तेरे मेरे दरमियान - 107 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • सीप का मोती - 5

    भाग ५ "सुनेत्रा" ट्युशन से आते समय पीछे से एक लडके का आवाज आ...

  • Zindagi

    Marriage is not just a union between two people. In our soci...

  • Second Hand Love

    साहनी बिला   आलीशान महलघर में 20-25 नौकर। पर घर मे एक दम सन्...

  • Beginning of My Love - 13

    ​शरद राव थोड़ा और आगे बढ़कर सुनने लगे कि वॉर्ड बॉय और नर्स क्य...

  • पीपल तले उम्मीद

    ️ पीपल तले उम्मीद ️कई दिनों से आसमान में बादल लुका-छिपी का ख...

श्रेणी
शेयर करे

तेरे मेरे दरमियान - 107

उसकी आँखों से आँसू लगातार बहने लगते हैं। उधर आदित्य भी जानवी को देखकर कुछ पल के लिए खो जाता है। उसके मन में भी हजारों बातें चल रही थीं , पर वह कुछ कह नहीं पाता। दोनों बस दूर खड़े एक-दूसरे को देखते रहते हैं। आज भी उनके दिल एक-दूसरे के लिए धड़क रहे थे…पर उनके बीच गलतफहमियों की दीवार खड़ी थी।

जानवी को दैखकर आदित्य के कदम रुक जाते है और दौनो ही एक दुसरे को दैखने लगता है इतने दिनों के बाद भी…उन नजरों में आज भी वही प्यार और दर्द था। लेकिन आज सिर्फ उनका रिश्ता ही नहीं…आज सच और झूठ का भी फैसला होना था।

और कुछ ही देर में कोर्ट रूम के अंदर वो सच्चाई सामने आने वाली थी…जो सबकी जिंदगी बदल देगी। विकी मोनिका को दैखकर जर गया था , क्योंकि विकी ने मोनिका को मारने की सुपारी दिया था , पर मोनिका को कर्ट मे दैखकर विकी डर गया था और उस आदमी को फोन करने लगती है जिसे विकी ने सुपारी दिया था , पर उस आदमी का फोन स्विच ऑफ आ रहा था ।

उसके दिमाग में तुरंत वही बात घूमने लगती है —

"अगर मोनिका ने सच बोल दिया…तो सब खत्म हो जाएगा।"

विकी के माथे पर पसीना आ जाता है।

विकी (घबराकर खुद से): - ये… ये फोन बंद क्यों है?

अब विकी की घबराहट और बढ़ जाती है। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या होगा। तभी कोर्ट के अंदर से आवाज आती है —

“सभी लोग कोर्ट रूम के अंदर आएँ, सुनवाई शुरू होने वाली है।”

ये सुनकर सभी लोग धीरे-धीरे अंदर जाने लगते हैं। आज सिर्फ एक केस का फैसला नहीं होने वाला था…
आज सच और झूठ की लड़ाई का फैसला होने वाला था।
और शायद…आज ही तय होगा कि आदित्य और जानवी हमेशा के लिए अलग होंगे…या किस्मत उन्हें फिर से एक कर देगी।

कोर्ट रूम में सब लोग बैठे थे। जज अपनी कुर्सी पर आते हैं और फाइल देखते हैं फिर कहते है --

जज: - केस नंबर 214… आदित्य और जानवी का तलाक मामला।

जज के आवाज से पूरा कमरा शांत हो जाता है। आदित्य और जानवी एक-दूसरे के पास खड़े थे…लेकिन आज उनके बीच पहले से भी ज्यादा दूरी महसूस हो रही थी। दोनों की आँखें नीचे झुकी थीं और दोनो के मन मे एक अजीब सा तुफान चल रहा था ।

तभी जज दोनो से कहता है --

जज: - क्या दोनों पक्ष अब भी तलाक चाहते हैं?

