Chapter 1: मजबूरी का रिश्ता
हवा में अजीब सी ठंडक थी… पर अनाया के दिल में उससे भी ज्यादा सन्नाटा।
दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर पली-बढ़ी वो लड़की आज इस वीरान बॉर्डर एरिया में खड़ी थी… जहाँ हर सांस के साथ खतरा महसूस होता था।
“पापा, हम यहाँ क्यों आए हैं?” उसने धीमे से पूछा।
उसके सामने खड़े थे कर्नल अर्जुन सिंह—एक सख्त, अनुशासित और देश के लिए जान देने वाले सैनिक।
उन्होंने उसकी तरफ देखा, पर उनकी आँखों में आज कुछ अलग था… जैसे कोई बड़ा फैसला उन्हें अंदर से तोड़ रहा हो।
“अनाया… जो मैं कहने जा रहा हूँ, वो तुम्हारी जिंदगी बदल देगा,” उनकी आवाज भारी थी।
अनाया का दिल जोर से धड़कने लगा।
“क्या हुआ पापा? आप ऐसे क्यों बोल रहे हैं?”
कुछ पल के लिए खामोशी छा गई… फिर उन्होंने धीरे से कहा—
“तुम्हें शादी करनी होगी।”
“शादी…?” अनाया के होंठ कांप गए, “अचानक? और किससे?”
कर्नल अर्जुन ने अपनी नजरें झुका लीं, “एक दुश्मन देश के सैनिक से…”
उस पल जैसे समय रुक गया।
“WHAT?!” अनाया की आवाज काँपते हुए चीख में बदल गई, “पापा, आप मजाक कर रहे हैं ना? दुश्मन देश का सैनिक? आप होश में हैं?”
“ये मजाक नहीं है,” उन्होंने सख्ती से कहा, “ये मिशन है।”
अनाया के आँखों में आँसू भर आए।
“मैं आपकी बेटी हूँ, कोई मोहरा नहीं… जिसे आप ऐसे इस्तेमाल कर लें…”
“मैं भी बाप हूँ अनाया!” कर्नल अर्जुन की आवाज टूट गई, “मुझे भी दर्द हो रहा है… पर ये देश का मामला है।”
“देश…?” उसने दर्द से हँसते हुए कहा, “क्या देश के लिए मेरी जिंदगी कुर्बान कर देंगे आप?”
“अगर जरूरत पड़ी तो हाँ…” उन्होंने आँखें बंद कर लीं, “क्योंकि ये सिर्फ तुम्हारी नहीं… हजारों लोगों की जिंदगी बचाने का सवाल है।”
अनाया के आँसू अब रुक नहीं रहे थे।
“कौन है वो?” उसने कांपते हुए पूछा।
कर्नल अर्जुन ने एक फाइल उसकी तरफ बढ़ाई।
“कैप्टन अयान खान… दुश्मन देश का एक टॉप एजेंट। हमें उस पर नजर रखनी है… और तुम ही हमारी एकमात्र उम्मीद हो।”
अनाया ने कांपते हाथों से फाइल खोली।
एक तस्वीर… एक चेहरा… ठंडी आँखें… और होंठों पर हल्की सी मुस्कान, जैसे हर चीज उसके कंट्रोल में हो।
“ये… ये इंसान…” उसकी आवाज धीमी हो गई, “मैं इससे शादी करूँगी?”
“हाँ,” कर्नल अर्जुन बोले, “ये एक कॉन्ट्रैक्ट मैरिज होगी। सिर्फ दिखावे के लिए… पर असल में तुम हमारे लिए जासूसी करोगी।”
“और अगर मैंने मना कर दिया तो?” उसने सीधे उनकी आँखों में देखा।
कुछ पल की चुप्पी के बाद…
“तो हम ये मिशन हार जाएंगे… और बहुत से लोग मारे जाएंगे।”
ये शब्द जैसे उसके दिल में तीर की तरह लगे।
उसने धीरे से आँखें बंद कर लीं… और एक आँसू उसकी गाल पर लुढ़क गया।
“ठीक है…” उसकी आवाज बमुश्किल निकली, “मैं करूँगी ये शादी।”
अगले दिन… बॉर्डर के पास एक गुप्त लोकेशन
अनाया ने लाल रंग का लहंगा पहना हुआ था… पर उसके चेहरे पर दुल्हन वाली खुशी नहीं, सिर्फ डर और बेचैनी थी।
“तुम तैयार हो?” कर्नल अर्जुन ने पूछा।
“क्या मेरे पास कोई और ऑप्शन है?” उसने बिना उनकी तरफ देखे कहा।
उसी वक्त दरवाजा खुला… और वो अंदर आया।
कैप्टन अयान खान।
उसकी मौजूदगी ही कमरे का माहौल बदलने के लिए काफी थी।
लंबा कद, तेज नजरें… और चेहरे पर एक अजीब सा कॉन्फिडेंस।
वो धीरे-धीरे चलते हुए अनाया के सामने आकर रुक गया।
“तो… तुम हो मेरी होने वाली बीवी?” उसकी आवाज में हल्की सी मुस्कान थी।
अनाया ने उसकी तरफ देखा… और पहली बार उसकी आँखों में आँखें डालीं।
“सिर्फ नाम की,” उसने ठंडे स्वर में कहा, “असल में मैं तुम्हारी दुश्मन हूँ।”
अयान हल्का सा हंसा, “Interesting… मुझे चैलेंज पसंद है।”
“और मुझे नफरत,” अनाया ने तुरंत जवाब दिया।
कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे… जैसे कोई अनकहा युद्ध चल रहा हो।
फिर अयान थोड़ा झुककर उसके करीब आया और धीमे से बोला—
“देखो, ये शादी हम दोनों के लिए मजबूरी है… पर याद रखना, मैं किसी पर भरोसा नहीं करता… खासकर अपने दुश्मनों पर।”
अनाया ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया—
“तो फिर हम दोनों एक जैसे हैं… क्योंकि मैं भी तुम पर भरोसा नहीं करती।”
उनकी आँखों में एक अजीब सी चिंगारी थी… नफरत की… या शायद कुछ और की, जिसे वो खुद भी समझ नहीं पा रहे थे।
शादी का पल
चारों तरफ सन्नाटा था… कुछ गिने-चुने लोग… और बीच में खड़े दो अनजान लोग, जिन्हें किस्मत ने एक अजीब रिश्ते में बाँध दिया था।
पंडित मंत्र पढ़ रहे थे… पर अनाया के कानों में कुछ सुनाई नहीं दे रहा था।
उसका ध्यान सिर्फ एक चीज पर था—
उसका दिल… जो हर धड़कन के साथ उससे पूछ रहा था—
“क्या यही तुम्हारी जिंदगी है अब?”
अचानक अयान की आवाज उसके कानों में गूंजी—
“डरो मत… मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा।”
उसने उसकी तरफ देखा, “मुझे तुमसे डर नहीं लगता… मुझे इस रिश्ते से डर लगता है।”
अयान कुछ पल चुप रहा… फिर धीरे से बोला—
“रिश्ते डराने के लिए नहीं होते… बदलने के लिए होते हैं।”
“और अगर मैं बदलना ही ना चाहूँ तो?” उसने पूछा।
“तो मैं इंतजार करूँगा…” उसने पहली बार गंभीर होकर कहा,
“क्योंकि कुछ जंगें तलवार से नहीं… वक्त से जीती जाती हैं।”
उसकी बात सुनकर अनाया थोड़ी देर के लिए चुप हो गई।
क्या ये वही इंसान है जिसे उसे दुश्मन समझना है?
या इसके पीछे कुछ और भी है