कंटेनर की तलाशी ले रहे थे, लेकिन वह 'मशीनरी' वाला कंटेनर कहीं नहीं था।
अभिमन्यु: "मैडम, हमने पिछले 2 घंटों में हर बड़ी गाड़ी चेक की है। वह कंटेनर यहाँ पहुँचा ही नहीं। या तो उसने रास्ता बदल लिया है, या वह कहीं गायब हो गया है।"
संध्या सिंह: "नहीं अभिमन्यु, अपराधी कितना भी शातिर हो, ज़मीन नहीं निगल सकता। अगर वह बॉर्डर पर नहीं आया, तो इसका मतलब है कि वह 'लोकल' किसी की शरण में गया है। बेगूसराय के आसपास ऐसी कौन सी जगह है जहाँ पुलिस का जाना मना है?"
तभी एक कांस्टेबल दौड़ता हुआ आता है।
"मैडम! एक खबर मिली है। अजय कौशल और शहर के दूसरे बड़े रसूखदार नेता ठाकुर भानु प्रताप के बीच पुरानी दुश्मनी है। सुना है ठाकुर के बेटे और साक्षी कौशल के बीच कॉलेज में कुछ बड़ा झगड़ा हुआ था।"
संध्या की आँखें चमक उठीं। "बदला! यह अपहरण तस्करी के साथ-साथ बदले की आग भी है।"
काली हवेली का नर्क
कंटेनर एक पुरानी, वीरान हवेली के तहखाने में पहुँचता है। लड़कियाँ डर से कांप रही थीं। साक्षी कौशल को बाकी लड़कियों से अलग एक सजे-धजे लेकिन बंद कमरे में ले जाया जाता है।
संध्या की दुविधा
संध्या ने कांस्टेबल की तरफ शक भरी नज़रों से देखा। "ठाकुर भानु प्रताप? वह तो पिछले 7 सालों से बेगूसराय सेंट्रल जेल की हाई-सिक्योरिटी सेल में बंद है। उस पर भ्रष्टाचार और कत्ल के संगीन इल्जाम हैं। और रही बात उसके बेटे विक्रम की, तो मेरी जानकारी के मुताबिक वह स्विट्जरलैंड में अपना बिजनेस संभाल रहा है।"
अभिमन्यु ने सिर खुजलाते हुए कहा, "मैडम, लेकिन रसूखदार लोग जेल के अंदर से भी सरकार चलाते हैं।"
संध्या सिंह: "नहीं अभिमन्यु, उस जेल की इंचार्ज मैं खुद रह चुकी हूँ। वहां की सुरक्षा अभेद्य (impenetrable) है। और अगर विक्रम भारत में होता, तो हमारे इमिग्रेशन रिकॉर्ड में उसकी एंट्री जरूर होती। इसका मतलब है कि कोई 'तीसरा चेहरा' है, जो ठाकुर का नाम इस्तेमाल कर रहा है या फिर हमें गुमराह करने के लिए पुरानी दुश्मनी का सहारा ले रहा है।"
एक अनजाना खौफ
संध्या अपनी टीम के साथ वापस हेडक्वार्टर पहुँचती है। वह साक्षी कौशल के पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड खंगालने लगती है। तभी उसे एक ऐसी फोटो मिलती है जिसे देखकर उसके माथे पर पसीना आ जाता है।
फोटो में साक्षी एक अनजान लड़के के साथ बहस कर रही थी। उस लड़के का चेहरा साफ नहीं था, लेकिन उसके हाथ पर एक 'धधकते हुए शेर' का टैटू बना था—वही लोगो जो जेके दुर्रानी के पास था।
संध्या सिंह: "अभिमन्यु! ये देखो। ये लड़का ठाकुर का बेटा नहीं है। ये तो दुर्रानी का कोई बेहद करीबी आदमी है। इसका मतलब है कि असली मास्टरमाइंड जेके दुर्रानी ही है, और उसने साक्षी को किसी और मकसद के लिए उठाया है।"
काली हवेली का असली सच
इधर, उस पुरानी हवेली में, जिसे 'काली हवेली' कहा जा रहा था, नकाबपोश आदमी अपने बॉस को रिपोर्ट दे रहा था। लेकिन वहां ठाकुर भानु प्रताप नहीं, बल्कि एक आलीशान कुर्सी पर एक नौजवान बैठा था, जिसके हाथ पर वही 'शेर का टैटू' था।
