प्यार था… बस कहा नहीं - 1 Payal Author द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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प्यार था… बस कहा नहीं - 1

Part 1 —

पहली बार उसका नाम सुना 

कॉलेज का पहला हफ्ता हमेशा थोड़ा अजीब होता है।
नए चेहरे, नई क्लास, नए लोग… और खुद को उस भीड़ में फिट करने की कोशिश।

रूही के लिए भी सब कुछ नया था।

वो पहली बार अपने शहर से बाहर पढ़ने आई थी। उसके अंदर excitement भी थी और हल्की सी घबराहट भी।
सुबह से ही कॉलेज में काफी शोर था। कोई नए दोस्तों के साथ selfies ले रहा था, कोई seniors से बचता फिर रहा था, तो कोई बस अकेले बैठकर सब observe कर रहा था।
रूही अपनी दोस्त नेहा के साथ कैंटीन के एक कोने में बैठी थी। सामने कॉफी रखी थी, लेकिन उसका पूरा ध्यान आसपास के लोगों पर था।

“तू इतनी चुप क्यों है? नेहा ने पूछा।

“बस… नया माहौल है ना, थोड़ा weird लग रहा है,” रूही हल्का सा मुस्कुराई।

“दो दिन में आदत हो जाएगी।”

इतने में पास वाली टेबल पर कुछ लड़के आकर बैठे। उनकी आवाज़ थोड़ी तेज थी, इसलिए उनकी बातें साफ सुनाई दे रही थीं।

“भाई, आरव फिर नहीं आया?” एक लड़के ने पूछा।
दूसरा हँस पड़ा।

“वो टाइम पर आ जाए तो चमत्कार हो जाएगा।”
“Attitude बहुत है उसमें।”

“Attitude नहीं… बस अलग है थोड़ा।”

रूही का ध्यान अचानक उनकी बातों पर टिक गया।
आरव…
पता नहीं क्यों, लेकिन ये नाम सुनते ही उसने अनजाने में उनकी तरफ देख लिया।

“कौन है ये आरव?” उसने धीरे से नेहा से पूछा।
नेहा ने बिना ज्यादा interest के जवाब दिया,
“सेकंड ईयर में है। ज्यादा किसी से बात नहीं करता। थोड़ा reserved type है।”

“ओह…”

बस इतना ही।

लेकिन पता नहीं क्यों, रूही के मन में वो नाम रह गया।
कुछ देर बाद दोनों कैंटीन से निकलकर क्लास की तरफ जाने लगीं। कॉलेज का लंबा कॉरिडोर students से भरा हुआ था। कोई भागते हुए जा रहा था, कोई हँसते हुए बातें कर रहा था।

रूही जल्दी-जल्दी अपनी किताबें संभालते हुए चल रही थी कि अचानक सामने से आते किसी इंसान से उसकी टक्कर हो गई।
उसके हाथ से सारी किताबें नीचे गिर गईं।

“ओह शिट… सॉरी।”

रूही नीचे झुककर किताबें उठाने लगी। सामने वाला लड़का भी तुरंत नीचे बैठ गया।

“मेरी गलती थी,” उसने शांत आवाज़ में कहा।
रूही ने जैसे ही ऊपर देखा… कुछ सेकंड के लिए वो बस उसे देखती रह गई।

ब्लैक हूडी, हल्के बिखरे बाल, और चेहरे पर ऐसी शांति जैसे वो बाकी लोगों से बिल्कुल अलग हो।
“इट्स ओके,” रूही ने धीरे से कहा।

उस लड़के ने उसकी आखिरी किताब उठाकर उसके हाथ में दी।

“Thanks…”

उसने बस हल्का सा सिर हिलाया।
तभी पीछे से किसी ने आवाज़ लगाई—
“आरव! जल्दी आ भाई!”

रूही का ध्यान तुरंत उस नाम पर गया।
तो ये आरव है…
आरव ने पलटकर अपने दोस्त को देखा, फिर बिना कुछ कहे वहाँ से चला गया।

बस कुछ सेकंड की मुलाकात थी।
ना कोई फिल्मी moment हुआ,

ना कोई background music।

लेकिन उसके जाने के बाद भी रूही कुछ पल वहीं खड़ी रह गई।

अजीब बात ये थी कि वो खुद भी नहीं समझ पा रही थी कि आखिर ऐसा क्या था उस लड़के में… जो उसे बाकी सबसे अलग लगा।

शायद उसकी आँखें।
या उसका कम बोलना।

या फिर वो एहसास… जो पहली बार किसी अजनबी को देखकर हुआ था।
नेहा ने उसके सामने हाथ हिलाया।

“कहाँ खो गई?”

“कहीं नहीं,” रूही ने तुरंत कहा और आगे बढ़ गई।
लेकिन सच तो ये था…
उस दिन पहली बार किसी का नाम उसके दिल में रह गया था।


To Be Continued…