दोस्ती Kapil Tiwari द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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दोस्ती

हम अक्सर एक दूसरे से पूछते हैं कि.. आपका दोस्त कौन...??

सामान्यतः उत्तर यही मिलता है कि जो मेरे साथ हमेशा खड़ा रहे और मेरा हमेशा साथ देता रहे वहीं हमारा असली दोस्त है, ये परिभाषा बाहरी तौर से देखे तो अच्छी भी लगती हैं लेकिन जैसे ही आप इसको नजदीक से देखेंगे तो आपको इसमें कुछ कमियां भी नजर आएगी।

कमियां यह कि जो हमारे साथ खड़ा है या जिसके साथ हम खड़े हैं क्या हम दोनों को ये ज्ञात भी है? कि किस काम में किसके साथ होना चाहिए या किस काम में किसके साथ नहीं होना चाहिए? लेकिन हम दोस्ती में अक्सर यह भेद करना भूल जाते हैं।

अगर आपका दोस्त आपको सिर्फ अच्छा बोलता रहें , आपकी सारी गलतियां छुपाता रहे, आपकी असलियत आपको न बताएं... हो सकता हैं आपको ऐसा दोस्त अच्छा भी लगें लेकिन सच तो यह है कि वह आपका दोस्त होने में संदेश पैदा करता हैं। जो आपकों सिर्फ मान सम्मान ही देता रहें और जब आप उसके काबिल भी न हो .. तो ये दोस्त और दोस्ती एक सोचनीय विषय बन जाता हैं ।

सच तो ये है कि जो आपका हितैशी (हित चाहने बाला) होगा और जो आपका वास्तविक दोस्त होगा... वो आपके घटिया कामों मे कभी साथ नहीं देगा..... वो घटिया कामों मे आपके बगल में नहीं खड़ा होगा... घटिया कामों मे वो आपका सबसे बड़ा आलोचक ( निंदक ) होगा,वो घटिया कामों से रोकेगा अपको।

हम अक्सर कुतर्क करते हैं कि मेरे दोस्तों ने मुझे बिगाड़ दिया .. हम उनसे पूछते हैं क्या अपको वो अपहरण (जबरदस्ती उठा कर ले जाना) कर के ले जाते है...और अगर ले जाते है तो आप समझ लीजिए कि अभी आपको खुद के ऊपर काफी काम करने की जरूरत है।आप स्वयं विचार करें कि आपका मन न हो और आपको कोई जबरदस्ती ले जाए.... क्या आप बच्चे हैं...? कि एक चॉकलेट दिखा दो तो चल पड़े पीछे पीछे... हद है।

इस बात को और गहराई से सोचो अगर आपकी बिना मर्जी के कोई अपको ले जाता है... आपका समय बर्बाद कर देता है... तो आपकी ये अच्छी स्थिति नहीं हैं । वास्तविकता तो ये हैं की कही न कही आप ख़ुद ही दोस्तों के साथ जाना चाहते थे और आपने अपने आप को ही एक बहाना दिया कि दोस्त ले गए इसमें मेरी कोई गलती नहीं है?

आपको अपने विवेक से ये सोचना पड़ेगा कि कौन दोस्त आपको बोध, ज्ञान की तरफ ले जा रहा हैं और कौन आपके मस्तिष्क को और निचाई दे रहा हैं, इसमें विवेक से भेद करना सीखना होगा।

आप बोलते हो दोस्त हैं नशा करा देते हैं या दोस्तो में करना पड़ता हैं भाई, पीते नहीं हैं पीला देते हैं। ये तर्क अक्सर हम खुद की नियत को छुपाने के लिए उपयोग में लाते हैं। हम तो ठीक हैं लेकिन क्या करें दोस्तो के साथ सब हो जाता हैं मेरी कोई गलती नहीं हैं।सच तो ये है कि आप दोस्तो पर झूठा इल्जाम लगाना छोड़ो... ड्रिंक, समय बर्बाद में मज़ा अपको भी आता है। हम यह नही कह रहे हैं की दोस्तो का कोई कसूर नहीं है.... लेकिन फिर वो दोस्त कहां जो आपकी जिंदकी को गलत दिशा देने में सहायक हैं?

