फ़ेक फ़िऑन्से चैलेंज - 2 priyanka katiyar द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

फ़ेक फ़िऑन्से चैलेंज - 2


महल जैसे मल्होत्रा हाउस का ड्रॉइंग रूम अचानक बिल्कुल शांत हो गया।
दरवाज़े पर खड़ी लड़की ने हील्स की टक-टक के साथ अंदर कदम रखा।
उसका नाम था रिया कपूर।
स्टाइलिश, कॉन्फिडेंट और बेहद खूबसूरत।
उसने सीधे आर्यन की तरफ देखा।
"तो... यही है तुम्हारी होने वाली मंगेतर?"
अनन्या ने धीरे से आर्यन की ओर देखा।
"ये...?"
आर्यन ने लंबी साँस ली।
"रिया... मेरी एक्स।"
अनन्या ने मन ही मन सोचा—
"वाह! कहानी तो शुरू होने से पहले ही ट्विस्ट आ गया।"
रिया हँस पड़ी।
"आर्यन, तुम्हारा मज़ाक अच्छा है। तुम शादी? और वो भी इतनी... सिंपल लड़की से?"
अनन्या मुस्कुराई।
"धन्यवाद। सिंपल होना बुरी बात नहीं होती।"
रिया ने पहली बार महसूस किया कि सामने वाली लड़की डरने वालों में से नहीं है।
दादी बीच में आ गईं।
"जो भी हो, मेरी बहू अनन्या ही बनेगी।"
रिया गुस्से से वहाँ से चली गई, लेकिन जाते-जाते बोली—
"मैं वापस आऊँगी... और सच सबके सामने लेकर आऊँगी।"
अगली सुबह
अनन्या ऑफिस जाने के लिए बस पकड़ने निकली ही थी कि उसके सामने वही काली लग्ज़री कार आकर रुकी।
खिड़की नीचे हुई।
आर्यन बोला—
"बैठो।"
"मैं बस से चली जाऊँगी।"
"अब तुम मेरी फेक फ़िऑन्से हो। अगर किसी ने देख लिया तो?"
अनन्या बड़बड़ाई—
"फेक रिश्ते में भी इतनी मेहनत..."
वह कार में बैठ गई।
पाँच मिनट बाद...
पूरी कार में सन्नाटा।
अनन्या चुप नहीं रह सकी।
"आप हमेशा ऐसे ही रहते हो?"
"कैसे?"
"जैसे किसी ने आपका Wi-Fi बंद कर दिया हो।"
आर्यन ने पहली बार ज़ोर से हँसी रोकने की कोशिश की।
"तुम बहुत बोलती हो।"
"और आप बहुत कम। इसलिए बैलेंस बना रहता है।"
ऑफिस में
दोनों साथ अंदर आए।
पूरे ऑफिस में सन्नाटा।
फिर फुसफुसाहट...
"सर किसी लड़की के साथ आए हैं!"
"वो भी हाथ में कॉफी लेकर!"
"क्या ये... डेट कर रहे हैं?"
आर्यन ने सबकी तरफ देखा।
एक सेकंड में पूरा ऑफिस काम में लग गया।
अनन्या धीरे से बोली—
"आपको देखकर लोग साँस लेना भी भूल जाते हैं।"
"अच्छा है। कम शोर रहता है।"
शाम
दादी ने नई घोषणा कर दी।
"सगाई तक अनन्या इसी घर में रहेगी।"
दोनों एक साथ चिल्लाए—
"क्या??"
दादी मुस्कुराईं।
"एक-दूसरे को जानोगे तभी तो रिश्ता मजबूत होगा।"
आर्यन ने धीरे से कहा—
"हमारा रिश्ता... नकली है।"
दादी सुन नहीं पाईं।
"क्या कहा?"
"मैंने कहा... बहुत अच्छा आइडिया है।"
नया घर... नई मुसीबत
अनन्या को जो कमरा मिला...
वह आर्यन के कमरे के ठीक सामने था।
पहली रात...
उसे नींद नहीं आ रही थी।
वह पानी लेने नीचे गई।
उसी समय आर्यन भी किचन में था।
दोनों ने एक ही पानी की बोतल पकड़ ली।
"सॉरी।"
"सॉरी।"
दोनों हँस पड़े।
अनन्या बोली—
"देखा? पहली बार बिना लड़ाई बात हुई।"
आर्यन मुस्कुराया।
"रिकॉर्ड बना लो।"
अगले दिन की सबसे बड़ी मुसीबत
दादी ने कहा—
"आज तुम दोनों मिलकर खाना बनाओगे।"
आर्यन चौंक गया।
"मैं?"