जज के इतना कहते ही कुछ पल के लिए सन्नाटा छा जाता है , जानवी चाहती थी कि आदित्य कुछ बोले…और आदित्य चाहता था कि जानवी उसे रोक ले। पर दोनों चुप थे।

आदित्य जानवी की और दैखता है जानवी आदित्य की और दोनो की आंखे एक दुसरे से टकराती है और आदित्य मन ही मन सौचता है ---

आदित्य ( मन ही मन ) :-जानवी . मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ , पर शायद किस्मत को ये मंजूर नही के मुझे तुम्हारे प्यार मिले । तुम हमेशा से मुझसे दुर जाना चाहती थी और लो दैखो .. वो घड़ी अब आ गई । मैं तुमसे दुर होकर शायद रह नही पाउगां , पर तुम हमेशा खुश रहो यही प्रार्थना करुगां ।

तभी जानवी भी मन मे सौचती है --

जानवी ( मन ही मन ) :- बस ऐक बार कह दो आदित्य के तुम्हें डिवोर्स नही चाहिए , तुम मुझसे प्यार करते हो । कह दो आदित्य ... मैं तुमसे प्यार करता हूँ जानवी । तो ये जानवी सब कुछ छोड़कर तुम्हारे पास आ जाएगी । मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ आदित्य । 

दोनो को ही मन मे ओक दुसरे के लिए प्यार था पर गलतफहमी के कारण वो दोनो एक दुसरे से कुछ कह नही पा रहा था । तभी आदित्य कहता है --

आखिरकार आदित्य धीरे से बोलता है —

आदित्य: - जी… हाँ।

यह सुनकर जानवी का दिल टूट जाता है। उसकी आँखों से आँसू गिरने लगते हैं। जानवी अपनी आंशुओ को छुपाती हूई कहती है --

कुछ पल बाद वह भी धीमी आवाज में कहती है —

जानवी: - जी…

दोनो का जवाब सुनने के बाद जज फाइल बंद करते हैं।

जज: - अदालत इन दोनों के तलाक को मंजूरी देती है।

जैसे ही ये शब्द सुनाई देते हैं…दोनों के दिल के अंदर कुछ टूट जाता है। आज उनका रिश्ता कागजों पर खत्म हो गया था। जानवी के आंखो से आंशु गिरने लगते है और आदित्य के भी आंखो नम हो जाता है , अशोक जानवी के पास जाता है और उसे वहां से निचे लेकर आता है और एक जगह पर बैठ जाता है , जानवी अपने पापा की और दैखता है और कहती है --

जानवी :- पापा ... दैखा आपने , कैसे एक पल मे सब कुछ खतम हो गया , यो सब मेरी ही गलती है पापा , जब आदित्य मेरे साथ था तो मुझे उसकी कद्र नही थी और जब मुझे उसकी सबसे ज्यादा जरुरत है तब वो मेरे से दुर है ।

अशोक जानवी के आंशु को पोंछता है और कहता है -

अशोक :- बेटा क्या हम एक बार आदित्य से बात नही कर सकते ?

जानवी :- नही पापा , वो रागिनी के साथ खुश है तो .... मैं कौन होती हूँ फिर से उसकी मे दखल देने वाली । वो रागिनी के साथ खुश हो तो उसे खुश रहने दिजिए ।

उसी समय वकील खड़ा होता है और कहता है --

वकील: - माई लॉर्ड… इससे पहले कि अगला केस शुरू हो, इस केस से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सच अदालत के सामने रखना जरूरी है।

जज उसकी ओर देखते हैं।

जज: - क्या बात है?

तभी वो वकील मोनिका की दैखता है तो मोनिका आगे आती है।
पूरा कोर्ट रूम उसकी तरफ देखने लगता है और विकी के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। तभी मोनिका विकी की और दैखती है तो विकी ना मे इशारा करता है , तभी मोनिका जज से कहती है --

मोनिका: - माई लॉर्ड… मैंने इस केस में बहुत बड़ी गलती की है। 

मोनिका के इतना कहने पर पुरे हॉल मे संन्नाटा छा जाता है और निकी का दिल का धड़कन तेज हो जाता है , मोनिका अपनी बात जारी रखते हूए और आदित्य की और दैखते हूए कहती है --

मोनिका :- मैंने आदित्य पर झूठा आरोप लगाया था।

मोनिका के इतना कहते ही कोर्ट में हलचल मच जाती है।

जज: - आप कहना क्या चाहती हैं?

मोनिका गहरी सांस लेकर कहती है —

मोनिका: - जिस बच्चे के लिए मैंने आदित्य को जिम्मेदार ठहराया था…वह बच्चा आदित्य का नहीं है।

सब लोग हैरान रह जाते हैं। जानवी भी चौंककर आदित्य की तरफ देखती है।

जज: - तो फिर उस बच्चे का पिता कौन है?

