एपिसोड 4: गंगा घाट का टकराव
सूरज धीरे-धीरे गंगा के पानी में डूब रहा था। हवा में ठंडक और हल्की नमी थी। रिया और आरव घाट की सीढ़ियों पर बैठे थे। दोनों के बीच खामोशी थी, लेकिन दिलों में तूफ़ान। तभी पीछे से आवाज़ आई –
“रिया जी!”
राजेश खड़ा था। उसके चेहरे पर दृढ़ता और आंखों में सवाल। आरव तुरंत खड़ा हुआ। “तुम?”
राजेश ने सीधा कहा, “हाँ, मैं। रिया जी से शादी की बात चल रही है। और आप… आप कौन?”
आरव ने गहरी सांस ली। “मैं आरव हूं। और रिया मेरी ज़िंदगी है।”
हवा में तनाव भर गया। रिया बीच में खड़ी थी – दो दिल, दो रास्ते।
राजेश ने शांत स्वर में कहा, “रिया जी, मैं आपको सम्मान देता हूं। मेरी मां ने आपकी मां से बात की है। शादी की तारीख तय करने की बात हो रही है। मैं चाहता हूं कि आप खुश रहें। लेकिन अगर कोई और है, तो साफ कह दीजिए।”
रिया की आंखों में आंसू थे। “राजेश जी, मैं आपकी इज्ज़त करती हूं। आप अच्छे इंसान हैं। लेकिन मेरा दिल… मेरा दिल आरव के पास है।”
आरव ने रिया का हाथ पकड़ लिया। “देखा? उसने खुद कहा।”
राजेश का चेहरा कठोर हो गया। “आरव जी, आप अमीर हैं। बिज़नेसमैन हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि रिया के परिवार की हालत कैसी है? क्या आप उनकी जिम्मेदारी उठा पाएंगे?”
आरव ने दृढ़ता से कहा, “हाँ। मैं सब संभाल लूंगा। मैं सिर्फ रिया को नहीं, उसके परिवार को भी अपनाऊंगा।”
रिया कांपते हुए बोली, “राजेश जी, मैं झूठ नहीं बोल सकती। मेरा दिल आरव के साथ है। लेकिन मां… मां को कैसे समझाऊं?”
राजेश ने गहरी सांस ली। “ठीक है। मैं आपकी मां से बात करूंगा। अगर वो मान जाएं, तो मुझे खुशी होगी। लेकिन अगर नहीं… तो सोचिए।”
आरव ने बीच में कहा, “नहीं। मैं खुद रिया की मां से बात करूंगा। उन्हें बताऊंगा कि मैं रिया से कितना प्यार करता हूं।”
गंगा की लहरें तेज़ हो गईं। माहौल भारी था।
रिया घर लौटी। मां इंतजार कर रही थीं। “बेटी, राजेश अच्छा लड़का है। उसकी मां ने कहा है कि शादी जल्दी कर दें। तुमने क्या सोचा?”
रिया ने हिम्मत जुटाई। “मां, मैं… मैं आरव को पसंद करती हूं।”
मां चौंक गईं। “आरव? वो बिज़नेसमैन? बेटी, वो अमीर है। हमारी दुनिया अलग है। वो तुम्हें कभी अपनाएगा नहीं।”
रिया रो पड़ी। “मां, वो मुझे अपनाना चाहता है। उसने कहा है कि वो हमारी जिम्मेदारी उठाएगा।”
मां की आंखों में गुस्सा और डर था। “बेटी, अमीर लोग वादे करते हैं, निभाते नहीं। राजेश स्थिर है। सरकारी नौकरी है। तुम्हारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।”
रिया चुप रही। दिल में आरव की आवाज़ गूंज रही थी – “प्यार बैरियर तोड़ता है।”
उधर, आरव अपने घर में मां से बहस कर रहा था। “मां, मैं रिया से शादी करूंगा। चाहे कुछ भी हो।”
मां चिल्लाईं, “आरव! वो गरीब लड़की है। हमारी इज्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी। मैं कभी मंज़ूर नहीं करूंगी।”
आरव ने दृढ़ता से कहा, “मां, आप चाहें या न चाहें, मैं रिया को नहीं छोड़ूंगा।”
रात लंबी थी। रिया बिस्तर पर लेटी सोच रही थी – “क्या मैं सही कर रही हूं? क्या आरव सच में मेरा साथ देगा? या मां सही कह रही हैं?”
फोन की स्क्रीन चमकी – आरव का मैसेज: “कल मैं तुम्हारे घर आऊंगा। तुम्हारी मां से बात करूंगा। अब फैसला होगा।”
रिया का दिल जोर से धड़कने लगा।
(एपिसोड समाप्त। अगले एपिसोड में: आरव का घर पर आना, मां का गुस्सा और रिया का साहसिक फैसला।)
---