बारिश उस शहर की आदत थी।
हर शाम आसमान ऐसे बरसता था जैसे उसे भी किसी का इंतज़ार हो।
रिया अपनी खिड़की के पास बैठी थी।
टेबल पर रखी कॉफी कब की ठंडी हो चुकी थी, लेकिन उसके हाथ अब भी कप को पकड़े हुए थे।
उसकी आँखों के सामने बस दो चेहरे घूम रहे थे।
आरव…
और कबीर।
दो नाम।
दो एहसास।
दो अधूरी दुनियाएँ।
कभी-कभी जिंदगी इंसान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहाँ सही और गलत में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
रिया भी उसी मोड़ पर थी।
उसने खुद से हजार बार कहा था कि कबीर अब सिर्फ अतीत है।
एक ऐसा अतीत जिसे याद करके सिर्फ दर्द मिलता है।
लेकिन जब उसने उसे फिर से देखा…
तो दिल ने वो सब महसूस किया जिसे वो दो साल से दबा रही थी।
पहला प्यार शायद कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता।
वो बस दिल के किसी शांत कोने में सो जाता है…
और फिर एक दिन अचानक लौट आता है।
अगले दिन कॉलेज में अजीब सी खामोशी थी।
आरव हमेशा की तरह लाइब्रेरी में उसका इंतज़ार कर रहा था।
लेकिन आज उसकी मुस्कान थोड़ी फीकी थी।
रिया उसके सामने बैठ गई।
“तुम ठीक हो?”
उसने धीरे से पूछा।
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“हाँ।”
लेकिन उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं।
रिया उसे बहुत अच्छी तरह समझने लगी थी।
वो जानती थी कि जब आरव ज्यादा मुस्कुराता है… तब वो अंदर से सबसे ज्यादा टूटा होता है।
कुछ देर दोनों चुप बैठे रहे।
फिर आरव ने किताब बंद की और धीरे से पूछा—
“वो वापस आ गया?”
रिया का दिल जोर से धड़का।
उसने नजरें झुका लीं।
“हाँ।”
आरव कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।
फिर बोला—
“तुम अब भी उससे प्यार करती हो?”
ये सवाल सुनते ही रिया जैसे अंदर से रुक गई।
उसने जवाब देना चाहा…
लेकिन शब्द उसके गले में अटक गए।
क्योंकि सच ये था कि वो खुद नहीं जानती थी।
आरव हल्का सा हँसा, लेकिन उसकी हँसी में दर्द था।
“कोई बात नहीं… जवाब मत दो।”
उस दिन पहली बार दोनों के बीच चुप्पी आ गई थी।
और कभी-कभी चुप्पियाँ लड़ाइयों से ज्यादा दर्द देती हैं।
उस शाम कबीर ने रिया को मिलने बुलाया।
बारिश के बाद सड़कें चमक रही थीं।
हवा में ठंडक थी।
रिया जब कैफे पहुँची तो कबीर पहले से वहाँ बैठा था।
वही पुरानी आदत।
हर बार उससे पहले पहुँच जाना।
रिया उसके सामने बैठ गई।
कुछ देर दोनों सिर्फ एक-दूसरे को देखते रहे।
इतने सालों बाद भी…
उनके बीच की खामोशी अजनबी नहीं लगी।
कबीर ने धीरे से पूछा—
“तुम खुश हो?”
रिया मुस्कुराई… लेकिन वो मुस्कान अधूरी थी।
“पता नहीं।”
कबीर उसकी आँखों में देखता रहा।
“मैंने बहुत कोशिश की तुम्हें भूलने की।”
रिया की सांसें भारी होने लगीं।
“फिर भूल क्यों नहीं पाए?”
कबीर हल्का सा हँसा।
“क्योंकि कुछ लोग आदत नहीं बनते… जिंदगी बन जाते हैं।”
रिया तुरंत नजरें झुका गई।
उसकी आँखों में आँसू आ चुके थे।
कबीर ने आगे बढ़कर धीरे से उसका हाथ पकड़ा।
“रिया… अगर मैं उस दिन नहीं जाता… तो क्या आज भी तुम मेरी होती?”
रिया ने हाथ छुड़ाया नहीं।
लेकिन जवाब भी नहीं दिया।
क्योंकि कुछ सवालों के जवाब इंसान के पास होते हैं…
फिर भी वो उन्हें बोल नहीं पाता।
दूसरी तरफ आरव खुद से लड़ रहा था।
उसने कभी सोचा नहीं था कि उसे किसी से इतना प्यार हो जाएगा।
रिया उसकी जिंदगी की वो आदत बन चुकी थी जिसके बिना हर दिन अधूरा लगता था।
उसकी हँसी।
उसकी छोटी-छोटी बातें।
बारिश देखते वक्त उसका चुप हो जाना।
आरव हर चीज से प्यार करने लगा था।
लेकिन अब पहली बार उसे डर महसूस हो रहा था।
डर किसी को खो देने का।
उस रात वो अपने कमरे की बालकनी में खड़ा बारिश देख रहा था जब उसके दोस्त विवान का फोन आया।
“तू ठीक है?”
