। । वीर को प्रकाश अंकल की कल की कही हुई बात याद आ जाती है , कि दुनिया तुम्हें तभी देखती है जब तुम सफल हो जाते हो और तुम्हारी सफलता की सराहना भी करती है । लेकिन सफल होने के लिए तुम जो परिश्रम करते हो , उसे कभी नहीं देखती और वीर यही बात सोच कर अब से अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने के बारे में सोच रहा था , जैसा वह अपने पिता के जाने से पहले किया करता था । इसीलिए वह अभी पढ़ रहा था ।वीर का दिमाग वैसे तो बहुत तेज था लेकिन वह जानबूझकर ही पढ़ने में ज्यादा ध्यान नहीं देता था । उसे यह सब पसंद नहीं था । उसके पिता के जाने के बाद वह अकेला सा रहने लगा था लेकिन अब वीर को पढ़ाई करने के कुछ कारण मिल गए थे , इसीलिए वह वही कर रहा था । ।
। । वीर का वीर के बचपन का दोस्त अनुराग वीर को एकटक देखे जा रहा था , वीर ने कुछ ही देर में मैथ्स के लगभग सभी चैप्टर्स को खत्म कर दिया था । उसे यह सब करने में सिर्फ 20 मिनट लगे थे ।अनुराग तो यह सब देखकर भौचक्का सा रह गया था । ।
। । कुछ देर बाद मैथ के टीचर शर्मा सर के पीरियड की बेल लग जाती है और बस थोड़ी ही देर में शर्मा सर उनकी क्लास में आ जाते हैं । शर्मा सर के आते हैं सभी बच्चे जो मस्ती मजाक और चिल्ला - चौट कर रहे थे । वह सभी चुपचाप जाकर अपनी जगह पर बैठ जाते हैं । ।
। ।शर्मा सर सभी से कहते हैं , " हां तो बच्चों.... जैसा कि मैंने कहा था कि आज मैं टेस्ट लूंगा इसीलिए मुझे लगता है कि सभी अच्छे से तैयारी करके आए होंगे , यह टेस्ट तुम्हारी फाइनल एग्जाम के लिए बहुत जरूरी होने वाला है " । ।
। । अभी शर्मा सर कह ही रहे थे , कि तभी उनकी नजर वीर पर जाकर पड़ जाती है , जो कि वही लास्ट बेंच पर बैठा हुआ था । ।
। । वह वीर को देखकर कहते हैं , "वीर खड़े हो जाओ" । ।
। । वीर उनकी बात सुनकर खड़ा हो जाता है । ।
। ।तब शर्मा सर उससे पूछते हैं, " पिछले दो-तीन दिन से तुम कहां पर थे " । ।
। । वीर उन्हें जवाब देते हुए कहता है , " वो... मैं ...कुछ काम था" । ।
। । तभी शर्मा सर चिल्लाते हुए वीर से कहते है, " पढ़ाई से भी ज्यादा जरूरी कुछ काम होता है क्या" । ।
। ।तब वीर जवाब देते हुए कहता है, " नहीं सर वो... ऐसी बात नहीं है "। ।
। । तभी वीर को बीच मे ही टोकते हुए शर्मा सर बोलते हैं , " अगर इस बार तुम्हें टेस्ट में कम नंबर आते हैं , तो मैं प्रिंसिपल सर से कह कर तुम्हें दूसरे section में डलवा दूंगा...। मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे अकेले की वजह से पूरी क्लास का एवरेज ग्रेड खराब हो "। ।
। । शर्मा सर की बात सुनकर वीर अपना बस सर झुका लेता है पर कुछ कहता नहीं है । ।
। । फिर थोड़ी ही देर बाद टेस्ट शुरू होता है और सभी लिखना शुरु कर देते हैं।
। ।लगभग आधे घंटे बाद टेस्ट खत्म हो गया था शर्मा सर भी क्लास से चले गए थे । । तब वीर का दोस्त अनुराग वीर से पूछता है , " हां.... भाई कैसा गया टेस्ट"। ।
। । अनुराग के सवाल का जवाब देते हुए वीर उससे कहता है, " हां वैसे तो ठीक ही गया है" । ।
। । यह सुनकर अनुराग की आंखें बड़ी हो जाती है , " क्या कहा... ठीक ही गया है। ऐसा कैसे हो सकता है , तूने तो बस 20 मिनट ही पढ़ाई की थी " । ।
। । तब वीर अनुराग को जवाब देते हुए कहता है , " चल छोड़ ना अब क्या करना है इन सब बातों से...? । ।
। ।वीर की बात सुनकर आ अनुराग भी उसपर ज्यादा दबाव नहीं डालता है और वीर को जाने देता है । ।
