WAIT FOR WET - 1 Ren Remag द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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WAIT FOR WET - 1

मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद का आदमी धीमे- धीमे अपने कदम आगे बढा रहा था. उसने एक लंबा ब्लैक कोट पहना हुआ था, जिसकी वजह से इस अंधियारी रात में वह बेहद डरावना लग रहा था. मगर इससे भी ज्यादा खौफनाक बात यह थी कि उसके एक हाथ में खून से. सनी कुल्हाडी थी. इस भयानक भेष में वह कोई सायको किलर प्रतीत हो रहा था.

इतने में ही सामने से एक लडका उसकी ओर चलते आया और उस कुल्हाडी वाले की आँखों में आँखें डाल, बिना किसी घबराहट के बोला:
मुझे पता है तुम्हें किसकी तलाश है, लेकिन यकीन मानो वो तुम्हें यहाँ तो हरगिज नहीं मिलने वाला।

लडके की बातें सुन वह रहस्यमयी आदमी अपनी बडी- बडी आँखों से कुछ देर तक उसे घूरता रहा. लेकिन अगले ही पल, वह अपनी भारी आवाज में बोला:
तुम्हें क्या पता मुझे क्या चाहिये?

यह सुन लडका तुरंत बोला:
स्नोम"

मगर यह शब्द सुनते ही वह आदमी हैरान रह गया. वह अपनी बडी- बडी आँखें फाडे उस लडके को देख रहा था, मानो उसके कानों को उस नाम पर यकीन ही न हुआ हो. अगले ही पल वह लडका फिर बोला:

वेतनगरी, तुम्हें उसे पाना है तो वेतनगरी आना होगा. मुझे ये तो नहीं पता कि वो है कौन? लेकिन इतना जानता हूँ कि वो कहाँ मिलेगा।

लेकिन ये सब तुम मुझे बता क्यों रहे हो? तुम हो कौन? और स्नोम के बारे में कैसे जानते हो?
उस आदमी ने गहरी उत्सुकता और संदेह से पूछा.

जिसका जवाब देते हुए वह लडका बोला:
मैं ये सब तुम्हें इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि तुम ही हो स्नोम के योग्य. और इन सब से कोई फरक नहीं पडता कि मैं कौन हूँ? और मुझे इन सब के बारे में कैसे पता?

लडके ने एक गहरी सांस ली और इस बार पूरी तरह गंभीर होते हुए बोला:
मुझे ये जानना है कि तुम कोई हीरो हो! या कोई विलेन।

तुम्हें क्या लगता है मैं कौन हूँ?

उम्मीद करता हूँ, तुम कोई हीरो ही हो, वरना हर कहानी के अंत में विलेन ही मारा जाता है, चाहें वह सही हो या गलत.

घबराओ मत, अगर मैं विलेन हुआ भी तो मेरी इस कहानी में, किसी हीरो मे इतनी जान नहीं, जो मुझे हरा सके।
उस आदमी ने गर्व से कहा, जिसे सुनकर सामने खडे लडके के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान उभर आई.

कुछ दिन बाद.
शाम के पाँच बजकर बारह मिनट हुए थे. वेतनगरी के ब्लैक बीच पर समंदर के किनारे दो लडके सिगरेट का कश लगाते हुए, आसपास के माहौल और लोगों को बडी ही बारीकी से निहार रहे थे. उनके महंगे पहनावे से साफ लग रहा था कि दोनों किसी रईस घराने से ताल्लुक रखते हैं. इतने में ही एक लडका तिरछी नजरों से दूसरे की ओर देखते हुए बोला:

ओय कोर्बिन. वो वहाँ देख, वो ब्लू ड्रेस वाली ऐसा लग रहा है कोई हेवेन से उतरी एंजेल हो? तू यकीन नहीं करेगा मुझे इससे बेइंतहा प्यार हो गया है.

दूसरे लडके का नाम कोर्बिन था. उसने उस ओर देखा जहाँ पहले लडके ने इशारा किया था. वहाँ सचमुच एक नीली ड्रेस पहने लडकी खडी थी. मगर उसे देख कोर्बिन चिढते हुए बोला:

हेवन से उतरी एंजेल नहीं, साले हेवन से उतरी बच्ची है वो. अपनी ठरक को थोडा काबू किया कर निवेद. जरा देख तो उसे मुश्किल से पंद्रह- 16 की रही होगी.