वह कोई और नहीं, जेके दुर्रानी का बेटा 'ज़ोरान' था।
ज़ोरान: (क्रूरता से हँसते हुए) "पुलिस को लगने दो कि ये ठाकुर का काम है। जब तक वो जेल और पुराने रिकॉर्ड्स में उलझे रहेंगे, तब तक हमारी खेप (consignment) बॉर्डर पार कर चुकी होगी।"
उसने साक्षी की तरफ देखते हुए कहा, "साक्षी कौशल, तुम्हारा बाप समझता है कि वो बेगूसराय का राजा है, लेकिन उसे नहीं पता कि इस शहर के असली मालिक हम हैं। तुम्हारी आड़ में हम उन 13 लड़कियों को ऐसी जगह भेजेंगे जहाँ से मौत भी वापस नहीं आती।"
संध्या का मास्टरप्लान
संध्या समझ गई थी कि उसे दो मोर्चों पर लड़ना होगा। एक तरफ उन 13 गरीब लड़कियों की जान बचानी थी जो कंटेनर में थीं, और दूसरी तरफ साक्षी कौशल को ढूंढना था।
संध्या: "अभिमन्यु, हमें दुर्रानी को उसके ही खेल में हराना होगा। हम ये खबर फैलाएंगे कि ठाकुर भानु प्रताप जेल से फरार हो गया है। जैसे ही ये खबर दुर्रानी के कान तक पहुँचेगी, वो घबराकर ठाकुर के असली ठिकाने या अपने गुर्गों से संपर्क करेगा। हमें बस उस एक फोन कॉल को ट्रैक करना है।"
तभी जितेंद्र परमार का एक और भड़काऊ वीडियो वायरल होता है, जिसमें वह दावा करता है कि पुलिस ने जानबूझकर लड़कियों को गायब होने दिया है ताकि बड़े घरानों से पैसा वसूला जा सके।
मुखौटों के पीछे का चेहरा
पुलिस मुख्यालय - अदृश्य दुश्मन की तलाश
संध्या सिंह ने पूरे ऑफिस की दीवारों पर बेगूसराय के नामी लोगों की तस्वीरें लगा दी थीं। वह अपनी पेन से उन चेहरों को देख रही थी।
संध्या सिंह: "अभिमन्यु, सोचो। दुर्रानी के पास इतना पैसा है कि वह पूरे शहर को खरीद सकता है। वह नेपाल बॉर्डर को मैनेज कर रहा है, पुलिस के अंदर उसके खबरी हैं, और जितेंद्र परमार जैसा बिकाऊ पत्रकार उसके इशारों पर नाच रहा है। ऐसा आदमी गुमनाम रहकर यह सब नहीं कर सकता। वह जरूर कोई ऐसा चेहरा है जिस पर समाज आँख मूँद कर भरोसा करता है।"
अभिमन्यु: "मैडम, अगर वह नाम बदलकर हमारे बीच रह रहा है, तो उसका कोई न कोई सुराग तो होगा? न उसका कोई फिंगरप्रिंट है, न कोई तस्वीर। यहाँ तक कि 'दुर्रानी' नाम भी शायद फर्जी हो।"
एक चौंकाने वाली कड़ी
संध्या अचानक रुकी। उसकी नज़र उन 13 गरीब लड़कियों की फाइल पर गई। "अभिमन्यु, इन 13 लड़कियों में से 5 लड़कियां उसी एनजीओ (NGO) में काम करती थीं या मदद लेती थीं, जिसका फंड शहर के सबसे बड़े दानवीर और समाजसेवी डॉ. अद्वैत खन्ना देते हैं।"
अभिमन्यु चौंक गया। "डॉ. अद्वैत? मैडम, वो तो शहर के सबसे सम्मानित व्यक्ति हैं। पिछले महीने उन्होंने पुलिस वेलफेयर के लिए 50 लाख का डोनेशन दिया था।"
संध्या सिंह: "यही तो चालाकी है! सबसे बड़ा चोर अक्सर सबसे ज्यादा दान करता है ताकि पुलिस उस पर कभी शक न करे। दुर्रानी का मतलब हो सकता है— 'दूर रहने वाला'। वह अपनी पहचान सेवा के पीछे छिपा रहा है।"
