तेरे मेरे दरमियान - 92 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

तेरे मेरे दरमियान - 92

अशोक उन दोनो को दैखकर खुश हो जाता है और भगवान से कहता है --

अशोक :- हे भगवान , इन दोनो का ये प्यार बना रहे , जानवी को उसकी याददाश्त लोटा दो प्रभु ।

आदित्य जानवी को लेकर अंदर जाता है और उसे सौफे पर बिठा देता है और कहता है --

आदित्य :- तुम यहां पर बैठो , मैं तुम्हारे लिए कुछ बनाकर ले आता हूँ ।

आदित्य किचन के अंदर चला जाता है , आदित्य जानता था— ये पल सच नहीं है। ये नशे का असर है। वो ये भी जानता था— सुबह होगी, तो वही जानवी उससे दूरी बनाएगी, शायद नफरत भी करेगी।
फिर भी… उसमे किचन मे उसके लिए गया ।

किचन की हल्की रोशनी में आदित्य खड़ा था। सब्ज़ी काटते हुए
उसके हाथ काँप रहे थे। हर आवाज़ में जानवी की साँसें सुनाई दे रही थीं। वो मन ही मन सोच रहा था—“काश ये पल सच होता… काश ये बात सिर्फ़ नशे की न होती…

जानवी सोफ़े पर बैठी धीरे-धीरे बोल रही थी—

जानवी :- तुम अच्छे हो आदित्य… सब कहते हैं तुम बुरे हो…”
पर मुझे…अच्छा लगता है जब तुम पास होते हो…

आदित्य जानवी की बात सुन रहा था , पास मे ही कितन था और वहां से जानवी और उसकी आवाज साफ - साफ आ रही थी । आदित्य की आँखें भर आईं , वो जानता था—ये शब्द कल नहीं रहेंगे।


आदित्य प्लेट लेकर आया।जानवी ने देखा और मुस्कुरा दी।

जानवी :- तुमने खुद बनाया?”

उसने पूछा।

आदित्य :- हाँ। 

जानवी :- तुम्हारे हाथ का है…

जानवी खाना को दैखने लगी फिर वो बोली--

जानवी :- इसलिए अच्छा होगा।

आदित्य ने नज़रें झुका लीं। और खाने को कहा ।

दरवाज़े के पास अशोक खड़ा था , सब देख रहा था।
बिना कुछ कहे, उसकी आँखें भर आईं। उसे समझ आ गया था—
ये लड़का अपनी खुशी नहीं, सिर्फ़ जानवी की सलामती चाहता है।
अशोक मन ही मन बोला—

अशोक :- काश…ज़िंदगी आदित्य को उसका हक़ दे पाती। हे भगवान मेरी बेटी की याददाश्त लोटा दे , मेरे लिए नही इस आदित्य के लिए , जो अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता है और उसके लिए हर नफरत हर मुसीबत को झेलता है और अपनी पत्नी की रक्षा करता है । आदित्य को उसकी खुशी लोटा दे प्रभु ...

जानवी खाना खाते-खाते आदित्य की तरफ देखती रही।

जानवी :- तुम कहीं जाओगे तो नहीं?

उसने पूछा।

आदित्य ने धीमे से कहा—
आदित्य :- नहीं। मैं यही हूँ , कही नही जा रहा ।

और उस पल वो झूठ नहीं था। जानवी खाना खाते हूए आदित्य से पूछा ...

जानवी :- तुम्हें .. भूख नही लगी ?

आदित्य हल्की मुस्कान के साथ कहता है --

आदित्य :- नही .. तुम खाओ ।

जानवी अपना खाना टेबल पर रखती है और उठकर किचन की और जाने लगती है और कहती है --

जानवी :- तुम रुको मैं तुम्हारे लिए खाना लेकर आता हूँ ।

इतना बोलकर जानवी वहां से लड़खड़ाती हूई किचन की और जाने लगती है , अर्जुन उसे रोकने की कोशिश करता है--

अर्जुन :- जानवी , तुम बैठो मैं खुद ले लूगां ।

जानवी कहती है -

जानवी :- तुम चुप चाप यहां पर बैठो .. मैं लेकर आती हूँ ।

इतना बोलकर जानवी किचन के अंदर जाती है और एक प्लेट मे खाने लेकर आती है , आदित्य जानवी को अब बस दैखै जा रहा था , जानवी का अपने लिए प्यार दैखकर आदित्य के आंख छलकने लगता है पर आदित्य किसी तरह अपने इमोशन को कंट्रोल करता है । 

आदित्य जानवी की तरफ दैखे जा रहा था । जानवी चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए आदित्य के पास बैठ जाती है , इस पल—
वो उसकी तरफ बिल्कुल अलग नज़र से देख रही थी।
जैसे वो उसका अपना हो। आदित्य कुछ बोल नहीं पाया बस अपनी नजरे चुरा लिया । तो जानवी आदित्य से कहती है --

जानवी :- क्या हुआ? ऐसे क्या दैख रहे हो ?