कोर्बिन की इस डांट के बावजूद निवेद की नजर उस लडकी से नहीं हटी. वह लडकी वाकई उम्र में काफी छोटी लग रही थी. तभी अचानक न जाने कोर्बिन के जहन में क्या ख्याल आया, वह मन ही मन खुश होते हुए बोला:

अबे तू उसे छोड वरना पोस्को लग जायेगा. और अगले एक हफ्ते बाद फेयरवेल है. और मैं चाहता हूँ, तब तक एनी पूरी तरह मेरी हो जाये. फरक नहीं पडता कैसे? चाहे जैसे. और बदले में मैं तुझे सुभश्री मैम की दिलाऊंगा. बोल मंजूर है तुझे।

निवेद ने अभी तक सामने खडी उस लडकी से अपनी नजरें नहीं फेरी थीं, लेकिन कोर्बिन का यह प्रस्ताव सुन उसने बेहद गंभीर स्वर में कहा:
थोडा तमीज से भाई. तुझे पता है ना मैं सुभश्री मैम से प्यार करता हूँ. ये क्या बात हुई तू मुझे उनकी दिलायेगा. प्यार में जबरदस्ती नहीं होती कोर्बिन, वरना पेले जाओगे.

इतना कहकर वह एक पल के लिए रुका और कोर्बिन की आँखों में घूरते हुए बोला:
और कितनी बार बोला है, तू एनी से अपनी गंदी नजरें हटा ले. वो मेरे दोस्त की बंदी है. सुती प्यार करता है एनी से, तो तुझे उन दोनों के बीच क्यों घुसना है.

यह सुनते ही कोर्बिन तपाक से बोला:
मुझे फरक नहीं पडता. मैं चाहूँ तो जब मन करें उसे अपना बना सकता हूँ. आखिर तुझे तो पता ही है, मैं हूँ कौन?

कोर्बिन की आँखों में इस वक्त एनी के लिए एक अलग ही पागलपन और सनक साफ झलक रही थी, मानो वह उसे हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था. मगर फिलहाल निवेद भी अपनी ही धुन में सवार था. वह धीमे- धीमे अपने कदम उस ब्लू ड्रेस वाली लडकी की ओर बढाते हुए बोला:

तुझे जो करना है कर मेरे भाई tr. वैसे भी तुम दोनों ही मेरे दोस्त हो. ये मैं तुम ही पे छोडता हूँ. लेकिन मुझे बीच में मत घसीटना.

कोर्बिन ने निवेद की बात सुनी, मन ही मन मुस्कुराया और उसे उस लडकी की तरफ जाते देख अपनी गर्दन हिलाते हुए बुदबुदाया:
ये नहीं सुधरेगा.
अगले दिन, ग्लोबल यूनिवर्सिटी ऑफ वेतनगरी के परिसर में छुट्टी की घंटी बज चुकी थी. छात्रों की एक भारी भीड मेन गेट की ओर बढ रही थी. उसी भीड के बीच दो लडकियां आपस में गप्पे मारती हुई आगे बढ रही थीं. तभी उनमें से एक लडकी अपनी सहेली से कहती है:

एनी. तू तो बहुत लकी है यार.

और वो कैसे? एनी ने सहजता से पूछा.

क्या मतलब कैसे? पूरे Collage को पता है कि- साक्षात कोर्बिन डेविस तेरे पीछे पागल है. काश मैं तेरी जगह होती ना एनी. अब तक तो सुती.

इससे पहले कि वह अपनी बात पूरी कर पाती, एनी उस पर कडकते हुए बोली:
मुझे क्या तूने अपने जैसा समझा है गरिमा?

मतलब. गरिमा ने थोडे सहमे हुए स्वर में पूछा.

मतलब कि तुझे पता है ना. मैं सुती के साथ हूँ. और मैं उससे प्यार करती हूँ. बहुत. मैं उसके अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती.
एनी ने जवाब दिया. कुछ देर पहले जो उसके चेहरे पर सौम्य मुस्कान थी, उसकी जगह अब तीखे गुस्से ने ले ली थी. एनी का यह उग्र रूप देखकर गरिमा एक पल के लिए डर गई.