। ।शाम को वीर जब घर पहुंचता है , तब प्रकाश अंकल के बताए अनुसार वह अपने रूम में फिर से ध्यान लगाने के लिए बैठ जाता है । वीर को शुरुआत में बस यही करना था , कि वह रोजाना नियमित रूप से ध्यान लगाता रहे ताकि वह अपने एलीमेंटल पावर को कंट्रोल कर सके और उसके बाद में difficult conditions में भी वह focus कर सके , ताकि जब वह खतरे में हो तब उसका ध्यान ना भटके और एलिमेंट को अच्छे से कंट्रोल कर सके । ।
। । दरअसल जब कोई रोजाना नियमित रूप से ध्यान लगाता है , तो वह किसी भी चीज पर बहुत अच्छे से focus कर पाता है । इसीलिए प्रकाश अंकल ने वीर से कहा था कि वह रोजाना ध्यान लगाता रहे ताकि वह जब Mutant Zone के खतरों का सामना करें तब डर, घबराहट और जल्दबाजी में वह अपने एलिमेंट्स को ठीक से कंट्रोल कर सके । ।
। ।कई बार Mutant Zone में अच्छे से अच्छे और पावरफुल लोग भी डर और घबराहट के चक्कर में कई बार अपने एलिमेंट्स को कंट्रोल नहीं कर पाते थे और वह वहां पर एक साधारण इंसान की तरह ही रह जाते थे और उसका अंत बहुत ही भयानक होता था । यह बताने की भी आवश्यकता नहीं है कि फिर उनके साथ में क्या होता होगा इसीलिए प्रकाश अंकल ने वीर को नियमित रूप से ध्यान लगाने के लिए कहा था और वीर भी अब रोजाना अपने कमरे में रात को ध्यान लगाया करता था और रात को ही नहीं बल्कि जब भी उसे समय मिलता था , तब वह ध्यान लगाने के लिए बैठ जाता था । ।
। ।अगले दिन वीर सुबह उठकर स्कूल के लिए निकल जाता है । वीर आज थोड़ा सा नर्वस था, क्योंकि उसने कल जो टेस्ट दिया था , अगर उसमें उसे कम मार्क्स आते हैं ,तो शर्मा सर उसे जरूर ही उनकी क्लास से निकालकर किसी और से section में डाल देंगे, ताकि उनकी क्लास का एवरेज ग्रेड वीर की वजह से कम ना हो । ।
। ।वीर यह नहीं चाहता था क्योंकि , अभी वह एक एलिट क्लास में पढ़ रहा था और दूसरे सेक्शन की क्लासेस में जो बच्चे पढ़ते थे वह बहुत ही शरारती थे । वह पढ़ने में ध्यान नहीं देते थे और सिर्फ मस्ती मजाक ही करें किया करते थे । यहां तक कि उनमें जो टीचर्स पढ़ाते थे वह भी उनको ठीक से नहीं पढ़ा पाते थे । इसीलिए वीर उस क्लास में नहीं जाना चाहता था । ।
। ।जब भी किसी बच्चे को एलिट क्लास से निकालकर दूसरे section में डाला जाता था , तब वह उस बच्चे के लिए बहुत ही ज्यादा बेज्जती की बात हुआ करती थी। इसलिए विर थोड़ा घबराया हुआ था और इसी घबराहट में थोड़ी देर में ही शर्मा सर के पीरियड की बेल लग जाती है और थोड़ी देर में जब शर्मा सर क्लास में आते हैं तब उनके हाथ में टेस्ट कॉपीज का एक बंडल और साथ में एक पेपर था जिसमें सभी के टेस्ट पेपर के रिजल्ट तैयार थे। ।
। ।तो क्या वीर टेस्ट में पास हो पाएगा और क्या वह एलिट क्लास में ही रहेगा और क्या होगा अगर वह टेस्ट में पास नहीं हो पाया और उसे दूसरे sections में डाल दिया जाता है तो और क्या वीर अपने एलिमेंट्स पर ठीक से कंट्रोल कर पाएगा ।
,, शर्मा सर के पीरियड की बेल लगती है और थोड़ी देर में जब शर्मा सर क्लास में आते हैं तब उनके हाथ में टेस्ट कॉपीज का एक बंडल और साथ में एक पेपर था जिसमें सभी के टेस्ट पेपर के रिजल्ट तैयार थे। ।
। । शर्मा सर को क्लास आते हुए देखकर सभी बच्चे खड़े हो जाते हैं और उन्हें गुड मॉर्निंग विश करते हैं । । शर्मा सर को देखकर वैसे तो सभी बच्चों के दिल की धड़कन तेज थी । । लेकिन वे इसके लिए कुछ भी नहीं कर सकते थे । ।
। ।शर्मा सर क्लास में आकर कहते हैं , "हां तो बच्चों... तुम सभी ने कल के टेस्ट में मेरी उम्मीद से भी ज्यादा अच्छा तो perform किया है , बस कुछ लोगों को छोड़कर " । ।