जानवी ने धीरे से पूछा। फिर मुस्कुराकर बोली—

जानवी :- लो ना…रुको .. मैं खिला देती हूँ ।

उसने चम्मच उठाया। और आदित्य के मुह पास लेकर गई , आदित्य की जैसे साँस अटक गई। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। ये पहली बार था जब जानवी आदित्य को प्यार कर रही थी । आदित्य मन ही मन सौचता है --

आदित्य :- ये सपना है,

उसने मन ही मन कहा , जानवी ने चम्मच आगे बढ़ाया।

जानवी :- खाओ ना ...

उसने बच्चों की तरह कहा। आदित्य ने धीरे से मुँह खोला।
निवाला मुँह में गया—पर स्वाद गले से नीचे नहीं उतरा। क्योंकि आँखें
भर चुका था ।

वो जानता था—सुबह ये सब बदल जाएगा।सुबह जानवी फिर कहेगी—

" तुमसे बात नहीं करनी।”

पर इस एक पल में—वो सब भूल गया। आज वो बस प्यार महसूस कर रहा था।

जानवी ने दूसरा निवाला दिया।

जानवी :- धीरे खाओ , आराम से ।

आदित्य को आंखे से पानी आने लगा , अशोक का भी आदित्य को दैखकर आंखो मे आंशु आने लगा था क्योकी अशोक जानता था के आदित्य जानवी से कितना प्यार करता है और उसते गिल मे अभी क्या बित रहा है । आदित्य ने सिर झुका लिया कहीं जानवी उसकी आँखों का पानी ना देख ले।

उस पल आदित्य को लगा—अगर ज़िंदगी में एक ही सपना चुनना हो,
तो वो यही होगा। कोई वादा नहीं, कोई भविष्य नहीं—बस ये पल।

जानवी का हाथ थोड़ा काँपा तो आदित्य ने बहुत धीरे से प्लेट थाम लिया और कहा --

आदित्य :- बस, मेरा पेट भर गया ।

जानवी मुस्कुराई और आदित्य जानवी की आंखो मे दैखने लगा …वो अब भी सोच रहा था—

“अगर ये सपना है, तो काश कभी सुबह ना आए।”

रात गहरी होती गई , आदित्य जानवी को अपने गौद मे उठा लिया , जानवी अपनी दोनो हाथो को आदित्य के कंधे को पकड़कर रखा था , जानवी आदित्य के चेहरे को दैखकर हल्की मुस्कान दे रहा था । और फिर आदित्य के गाल पर प्यार से हाथ फैरची है और कहती है --

जानवी :- तुम इतने हेंडसम हो , तुम्हें कोई लड़की प्रपोज नही करती है क्या ?

जानवी के सवाल पर आदित्य जानवी की और दैखता है तो जानवी फिर से कहती है --

जानवी :- सॉरी .. सॉरी , मैं भी तुमसे कैसे सवाल कर रही हूँ , मैं तो तुम्हाकी बीवी हूँ ना .. इसिलिए शायद तुम डर रहे हो मुझे बताने को । 

आदित्य: - ऐसी कोई बात नही है ।

जानवी ( नशे मे ) :- क्या ..! एक ने भी प्रपोज नही किया ? खड़ुस हो क्या ? जो लड़किया पास नही आती है ।

आदित्य जानवी की बात पर हैरान होकर उसकी और दैखता है तो जानवी फिर कहती है --

जानवी :- दैखो .. मुझसे डरने की कोई जरुरत नही है , अब मैं तुम्हारी बीवी हूँ तो इसका मतलब ये नही है के तुम मुझसे डरते रहो । तुम मुझसे कह सकते हो ।

आदित्य :- बीवी से तो हर कोई डरता है ।

जानवी :- तो क्या तुम भी मुझसे डरते हो ?