तू इतनी सीरियस क्यों हो रही है एनी? मुझे पता है तू सुती को चाहती है. मुझे पता है, मैं तो बस मजाक कर रही हूँ.
गरिमा ने एक नकली मुस्कान के साथ बिगडती बात को संभालने की कोशिश की.

अगर ये मजाक भी था तो. आइंदा से कभी मत करना.
एनी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, जिसे सुनकर गरिमा की आगे कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई. उसने बस चुपचाप हाँ में अपना sir झुका दिया.

अभी दोनों ने आगे महज तीन- चार कदम ही बढाए थे कि पीछे से एक लडका दौडते हुए आया और उनके बगल में साथ- साथ चलने लगा.

हेय एनी.
ओर गरिमा मेरे पास ना दो मूवी टिकट्स हैं. इफ तुम फ्री हो तो क्या तुम चलोगी?

वह लडका गरिमा को साथ चलने का न्योता दे रहा था, मगर गरिमा को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी. उसके हावभाव से यह साफ जाहिर था. वह बेहद रूखे स्वर में बोली:
मैं नहीं आ पाऊँगी आदित, मैं आज जरा भी फ्री नहीं हूँ. या सच कहूँ तो मेरा मूड नहीं है.

गरिमा के इस दो टूक जवाब से आदित का दिल टूट गया. फिर भी, उसने अपने चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान लाते हुए कहा:
कोई बात नहीं-

आदित की बात पूरी होने से पहले ही पीछे से किसी तीसरी लडकी की आवाज गूंजी:
कोई बात नहीं आदित! अगर ये नहीं आ रही है, तो क्या मैं साथ आ सकती हूँ तुम्हारे?

जैसे ही आदित ने मुडकर देखा, तो उसे एक जानी- पहचानी शक्ल दिखी. यह अनामी थी, जो आदित के साथ मूवी जाने के लिए बेहद उत्सुक लग रही थी. मगर उसे देखकर आदित के चेहरे पर कोई खास खुशी नहीं उभरी, फिर भी वह उसे मना नहीं कर सका.

क्यों नहीं अनामी? जरूर चल सकती हो. वो शो आज तीन बजे का है।
आदित ने एक फीकी मुस्कान के साथ कहा. यह सुनकर अनामी के चेहरे पर एक प्यारी सी खिलखिलाहट आ गई. मगर जैसे ही अनामी की नजर एनी के मायूस चेहरे पर पडी, तो उसने फौरन पूछा:

तुझे क्या हुआ है एनी? ऐसे मुँह लटकाके क्यों चल रही है, कही इस वजह से तो नहीं क्युकी आज सूती ऍप्सेंट है?

इस सवाल पर एनी तो खामोश रही, मगर गरिमा तुरंत तंज कसते हुए बोली:
इसका मूड मेरी वजह से खराब है. क्योंकि.

गरिमा की बात बीच में ही काटते हुए एनी गुस्से में बोली:
गरिमा तू फिर से वही बात मत निकाल हाँ. मैंने कहा ना. मुझे ये सब नहीं पसंद.

एनी के तीखे तेवर देखकर गरिमा आगे कुछ नहीं बोली. यहाँ आदित और अनामी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इन दोनों सहेलियों के बीच आखिर क्या खिचडी पकी है.

क्या हुआ तुम दोनों के बीच कुछ झगडा हुआ है क्या? आदित ने पूछा. उसकी आँखें गरिमा के चेहरे पर टिकी थीं, मानो वह जवाब का इंतजार कर रहा हो.

गरिमा ने अपने चेहरे पर एक शातिर मुस्कान लाते हुए कहा:
नहीं तो. बिल्कुल नहीं. ये तो बस जब लोगों को ज्यादा अटेंशन मिलने लगती है ना. तो उनका रवैया कुछ ऐसा ही रहता है.

गरिमा का यह ताना एनी पर बेअसर रहा. उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं आई, मानो गरिमा की बातें उसके लिए कोई मायने ही नहीं रखती थीं. यहाँ आदित और अनामी को भी अब धुंधला सा अंदाजा होने लगा था कि माजरा क्या है, आखिर वे सब एक ही Collage के छात्र थे.