आरव हँस पड़ा।
“हाँ।”
“झूठ मत बोल।”
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर आरव धीरे से बोला—
“कभी-कभी लगता है मैं उसकी कहानी में बहुत देर से आया।”
विवान चुप हो गया।
आरव ने आँखें बंद कर लीं।
“वो उसे वैसे देखती है… जैसे लोग अपनी सबसे प्यारी यादों को देखते हैं।”
उसकी आवाज टूट गई।
“और मुझे डर है…
कहीं मैं सिर्फ उसकी अकेलेपन की आदत बनकर ना रह जाऊँ।”
बारिश लगातार गिरती रही।
और उस रात आरव पहली बार रोया।
कुछ दिनों बाद कॉलेज ट्रिप रखी गई।
पहाड़ों पर।
रिया नहीं जाना चाहती थी, लेकिन आरव ने बहुत insist किया।
“अगर तुम नहीं गई तो मैं भी नहीं जाऊँगा।”
रिया हँस पड़ी।
“ड्रामा बंद करो।”
लेकिन अंदर ही अंदर उसे अच्छा लगा कि कोई उसके लिए रुकना चाहता है।
ट्रिप के दौरान सब कुछ कुछ देर के लिए सामान्य लगने लगा।
रिया और आरव फिर से साथ हँसने लगे।
लेकिन किस्मत शायद उन्हें चैन से खुश नहीं देखना चाहती थी।
एक रात होटल की छत पर पार्टी चल रही थी।
संगीत, ठंडी हवा और दूर पहाड़ों पर गिरती बारिश।
रिया अकेली रेलिंग के पास खड़ी थी जब कबीर उसके पास आया।
“तुम उससे प्यार करती हो?”
रिया ने उसकी तरफ देखा।
पहली बार कबीर की आँखों में डर था।
रिया ने धीरे से कहा—
“मैं कोशिश कर रही हूँ समझने की।”
कबीर दर्द से मुस्कुराया।
“और मैं कोशिश कर रहा हूँ तुम्हें फिर से खोने से बचाने की।”
रिया की आँखें भर आईं।
“तुमने मुझे पहले ही खो दिया था, कबीर।”
ये सुनते ही कबीर चुप हो गया।
उसके पास कोई जवाब नहीं था।
कुछ देर बाद उसने धीमे से कहा—
“मैं मजबूर था।”
रिया हँस पड़ी… लेकिन उसकी हँसी टूट चुकी थी।
“हर इंसान जो छोड़कर जाता है… यही कहता है।”
उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे।
“तुम्हें पता है मैंने कितना इंतज़ार किया था?”
कबीर कुछ नहीं बोला।
रिया की आवाज कांप रही थी।
“हर बारिश में लगता था तुम वापस आओगे…
हर फोन की आवाज पर लगता था शायद तुम हो…”
वो रो पड़ी।
“लेकिन तुम कभी नहीं आए।”
कबीर की आँखें भी भर चुकी थीं।
उसने धीरे से कहा—
“मैं हर दिन तुम्हारे पास लौटना चाहता था।”
रिया ने उसकी तरफ देखा।
“फिर लौटे क्यों नहीं?”
कबीर ने नजरें झुका लीं।
“क्योंकि मुझे डर था…
कि शायद तब तक तुम मुझे भूल चुकी होगी।”
रिया कुछ पल उसे देखती रही।
फिर धीरे से बोली—
“और तुम्हें क्या लगता है…
जो इंसान सच में प्यार करता है वो इतनी आसानी से भूल जाता है?”
उसी समय पीछे खड़ा आरव ये सब सुन चुका था।
उसके हाथ धीरे-धीरे मुट्ठी में बदल गए।
दिल का टूटना शायद आवाज नहीं करता…
लेकिन उस पल आरव ने उसे साफ महसूस किया।
वो बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया।
अगली सुबह रिया ने आरव को हर जगह ढूँढा।
लेकिन वो उससे बच रहा था।
आखिरकार उसने उसे झील के पास अकेले बैठे देखा।
रिया उसके पास गई।
“तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे?”
आरव हँसा।
लेकिन उसकी आँखें लाल थीं।
“क्या बोलूँ?”
रिया चुप रही।
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“मैंने पूरी कोशिश की, रिया।”
उसकी आवाज भारी हो गई।
“मैंने तुम्हारे हर दर्द को अपना समझा…
हर टूटे हिस्से को प्यार से जोड़ा…”
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“लेकिन कुछ लोग कभी किसी और के नहीं हो पाते।”
रिया का दिल टूटने लगा।
“ऐसा मत बोलो…”
आरव ने पहली बार उसकी बात काट दी।
“फिर क्या बोलूँ?”
वो खड़ा हो गया।
“जब तुम उसे देखती हो ना…
तुम्हारी आँखें बदल जाती हैं।”
रिया कुछ नहीं बोल पाई।
क्योंकि शायद वो सच कह रहा था।
आरव मुस्कुराया।
लेकिन वो मुस्कान हार चुकी थी।
“मैं तुम्हें मजबूर नहीं करूँगा।”
उसने धीरे से कहा—
“प्यार अगर सच हो… तो उसे चुना नहीं जाता।
दिल खुद चुन लेता है।”
ये कहकर वो चला गया।
रिया वहीं खड़ी रह गई।
उसकी आँखों से लगातार आँसू गिर रहे थे।
क्योंकि पहली बार उसे एहसास हुआ…
किसी एक इंसान को चुनना आसान नहीं होता…
जब दिल का एक हिस्सा अतीत में अटका हो…
और दूसरा किसी नए सुकून में जीना सीख रहा हो।
उस रात रिया अकेले बारिश में बहुत देर तक चलती रही।
शहर की लाइट्स धुंधली हो चुकी थीं।
और उसके दिल में सिर्फ एक सवाल था—
“क्या इंसान एक जिंदगी में दो लोगों से प्यार कर सकता है…?”