Objection, Ms. Singhania! - 1 Aarushi Singh Rajput द्वारा क्राइम कहानी में हिंदी पीडीएफ

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Objection, Ms. Singhania! - 1

रात का गहरा अंधेरा चारों तरफ फैला हुआ था।

सड़क लगभग सुनसान थी।

दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था।

एक काली कार तेज़ रफ्तार से सड़क पर दौड़ी चली जा रही थी।

उसकी हेडलाइट्स अंधेरे को चीरती हुई आगे बढ़ रही थीं।
अचानक...

कार का संतुलन बिगड़ गया।

टायरों के सड़क पर घिसटने की तेज़ आवाज़ गूँजी।
"स्क्रीईईच...!"

अगले ही पल कार सड़क किनारे बने डिवाइडर से टकरा गई।

धड़ाम!

टक्कर इतनी भयानक थी कि पूरी कार पलट गई।

कुछ सेकंड के लिए सब कुछ शांत हो गया

फिर कार के अगले हिस्से से धुआँ निकलने लगा।

और देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगीं।

कुछ ही क्षणों में पूरी कार आग की चपेट में आ गई।

काला धुआँ आसमान की तरफ उठने लगा।

एक दिन पहले

सुबह का समय था।

सिटी कोर्ट के बाहर मीडिया की लंबी लाइन लगी हुई थी।
रिपोर्टर अपने कैमरों के साथ कोर्ट के मुख्य गेट की तरफ नजरें लगाए खड़े थे।

तभी दूर से पुलिस की गाड़ियों का काफिला दिखाई दिया।
उन्हें देखते ही मीडिया में हलचल मच गई।

सभी रिपोर्टर तेजी से पुलिस वैन की तरफ दौड़ पड़े।
"मैम! क्या आपको लगता है कि आपको फँसाया गया है?"
"मैम! क्या आज आपको बेल मिल जाएगी?"

"मैम! आप एक महीने से जेल में हैं, आपका क्या कहना है?"
"मैम! प्लीज़ कुछ तो कहिए!"

सवालों की बौछार होने लगी।
पुलिस वैन के अंदर बैठी एक महिला, जिसकी उम्र लगभग बत्तीस-तैंतीस वर्ष रही होगी, ये सब सुनकर घबरा गई।

उसके चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था।
वह चुपचाप बैठी रही।

जैसे उसके पास बहुत सारे जवाब हों...
लेकिन उन्हें कहने की इजाज़त न हो।

पुलिस ने तुरंत सुरक्षा घेरा बनाया।

"पीछे हटिए!"

"रास्ता खाली कीजिए!"

महिला को वैन से उतारकर सुरक्षा के बीच कोर्ट के अंदर ले जाया गया।

मीडिया लगातार उसके पीछे सवाल दागती रही।

लेकिन उसने एक शब्द तक नहीं कहा।

उसी समय कोर्ट के बाहर एक और लग्ज़री कार आकर रुकी।

कार को देखते ही मीडिया में फिर से हलचल मच गई।
सभी रिपोर्टर लगभग दौड़ते हुए उस कार की तरफ बढ़ गए।

कुछ ही सेकंड में कार के चारों तरफ कैमरे और माइक्रोफोन का घेरा बन चुका था।

"Mr. Singhania! Mr. Singhania!"

"Sir, आज Priya Sharma के murder case की hearing है।"

"क्या आपको पूरा confidence है कि Priya Sharma को आज bail मिल जाएगी?"

"Sir, क्या आपको लगता है कि आपकी client को जानबूझकर फँसाया गया है?"

"Sir, one statement please!"

सवालों की बौछार लगातार जारी थी।

तभी कार का दरवाज़ा खुला।

अंदर से एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बाहर निकला।

काला कोट, सफ़ेद शर्ट, तेज़ नज़रें और चेहरे पर अटूट आत्मविश्वास।

वह कोई और नहीं बल्कि Mr. Rajveer Singhania थे।
देश के सबसे चर्चित और सफल वकीलों में से एक।

उनकी उम्र लगभग पचपन-छप्पन वर्ष रही होगी, लेकिन उनके व्यक्तित्व में आज भी वही रौब था जिसने उन्हें कोर्टरूम की दुनिया का बड़ा नाम बना दिया था।

जैसे ही वे कार से उतरे, उनके बॉडीगार्ड्स ने तुरंत उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और मीडिया को पीछे हटाने लगे।

Mr. Singhania बिना रुके कोर्ट की तरफ बढ़ते रहे।

मीडिया अब भी लगातार सवाल पूछ रही थी।
तभी चलते-चलते उन्होंने कहा,

"Justice may be blind... but the law isn't."

उनकी आवाज़ शांत थी, लेकिन उसमें ऐसा विश्वास था
जिसने कुछ पल के लिए सभी को चुप कर दिया।

वे आगे बढ़ते हुए बोले,

"Today, Priya's truth will come out in front of the entire world."

"And I'll make sure the truth prevails."

इतना कहकर वे आगे बढ़ने ही वाले थे कि भीड़ में खड़े एक रिपोर्टर ने ऊँची आवाज़ में पूछा,

"And what if you lose the case, Mr. Singhania?"

यह सुनकर Mr. Singhania रुक गए।

उन्होंने धीरे से अपनी कोट की कॉलर ठीक की।

फिर उस रिपोर्टर की तरफ देखा।

उनके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान उभरी।

"Lose?"

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,

"That word doesn't exist in my dictionary, young man."

कुछ पल रुककर उन्होंने अपनी घड़ी की तरफ देखा और फिर कहा,

"Winning is all that matters."

यह कहकर वे मुड़े और कोर्ट के अंदर चले गए।

उनके जाते ही मीडिया में फिर से चर्चा शुरू हो गई।