कुछ पलों बाद, वे चारों Collage के मुख्य द्वार के बाहर खडे थे. अधिकांश छात्र अपने- अपने घरों के लिए निकल चुके थे. जब गरिमा और अनामी वहाँ से जाने लगीं, तब अनामी ने ध्यान दिया कि एनी वहीं रुककर सामने की तरफ देख रही है.

एनी यार. अब माफ भी कर दे इसे, दोबारा वैसा कुछ नहीं बोलेगी, चल अब घर नहीं जाना क्या तुझे?
अनामी ने मिन्नत करते हुए पूछा.

जिसके जवाब में एनी ने कहा:
नहीं वैसी कोई बात नहीं है. वो सुती अभी यहीं आ रहा है. हमे Hospital जाना है यहा से नजदीक ही पडता है ना, तो हम यहीं से चले जाएंगे.

एनी के इतना कहते ही अनामी ने आदित को Bye किया और गरिमा का हाथ पकडकर आगे बढने लगी. मगर तभी गरिमा अचानक चौंककर अपनी जगह ठिठक गई.

तभी एनी के ठीक सामने एक चमचमाती हुई लाल फेरारी आकर रुकी. शायद इसी आलीशान गाडी को देखकर गरिमा के कदम रुक गए थे. कार का दरवाजा खुला और एक लडका आँखों पर काला चश्मा चढाए बाहर उतरा. वह तेजी से आदित की ओर बढा और बोला:

क्या हाल है मेरे पढाकू दोस्त?

यह निवेद ही था. अगले ही पल वह आदित को पकडकर भीड से थोडा दूर ले गया, मानो उसे कोई ऐसी जरूरी बात कहनी हो जो सबके सामने नहीं कही जा सकती थी.

इसी बीच, कार के दूसरे हिस्से से एक और लडका बाहर आया. वह सीधा एनी की तरफ बढा और मुस्कुराते हुए बोला:
कैसी हो एनी?

एनी का हालचाल पूछने वाला यह लडका कोई और नहीं, बल्कि कोर्बिन डेविस था. मगर एनी ने उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया. वह कोर्बिन की मौजूदगी में खुद को बेहद असहज महसूस कर रही थी. जब एनी ने कोई जवाब नहीं दिया, तो कोर्बिन ने दोबारा पूछा:

क्या हुआ एनी तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही. मैंने ऐसा भी क्या पूछ लिया?

एनी इस बार भी टस से मस नहीं हुई. कोर्बिन फिर से कुछ बोलने ही वाला था कि अनामी चिढकर बीच में बोल पडी:
तुझे समझ नहीं आ रहा क्या? उसे बात नहीं करनी तुमसे- परेशान क्यों कर रहा है?

अनामी की यह दखलंदाजी कोर्बिन को नागवार गुजरी. वह झल्लाकर बोला:
क्या मतलब परेशान मत कर. मैं क्यों परेशान करूँगा. वो भी एनी को. बिल्कुल नहीं.
और मैं तुझसे थोडी बात कर रहा हूँ. तो तू अपना मुँह बंद रख समझी, गरिमा समझा अपनी बहन को.

कोर्बिन की घुडकी सुनकर गरिमा डर गई. उसने अनामी का हाथ जोर से जकड लिया और आँखों से इशारा किया कि वह चुप रहे. अब एनी की आँखों में भी गुस्सा साफ दिखने लगा था. बात और बिगडती, इससे पहले ही आदित और निवेद हडबडाहट में उनकी तरफ वापस लौटे. आदित के चेहरे पर गहरी परेशानी थी, जबकि निवेद पीछे से उसे शांत करने की नाकाम कोशिश कर रहा था. न जाने उन दोनों के बीच क्या बात हुई थी, लेकिन इस वक्त सबकी नजरें उन्हीं पर टिक गईं.

निवेद ने आदित को रोकते हुए गुस्से में कहा:
कहाँ जा रहा है साले रुक! साले तू अपने दोस्त के लिए इतना नहीं कर सकता क्या? ये मैं तुझे इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि तू उनका फेवरेट स्टूडेंट है, तेरी बात वो नहीं टालेंगी?