ज़ोरान का असली रूप
कैमरा अब एक आलीशान चैरिटी ऑफिस के अंदर जाता है। वहां डॉ. अद्वैत खन्ना का बेटा, आर्यन खन्ना, बैठा था। वही आर्यन जिसे दुनिया एक 'बिजनेस टाइकून' और यूथ आइकन' मानती थी।
उधर संध्या और अभिमन्यु भी उसके ऑफिस पहुंच जाते हैं इस बात का पता लगाने की असली कौन है या नकली है या यह दुनिया तो धोखा दे रहा है उन्हें पता है की आर्यन को काली से बहुत डर लगता है इसलिए वह अपने साथ छिपकली लेकर जाते हैं ताकि उसका टैटू देख सकें
आर्यन उन्हें देख कर चुक जाता है और कहता है आओ स्वागत है और कैसा आना हुआ और वह एक दूसरे से बात करने में लग जाते हैं
आर्यन खन्ना का ऑफिस
अभिमन्यु ने बड़ी चतुराई से एक कांच की डिब्बी से छिपकली निकाली और बातों-बातों में आर्यन की शर्ट के कॉलर के पास छोड़ दी। जैसे ही आर्यन को अपने बदन पर रेंगती हुई किसी चीज़ का अहसास हुआ, वह घबरा गया।
आर्यन: (हड़बड़ाते हुए) "ये... ये क्या है? मेरे कपड़ों के अंदर कुछ है!"
उसकी घबराहट का फायदा उठाकर संध्या ने कहा, "मिस्टर आर्यन, शायद कोई कीड़ा या छिपकली है, अपनी शर्ट उतारिए वरना वो काट लेगी!"
आर्यन ने बिना सोचे-समझे अपनी महंगी सिल्क की शर्ट उतार दी। संध्या और अभिमन्यु की आँखें उसके दाहिने कंधे पर टिकी थीं। उन्हें पूरा यकीन था कि वहाँ 'धधकते हुए शेर' का टैटू होगा। लेकिन जैसे ही शर्ट नीचे गिरी, दोनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
आर्यन का शरीर बिल्कुल साफ था। कहीं भी कोई टैटू का निशान नहीं था।
पासा पलट गया
आर्यन का चेहरा अब डर से बदलकर गुस्से से लाल हो गया। उसने अपनी शर्ट वापस पहनी और संध्या की तरफ उंगली उठाकर चीखा।
आर्यन: "यह क्या बत्तमीज़ी है IPS संध्या सिंह? आप एक प्रतिष्ठित नागरिक के ऑफिस में घुसकर यह घटिया मज़ाक कर रही हैं? छिपकली छोड़ना? मेरी शर्ट उतरवाना? क्या यही आपकी 'इन्वेस्टिगेशन' है?"
अभिमन्यु: (हकलाते हुए) "वो... मिस्टर आर्यन, हमें लगा कि शायद..."
आर्यन: "क्या लगा? कि मैं कोई अपराधी हूँ? मेरे पिता ने इस शहर के लिए अपना जीवन दे दिया और आप उनके बेटे को अपमानित कर रही हैं? गेट आउट! अभी इसी वक्त बाहर निकलिए, वरना मैं अभी गृह मंत्री को फोन लगाऊंगा!"
हार या साजिश?
संध्या और अभिमन्यु बेइज्जत होकर ऑफिस से बाहर निकले। बाहर मीडिया और जितेंद्र परमार पहले से ही तैयार थे।
जितेंद्र परमार: (कैमरे पर चिल्लाते हुए) "देखिए दर्शकों! बेगूसराय की पुलिस अब गुंडागर्दी पर उतर आई है। बिना वारंट के डॉ. अद्वैत खन्ना के ऑफिस में तोड़-फोड़ और उनके बेटे के साथ बदसलूकी! क्या संध्या सिंह पागल हो चुकी हैं?"
गाड़ी में बैठते ही अभिमन्यु ने अपना सिर पकड़ लिया। "मैडम, हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई। अगर आर्यन 'ज़ोरान' नहीं है, तो फिर वो कौन था जिसे हमने साक्षी की फोटो में देखा था?"