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हरखू — जिंदगी और याददाश्त के बीचकई दिन बीत चुके थे।शहर के एक निजी अस्पताल में हर...
कैंटीन की गॉसिप और सुलगती चायउधर, एडमिन ब्लॉक के ठीक पीछे बनी फैक्ट्री की कैंटीन...
ध्रुव की ताराभाग - १५लेखिका "अनामिका" ध्रुव अपनी माँ को ढूँढते हुए उनके कमरे में...
क्या आपने कभी सोचा है कि एक औरत अपनी पूरी ज़िंदगी दूसरों के नाम करके भी मुस्कुरा...
Episode-6ऊंचाई सोच बदल देती है नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आप सभी का घुमक्कड़ जिज्...
सिम्भाला नगरी...वह कोई साधारण नगरी नहीं थी। संसार की आँखों से अदृश्य, दिव्य कवच...
रात गहरी थी। रितांश अकेला पहाड़ की चोटी पर बैठा था। उसकी मुट्ठियाँ भींची हुई थीं...
परिवर्तन के पथ (काव्य संग्रह ) -डॉ भारतेन्द्र सिंह विनम्र सौम्य एवं सार्थक सोच व...
[दृश्य 1]स्थान: रेहान का कमरासमय: रात के 11:10 बजेकमरे में गूँजती उस फोन की घंटी...
सुबह की पहली किरण के साथ ही महानगर का मुख्य जिला न्यायालय परिसर वकीलों, मुंसिफों...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
"नमस्कार दोस्तों! स्वागत है, आप सभी का "मातृभारती" के एक बेहद अनोखे और आपके होश उड़ा देने वाले सफ़र में।मैं हूँ, आपका दोस्त..."धर्मेंद्र कुमार"......अपने यात्रा...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
यह कहानी आधुनिक समाज, रिश्तों की उथल-पुथल, मानवीय मूल्यों और संघर्ष के बीच उम्मीद की एक किरण ढूँढने की यात्रा है। कहानी का मुख्य पात्र 'राघव' है, जो शहर की चमक-धमक से दूर अ...
में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता एक पल यहां lकैसे कटेगी एक उम्र भला यहा...
गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था। सुबह के पाँच बजे थे। आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
भाग 1 — कंस की भविष्यवाणी और श्रीकृष्ण के जन्म की शुरुआत जय श्रीकृष्ण मथुरा नगरी में उस समय चारों ओर खुशियाँ थीं। राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह यदुवंशी वीर वसुदेव के साथ...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
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