चंद होलियाना समाचार Yashvant Kothari द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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चंद होलियाना समाचार

 चंद होलियाना समाचार

यशवंत कोठारी

1-अकादमी पुरस्कारों का क्या होगा?

केन्द्रीय साहित्य अकादमी के पुरस्कारों की घोषणा की पत्रकार वार्ता स्थगित हो गयी .कई चेहरे मुरझा गए ,डिनर पार्टियाँ स्थगित हो गयी रस रंजन के बजाय  रस भंजन हो गया .कविता और कहानी अटक गयी ,अब सरकार तय करेगी की इनाम किसको ,कब और क्यों मिलेगा .सत्ताधीश राज कवि का साफा किसको बांधेंगे  कौन जानता है ? एक अनजान व्यंग्यकार को पद्मश्री मिल गई,साहित्य  को सत्ता से  और क्या चाहिए . रॉयल्टी की खिड़की किस नौकर के कमीज़ में खुलती है कौन जानता है ?एक पत्रकार ने गुलाबी नगर में पकोड़ियों की दुकान लगा ली ,कविता में क्या रखा है ?

2-किताब पढने के खतरे –किताबें खतरे में हैं यह जुमला पुराना  हो गया  है ,अब किताब की लाइनें पढ़ना भी खतरनाक हो गया है .यह खतरा संसद से सडक तक चल रहा है.बिना छपी किताब  पढने के खतरें तो और भी ज्यादा है .किताबों का प्रकाशन बंद करने का एक अध्यादेश निकलना  चाहिए ,क्या ख्याल है आपका ?किताब की जाँच अब सरकार करेगी,पुलिस करेगी ,असली प्रजातंत्र है कोई मज़ाक नहीं .

3-ए आई आया ए आई आया –बड़ा हल्ला हो रहा है ए आई आ गया है अब क्या होगा ?एक टेक ने बताया अब नौकरी गयी ,एक सरकारी कर्मचारी का बयान  –मैं तो परमानेंट हूँ ,मेरा क्या  बिगड़ेगा ?एक अफसर  ने कहा –ए आई के  भूत से क्या डरना मैंने कई पीढ़ियों का इंतजाम कर लिया है  नेता जी बोले ए आई आये या जाये सरकार हमारी ही रहेगी .एक गृहणी ने साफ़ कहा –बर्तन,झाडू ,  पोंछा तो उनको ही करना है कोई आओ कोई जाओ .मैं किचन बंद कर दूंगी . पर भारत में ए आई को चीनी कुत्ते ने काट लिया.रही सही कसर  एपस्टीन फाइल ने निकाल दी . 

4- सुरक्षा का खतरा --देश  की सुरक्षा को बड़ा खतरा है,अब  महिलाओं के दांत भी हथियार बन गए हैं ,कोई भी सुरक्षित नहीं है.इस काल्पनिक घटना से अखबार टीवी सब भरे पड़े हैं .बिहार जीत लिया अब बंगाल की बारी है , आज की  नारी सब पर भारी है .अब चुनाव  सर से जीते जायेंगे वोट से नहीं . संसद तक में मुखिया सुरक्षित नहीं है ,तो और क्या बात करे ?

5-लिट्फेस्टों की माया –दिवाली के बाद से ही हर शहर में लिट फेस्ट का बुखार चढ़ने लगता है ,हर तरफ लिट-फेस्ट का जलवा बिखरने लगता है .मंच पर वे होते हैं जिन्होंने लिखना पचास साल पहले बंद कर दिया .श्रोताओं के लिए तरसते वक्ता होते हैं. बढ़िया लंच, डिनर व रस रंजन होता है ,लेखक के पैसे से छपी किताब का विमोचन -लोकार्पण होता है सेल्फ पब्लिशिंग के मारे लेखक की जेब कटती रहती है और प्रकाशक की कोठी पर एक मंजिल और चढ़ जाती है .लिटफेस्ट के लिए सरकारों से अनुदान लेना भी एक कला है ,सिस्टम  को समझना पड़ता है कार्यक्रम की फाइल पर वज़न रखना पड़ता है ,एक आयोजक तो साल भर इसी अनुदान से चैन की बंसी बजाते रहते हैं.रचनात्मक लिखने वालों को इन फेस्टों में फटकने नहीं दिया जाता ,सब गुड गोबर कर देने का खतरा रहता है.इन फेस्टों में स्त्री देह से आगे के विमर्श होते हैं सेंट परफ्यूम के वादे होते हैं,कविता से आगे देह हो, तो सफलता निश्चित है.

6-इक्कीसवीं सदी-यह सदी  चौथाई बीत गयी क्या पाया क्या खोया कुछ पता नहीं चलता ,अरावली को बचाना है खेजड़ी को बचाना है मगर सबसे पहले सरकार को बचाना है अगर सरकार गिर गयी तो अरावली या खेज़डी का क्या करना है ,मगर सरकारें आएँगी सरकारें  जाएँगी अरावलीऔर खेजड़ी रहेंगी .लोक कलाओं का क्या करना है ?

बेरोज़गारी ,महंगाई तो शाश्वत है इसका रोना क्यों रोते हो भाई .मन  की सुनो दिल कि सुनो तन तो नाशवान है .इस की चिंता छोड़ो वोट मुझे दो नहीं तो राष्ट्र - द्रोही का तमगा लो.

7-अमेरिकी टेरिफ –ट्रम्प के क्या कहने ,तेल मेरे से लो नहीं तो टेरिफ भुगतों.वो तय करेंगे गेंहूँ , मक्का बादाम ,दूध फल कौन से खाए जायेंगे कौन से नहीं ,कभी बचपन में पी एल 480 का गेंहूँ आता था दूध का पाउडर आता था  हम अब वापस वही पहुँच गए जहाँ  से चले थे ,जो अमेरिका में  है उनके तो हर समय तलवार लटकती है कब हथकड़ी में वापस जाना पड़े .खुदा खैर करे.हैप्पी होली. (कल्पना की उड़ान )

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यशवन्त कोठारी ,701,गोल्डन फार्च्यून  SB-5 ,भवानी सिंह  रोड ,बापू नगर ,जयपुर -302015  मो.-94144612 07