मोनिका धीरे से मुड़कर विकी की तरफ देखती है। विकी की साँसें तेज हो जाती हैं।

मोनिका: - उस बच्चे का असली बाप… विकी है।

पूरा कोर्ट रूम एकदम शोर से भर जाता है। विकी स्तब्ध रह जाता है। सभी गुस्से से विकी की तरफ देखते हैं।

मोनिका आगे कहती है —

मोनिका: - विकी ने ही मुझे पैसे देकर डीएनए रिपोर्ट बदलवाने की कोशिश की…और जब उसे डर लगा कि सच सामने आ जाएगा…तो उसने मुझे मारने की सुपारी भी दे दी। 

मोनिका अपने और विकी के बारे मे सब कुछ बता देती है यह सुनकर जज का चेहरा सख्त हो जाता है।

जज: - क्या आपके पास इसका कोई सबूत है?
मोनिका सिर हिलाती है।

मोनिका: - जी… मेरे पास फोन रिकॉर्डिंग और सबूत हैं।

सबूत कोर्ट में पेश किए जाते हैं।

जज गुस्से में कहते हैं —

जज: - विकी… आपने सिर्फ धोखा ही नहीं दिया, बल्कि हत्या की साजिश भी रची है। अदालत आपको तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश देती है।

पुलिस आगे बढ़कर विकी को गिरफ्तार कर लेती है।

विकी चिल्लाता है —

विकी: - मैंने कुछ नहीं किया! ये लड़की झुट बोल रही है , पैसे के लिए मुझे फसा रही है , ये धोकेबाज है जज साहब ।

लेकिन अब कोई उसकी बात नहीं सुनता। अब कोर्ट में सन्नाटा था।
सबकी नजर आदित्य और जानवी पर थी।
सच सामने आ चुका था…पर उनका रिश्ता…वह पहले ही अदालत में खत्म हो चुका था। जानवी की आँखों से आँसू गिर रहे थे। उसे आज पता चला —जिस इंसान पर उसने सबसे बड़ा आरोप लगाया था…वह हमेशा बेगुनाह था। और आज…वह इंसान उससे हमेशा के लिए दूर हो चुका था।

आदित्य अपने उप लगे सभी आरोपो से बरी होतर एक गहरी सांस लेता है और रागिनी के गले लग जाता है , जैसे आदित्य के जिंदगी से बोझ दुर हो गई हो । जानवी बस आदित्य को दैखती रहती है पर उसके पास जाकर वो बता नही पा रही थी के वो आदित्य से प्यार करने लगी है । 

वहां पर आदित्य के पास सभी आ जाते है उसका मां , पापा, भाई और सभी दोस्त कृतिका रमेश और रश्मी भी । सभी आदित्य को गले से लगाता है , सभी के चेहरे पर मुस्कान था पर आदित्य और जानवी दोनो के दिल मे तुफान था एक दुसरे से अलग होने का तुफान ।

शमिका एक जगह पर चुप होकर बैठी थी तभी आदित्य आकर शमिका से कहता है --

आदित्य :- शमिका ... मुझे माफ कर देना क्योकी मेरी वजह से तुम विकी से अलग हो गई ।

शमिका अपनी आंखो से आंशु पोछती है और कहती है --

शमिका: - नही आदित्य .. तुम ऐसा मत कहो । ये आंशु उस विकी से अलग होने के लिए नही है , ये तो मेरो पछतावे का आंशु है के मैने एक गलत इंसान से प्यार किया ।

तभी अनय कहता है --

अनय :- पर शमिका तुम इस विकी को कब से जानती हो ?

शमिका :- हम लोग एक बिजनेस मीटिंग मे मिले थे , ये वहां पर अपनी कंपनी का प्रोजेक्ट लोकर आया था ।

शमिका की बात को सुनकर अनय हैरानी से कहता है --

अनय :- क्या प्रोजेक्ट और उसकी खुद की कंपनी का ?

शमिका :- हां ... पर तुम ऐसे क्यों पुछ रहे हो ?

अनय :- अरे शमिका ये तुमसे झुट बोला है , ये मेरे कंपनी का मामुली सा एम्पलाई है , ये कबसे कंपनी का मलिक हो गया ।

To be continue....1017