माई डियर प्रोफेसर - भाग 12 Vartika reena द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 12














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उस दिन से अब तक एक हफ्ता बीत चुका था । अमोघ नैना का बेहद ध्यान रखता था । वही नैना उससे रूखा ही बर्ताव करती थी । उसे याद था अमोघ की बदतमीजी ! पर...अब वो अमोघ के एफर्ट्स की अनदेखी भी नही कर सकती थी । वो दिखाती नही थी पर अपनी बिमारी के बारे मे जान परेशान जरूर हो गई थी । इसलिए नही की उसे कुछ हो सकता है बल्कि इस लिए की अगर उसे कुछ हो गया तो उसका छोटा भाई अकेला रह जाएगा । अपने मां बाप को जानती थी वो ! उनके लिए बच्चे...बच्चे नही बस एक ट्रॉफी है ! पडोसी , रिश्तेदार ..समाज — इन सब के सामने ढींगे हांकने का एक जरिया ! 

नैना की आंखे नम पड गई! 

वो अभी और कुछ सोचती की उसे अपने कंधे पर किसी के हाथ की तपन बस महसूस भर हुई।  उसने सर उठाकर देखा तो अमोघ खडा था । स्थिर , शांत ! उस से..उससे कितना अलग था वो ! कहा वो इतनी विचलित और हर बात पर परेशान हो जाने वाली और कहा वो मुश्किल से मुश्किल प्रस्थिति मे भी गिरी सा स्थिर और अडिग ! 

चिढ और जलन...दोनो होती थी उसे अमोघ से ! 


नैना ने अपने कंधे पर देखा तो उसकी आंखे नर्म पड गई । अमोघ की हथेली एक इंच हवा मे थी । उसे छू नही रहा था वो ! करीबी बस इतनी थी की नैना को एहसास हो जाए की वो है उसके पास !


" ठीक हो ? ", अमोघ उसके पास ही कुर्सी खींच कर बैठ गया ।


" हम्म! बस थोडा सर दर्द है । ", नैना ने पलके झपकाते हुए कहा।

अमोघ के चेहरे पर चिंता की लकीर दिखाई देने लगी। अभी नैना कुछ समझ भी पाती की अमोघ तेजी से उसके पीछे आकर खडा हो गया और उसका सर दबाने लगा।


नैना चौंक कर सटने लगे तो अमोघ ने बस नजर भर उसे देखा। वो शांती से बैठ गई ।


" थैंक यू अमोघ ! ", कुछ समय बाद नैना बोली। 

" किस लिए? "

" तुम इतना ध्यान रख रहे हो मेरा ! मेरे कारण परेशानी भी होती होगी तुम्हे ! "


अमोघ की उंगलिया स्थिर हो गई।  वो नैना के कान के पास आकर रूक गया। 

" परेशानी तब होती अगर आप जिद्दी और नखरीली होती! लेकिन आप तो हर चीज बिल्कुल गंभीरता से करती है नैना । और अगर आप जिद्दी होती भी तो भी आपका साथ नही छोडता । आपकी जिद्द , नखरा , गुस्सा , हँसी , प्यार...सब सर आंखो पर! बस आपका होना काफी है नैना !",


अमोघ की बात सुनकर नैना के पेट मे कुछ कुछ होने लगा। उसने हल्के से गर्दन घुमाई।  दोनो का चेहरा बहुत पास था । अमोघ प्यार भरकर नैना की आंखो मे देख रहा था । नैना की धडकने रफ्तार पकडने लगी थी । उसके गालो पर हल्की लाली छा गई । 



शायद वो गलत थी ! शायद वो अमोघ के पहले बर्ताव के कारण उसके बदलाव को नही देखना चाहती थी । लेकिन शायद अब वो उसकी तरफ झुकने लगी थी....एक नए एहसास के साथ! 

जिसे अभी प्यार कहना तो जल्दबाजी होगी ! 





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चारू अपने नोट्स कम्प्लीट कर रही थी । वो इस समय लाइब्रेरि मे थी । उसने बालो का बेतरतीब सा जुडा बना रखा था। नाक पर भूरे चमकते रिम वाल्व चश्मा टिका था और वो लैपटॉप को देखते हुए अपनी पैन की कैप चबाए जा रही थी । वो अभी पढ ही रही थी की दो उंगलियो ने उसकी बांह के पास टेबल पर दस्तक करी । 


चारू ने सर उठाकर देखा तो उसकी आंखे बडी हो गई।  पैन चबाते दांत रूक गए। वो एक टक अपने सामने खडे प्रोफेसर अमर राजपूत को देखती रही ।


वो अपनी गहरी भूरी आंखो से उसे ही देख रही थे । उनके बाल बिखर कर माथे पर पडे थे। शर्ट की आस्तीन कोहनी तक मोड रखी थी। ऊपर के दो बटन खुले हुए थे। 


चारू को महसूस हुआ की उसका दिल फुदक ने लगा है ! और अब किसी भी वक्त सीने से बाहर निकल नाचने लगेगा ।


" मिस चारू ! ", प्रोफेसर अमर ने चारू को पुकारा ।


मगर हमारी चारू तो इस समय नयनसुख लेने मे व्यस्त थी! उन्हे कहा सुध थी कि उसके सामने खडा ये हैंडसम प्रोफेसर उसे ही आवाज लगा रहा है। वो तो बस एकटक बिना पलके झपकाए अमर को देखती रही ।


अमर की आंखे सिकुड गई।  ये चौथी बार था जो उसने चारू को ऐसे अलग ही जोन मे देख रहा था ! उसने टेबल पर जरा जोर से हाथ मारा और चारू की तरफ झुक गया।


आवाज से चारू हडबडा कर खडी हो गई । और यही उसे नही करना था । वो एकदम पत्थर की हो गई थी । वही अमर के चेहरे का रंग भी उड गया था । उसकी आंखे बडी हो गई थी। 

चारू के हडबडा कर खडे होने के कारण , उसकी तरफ झुका हुए अमर के गालो से चारू के होंठ हल्के से.छू गए।


चारू का दिल तो अब फट पडने को तैयार था।.उसके शरीर ने एक झुरझुरी ली और उसने अमर को देखा । 


और बस...अगले ही पल कान पकडे वो अमर से माफी मांगने लगी।


" सॉरी सर! मुझे नही पता ये कैसे हो गया ! मै ऐसा कुछ नही करना चाहती थी । सॉरी सर...मै..मै..पागल हूं ! मुझे ऐसे खडा नही होना था। सर मै आपकी इज्जत नही लुटना चाहती थी। मेरे से बहुत बडी गलती हो गई।  सर मुझे जेल मत भेजना ! मैने जानबूझकर आपको किस.नही किया। सॉरी !!!!",,,कहते कहते चारू की आंखे नम हो गई।  वो अपराधबोध से घिरने लगी थी। उसे लगने लगा कि उसने गलती से ही सही पर एक बहुत बडी लाइन क्रॉस कर दी थी ।



अमर कुछ कहता उससे पहले ही अपना सामान लेकर चारू वहा से भाग गई ।


भौचक्का सा अमर अपनी जगह.पर खडा चारू को जाते हुए देख रहा था।   चारू की बातो पर वो सर हिलाकर रह गया ।



" बेवक्त लडकी ! मेरी बात तो सुन लेती । अब पता नही कहा चली गई। बात को किलयर करे.बिना कौन जाता है । और मै इसे जेल क्यो भेजूंगा ! गलती से हुआ! कौन सा जानबूझकर किया इसने ! "


अमर बड़बड़ाने लगा। 




क्रमशः