आदित्य :- हां.... शायद , पता नही ।

बात करते - करते दोनो कमरे तक पहूँच चुके थे । आदित्य जानवी को धीरे-धीरे बेड पर लिटा देता है । और वहां से जाने लगता है तो जानवी आदित्य का हाथ पकड़ लेती है और कहती है --

जानवी :- कहां जा रहे हो ?

आदित्य :- घर जा रहा हूँ ।

जानवी :- घर क्यो ? 

आदित्य जानवी के सवाल का कोई जवाब नही दे पाता है तो जानवी फिर से कहती है --

जानवी :- क्या मेरा घर तुम्हारा घर नही है ?

जानवी आदित्य का हाथ कसके पकड़ी थी ताकी आदित्य उसे छुड़ा ना पाये , पर आदित्य जानता था के जानवी ये सब नशे की हालत मे कर रही है , अगर वो यहां पर रुका तो सुबह बहुत बड़ा बवाल खड़ा हो जाएगा ।

आदित्य :- ऐसी बात नही जानवी .. मुझे जाना ही होगा , वरना सुबह बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी ।

जानवी :- कुछ नही होगा , मैं हूँ ना ।

जानवी आदित्य को अपने करीब खींच लेती है , आदित्य जानवी के करीब पहूँच जाता है , जानवी आदित्य को गले लगता लेती है और कहती है --

जानवी :- तुमने मेरा हर वक्त साथ दिया आदित्य .. पर मै ही तुम्हें हर बार गलत समझती रही , ये सब उस विकास की वजह से है , उसने आज मेरे साथ ... उस दिन एक्सीडेंट की वजह से मैं तुमसे कुछ कह नही पाई थी । बहुत कुछ कहना था मुझे तुमसे । तुम्हें पता है , तुमसे दुर मैं रह नही पाती हूँ , अजीब सा बैचेनी होती है ।

आदित्य ये सब सुनकर हैरान था , आदित्य को लगा रहा था जैसे जानवी को अब सब याद आने लगा है ।

जानवी :- उस दिन जो मैं तुमसे कह नही पाई , वो मैं अब कहती हूँ आदित्य ..... 

जानवी आदित्य की और दैखती है और अपने दोनो हाथ उसके गाल पर रखती है , आदित्य एक दम चुप, हैरान था , इसकी दिल की धड़कन तेज हो चुकी थी । वो बस जानवी को दैखे जा रहा था , जानवी कहती है --

जानवी :- आदित्य ... I LOVE YOU ... I LOVE YOU SO MUCH आदित्य । 

जानवी से इतना सुनकर आदित्य हैरान और स्तब्ध था । आदित्य को चुप दैखकर जानवी फिर से कहती है --

जानवी :- क्या हूआ ? तुम चुप क्यों हो ? 

आदित्य :- तुम्हें पता है जानवी । ये सुनने के लिए मैं कबसे तरस रहा था । पता नही ये सच है या सपना , पता नही ये सुबह होते ही क्या होगा ?

जानवी :- सुबह क्या होगा , कुछ भी तो नही और अब सुन लिये ना । तो तुम भी कहो , क्या तुम मुझसे प्यार करते हो ?

आदित्य :- हां .. जानवी , करता हूँ , बहुत प्यार करता हूँ तुमसे ।

दोनो एक दुसरे को बाहों मे भर लेता है , कुछ दैर तक एक दुसरे के बाहों मे रहने के बाद आदित्य कहता है --

आदित्य :- जानवी , अब तुम सो जाओ ।

आदित्य हैरान था , वो परेशान था के पता नही ये सब जो जानवी बोल रही है वो सुबह तक याद रहेगा या नही ।

जानवी :- तुम आओ ना ..

जानवी के इतना कहने पर आदित्य कहता है --

आदित्य :- नही .. तुम सो जाओ , मैं बाहल सो जाता हूंँ ।

जानवी :- क्या हम एक साथ एक बेड पर नही हो सकते ? इतने दिनो से हम अलग रहे है । क्या अब हम साथ नही हो सकते ?

जानवी आदित्य को अपने साथ रहने के लिए बोल रही थी तब आदित्य सौचता है --

" काश ये तुम रोष मे रहकर कहती जानवी , काश ये पल यही रुक जाता , सुबह होता ही नही । पता नही सुबह होते ही क्या होगा । तुम अभी नशे हो इसिलिए मैं यहां रुकुगां तो गलत होगा । मुझे इसे सुलाकर यहाॉ से चले जाना चाहिए । "


To be continue....858