। । यह सुनकर तो वीर के सर पर जैसे बिजली गिर गई थी, उसे डर था कि कहीं वह फेल ना हो जाए । ।
। ।लेकिन तभी शर्मा सर कहते हैं, " वीर ...."। ।
। । वीर शर्मा सर की आवाज सुनकर अचानक से चौक जाता है , उसे समझ नहीं आता कि वह क्या करें । ।
। । तभी शर्मा सर वीर से कहते हैं , " वीर मैंने सोचा नहीं था कि तुम इतने अच्छे और इंटेलिजेंट बच्चे हो तुमने सेकंड रैंक पाई है " । ।
। ।वीर शर्मा सर की बात सुनकर अचानक से चौक जाता है और उसके चेहरे पर अजीब से expressions आने लगते हैं, उसने तो उम्मीद भी नहीं की थी कि वह पास भी हो पाएगा । ।
। । लेकिन अब उसकी सेकंड रैंक लग चुकी थी , वीर का दोस्त अनुराग भी वीर को ऐसे देख रहा था जैसे उसके सामने कोई भगवान खड़े हो। अनुराग वीर को देखकर सोच रहा था कि वीर ने किसी टेक्निक का इस्तेमाल किया होगा तभी वह सेकंड रैंक ला पाया है और अब अनुराग भी चाहता था कि वह भी इस टेक्निक को वीर से सीख सके ताकि वह भी exam में अच्छा perform कर सके। ।
। । वैसे वह जानता था कि वीर पढ़ने में काफी अच्छा है और सिर्फ उसके पिता के जाने के बाद से ही वह पढ़ाई में ठीक से ध्यान नहीं दे पा रहा है, लेकिन अभी उसे भरोसा नहीं था कि वीर कभी अपनी पढ़ाई के लिए आप सीरियस भी हो पाएगा इसीलिए अभी जब उसने शर्मा सर के मुंह से वीर के टेस्ट रिजल्ट सुने थे तो उसको भरोसा ही नहीं हो पा रहा था । ।
। । उसे ऐसा ही लग रहा था कि वीर ने जरूरी कोई टेक्निक या फिर कोई तो ऐसा तरीका निकाल लिया है जिससे वह एग्जाम में ज्यादा मार्क्स ला सकते हैं । ।
। ।अनुराग को यह भरोसा था कि वीर कभी cheating नहीं कर सकता, वीर एक सच्चा और ईमानदार लड़का था और वह कभी भी बुराई का साथ नहीं देता था और अनुराग को वीर की यही बात सबसे अच्छी लगती थी । ।
। । यहां तक कि कई बार क्लास में वह चीटिंग करके ज्यादा मार्क्स भी ला सकता था, लेकिन उसने मना कर दिया । । वह कम मार्क्स ही सही , लेकिन इमानदारी से लाए हुए मार्क्स पर ज्यादा भरोसा करता था ।।
। ।अनुराग की नजरों में वीर से अच्छा लड़का पूरी क्लास में तो क्या पूरे स्कूल में भी नहीं था । ।अनुराग और वीर दोनो बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त थे , यहां तक कि अनुराग के पिता प्रकाश सिंघानिया और वीर के पिता कार्तिक रंधावा दोनों भी बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे । ।
। । वीर के मार्क्स सुनकर सभी बच्चे shouk हो गए थे ।।
। । लेकिन शर्मा सर को भरोसा था, कि वीर ने बिना चीटिंग ही यह marks लाए हैं क्योंकि वह उसे बचपन से जानते थे। वह तो बस अपनी कंडीशन और अपनी halat से मजबूर होकर वीर ठीक से पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था, लेकिन अब उसका रिजल्ट देख कर शर्मा सर बहुत खुश थे । ।उन्हें वीर की कंडीशन का पता थी कि उसने अपने पिता को बचपन में ही खो दिया था और तब से ही वह किसी भी चीज पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाता था । ।लेकिन अब उन्हें लग रहा था कि सब ठीक होने वाला है । ।
। । स्कूल के बाद शाम को वीर स्कूल से घर पर अपने रूम में मेडिटेक करने के लिए बैठने ही वाला था कि तब तभी उसका फोन बजने लगता है । । वीर जब अपने फोन की स्क्रीन पर देखता है तब वह पाता है कि , फोन किसी और का नहीं बल्कि प्रकाश अंकल का था । पहले तो वह अपनी आदत के अनुसार अपना अजीब सा मुह बना लेता है और फोन को काटने वाला था , कि तभी उसे प्रकाश अंकल की पिछले दिनों की हुई मदद याद आ जाती है और वह फोन उठा लेता है। । यह बात बताने की भी जरूरत नहीं है कि फिर क्या हुआ होगा । ।
