ढेंचू-ढेंचू वाला युनिकॉर्न CA Parmeshwar Rathi द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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ढेंचू-ढेंचू वाला युनिकॉर्न

१. एक अजीब सुबह और जादुई गधा

सुखिया के पास एक गधा था, जिसका नाम उसने 'बहादुर' रखा था। बहादुर स्वभाव से थोड़ा आलसी और खाने-पीने का शौकीन था। एक रात, सुखिया का दस साल का बेटा चिंटू टीवी पर हैरी पॉटर जैसी कोई जादुई फिल्म देख रहा था। फिल्म खत्म होने के बाद उसके दिमाग में शरारत सूझी। उसने घर में रखी सफेद पुट्टी, फेविकोल और एक पुरानी प्लास्टिक की आइसक्रीम कोन (Cone) उठाई। चिंटू ने सोते हुए बहादुर गधे के माथे के ठीक बीचों-बीच उस आइसक्रीम कोन को फेविकोल और पुट्टी की मदद से मजबूती से चिपका दिया। सुबह की धूप में वह कोन बिल्कुल एक सींग की तरह चमक रहा था।

सुबह जब सुखिया अपनी आंखें मलता हुआ तबेले में गया, तो उसकी नजर बहादुर पर पड़ी। बहादुर शांति से घास चबा रहा था, लेकिन उसके माथे पर एक फीट लंबा, नुकीला सफेद सींग चमक रहा था। सुखिया की चीख निकल गई, "अरे मोरी मैया! यो क्या हो गयो!"

सुखिया की आवाज सुनकर उसकी पत्नी रामरती और पड़ोसी मंटू भागे चले आए। मंटू शहर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, इसलिए वह खुद को वैज्ञानिक समझता था। मंटू ने अपनी आंखें सिकोड़कर बहादुर को देखा और चिल्लाया, "सुखिया भैया! यो गधा ना है! यो तो अंग्रेजी किताबों वाला रहस्यमयी 'युनिकॉर्न' (Unicorn) है! करोड़ों में बिकता है यो!"

२. अफवाह की आग और मीडिया का तमाशा

'युनिकॉर्न' शब्द झमरी गांव के लोगों के लिए नया था। दोपहर तक यह बात पूरे गांव में फैल गई कि सुखिया के घर साक्षात देवलोक का घोड़ा उतरा है, जिसके माथे पर दिव्य सींग है। गांव के सरपंच जी अपनी चमचमाती स्कॉर्पियो से सुखिया के घर पहुंचे। उन्होंने गधे को दूर से देखा। बहादुर ने ठीक उसी समय जोर से 'ढेंचू-ढेंचू' किया। सरपंच ने हाथ जोड़ लिए, "अहा! दिव्य प्राणी की वाणी में भी कितना गंतव्य है! यह हमारे गांव का सौभाग्य है।"

शाम होते-होते लोकल न्यूज चैनल 'खलबली न्यूज' के रिपोर्टर बबुआन यादव अपनी पूरी टीम और कैमरे के साथ सुखिया के आंगन में लैंड कर गए। रिपोर्टर ने माइक संभालते हुए कैमरे के सामने चिल्लाना शुरू किया:"ब्रेकिंग न्यूज! क्या कलयुग में हुआ है सतयुग का अवतार? देखिए इस रहस्यमयी युनिकॉर्न को, जो साक्षात सुखिया के आंगन में घास चर रहा है!वैज्ञानिक हैरान हैं, तांत्रिक परेशान हैं! क्या इस सींग को छूने से लॉटरी लग सकती है? जानने के लिए देखते रहिए!"

बहादुर इस सारे तमाशे से बेखबर मजे से चने की दाल खा रहा था। कैमरा जैसे ही उसके मुंह के पास जाता, वह कैमरे के लेंस को ही चाटने की कोशिश करने लगता। रिपोर्टर ने इसे 'युनिकॉर्न का आशीर्वाद' घोषित कर दिया।

३. तांत्रिक और चंदे का धंधा

अगले दिन सुबह तक सुखिया का घर एक मेले में बदल चुका था। दूर-दूर के गांवों से लोग 'रहस्यमयी युनिकॉर्न' के दर्शन करने आने लगे। लोग बहादुर के पैरों में पांच-पांच, दस-दस रुपये चढ़ाने लगे। रामरती ने तुरंत मौका संभाला और आंगन में एक बड़ा सा गल्ला रख दिया।

तभी भीड़ को चीरते हुए बाबा भभूतनाथ वहां पहुंचे। बाबा के बाल बिखरे हुए थे और उन्होंने गले में कई तरह की मालाएं पहन रखी थीं। बाबा ने बहादुर को देखकर अपनी आंखें बंद कीं और जोर-जोर से मंत्र पढ़ने लगे। बाबा चिल्लाए, "यह कोई साधारण पशु नहीं है! इसके भीतर पाताल लोक के गुप्त खजाने का नक्शा छुपा है। यह सींग रात को बारह बजे अंतरिक्ष से तरंगें पकड़ता है!"

