आतिश- ए है जुनूँ Chahat द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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आतिश- ए है जुनूँ

मोह मोह के धागे
मोह मोह के धागे.... 

वो उस बारह मंजिला की पाँचवी मंज़िल थी । सुरज़ ढलने को था । हवा में हल्की सी सर्द मोहरी थी । पत्थर की बनी उस बालकनी का रंग गहरा ख़ाकी था जहाँ जगह-जगह कथई और सफ़ेद धब्बे उभर आए थे… वो उस पर बैठी हुई थी उसके पैर हवा में झूल रहे थे और उसे पता था की उसकी उपरी और निचली मंज़िल पर कोई नहीं रहता था । इस वक़्त उसके हाथ में एक ग्लास था जिसमें ढेर सारे पुदीने के पत्ते और कटे हुए नींबू के स्लाइस थे वो लेमन मिन्ट था शायद या किसी और फ्लेवर का । सफ़ेद रंग का खुला खुला सा प्लाज़ो और हल्के सब्ज़ रंग का कुर्ता पहना हुआ था जो उसके घटनों से कुछ उपर था । बालों को खुला रखा हुआ था। उसके कानों में हैंस्प्रि पहने उसके लब हरक़त कर रहे थे ।

ये मोह मोह के धागे
तेरी उँगलियों से जा उलझे
कोई टोह टोह ना लागे
किस तरह गिरह ये सुलझे... 

उसपर किसी कोयल गुमान होता था वो किसी और दुनिया में थी । उसकी आँखे बंद थी चेहरा हल्का सा आसमां में उठा हुआ था । और उसके लब हिले थे अबकी उसने उस लाइन को सांस की तरह अन्दंर खिच कर गुनगुनाया था ।

हैं रोम रोम एक तारा.... 

छठ्ठि मंज़िल पर एक हरक़त हुई थी वो जो अभी बालकनी में अपनी चेयर रखने आया था उसके क़दम साकेत हो गए । वो जो जाने को मुड़ा था उसने गर्दन को तिरछी सा मोड कर देखा था आवाज़ बाहर से आ रही थी।

है रोम रोम एक तारा
जो बादलों में से गुज़रे

उसके कदम ख़ुद-बा-ख़ुद बालकनी की और बढ़ गए । उसने गौर किया आवाज़ निचली मंज़िल से आ रही थी। वो वापिस जाना भूल गया । बस वही बालकनी पर हाथ धरे खड़ा सामने डूबते सूरज को देखने लगा । सामने ही समन्दर था । उससे उठती लहरे । डूबते सूरज की मथम पड़ती रोशनी । उसने अपनी जेब से सिगार निकाली । और दूसरी जेब से एक सिल्वर लाइटर जो calories का था । उसने सिगार को अपने होठों तले दबाया और सिगार जला दी । 

ये मोह मोह के धागे
तेरी उँगलियों से जा उलझे
कोई टोह टोह ना लागे
किस तरह गिरहा ये सुलझे


अब सिगार थी के कभी उसके हाथों में तो कभी उसके लाबों में और उठता धुँआ ढल चुकी शाम और डूबता सूरज । और वो अज़नबी के बोल । 


तू होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
तू होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
कैसे तू ने अनकहा
तूने अनकहा सब सुना

उसके पैरों की हरक़त थमी थी कुछ हल्की सी परत उसके पैरों पर आ गिरी थी उसने आँखें खोल कर अपने पैरों को देखा था । कुछ जला हुआ सिगार का ash था। वो थमी थी उसने नज़र उठा कर उपर देखा दो हाथ नज़र आए थे एक हाथ में सिगार था जिसमें एक खूबसूरत सी सिल्वर ही watch थी उसने शायद ब्लू t-shirt या shirt पहना होगा जो फुल स्लिवस का था जिसने उसके गोरे हाथ ढक दिए थे । वो थोड़ा हैरान हुई थी फिर सर झटक दिया और आँखें बंद कर होले से गुन्गुनाइ ।

तू होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
तू दिन सा है मैं रात आना दोनो
मिल जाए शामों की तरह
ये मोह मोह के धागे
तेरी उँगलियों से जा उलझे
कोई टोह टोह ना लागे
किस तरह गिरहा ये सुलझे

उसे जब कोई आवाज़ न आई तो उसने सर झुका कर नीचे देखा उसके पैरों की हरक़त थम गई थी चेहरा नहीं दिख रहा था। और न देख सकता था। उसने बे साख़ता मूँह से धुआँ निकाला था । और उसे आवाज़ आई थी जो उस धुँए की तरह बोझल और धीमी थी ।

के तेरी झूठी बातें मैं सारी मान लूँ
के तेरी झूठी बातें मैं सारी मान लूँ
आँखों से तेरे सच सभी, सब कुछ अभी जान लूँ
के तेरी झूठी बातें मैं सारी मान लूँ
तेज है धारा, बहते से हम आवारा
आ थम के साँसे ले यहाँ

वो आँखे बंद किए लफ़्ज़ों के आवाज़ के जेरे असर था नहीं पता था उसे खुद भी वो बस ठहर गया था उन लफ़्ज़ों में या उस आवाज़ पर थम गया था वो वापसी जाना भूल गया, वो रुक गया था, आँखें बंद किए किसी और दुनिया का वो लग रहा था वो उस भागती दुनिया में रुक गया था उस लम्हा उस पल को ।


वो चुप हुई ही थी की उपर बालकनी से आवाज़ आई शायद किसी का फोन आया था । "hello..." कहता वो अन्दर कमरे में चला गया। वही वो बैठी सोच में पड़ गई । शायद कोई नया किराएदार हैं खैर मुझे क्या? " और अन्दर कमरे से कुकर की सिटी की आवाज़ आई वो जल्दी से बालकनी से उतर कमरे में भागी थी ।