अनकहा जुनूँ - 7 Priya Chaudhary द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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अनकहा जुनूँ - 7

(घड़ी की सुई की टिक-टिक, धीरे-धीरे मद्धम होती हुई। कमरा पूरी तरह शांत, लेकिन एक अजीब सी भारीपन महसूस हो रहा है)
नरेटर: खिलौना टूट चुका था, लेकिन घर के हर कोने में अभी भी निकी की मौजूदगी का एहसास बाकी था। बियर ने फर्श पर बिखरे खिलौने के टुकड़ों को अपनी आँखों से घूरा। वो टुकड़े मरे हुए नहीं लग रहे थे, बल्कि उनमें अभी भी एक अजीब सी धड़कन थी। बियर उठकर खड़ा हुआ। उसका शरीर कांप रहा था। उसने खिड़की की ओर देखा, बाहर अब उजाला होने वाला था, लेकिन वो अंधेरा जो उसके अंदर घर कर गया था, वो सूरज की किरणों से मिटने वाला नहीं था।
बियर: (स्वयं से बुदबुदाते हुए) "मैंने उसे खत्म कर दिया... फिर भी... फिर भी मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि वो कहीं नहीं गई?"
नरेटर: बियर ने एक लंबा सांस लिया और रसोई की ओर बढ़ा। उसे प्यास लगी थी। जैसे ही उसने पानी के गिलास को छुआ, उसे लगा जैसे उसके हाथ में किसी और की ठंडक है। गिलास उसके हाथ से फिसलकर नीचे गिर गया। कांच के टूटने की आवाज़ ने घर के सन्नाटे को चीर दिया। तभी, दीवार पर लगी घड़ी अचानक रुक गई। ठीक उसी समय पर—जो निकी की मौत का समय था।
(साउंड: अचानक कमरे में निकी की हँसी की गूँज, जो अब किसी ठंडी हवा की तरह बियर के चारों ओर घूम रही है)
बियर के कान के पास वही आवाज़ आई, जो उसे उसके खुद के अस्तित्व पर शक करने को मजबूर कर रही थी।
निकी की आवाज़ (गूँजती हुई): "तुमने खिलौना तोड़ा है बियर, मेरा वजूद नहीं। मैं तो तुम्हारे हर एक शब्द में हूँ, तुम्हारी हर एक धड़कन में। तुमने मुझे चाहा था, याद है? तुमने कहा था—'मुझे सिर्फ तुम चाहिए।' और अब, तुम चाहकर भी मुझे नहीं निकाल सकते।"
नरेटर: बियर ने आईने की तरफ देखा। आईने में उसे खुद का चेहरा नहीं, बल्कि निकी का चेहरा दिखाई दिया। उसके अपने बाल लंबे हो रहे थे, उसकी आँखें कजरारी हो रही थीं। वो निकी का रूप ले रहा था। यह कोई जादू नहीं था, यह उसका 'अंतिम अंजाम' था। उसने जिस जुनूँ को मांगा था, वो अब उसे 'निगल' रहा था। बियर ज़मीन पर गिर पड़ा। उसे अपनी यादें धुंधली होती नज़र आईं। उसे अपने बचपन के दिन, अपनी दुकान, अपना नाम... सब कुछ एक फिल्म की तरह मिटता हुआ महसूस हुआ।
वह समझ गया कि उसने खिलौने से निकी को वापस नहीं बुलाया था, बल्कि उसने 'मृत्यु' को आमंत्रण दिया था। जो निकी उसके साथ थी, वो कोई आत्मा नहीं थी, वो उसकी खुद की 'आकांक्षाओं का अंत' था। बियर ने अपनी आखिरी बची हुई ताकत से अपने हाथ उस टूटे हुए खिलौने की तरफ बढ़ाए। उसने उस टुकड़े को उठाया जिसमें निकी की आँख थी। उसने उसे अपनी छाती से लगा लिया।
बियर: "अगर... अगर तुम यही चाहती हो... तो मुझे अपने साथ ले चलो।"
(साउंड: कमरे का सन्नाटा एकदम गहरा हो गया, जैसे ब्रह्मांड थम गया हो)
नरेटर: जैसे ही उसने वो टुकड़ा अपनी छाती पर रखा, उसके अंदर का वो अजीब सा भारीपन गायब होने लगा। एक ठंडी रोशनी ने पूरे कमरे को भर दिया। बियर को महसूस हुआ कि वो कहीं उड़ रहा है। कोई डर नहीं, कोई दर्द नहीं। बस एक अनंत शांति।
अगली सुबह, जब पड़ोसी उस घर में आए क्योंकि उन्हें कई दिनों से बियर दिखाई नहीं दिया था, तो उन्हें घर का दरवाज़ा खुला मिला। अंदर का मंज़र देखकर उनके होश उड़ गए। कमरे में कोई नहीं था। कोई लाश नहीं, कोई खून के निशान नहीं। बस फर्श पर एक पुरानी तस्वीर पड़ी थी, जिसमें बियर और निकी साथ खड़े मुस्कुरा रहे थे। वो तस्वीर ऐसी लग रही थी जैसे उसे अभी-अभी खींचा गया हो। और कोने में, वो जादुई खिलौना भी अपनी पूरी स्थिति में वापस आ गया था, जैसे उसने कभी कोई संघर्ष देखा ही न हो।
बियर कहाँ गया? क्या वह उस जुनून की दुनिया में कैद हो गया, या वह निकी के साथ उस अनंत यात्रा पर निकल गया? किसी को नहीं पता। उस घर की दीवारों ने अपनी खामोशी में इस रहस्य को हमेशा के लिए दफ़न कर लिया।
__________________________________________________________________________________लेखिका की कलम से: प्रिया चौधरी
इस कहानी को लिखते समय, मेरा उद्देश्य केवल एक डरावनी कहानी सुनाना नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि कैसे जुनून की एक छोटी सी चिंगारी हमारी पूरी दुनिया को राख कर सकती है। बियर का पात्र आप में से किसी का भी प्रतिबिंब हो सकता है—जो प्यार की चाह में हकीकत को भूल जाता है। मैं, प्रिया चौधरी, एक ऐसी लेखिका हूँ जो शब्दों के माध्यम से मानवीय भावनाओं के उन अंधेरों को खोजना पसंद करती हूँ जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। "अनकहा जुनूँ" मेरे लिए केवल एक सीरीज नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि जो हम मांगते हैं, उसे पाने की कीमत बहुत बड़ी हो सकती है। आपकी लेखिका के रूप में, मैं चाहती हूँ कि आप मेरी कहानियों को सिर्फ सुनें नहीं, बल्कि उन्हें महसूस करें।
पाठकों से एक निवेदन (Review Request):
मेरे प्यारे पाठकों और श्रोताओं, यह 7 एपिसोड का सफर आपके बिना मुमकिन नहीं था। 'अनकहा जुनूँ' का यह अंत आपको कैसा लगा?
क्या बियर का अंत सही था?
इस कहानी में आपको सबसे डरावना मोड़ कौन सा लगा?
क्या आप चाहेंगे कि मैं भविष्य में किसी अन्य विषय (जैसे सस्पेंस, प्रेरणादायक, या सामाजिक) पर लिखूँ?
अपने कीमती विचार, फीडबैक और सुझाव नीचे कमेंट्स में जरूर लिखें। आपकी एक छोटी सी राय मेरी लेखनी को और बेहतर बनाने की प्रेरणा देती है।
"इस पूरी सीरीज को सुनने के लिए शुक्रिया। अगर आपको यह कहानी पसंद आई, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर साझा करें और 'फॉलो' करना न भूलें! 🌑✨📖"