भीड़ में फुसफुसाहट शुरू हो गई। बाबा ने सुखिया से कहा, "इसकी सुरक्षा के लिए मुझे आज रात यहां 'महा-युनिकॉर्न यज्ञ' करना होगा, जिसके लिए केवल इक्कीस हजार रुपये की दक्षिणा लगेगी।" सुखिया डर गया और उसने गल्ले में जमा हुए पैसों में से बाबा को एडवांस दे दिया।

४. पुलिस और प्रशासन की एंट्री

बात इतनी बढ़ गई कि जिले के कप्तान साहब (SP) तक खबर पहुंच गई। कप्तान साहब को लगा कि कोई दुर्लभ विदेशी जानवर तस्करी करके लाया गया है। वे दो जीप पुलिस बल के साथ झमरी गांव पहुंच गए।

पुलिस ने आते ही सुखिया के आंगन को चारों तरफ से घेर लिया। दरोगा जी ने चिल्लाकर कहा, "कानून को अपने हाथ में मत लो! इस रहस्यमयी विदेशी जानवर को तुरंत सरकारी कब्जे में दिया जाए।"

सुखिया हाथ जोड़कर रोने लगा, "माई-बाप, यो तो हमार बहादुर है। बचपन से पाल रहे हैं।"दरोगा ने डांटा, "चुप रहो! गधे के माथे पर सींग देखा है कभी? यह इंटरनेशनल स्मगलिंग का मामला लगता है।"

तभी वहां वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट के एक डॉक्टर साहब को बुलाया गया, ताकि वे इस 'रहस्यमयी प्रजाति' की जांच कर सकें। डॉक्टर साहब ने अपना चश्मा ठीक किया और बड़े ध्यान से बहादुर के पास गए। बहादुर ने डॉक्टर साहब की जेब में रखा हुआ बिस्कुट का पैकेट सूंघ लिया और अपनी जीभ से उनकी शर्ट को गीला कर दिया।

५. रहस्य का पर्दाफाश

डॉक्टर साहब ने बहादुर के माथे के सींग को पकड़कर हिलाने की कोशिश की। धूप तेज हो चुकी थी, जिसकी वजह से चिंटू द्वारा लगाया गया फेविकोल और पुट्टी का जोड़ थोड़ा ढीला हो गया था। डॉक्टर साहब ने जैसे ही थोड़ा जोर लगाया, वह 'रहस्यमयी दिव्य सींग' उखड़कर उनके हाथ में आ गया!

सींग के नीचे गधे की चमड़ी पर सफेद पुट्टी और फेविकोल की परत साफ दिख रही थी। डॉक्टर साहब ने उस सींग को घुमाकर देखा, तो उसके अंदर साफ अक्षरों में लिखा था: "क्वालिटी आइसक्रीम - कीमत ₹१०"।

पूरे आंगन में सन्नाटा छा गया। रिपोर्टर का माइक नीचे गिर गया। बाबा भभूतनाथ चुपके से भीड़ से पीछे हटने लगे। सरपंच जी ने अपनी स्कॉर्पियो की चाबी जेब में डाल ली।

दरोगा ने गुस्से में सुखिया को देखा, "तो यह तुम्हारा इंटरनेशनल युनिकॉर्न है? जनता को बेवकूफ बनाते हो?"

तभी कोने में खड़ा चिंटू रोने लगा, "पुलिस अंकल, पापा को मत पकड़ो। मैंने ही रात को बहादुर के सिर पर आइसक्रीम का कोन चिपकाया था। मुझे नहीं पता था कि यह सचमुच का जादू बन जाएगा।"

६. कहानी का खुशनुमा अंत

पूरी बात समझ में आते ही वहां मौजूद भीड़ ठहाके मारकर हंसने लगी। रिपोर्टर ने तुरंत अपनी स्क्रिप्ट बदली और नया प्रोमो रिकॉर्ड किया: "देखिए कैसे एक बच्चे की शरारत ने उड़ाए पूरे प्रशासन के तोते! अंधविश्वास का भंडाफोड़!"

पुलिस ने सुखिया को चेतावनी देकर छोड़ दिया। बाबा भभूतनाथ का एडवांस पैसा भी रामरती ने वापस छीन लिया।

बहादुर, जो कुछ घंटों के लिए 'रहस्यमयी युनिकॉर्न' बना था, अब फिर से एक आम गधा बन चुका था। हालांकि, उस दो दिन के ड्रामे से सुखिया के गल्ले में इतनी कमाई हो चुकी थी कि उसने बहादुर के लिए सालभर के बढ़िया चारे और चने का इंतजाम कर दिया। आज भी झमरी गांव में जब कोई बहुत ज्यादा फेंकने की कोशिश करता है, तो लोग हंसकर कहते हैं, "ज्यादा मत उड़ो भाई, वरना माथे पर आइसक्रीम का कोन चिपका देंगे!"