"हाँ।"
अनन्या बोली—
"आपको खाना बनाना आता है?"
"मैगी।"
"बस?"
"दो मिनट वाली।"
"अगर चार मिनट लग जाएँ?"
"तो मैं ऑर्डर कर देता हूँ।"
अनन्या हँसते-हँसते झुक गई।
किचन में...
आर्यन ने पहली बार प्याज़ काटी।
पाँच सेकंड बाद...
उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे।
अनन्या हँसते-हँसते बोली—
"इतनी जल्दी इमोशनल?"
"ये प्याज़ की गलती है।"
फिर अनन्या ने उसे सिखाया।
लेकिन आर्यन ने नमक की जगह चीनी डाल दी।
सब्ज़ी मीठी हो गई।
दोनों एक-दूसरे को देखकर हँसते-हँसते लोटपोट हो गए।
दादी ने खाना चखा।
कुछ पल चुप रहीं...
फिर बोलीं—
"प्यार थोड़ा ज़्यादा पड़ गया लगता है।"
दोनों के चेहरे लाल हो गए।
उसी रात
अनन्या बालकनी में बैठी चाँद देख रही थी।
आर्यन भी आ गया।
कुछ देर दोनों चुप रहे।
फिर आर्यन बोला—
"तुम हमेशा इतनी खुश कैसे रहती हो?"
अनन्या मुस्कुराई।
"क्योंकि दुख तो बिना बुलाए आ ही जाते हैं... खुशी को खुद बुलाना पड़ता है।"
आर्यन पहली बार उसे ध्यान से देखने लगा।
वह सिर्फ़ हँसमुख नहीं थी...
वह मज़बूत भी थी।
अगले दिन
रिया फिर ऑफिस पहुँची।
उसने सबके सामने आर्यन का हाथ पकड़ लिया।
"चलो, हमें बात करनी है।"
अनन्या चुप रही।
लेकिन पता नहीं क्यों...
उसे अच्छा नहीं लगा।
आर्यन ने धीरे से अपना हाथ छुड़ाया।
"रिया... अब ये ठीक नहीं है।"
रिया ने अनन्या को देखा।
"तुम जीत नहीं पाओगी।"
अनन्या मुस्कुराई।
"मैं किसी से लड़ ही नहीं रही।"
रात
अनन्या अपने कमरे में बैठी थी।
वह सोच रही थी—
"मुझे फर्क क्यों पड़ रहा है?"
उसी समय दरवाज़े पर दस्तक हुई।
आर्यन खड़ा था।
उसके हाथ में एक छोटा-सा डिब्बा था।
"ये क्या है?"
"तुम्हारी अंगूठी।"
"अंगूठी?"
"कल प्रेस कॉन्फ़्रेंस है। अगर फेक मंगेतर हैं... तो रिंग भी चाहिए।"
अनन्या ने डिब्बा खोला।
उसमें बेहद खूबसूरत डायमंड रिंग थी।
"ये बहुत महँगी होगी..."
आर्यन मुस्कुराया।
"रिंग की कीमत नहीं... पहनने वाले की अहमियत होती है।"
कुछ पल के लिए दोनों की नज़रें मिलीं।
कमरे में बिल्कुल ख़ामोशी थी।
तभी...
बत्ती चली गई।
पूरा कमरा अँधेरे में डूब गया।
अनन्या घबरा गई।
उसका पैर फिसला...
और वह सीधे आर्यन की बाँहों में आ गिरी।
दोनों की धड़कनें तेज़ थीं।
इतने में...
बत्ती वापस आ गई।
दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब थे।
तभी बाहर से दादी की आवाज़ आई—
"अरे, तुम दोनों ठीक हो ना?"
दोनों एक झटके से अलग हो गए।
आर्यन ने खाँसते हुए कहा—
"जी... सब ठीक है!"
अनन्या अपने चेहरे की मुस्कान छिपा नहीं पा रही थी।
लेकिन उसे यह नहीं पता था...
कि दरवाज़े के बाहर खड़ी रिया ने यह सब देख लिया था।
उसने धीरे से अपने फोन पर किसी को कॉल किया और कहा—
"प्लान शुरू करो। अब खेल दिल का नहीं... दिमाग का होगा।"
जारी रहेगा... 💖