"ये दोनो साथ साथ चलते हैं जैसे आप होगे वैसे ही आपके दोस्त"

दोस्ती तो शांती का अहसास होती है, अगर आपके पास सच्चा दोस्त है... तो ये दुनिया की सबसे बड़ी चीज है दुनिया में सच्ची मित्रता से बड़ी कोई दूसरी चीज नहीं है। दोस्ती एक सच्ची अनुभूति हैं दोस्ती में सब बराबर होते है... कोई छोटा नही कोई बड़ा नहीं चाहें वो पशु हो या मानव ,सब एक..!

दोस्त वो जो वास्तव मे आपका हित करे... जो आपकी जिंदकी को नीचे से उठा कर ऊपर (शांती, सत्य) की और ले जाए, जो अपको सही रास्ता दिखाएं, जो हमेशा सही के साथ हो और झूठ के खिलाफ हो। जो आपके मन को एक नया आयाम दे सके, जो अपनी जान की परवाह किए बिना अपने दोस्त की जान बचाए, दोस्त की खुशी के लिऐ बिन मोल बिक जाए जो दुख एक का हो वही दूसरे का भी(करुणा), ऐसा एक दोस्त.. फालतू के हजारों दोस्तो से अच्छा होता है।

अब हम विचार करते हैं कि ऐसे अच्छे दोस्त मिले कैसे? अक्सर हम अपने दोस्त बनाना सीखते हैं अपने आस पास के परिवेश, परिवार, सोशल मीडिया, और अपनी समझ के अनुसार, ऐसी दोस्ती में बोध, समझ , ज्ञान न खुद के अंदर होता हैं न सामने वाले के, न हमारे पास विवेक होता हैं न जिन्हें चुनते हैं वो विवेक युक्त होते हैं। तो सही रास्ता तो यही है कि पहले खुद को इस स्थिति में लाया जाए कि एक विवेक युक्त निर्णय मन से निकल सके तभी संभव है कि हमें किसी विवेक युक्त व्यक्ति मिले, किसी विवके युक्त का साथ मिलने के बाद फिर ये जिम्मेदारी भी होती हैं कि जिनकी चेतना का विकास कम है उसे और ऊंचा उठाया जा सके। अगर किसी को ऐसी दोस्ती या दोस्त मिलते है तो वो सर्वोत्तम हैं।

अगर आप सतर्क नहीं रहेंगे तो आपकी दोस्ती सिर्फ स्वार्थ आधारित हो कर रह जाएगी, देखा है आपने दोस्त एसे लगते हैं जैसे एक दुकानदार और ग्राहक का रिश्ता होता है, दुकानदार कभी नहीं चाहेगा कि मेरे ग्राहक भाग जाए क्योंकि उसे कुछ चहिए होता है.... इस लिऐ वो इतनी चिकनी बाते करता है कि कही ग्राहक भाग न जाए । हमारी तथाकथित दोस्तियां भी ऐसे ही होती हैं, बिना विवेक के।

ये बात सच है, उत्कृष्ट लोगो की पहचान आप तब कर सकते हो जब आप उत्कृष्ट हो या होना चाहते हो, तो अच्छे दोस्त बनाने के लिए पहले अपको एक अच्छा दोस्त बनना पड़ेगा... वरना आप स्वयं ही विचार कीजिए कि अगर आपको ही अपनी आजादी, उत्कृष्टा, विवेक से प्यार नहीं हैं तो जो आपके साथ होगे उनकी भी हालत आपके जैसे ही होगी।

"एक विवेक युक्त दोस्त खोजने के लिए पहले खुद विवेक युक्त बनो"

~ कपिल तिवारी “यथार्थ”