। । एक बार फिर से प्रकाश अंकल की राक्षसों की तरह हंसती हुई image वीर के सामने आ जाती हैं और फिर हर बार की तरह ही वीर इस बार भी डर जाता है आखिर वह था तो भी 16 17 साल का लड़का ही। ।
। । प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं , " वीर तुम्हारी मेडिटेशन की प्रैक्टिस कैसी चल रही है "। ।
। ।तब वीरों प्रकाश अंकल को जवाब देते हुए कहता है , "अभी तो ठीक ही चल रही है अंकल " । ।
। । तब प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं, " तो अब क्या तुम अपने elements पर फोकस कर पाते हो"। ।
। । तब वीर जवाब देते हुए कहता है, " हां मैं अभी थोड़ा थोड़ा ही कर पाता हु "। ।
। । प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं , "ठीक है ....तो फिर कल सुबह जल्दी से 7:00 बजे मेरी लैब पर आकर मिलो" । ।
। । वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर उनसे कहता है , "कल सुबह 7:00 बजे और आपकी लैब पर" । ।
। । प्रकाश अंकल कहते हैं, " हां मेरी लैब पर "। ।
। । वीर उनसे पूछता हैं , "लेकिन क्यों अंकल" । ।
। । प्रकाश अंकल उससे कहते हैं , "जो तुम अभी maditate कर रहे हो, वही अब से प्रैक्टिकल करने का वक्त आ गया है " । ।
। । वीर को कुछ समझ नहीं आता और वह उनसे कुछ बोलने ही वाला था कि तभी प्रकाश अंकल फोन काट देते हैं ।।
।। वीर उनकी बात सुनकर थोड़ा कंफ्यूज हो गया था लेकिन वह मेडिटेक करने के लिए बैठ जाता है और फिर अगली सुबह वीर 7:00 बजे ही वीर किसी तरह से उठकर जल्दी से भागता हुआ प्रकाश अंकल की लैब पर पहुंच जाता है । ।
। । प्रकाश अंकल वीर को देखते हुए उससे कहते हैं , "क्या बात है वीर...? तुम तो टाइम के एकदम पक्के निकले " । ।
। । तब वीर आपने चहरे पर मुश्कान लाते हुए प्रकाश अंकल से कहता है, " मुझे तो आना ही था लेकिन आपने मुझे यहां पर क्यों बुलाया है " । ।
। । प्रकाश अंकल वीर को जवाब देते हुए कहते हैं , "वीर मेरे पीछे आओ में बताता हूँ" ।।
।। वीर भी प्रकाश अंकल की बात सुनकर उनके पीछे -पीछे चल देता है । । प्रकाश अंकल वीर को एक बड़े से हॉल में लेकर आते हैं, वह दिखने में किसी ट्रेनिंग ग्राउंड की तरह था ।। जहां पर कुछ जगह पर दरार पड़ चुकी थी तो कुछ जगह एकदम ठीक थी । वीर को समझ नहीं आता कि प्रकाश अंकल का इस तरह की जगह पर लाने का क्या मतलब है । ।
।। वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर उनके पीछे -पीछे चल देता है । । प्रकाश अंकल वीर को एक बड़े से हॉल में लेकर आते हैं, वह दिखने में किसी ट्रेनिंग ग्राउंड की तरह था ।। जहां पर कुछ जगह पर दरार पड़ चुकी थी तो कुछ जगह एकदम ठीक थी । वीर को समझ नहीं आता कि प्रकाश अंकल का उसे इस तरह की जगह पर लाने का क्या मतलब है । ।
। । उस बड़े से ट्रेनिंग जैसे हॉल में पहुंचकर वीर प्रकाश अंकल से पूछता है , "अंकल यह कौन सी जगह है" ।।
।। प्रकाश वीर के सवाल का जवाब देते हुए कहते हैं , "यहां पर तुम अपनी elemental powers की प्रैक्टिस कर सकते हो " । ।
। । प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर excited होते हुए उनसे पूछता है, " तो क्या मैं यहां पर प्रैक्टिस कर सकता हूं..? क्या मैं भी अपने elemental powers को इस्तेमाल कर सकता हूं अंकल.. . ?" ।।
