मैं और वो जिन्न (एक अन्खाही कहानी) - 1 shahina shah द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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मैं और वो जिन्न (एक अन्खाही कहानी) - 1

कहते हैं कुछ कहानियाँ सिर्फ लिखी नहीं जातीं. वो महसूस की जाती हैं.
ये कहानी है सना की. एक ऐसी लडकी की जिसकी जिंदगी बाहर से बिल्कुल आम थी, लेकिन उसके बचपन से ही एक ऐसा राज जुडा था जिसे कोई समझ नहीं पाया.
कोलकाता के एक छोटे से जिले में रहने वाला सना का परिवार बहुत खुश था. घर में प्यार था, हंसी थी और छोटे- छोटे सपने थे.
सना जब पैदा हुई तो सबकी आँखों का तारा बन गई.
लेकिन उसके जन्म के कुछ ही दिनों बाद एक ऐसी घटना हुई, जिसने उसके परिवार को हमेशा के लिए डरा दिया.
सना सिर्फ चालीस दिन की थी. एक रात उसकी माँ उसे अपने पास सुलाकर सो गईं.
अचानक आधी रात को उनकी आँख खुली.
उन्होंने देखा. सना बिस्तर पर नहीं थी.
माँ घबरा गईं.
उन्होंने पूरे कमरे में देखा, फिर उनकी नजर दरवाजे के पास गई.
वहाँ छोटी सी सना खिलखिला कर खेल रही थी.
माँ डरते हुए उसके पास गईं और जैसे ही उसे गोद में उठाया.
सना जोर- जोर से रोने लगी.
माँ की आँखों में आँसू आ गए.
या अल्लाह. मेरी बच्ची वहाँ कैसे पहुँची?
उस रात के बाद सना के माँ- बाबा उसे बहुत संभालकर रखने लगे.
लेकिन उन्हें नहीं पता था कि कोई और भी था.
जो सना के साथ था.
एक ऐसी रूहानी ताकत. जिसे कोई देख नहीं सकता था.
सना बडी होती गई, लेकिन उसे हमेशा महसूस होता था कि कोई उसके आसपास है.
जब वो अकेली होती, तो उसे लगता कोई उसे देख रहा है.
जब वो उदास होती, तो जैसे कोई उसे हिम्मत देता.
लेकिन फिर उसकी माँ एक ताबीज लेकर आईं.
और उसके बाद सब बदल गया.
वो एहसास धीरे- धीरे खत्म हो गया.
सना ने सोचा शायद ये सब उसका वहम था.
साल बीत गए.
सना बडी हो गई.
उसने अपनी जिंदगी में आगे बढना सीख लिया.
लेकिन उसे नहीं पता था.
जिस राज से वो बचपन से भाग रही थी.
वो राज वापस आने वाला था.
एक रात.
जब बाहर तेज बारिश हो रही थी और पूरा घर खामोशी में डूबा हुआ था.
सना के कमरे में अचानक ठंडी हवा चली.
उसने धीरे से आँखें खोलीं.
और फिर एक आवाज आई.
तुमने मुझे भुला दिया सना.
सना का दिल रुक सा गया.
क्योंकि ये आवाज. कहीं सुनी हुई थी.
लेकिन कहाँ?
सना उस आवाज को सुनकर बिल्कुल खामोश हो गई.
कमरे में चारों तरफ अंधेरा था. बाहर बारिश की बूंदें खिडकी से टकरा रही थीं.
लेकिन सना का ध्यान सिर्फ उस आवाज पर था.
वो आवाज.
जिसे उसने पहले भी सुना था.
उसकी साँसें तेज हो गईं.
ये. ये आवाज मैंने पहले भी सुनी है।
सना ने अपनी आँखें बंद कीं और याद करने की कोशिश करने लगी.
अचानक उसके सामने बचपन की एक पुरानी याद आ गई.
जब वो सिर्फ पाँच साल की थी.
कहानी फिर कुछ साल पीछे चली जाती है.
तब जब सना सिर्फ पाँचसाल की थी.
पाँच साल की छोटी सी सना अपने कमरे में खेल रही थी. उसके हाथ में एक छोटी सी गुडिया थी और वो अपनी ही दुनिया में खोई हुई थी.
