों चलाई। 
आधा घंटा लड़ी। थक गई।

तभी तोप का गोला आया। सीधा रेशमा पर।

पीछे से कोई आया। धक्का दिया। 
*धमाका!*

धुआं हटा। अर्जुन जमीन पर। पीठ जली। 
"क्यों बचाया?" रेशमा रोई। पहली बार।

अर्जुन: "क्योंकि... क्योंकि मैं..." बेहोश।

रेशमा ने उसे गोद में उठाया। उसके आंसू अर्जुन के जख्म पर गिरे। 
जख्म भर गया। *चौथी शक्ति का पहला संकेत - हीलिंग*

*End Hook:* राजा दूरबीन से देख रहा: "तो प्यार हो गया। अब इसे मारना पड़ेगा।"

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*Chapter 5: शादी या जंग ~ 1200 शब्द*

राजा ने ऐलान: "या तो रेशमा मुझसे शादी करे और मेरी गुलाम बने। 
या 7 दिन में पूरे राज्य में आग लगा दूंगा।"

रेशमा: "मैं शादी करूंगी। पर शर्त है।"

महल। मंडप। हजारों लोग।

रेशमा लाल जोड़े में। बाल खुले। माथे पर आग का तिलक।  
सामने राजा। 50 साल का।

पंडित: "मंगलसूत्र पहनाइए।"

रेशमा ने हाथ बढ़ाया। तभी पीछे से आवाज: "रुको!"

अर्जुन। पट्टियां बंधी। पर खड़ा। हाथ में तलवार नहीं, फूल।  
"शादी मुझसे करो रेशमा। राजा से नहीं।"

राजा: "देशद्रोही! मारो!"

50 सिपाही दौड़े।

रेशमा ने 1 सेकंड में फैसला लिया। 
उसने अर्जुन का हाथ पकड़ा। दोनों के चारों तरफ आग का घेरा।

रेशमा चिल्लाई: "मैं किसी की गुलाम नहीं। न राजा की, न प्यार की। 
मैं आजाद हूं!"

*बूम!* 
आग का घेरा फट गया। महल की छत उड़ गई।

रेशमा + अर्जुन हवा में। उसके पंख।

राजा चीखा: "पकड़ो!"




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