। । तब प्रकाश अंकल वीर को जवाब देते हुए बताते हैं, " नहीं..... अभी नहीं ....अभी वह समय नहीं आया है , तुम जब सिटी इंटरनेशनल कॉलेज में पहुंच जाओगे, तब वहां पर वह तुम्हें सब सिखाएंगे और फिर तुम्हारी मेहनत पर ही यह बात निर्भर करती है कि तुम कितने अच्छे शिनोबी बन पाते हो" । ।
। । शिनोबी म्युटेंट जोन में लड़ने वाले योद्धाओं को कहा जाता है। शिनोबी में भी कई सारी रैंक हुआ करती है और हर रैंक उन्हें उनकी ताकत के मुताबिक दी जाती है, जैसे किसी ने अभी एलिमेंटल पावर्स को कंट्रोल करना शुरू ही किया होता है । उसे पहले म्युटेंट जोन की पूरी जानकारी दी जाती हैं और सा5ह ही तुम्हे ध्यान लगाना भी सिखाया जाता है और अगर तुम वह सब अच्छे से सिख जाते हो तब तुम्हारी एग्जाम भी होती है जिसमे तुम्हे graduate किया जाता है । तभी तुम्हे पहली rank 'गैनीन' कहा जाता है और वही अगर किसी ने एलीमेंटल पावर को बहुत अच्छे से कंट्रोल करना सीख लिया होता है, तब उसे कि 'च्यूनिन' कहा जाता है वीर तो अभी इसमें से किसी भी rank के लायक नहीं था क्योंकि वह तो अभी तक एलिमेंट पावर्स को कंट्रोल करना भी नहीं सीख पाया था । ।
। । वीर प्रकाश अंकल से पूछता है, " तो फिर अंकल आपने मुझे यहां पर क्यों बुलाया है....?"। ।
। । इस बात का जवाब देते हुए प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं, " वीर मैं चाहता हूं कि तुम यह देखो कि एलिमेंटल पावर को कैसे कंट्रोल किया जाता है यह वैसा ही है जैसे गाड़ी चलाने से पहले गाड़ी कैसे चलाई जाती है वह देखना" । ।
। । वीर प्रकाशन कल की सारी बातें समझ रहा था इसलिए वह अपनी गर्दन हां मिलाते हिलाता है और प्रकाश अंकल को आगे जारी रखने के लिए इशारा करता है तब प्रकाशन की वीर किसे कहते हैं , "अभी तुम देखते जाओ मैंने एक लाइटनिंग और विंड एलिमेंट यूज़र को बुलाया है । ।
। ।थोड़ी देर बाद प्रकाश अंकल वीर को थोड़ी और जानकारी दे ही रहे थे कि तभी प्रकाश अंकल देखते हैं कि कि उन्होंने जिस एलिमेंट यूज़र को बुलाया था , वह आ चुका है । ।
। ।प्रकाश अंकल उस आदमी को वीर से मिलवाते हुए कहते हैं , " वीर यह है विकास राठौर ....और यह तुम्हें दिखाएंगे कि कैसे एलिमेंटल पावस को कंट्रोल करके उन्हें use किया जाता है " । ।
। ।प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर विकास की तरफ अपना सीधा हाथ आगे कर देता है और कहता हैं , "hello... I am वीर सिंघानिया......." । ।
। । वीर के जवाब में विकास भी अपना हाथ आगे करके वीर से हाथ मिलाते हुए कहते हैं , " hii..... I am विकास राठौर" । ।
। ।बातें करने के बाद प्रकाश अंकल विकास से कहते हैं, "विकास अब तुम शुरू करो जिस काम के लिए तुम्हें बुलाया गया है, तुम्हें वीर को बताना है कि कैसे एलेमेंटल पावर्स को use करके हमला किया जाता है " । ।
। । विकास प्रकाश अंकल की बात में हामी भरते हुए कहता है, " yes professor.... why not....! "। ।
। । उसके बाद विकास उस हॉल में थोड़ा दूर जाकर एक टारगेट papet के सामने जाकर खड़ा हो जाता है । । वह टारगेट papet दिखने में बहुत भारी भरकम था । । वीर को प्रकाश अंकल ने पहले ही बता दिया था , कि वह टारगेट papet किस काम में आता है। । वह papet टारगेट के रूप में यूज किया जाता है । उसी के ऊपर शुरुआत में सभी एलिमेंटल पावर का हमला करके प्रैक्टिस की जाती थी। ताकि वह elements की पावर को अच्छे से कंट्रोल कर सके और उन्हें इस्तेमाल भी कर सके । ।