घर में उस दिन अजीब सी खामोशी थी.
उसकी माँ बाजार गई हुई थीं.
और घर में उसके पापा और उसके एक भाई और दो बहने थी.
सना खेलते- खेलते अचानक रुक गई.
क्योंकि उसे लगा जैसे किसी ने उसका नाम लिया हो.
सना.
वो डरकर इधर- उधर देखने लगी.
कौन है?
लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया.
फिर वही आवाज आई.
सना.
इस बार आवाज थोडी साफ थी.
छोटी सी सना डर गई.
उसकी आँखों में आँसू आ गए.
वो दौडते हुए अपनी माँ को ढूँढने लगी.
मम्मा. मम्मा आप कहाँ हो?
लेकिन घर में उसकी माँ नहीं थीं.
सना डर के मारे रोने लगी.
तभी उसके पापा वहाँ आए.
उन्होंने अपनी बेटी को रोते हुए देखा तो तुरंत उसे गोद में उठा लिया.
क्या हुआ बेटा?
सना ने डरते हुए कहा—
पापा. कोई मुझे बुला रहा था।
तब उसके पापा भी देखने लगे मगर उन्हें कोई नहीं दिखा.
उसके पापा ने प्यार से उसके आँसू साफ किए और बोले—
डरो मत बेटा, मैं हूँ तुम्हारे पास।
पापा की गोद में आते ही सना शांत हो गई.
उसके लिए उसके पापा ही उसकी पूरी दुनिया थे.
उस दिन उसके पापा उसे कमरे में ले गए और प्यार से सुला दिया.
छोटी सी सना नहीं जानती थी कि वो आवाज किसकी थी.
वो कहाँ से आ रही थी.
लेकिन वो इतना जानती थी कि उसके पापा उसके साथ हैं.
वो बेफिक्र होके सो गई अपने पापा के गोद में.
लेकिन जब कुछ देर बाद उसकी आँख खुली.
तो उसकी जिंदगी बदल चुकी थी.
घर में बहुत सारे लोग थे.
सबकी आँखों में आँसू थे.
सना ने मासूमियत से पूछा—
मम्मा. पापा कहाँ हैं?
लेकिन उसकी माँ के पास कोई जवाब नहीं था.
उस दिन सना से उसका सबसे प्यारा रिश्ता छिन गया था.
उसके पापा उससे बहुत दूर जा चुके थे.
वक्त गुजरता गया.
उसकी माँ ने अकेले ही सना और उसके तीन भाई- बहनों की परवरिश की.
लेकिन सना के दिल में एक सवाल हमेशा रहा.
उस दिन वो आवाज किसकी थी?
और क्यों उसके बाद उसके पापा उससे दूर हो गए?
आज इतने सालों बाद वही आवाज फिर लौट आई थी.
सना की आँखों में आँसू थे, लेकिन इस बार डर से ज्यादा गुस्सा था.
वो अंधेरे की तरफ देखकर चिल्लाई—
अब क्या लेने आए हो तुम?
मेरे पापा को मुझसे छीन लिया ना तुमने!
अब मेरी जिंदगी में वापस क्यों आए हो?
कमरे में सन्नाटा छा गया.
कुछ पल बाद एक धीमी आवाज आई—
सना. तुम सच नहीं जानती।
सना हैरान रह गई.
क्या मतलब?
आवाज आई—
तुम्हारे पापा की मौत की वजह मैं नहीं था.
सना की आँखें फैल गईं.
झूठ!
तुम झूठ बोल रहे हो!
लेकिन उस साये की आवाज दुबारा आई.
काश मैं झूठ बोल रहा होता.
लेकिन तुम्हें वो सच जानना होगा, जिससे तुम्हारी पूरी जिंदगी बदल जाएगी।
सना कुछ बोल नहीं पाई।
क्योंकि पहली बार उसे लगा।
शायद जिस चीज से वो नफरत करती रही।
उसके पीछे कोई और कहानी छुपी थी।

जानने के लिए पड़ते रहिये। मैं और वो जिन्न