चाहे तू कुछ भी बोल निवेद? मैं ये काम हरगिज नहीं करूँगा।
आदित ने दो टूक शब्दों में मना कर दिया. निवेद अब भी उसे गुस्से में घूर रहा था.

मगर यहाँ कोर्बिन इन दोनों के झगडे को नजरअंदाज करते हुए फिर से एनी को रिझाने में लग गया.
एनी. देखो मेरे पास दो मूवी टिकट्स हैं. क्या तुम मेरे साथ मूवी देखने चलोगी?

इस बार भी एनी ने कोर्बिन से अपना मुँह फेर लिया और दूसरी तरफ देखने लगी. कोर्बिन की बदतमीजी अब उसके सब्र का इम्तिहान ले रही थी. मगर वहाँ खडी गरिमा न जाने क्यों इस स्थिति से खुश होती हुई बोली:

कोर्बिन. वो शायद एनी को नहीं आना. लेकिन तुम्हें ऐतराज ना हो. तो क्या मैं चल सकती हूँ तुम्हारे साथ.

इसमें भला कैसा ऐतराज गरिमा. पागल है क्या तू? मैं तेरे साथ क्यों जाऊँगा.
कोर्बिन के इन कडवे और अपमानजनक शब्दों ने गरिमा के दिल को ठेस पहुँचाई. उसे बेहद बुरा लगा कि कोर्बिन ने उसकी भावनाओं की सरेआम धज्जियां उडा दीं.

मगर इस पल आदित की हालत उससे भी बदतर थी. वह आँखें फाडे गरिमा को देख रहा था, जबकि अनामी आदित की तरफ देख रही थी, मानो वह उसके भीतर के टूटे हुए दिल के दर्द को महसूस कर पा रही हो.

तभी अचानक कोर्बिन ने सारी हदें पार करते हुए एनी का हाथ पकड लिया. न जाने उसकी क्या मंशा थी, लेकिन इस हरकत ने एनी के धैर्य का बांध तोड दिया. उसने एक झटके से कोर्बिन की पकड से अपना हाथ छुडाया और पूरी ताकत से कोर्बिन के चेहरे पर एक करारा थप्पड जड दिया!

चटाक! की आवाज गूंज उठी.

कोर्बिन ने सपने में भी नहीं सोचा था कि एनी ऐसा कदम उठाएगी. वह थप्पड खाए गाल पर हाथ रखे, फटी आँखों से एनी को घूरने लगा. वहाँ खडे निवेद, आदित, गरिमा और अनामी भी इस मंजर को देखकर पूरी तरह सुन्न रह गए थे. एनी गुस्से में आगबबूला हो रही थी. उसने अपनी सारी भडास निकालते हुए चिल्लाकर कहा:

हिम्मत कैसे हुई तेरी मुझे छूने की? तुझे एक बार कही बात समझ नहीं आती क्या? मैं पहले से ही किसी के साथ हूँ. और मै बहुत खुश हु.
और अगर मैं सिंगल होती भी. फिर भी तुझ जैसे क्रिमिनल के साथ तो कभी नहीं. कोर्बिन, मुझे तुम्हें देखते हुए भी घिन्न आती है.

एनी का एक- एक शब्द कोर्बिन के आत्मसम्मान को छलनी कर रहा था. इस अपमान ने कोर्बिन के भीतर के शैतान को जगा दिया. अब उसकी आँखों में दीवानगी की जगह हिंसक गुस्सा तैर रहा था.

वह एनी की तरफ और करीब बढने लगा. एनी भले ही गुस्से में थी, पर कोर्बिन के इरादों को भांपकर वह सतर्कता से कदम पीछे हटाने लगी. आदित से यह सब बर्दाश्त नहीं हुआ, वह चिढकर आगे आया और बोला:
उससे दूर रह कोर्बिन.

तू इसमें मत पड आरी. वरना गंदा पिटेगा.
कोर्बिन ने आक्रोश में गुर्राते हुए कहा. उस पर आदित की चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ. निवेद भी कोर्बिन को रोकने के बजाय तमाशबीन बनकर चुपचाप खडा रहा.

