कुछ रिश्ते उलझे से - 6-7 Toufeek Ahmad द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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कुछ रिश्ते उलझे से - 6-7

अध्याय 6: जब रिश्ते समझ से टकराते हैं
ज़ोया और अमन ने बहुत सोच-विचार के बाद अपने रिश्ते के बारे में परिवार को बताने का फैसला किया। दोनों जानते थे कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन अब अपने जज़्बात छुपाना भी उनके लिए मुश्किल हो गया था। एक शाम जब सभी लोग घर पर मौजूद थे, तब अमन ने हिम्मत जुटाकर सबके सामने अपनी बात रखी।
उसकी बात सुनते ही कमरे में सन्नाटा छा गया। सबसे पहले ज़ोया के अब्बू बोले, “अमन, तुम दोनों अच्छे दोस्त हो, लेकिन शादी एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है।”
कुछ रिश्तेदारों को दोनों की उम्र का अंतर पसंद नहीं आया। वे तरह-तरह की बातें करने लगे। यह सब सुनकर ज़ोया की आँखें नम हो गईं। उसे लगा कि शायद उसकी मोहब्बत कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुँच पाएगी।
तभी नसरा आगे आई। उसने सभी की तरफ देखते हुए कहा, “मैं इन दोनों को बचपन से जानती हूँ। ये एक-दूसरे की इज़्ज़त करते हैं, एक-दूसरे को समझते हैं और सच में एक-दूसरे से प्यार करते हैं। हमें इनके रिश्ते को एक मौका देना चाहिए।”
नसरा की बात सुनकर माहौल थोड़ा शांत हुआ, लेकिन परिवार वालों ने तुरंत कोई फैसला नहीं लिया। उन्होंने कहा कि पहले अमन अपनी पढ़ाई पूरी करे और अपने करियर पर ध्यान दे। इसके बाद ही इस रिश्ते के बारे में आगे सोचा जाएगा।
अमन और ज़ोया ने परिवार के इस फैसले का सम्मान किया। हालांकि वे थोड़े उदास थे, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा।
अध्याय 7: दोस्ती से प्यार तक का सफर
परिवार की शर्त सुनने के बाद अमन ने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई और करियर पर लगा दिया। वह दिन-रात मेहनत करने लगा। ज़ोया भी हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाती रही।
समय धीरे-धीरे बीतता गया। आखिरकार अमन की मेहनत रंग लाई और उसे एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिल गई। जब यह खबर परिवार वालों को मिली तो सभी खुश हो गए।
कुछ दिनों बाद दोनों परिवार फिर से मिले। इस बार माहौल पहले जैसा तनावपूर्ण नहीं था। अमन की ज़िम्मेदारी और मेहनत देखकर सबका नज़रिया बदल चुका था।
ज़ोया के अब्बू मुस्कुराते हुए बोले, “अमन, तुमने साबित कर दिया कि तुम अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाना जानते हो। हमें इस रिश्ते से अब कोई ऐतराज़ नहीं है।”
यह सुनते ही ज़ोया की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए। अमन ने राहत की साँस ली। उसे लगा जैसे उसकी सबसे बड़ी लड़ाई खत्म हो गई हो।
कुछ ही दिनों बाद दोनों की सगाई रखी गई। घर को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया। रिश्तेदार और दोस्त खुशी में शामिल होने आए।
जब अमन ने ज़ोया को अंगूठी पहनाई तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। नसरा सबसे ज़्यादा खुश थी। उसने मज़ाक करते हुए कहा, “आखिरकार मेरी बेस्ट फ्रेंड और मेरे भाई की कहानी हैप्पी एंडिंग की तरफ बढ़ ही गई!”
सब लोग हँस पड़े। सगाई की उस खूबसूरत शाम में अमन और ज़ोया ने एक-दूसरे की तरफ देखा और महसूस किया कि उनकी दोस्ती अब हमेशा के लिए मोहब्बत में बदल चुकी है। उनकी नई ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सफर अब शुरू होने वाला था।❤️🩷💕💞💓💗❣️💚💛🩵💜