माई डियर प्रोफेसर - भाग 29 Vartika reena द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

माई डियर प्रोफेसर - भाग 29

-------------
वो युनिवर्सिटी का थिएटर क्लब था। शशांक और चारू किसी बात पर बहस कर रहे थे। 

" यार..दिस इज निडिड! ", चारू अपना सर पकड बोली।

" बट बहुत ड्रामेटिक हो जाएगा प्ले ! ", शशांक चिढ कर बोला।

" ड्रामेटिक नही इमोशनल । "

" तू पागल है। "

" आई नो ! "


चारू के जवाब पर शशांक चीढ कर दुसरी तरफ चला गया। चारू ने ना मे गर्दन हिला दी। 

आने वाले कल्चर्र प्रोग्राम मे थिएटर क्लब भी हिस्सा ले रहा था। चारू हमेशा से ही एक राइटर बनना चाहती थी। उसका इंट्रस्ट हिस्ट्री मे भी इसी कारण से था। 

" आई वांट देयर लव टू भी प्योर लाइक सिया राम । इसलिए स्टोरी जितनी प्रभाव और भावनात्मक होगी उतना अच्छा है। " , चारू बोली।

" मृणा का किरदार निभा सके..ऐसी लडकी कहा से लाओगी? ", शशांक ने भवे उचका कर सवाल किया।  

" पहले शाश्वत तो ढुंढ लूं ! " , चारू ने उसी लहजे मे.जवाब दिया।

तभी चारू ने शशांक पर गहरी निगाह डाली। शशांक ने जैसे ही.ये महसूस किया सकपका गया।

" क्या हो.गया ? ऐसे क्यो देख रही ? ", उसने सवाल.किया। 

" तू क्यो शाश्वत का रोल नही.कर.लेता । आजा ! एक बार ट्राई कर के देख ले। " , 

" मै !!", शशांक हैरत मे बोला।

" हां तुम ! ", चारू गंभीरता से बोली। " शशांक प्लीज । वैसे भी.हीरो आर्मी ऑफिसर है। तुम्हे भी तो आर्मी जाइन करनी है। कर ले.ना..! " चारू अब उम्मीद भरी.निगाह से शशांक.को देखने लगी । 

शशांक उसकी प्पी आईज के जादू से खुद को बचा ना पाया और हामी.भर.दी।

अब बस हीरोइन ढूंढनी थी। 

" मै..कर नही सकती। मेरा बास्केटबॉल प्रेक्टिस है। साथ मु ये प्ले डायरेक्ट करना है। और भी काम है। नैना...करेगी नही। वो डिबेट के लिए प्रिपेयर कर रही तो हिस्सा नही ले सकती । कौन..कौन.कहा मिलेगी मृणा ???", चारू सोचते हुए क्लब से बाहर निकल गई।  शशांक बाकी चीजे देखने लगा। 



चारू अभी बाहर निकली ही थी कि किसी टकरा गई।  उसने कसकर आंखे बंद कर ली।

" ये क्लब के बाहर दिवार कहा से आ गया रास्ते मे !!! ", वो चिढ कर बुदबुदाई। 

" आंखे खोलो..तो दिखे ना ।" , अमर की कडक आवाज जैसे ही चारू के कानो मे पडी वो घूमी और भाग गई। 

अमर ने ना मे.गर्दन हिला दी। हांलाकि उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान ले ही आई थी चारू अपनी हरकतो से।







----------------


नव्या कैंटीन मे बैठी फोन कुछ देख रही थी। उसकी स्क्रीन पर एक क्लासिकल डांस विडियो चला हुआ था। अभी व देख ही.रही थी कि उसे कुछ आभास हुआ।  वो.पलटी की सामने से भागते हुए चारू उसी की तरफ आ रही थी। नव्या की आंखे बडी हो गई।  

वो.खडी हुई,  और चकरू की तरफ बड गई।  इंसानी घोडा बनी अभी ब्रेक लगा भी पाती की नव्या ने उसे कंधो से पकड घुमा दिया। चारू झटके से रूक गई।  

" इससे पहले ये इंसानी बिजली मुझपर गिरती...मै तुम्हारा रास्ता ही बदल दी। अब जाओ और कही ओर गीरो । ", नव्या बोली।

" आज तो मै तुझपर ही गिरूंगी।" चारू नव्या की ओर पलट गई। 

" मतलब ? "

" मतलब ये की तुम मुझे मेरे प्ले मे चाहिए।  ", 

" कोई गुडिया हूं क्या जो चाहिए।  नही.आ रही तेरे प्ले मे । " 

" आना पडेगा। "

" जबर्दस्ती है ? " 

" हां..है ! "

" मार दुंगी । "

" भूत बनकर आ जाउंगी । "

" तुम पागल हो । "

" आई नो ! " 

" उफ्फ...चारू!!!!" , नव्या अब खीझ गई थी। उसने चारू को घूर कर देखा तौ चारू ने अपना निचला होंठ हल्के से बाहर निकाल , मासूम सी सूरत बनाकर उसे देखा। 

नव्या ने मा मे गर्दन हिला दी और हार मानते हुए चारू के सर पर एक चपत लगा दी।

चारू खुशी से उच्छल पडी । 

" मुझे पता था तुम मान जाओगी। तुम मेरी.सबसे अच्छी दोस्त हो नव्या " ,चारू नव्या के गले पडते मतलब लगते हुए बोली।

" दोस्त तुम बल पूर्वक बना ली हो । और जियान बनना बंद करो। डोरिमोन कम देखा करो । जियान का डायलॉग बोली रही थी तुम । "

नव्या ने चारू का सर सहला दिया।

चारू बच्चो जैसी थी। उसे लाड ना कर सके कोई,  ऐसा हो ही.नही.सकता था। नव्या भी चारू की चंचलता और उसके बचपने के प्रभाव से बच ना सकी थी।

अपने मोह मे बांध ली हो तुम सबको चारू । बस कभी कोई तुम्हारी इस बच्चो जैसे दिल को चोट ना पहुचाए। 





क्रमशः