। । विकास उस टारगेट papet के सामने जाकर वीर से कहता है, " वीर ध्यान से देखना"। । और फिर विकास उसके सामने खड़ा हो जाता है और अपने सभी chakra points पर conectarte करने लगता है और वीर देखता है कि विकास के हाथों में कुछ lightening के sparks होने लगे थे । ।
। । तभी विकास अचानक से कहता है, " lightening style clear palm"। । और इतना कह कर विकास अपना राइट हैंड जिसमें लाइटनिंग के sparks हो रहे थे । वह उस टारगेट papet पर हमला कर देता है । । उसके इतना कहते ही एक जोर का धमाका होता है और उस पूरे पुतले में लाइटनिंग के sparks दौड़ने लगते हैं और वह papet किसी गुब्बारे की तरह फट जाता है । ।
। । यह देखकर तो वीर की आंखें फटी की फटी रह गई थी। उसे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि ऐसा भी कुछ हो सकता है। ।
। ।प्रकाश अंकल वीर की तरफ देखते और वह भी समझ जाते हैं कि वीर कितना ज्यादा खुश लग रहा था । । वीर अब यही चाहता था कि वह भी अपनी एलिमेंटल पावर्स को जल्द से जल्द कंट्रोल करना सिख सके । ।
। ।तभी विकास वीर से कहता है, " वीर... कैसा लगा लाइटनिंग का पहला हमला....?"। ।
। ।वीर... विकास की आवाज सुनकर पहले तो उसे समझ नहीं आता कि वह रिएक्ट कैसे करें और विकास के सवाल का जवाब कैसे दे..? । ।
। ।लेकिन अगले ही पल वीर तालियां बजाते हुए विकास से कहता है , " अमेजिंग....! विकास क्या बात है ? यह तो बहुत ही अच्छा था , यह तो मैं भी करना चाहता हूं " । ।
। । तभी वीर की बात का जवाब देते हुए प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं, "वीर तुम्हें अपनी एलिमेंटल पावर्स को इस तरह से इस्तेमाल करने के लिए बहुत ही ज्यादा मेहनत करनी होगी" । ।
। । प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर समझ जाता है कि विकास ने भी अपने एलिमेंटल पावर्स को इस्तेमाल करने के लिए बहुत मेहनत की होगी इसीलिए वह आज इस मुकाम पर है । ।
। । फिर प्रकाश अंकल विकास से कहते हैं , "विकास अब क्यों न wind element का भी एक ट्रेलर वीर को दिखा दिया जाए" । ।
। ।तब वीर विकास की तरफ बहुत एक्साइटेड होते हुए देखता है। । विकास भी अपनी गर्दन हाँ में हीलाता है और आगे बढ़ जाता है। ।
। ।फिर वह दूसरे टारगेट papet के पास जाकर अपने हाथों को अजीब से pattern में घूमाता है और फिर उन्हें मिलाते हुए अपने मुंह के सामने लाता है और कहता है, " विंड स्टाइल ब्रेक थ्रू" । । और इतना कहते हैं विकास के मुह से हवा निकलने लगती है और वह हवा इतनी तेज थी कि सामने वाला papet तकरीबन 200 मीटर दूर उड़ जाता है । । जहां से हवा उससे टकराई थी वहां एक बड़ा सा छेद हो जाता है । ।
। । वीर एक बार फिर से तालियां बजाने लगता है । । लेकिन प्रकाश अंकल उससे कहते हैं, " अभी रुको वीर... अभी सब खत्म नहीं हुआ है, अभी तो एक और बाकी है " । ।
। । वीर को समझ नहीं आता । तभी विकास एक बार फिर से अपने हाथों को अजीब से पेटर्न्स में हिलाता है और कहता है, " विन स्टाइल फास्टट्रैक"। ।
। । तभी वह अपने दोनों हाथों को उस पेट की तरफ उठाता है । उसके दोनो हाथों में हवा बहुत तेजी से घूमने लगती है और वह किसी तोप के गोले की तरह उसके हाथ से निकलकर सीधा उस papet से टकराती है और वह papet कहीं फीट दूर जाकर गिरता है और गिर कर टुकड़े-टुकड़े हो जाता है ।
। । विकास एक बार फिर से अपने हाथों को अजीब से पेटर्न्स में हिलाता है और कहता है, " विन स्टाइल फास्टट्रैक"। ।