कोर्बिन जैसे ही एनी की तरफ एक और कदम बढाने लगा, तभी पीछे से एक कडकती हुई मर्दाना आवाज गूंजी:
क्या हो रहा है यहाँ?

जैसे ही कोर्बिन ने मुडकर देखा, डर के मारे उसके पैर हल्के से डगमगा गए. एनी ने राहत की सांस ली और तुरंत उस लडके के पास जाकर उसका हाथ थामते हुए बोली:
कुछ नहीं हुआ है सुती. हम चले वरना लेट हो जायेंगे.

वहाँ आने वाला लडका सुती ही था. वह भाँप चुका था कि उसके आने से पहले यहाँ कोई बडा बखेडा खडा हुआ था, जिसे एनी उससे छिपाने की कोशिश कर रही थी. उसने आदित की तरफ देखते हुए पूछा:
सब ठीक है ना आदित.

आदित अभी कुछ जवाब देने ही वाला था कि निवेद ने बीच में कूदते हुए बात संभाली:
अरे छोड ना सुती, यहाँ तो सब ठीक है. और वैसे बता, तुम दोनों कहाँ जा रहे हो? तु बोले तो मैं छोड के आऊँ.

फिलहाल सुती का ध्यान निवेद की फालतू बातों पर नहीं था. उसकी तेज आँखें कोर्बिन को घूर रही थीं, जो डर के मारे सुती से नजरें चुराने की नाकाम कोशिश कर रहा था. माहौल में बढते तनाव को भांपकर एनी ने अपने चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान लाई और बोली:

अरे नहीं. उसकी कोई जरूरत नहीं है निवेद. हमें पास ही में जाना है. हम चले जाएँगे.

इतना कहकर एनी जबरदस्ती सुती को वहाँ से खींचने लगी. वह अच्छी तरह जानती थी कि अगर सुती कुछ देर और वहाँ रुका, तो कोर्बिन के साथ उसका खून- खराबा होना तय था, और वह ऐसा कोई तमाशा नहीं चाहती थी.

चलो. एनी ने दोबारा आग्रह किया.

इस बार सुती ने कोर्बिन से अपनी तीखी नजरें हटाईं और एनी के साथ आगे बढ गया. हालांकि, उसके दिमाग में सवालों का बवंडर चल रहा था, जिसे उसने फिलहाल के लिए दबा दिया था.

उन दोनों के जाते ही गरिमा और अनामी भी चुपचाप अपने रास्ते निकल गईं. अब वहाँ सिर्फ कोर्बिन, निवेद और आदित बचे थे—तीनों ही अपने- अपने कारणों से गहरे तनाव और परेशानी में डूबे दिख रहे थे.

तभी Collage के मुख्य द्वार के उस पार से एक महिला बाहर आती दिखाई दी. गुलाबी साडी पहने वह एक बेहद खूबसूरत महिला थीं, जिनकी उम्र लगभग तीस वर्ष के आसपास रही होगी. उनके कोमल चेहरे की बनावट और उस पर तैरती हल्की मुस्कान उनकी सुंदरता में चार चांद लगा रही थी.

उन्हें देखते ही निवेद की आँखें चौंधिया गईं. वह सुध- बुध खोकर एकटक उन्हें निहारने लगा. जब उससे रहा नहीं गया, तो वह आगे बढकर बेताबी से बोला:

सुभश्री मैम. क्या आप जा रही हो. आप. उम. म. मतलब. क्या मैं आपको घर छोड दूँ. मैं अभी उसी ओर जाने वाला हूँ.

थैंक्स निवेद. लेकिन शायद तुम भूल रहे हो कि मेरे पास स्कूटी है.
सुभश्री मैम ने बेहद सहजता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया और अपनी पार्क की हुई स्कूटी की तरफ बढने लगीं.

यह देखकर निवेद हडबडा गया. वह अपनी कोहनी से आदित के कंधे पर हल्के से मारने लगा, मानो उसे कोई गुप्त इशारा कर रहा हो. फिर खुद ही सुभश्री मैम को आवाज देते हुए उन्हें रोकता है और बोला:

रुकिए मैम. ये आर्यमन आपसे कुछ कहना चाहता है.