अध्याय 3 — मोहब्बत के इकरार पर जज़्बात की उलझन
मेहंदी की रस्म खत्म हो चुकी थी।
घर में सब लोग हँसी-मज़ाक और डांस में व्यस्त थे, लेकिन ज़ोया का ध्यान बार-बार अमन की तरफ जा रहा था।
अमन भी हर थोड़ी देर में चोरी-छिपे उसे देख लेता।
रात को शोर-शराबे से दूर ज़ोया छत पर चली गई।
ठंडी हवा उसके चेहरे को छू रही थी।
“तुम यहाँ हो…” पीछे से अमन की आवाज़ आई।
ज़ोया ने पलटकर देखा।
“बस… थोड़ा अकेले रहना था,” उसने धीमे से कहा।
अमन उसके पास आकर खड़ा हो गया।
कुछ देर दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर अमन ने गहरी साँस ली।
“ज़ोया, मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ।”
ज़ोया का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
“मैं कई सालों से तुम्हें पसंद करता हूँ… शायद बचपन से। लेकिन अब ये सिर्फ पसंद नहीं रही।”
वो कुछ पल रुका।
“मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ।”
ज़ोया की आँखें फैल गईं।
उसने कभी सोचा नहीं था कि अमन अपने दिल की बात इतनी सीधे कह देगा।
“अमन… ये सब मत कहो,” ज़ोया घबराकर बोली।
“क्यों? क्या तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता?”
ज़ोया चुप हो गई।
उसकी खामोशी अमन को उम्मीद दे रही थी।
“देखो ज़ोया,” अमन बोला,
“मैं तुम्हें किसी मजबूरी में नहीं डालना चाहता। बस अपने दिल की बात बताना चाहता था।”
ज़ोया की आँखें नम हो गईं।
“ये रिश्ता आसान नहीं है अमन… परिवार, उम्र का फर्क, समाज… सब हमारे खिलाफ होंगे।”
“अगर मोहब्बत सच्ची हो तो मुश्किलें मायने नहीं रखतीं।”
ज़ोया ने नजरें झुका लीं।
“लेकिन मैं इतना हिम्मती नहीं हूँ…”
इतना कहकर वो वहाँ से चली गई।
और अमन उसे जाते हुए देखता रह गया। अध्याय 4 — गिल्ट का तूफ़ान ज़ोया के दिल में
अगले दिन से ज़ोया बदल गई थी।
वो अमन से नज़रें चुराने लगी।
जहाँ अमन होता, वो वहाँ से चली जाती।
नसरा ने भी ये बदलाव महसूस कर लिया था।
“तुम दोनों के बीच सब ठीक है ना?” उसने पूछा।
“हाँ… बिल्कुल,” ज़ोया ने झूठी मुस्कान दी।
लेकिन अंदर ही अंदर वो टूट रही थी।
रात को वो अपने कमरे में अकेली बैठी थी।
बार-बार अमन की उदास आँखें उसके सामने आ रही थीं।
“मैंने उसे इतना दुख क्यों दिया…?” वो खुद से बोली।
तभी बाहर बारिश शुरू हो गई।
ज़ोया खिड़की के पास गई तो उसने देखा—
अमन अकेला बारिश में खड़ा था।
उसका दिल बेचैन हो उठा।
वो तुरंत नीचे भागी।
“अमन!” उसने आवाज़ दी।
अमन ने उसकी तरफ देखा लेकिन कुछ नहीं कहा।
“तुम यहाँ बारिश में क्यों खड़े हो?”
अमन हल्का मुस्कुराया।
“कुछ दर्द बारिश के साथ आसान लगते हैं।”
ज़ोया की आँखों से आँसू निकल पड़े।
“आई एम सॉरी…”
अमन चुप रहा।
“मैं तुम्हें चोट नहीं पहुँचाना चाहती थी।”
कुछ पल बाद अमन ने धीरे से पूछा—
“तो क्या तुम्हारे दिल में मेरे लिए कुछ भी नहीं है?”
ज़ोया जवाब नहीं दे पाई।
उसकी खामोशी ही उसके दिल का सच बता रही थी।
अमन पहली बार मुस्कुराया।
और ज़ोया का दिल फिर उलझ गया। अध्याय 5 — रिश्तों की साफ तस्वीर
अब ज़ोया और अमन पहले से ज्यादा करीब आने लगे थे।
दोनों कोशिश करते कि कोई उनके रिश्ते के बारे में ना जान पाए।
लेकिन मोहब्बत कब तक छुपती?
एक दिन नसरा ने दोनों को साथ बैठे बातें करते देख लिया।
वो तुरंत उनके सामने आकर खड़ी हो गई।
“तो ये सब चल रहा है मेरे पीछे?” उसने आँखें छोटी करते हुए कहा।
ज़ोया घबरा गई।
“न… नहीं ऐसी कोई बात नहीं…”
अमन हँस पड़ा।
“दी, अब छुपाने का फायदा नहीं।”
नसरा ने हैरानी से दोनों को देखा।
“मतलब सच में तुम दोनों…?”
अमन ने सिर हिला दिया।
कुछ पल के लिए कमरे में खामोशी छा गई।
फिर अचानक नसरा ड्रामा करते हुए बोली—
“वाह! मेरी बेस्ट फ्रेंड और मेरा भाई… और मुझे सबसे आखिर में पता चला?”
ज़ोया डर गई।
लेकिन अगले ही पल नसरा हँस पड़ी।
“पागलों, मैं तुम दोनों के लिए खुश हूँ।”
ज़ोया ने राहत की साँस ली।
“लेकिन एक बात याद रखना,” नसरा गंभीर होकर बोली,
“परिवार वालों को मनाना आसान नहीं होगा।”
अमन ने मजबूती से कहा—
“मैं सब संभाल लूँगा।”
ज़ोया ने पहली बार बिना डर के उसकी तरफ देखा।
शायद अब उनके रिश्ते की कहानी सच में शुरू होने वाली थी।😊☺️👌