। । तभी वह अपने दोनों हाथों को उस पपेट की तरफ उठाता है । उसके दोनो हाथों में हवा बहुत तेजी से घूमने लगती है और वह किसी तोप के गोले की तरह उसके हाथ से निकलकर सीधा उस papet से जा टकराती है और वह papet कहीं फीट दूर जाकर गिरता है और गिर कर टुकड़े-टुकड़े हो जाता है । ।
। । एक बार फिर से वीर का पहले जैसा ही हाल हो जाता है। । उसकी दोनो आंखे बड़ी हो जाती है, वीर इस तरह के एलेमेंटल attacks देखकर भौचक्का ही रह गया था । ।
। । तब प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं, " वीर वैसे तुम भी इस तरह से elemental powers को use कर सकते हो बस तुम्हे मेहनत करनी होगी , बिना मेहनत किये इस दुनिया मे कुछ भी हासिल नही किया जा सकता " । ।
। ।वीर भी प्रकाश अंकल की बातों को समझ रहा था और वह अपना सिर हमें हिलाते हुए प्रकाश अंकल से कहता है, "हाँ अंकल मैं समझ गया.... अब मैं भी बहुत मेहनत करूंगा"। ।
। ।फिर प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं , "वीर तुम्हारी फाइनल एग्जाम कब से शुरू हो रही है " । ।
। । वीर प्रकाश अंकल के सवाल को सुनकर उन्हें जवाब देते हुए कहता है, "वो ...... अंकल मेरी फाइनल एग्जाम अगले महीने से शुरू होने वाली" । ।
।। इस बात पर प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं, " वीर.. तुम्हें इस एग्जाम में अच्छे मार्क्स लाने ही होंगे क्योंकि अगर तुम्हारे अच्छे मार्क्स नहीं आ पाते हैं तब तुम सिटी इंटरनेशनल कॉलेज में नहीं जा पाओगे । उस कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए तुम्हें कम से कम 90% से ऊपर लाने ही होंगे" । ।
। । वीर प्रकाश अंकल के बात में हामी भरते हुए कहता है, "जी अंकल.. मैं पूरी कोशिश करूंगा" । ।
। ।इस बात पर प्रकाश अंकल कहते हैं, " वीर कोशिश नहीं तुम्हें यह करना ही होगा.. क्योंकि अगर तुम सिटी इंटरनेशनल कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाते हो तो फिर तुम यह बात भी भूल जाओ की तुम कभी Mutant Zone में जा भी सकते हो और अपने परिवार का कर्ज भी चुका सकते हो" । ।
। । वीर प्रकाश अंकल की बातों में हामी भर देता है , वह समझ जाता है कि प्रकाश अंकल यह सब उसकी भलाई के लिए ही कह रहे हैं । । वैसे भी सिटी इंटरनेशनल कॉलेज एक बहुत बड़ा कॉलेज था उसे पूरे देश में टॉप कॉलेजो में गिना जाता था । । यहां तक कि उस में एडमिशन लेने के लिए भी बहुत सारे टेस्ट से गुजरना पड़ता था । । कई बार तो अमीर से अमीर घरों के लड़के लड़कियां भी वहां पर एडमिशन नहीं ले पाते थे , क्योंकि वहां पर सिर्फ बेस्ट स्टूडेंट को ही एडमिशन मिलता था और अगर कोई चाहता था कि वह उस कॉलेज में जाए , तब उसके पास एक ही रास्ता था कि वह अच्छे से पढ़ाई करे और अच्छे मार्क्स लाकर सिटी इंटरनेशनल कॉलेज में जा सके । ।
। । वीर और प्रकाश अंकल फिर थोड़ी देर तक इधर-उधर की बातें करने के बाद वीर प्रकाश अंकल से कहता है, "प्रकाश अंकल... मैं भी चलता हूं, मेरे पास ज्यादा समय नहीं है । । एग्जाम आने वाले हैं और मुझे बहुत सारी पढ़ाई करनी है । मुझे तो पूरे साल का सिलेबस अभी 1 महीने में ही खत्म करना है " । ।
। । प्रकाश अंकल को वीर की बात सुनकर उन्हें समझ नहीं आता कि वो react कैसे करें, प्रकाश अंकल वीर पर चिल्लाते हुए कहते हैं , "क्या कहा तुमने...? अभी तक तुम्हारा पूरा सिलेबस तक कंप्लीट नहीं हुआ है, वीर अब मुझे शक है कि तुम कभी सिटी इंटरनेशनल कॉलेज में जा भी पाओगे या नहीं । । मत भूलो वहां एडमिशन लेने के लिए अमीर से अमीर घरों के बच्चे तक नहीं जा पाते हैं, वहां पर सिर्फ होनार बच्चों की ही कद्र की जाती है । ।अब तक तो कई बच्चे अपना रिवीजन तक कई बार कंप्लीट कर चुके होंगे और तुमने अभी तक अपना सिलेबस तक कंप्लीट नही किया है वीर मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी " । ।
। ।प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर भी समझ जाता है कि उसे प्रकाश अंकल को यह बात नहीं बतानी चाहिए थी, इसलिए फिर वह अपनी बातों पर थोड़ा पर्दा डालते हुए प्रकाश अंकल से कहता है , "अंकल मैं अभी चलता हूं क्योंकि मेरे पास अभी ज्यादा समय नहीं है ,मैं खूब मेहनत करूंगा और मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं सिटी इंटरनेशनल कॉलेज में एडमिशन ले कर ही रहूंगा "। ।
। । तब प्रकाश अंकल जी से कहते हैं , "हां अभी तुम ऐसा कर ही लेना अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते तो फिर तुम अपने परिवार का कभी कर्ज भी नहीं चुका पाओगे और यह बात मुझे भी पूरी जिंदगी दर्द देगी कि मैं भी अपने दोस्त कार्तिक के परिवार के लिए कुछ नहीं कर पाए " । ।
। ।वीर थोड़ा इमोशनल हो जाता है लेकिन फिर अगले ही पल वह वहां से निकल जाता है। । वीर घर पहुंचकर एक बार फिर से गैरेज में जाता है और अपने पिता की कार से बात करने लगता है , "पापा मुझे समझ नहीं आ रहा कि अब मैं क्या करूं 1 महीने में मुझे पूरा सिलेबस कंप्लीट करना है ,मुझे विश्वास नही है कि मैं पास भी हो पाऊंगा । लेकिन मुझे तो सिटी इंटरनेशनल कॉलेज में एडमिशन लेना होगा जैसा कि प्रकाश अंकल ने बताया है । ।
। ।लेकिन अगले ही पल वीर के दिमाग में कुछ आता है और वह अपने पिता के कार से कहता है, " पापा देखना मैं उस कॉलेज में एडमिशन लेकर ही रहूंगा "। ।
। । और इतना कह कर वह अपने कमरे की तरफ चला जाता है। वीर फिर तुरंत आधे घंटे maditate करता है । उसके बाद पढ़ाई करने के लिए बैठ जाता है । इस बार वीर को उसका लक्ष मिल चुका था इसीलिए वह पूरे जी-जान से मन लगाकर पढ़ाई कर रहा था। । वीर को भी नहीं पता था कि उसने आखिरी बार कब इस तरह से पढ़ाई की थी । उसे बस यह मालूम था कि आखिरी बार के पिता से जाने से पहले एग्जाम की एक रात पहले उसने कुछ ऐसा ही किया था , लेकिन उस बात को भी बहुत वक्त हो चुका है। ।
। ।वीर अगले दिन स्कूल में जाकर भी पूरा मन लगाकर पढ़ाई ही कर रहा था । ।अनुराग वीर को देखकर हक्का बक्का सा रह गया था ।। वह वीर जिसने पढ़ाई करना सालों पहले छोड़ दिया था और आज तक उसने उसके हाथ में किताबे तक नहीं देखी थी आज पढ़ाई कर रहा था । ।अनुराग ने वीर में एक बात नोटिस की थी । । कि वीर जिस बुक में से पढ़ रहा था। वह बुक एकदम नई जैसी लग रही थी। यहां तक की क्लास के टॉपर बच्चे की बुक इतनी साफ-सुथरी नहीं थी ।। दरअसल वीर को कोई किताबों को अच्छे से रखना रखने का शौक नहीं था । वह तो बस इसलिए साफ सुथरा थी क्योंकि उसने उसे आज पहली बार खोला था । जिस दिन से वह किताबे दुकान से लाया था , उस दिन से वह उसके बैग में हीं पड़ी हुई थी । ।वीर को ध्यान लगाकर पढ़ाई करता हुआ देखकर अनुराग को भी लगता है कि वीर अब पढ़ाई में सीरियस हो चुका है, इसीलिए उसे अब उसको डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए इसीलिए कहा जाता है बॉटल में पानी भरकर वीर की डेस्क पर रख देता है । ।वीर पढ़ाई करने में इतना कंसंट्रेट कर रहा था कि वह ध्यान ही नहीं देता कि किसी ने पानी की बोतल भी रखी हो । ।