तेरे मेरे दरमियान - 88 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तेरे मेरे दरमियान - 88

विक्की :- तुम इस मुसीबत मे खुद फसी हो ना की मेरे वजह से , मैने तुम्हें पहले ही कहा था के Abortion करा लो पर नही तुम्हें तो इस बच्चे को लेकर शादी करनी है । तुम्हें पैसा भी दिया ताकी तुम उस पैसे से कुछ कर सको । 

मोनिका :- वो सब मैं कुछ नही जानती, मैने तुम्हारे लिए सबसे झुट बोला , अब अगर सच सबके सामने आ गया तो मेरा क्या होगा ? सब मुझे गलत नजरो से दैखेगा ।

विक्की :- इसके लिए तुम खुद जिम्मेदार हो ।

मोनिका :- दैखो , तुम्हें कुछ करना होगा । ताकी सच सबके सामने ना आए । अगर सच सामने आ गया तो तुम भी बचोगे नही ।

विक्की को ये सुमकर गुस्सा आ जाता है और विक्की मोनिका से कहता है --

विक्की :- तुम मुझे धमकी दे रहे हो ?

मोनिका :- तुम्हें जो समझना वो समझो , पर इस मुसिबत से बाहर बाहर निकालो ।

विक्की :- पर क्या करु , दैखो मोनिका तुम्हें जो करना है वो करो , अगर तुम्हारी वजह से मेरे और शमिका की रिश्ते को कुछ हुआ तो मैं तुम्हें .....

मोनिका गुस्सा होकर कहती है --

मोनिका :- तो क्या , तो क्या कर लोगे विक्की , मैं तुम्हारे धमकी से डरने वाली नही हूँ । आज मेरे मां और पापा को मेरे और तुम्हारे बारे मे सब पता चल गया है , मैं उनकी नजरो मे गिर गई हूँ ।

विक्की :- क्या , क्या कहा , तुमने उन्हें बताया ही क्यों ? अगर उनके वजह से कुछ गड़बड़ हूआ तो दैख लेना ।

मोनिका :- तो मैं और क्या कहती , और कितना झुट बोलू सबसे मैं।

विक्की :- तुमने प्रॉब्लम खुद क्रियेट किया है , अब तुम समझो और हां आगे से मुझे कॉल मत करना वरना बरोत पछताओगी ।

विक्की इतना बोलकर फोन काट देता है , विक्की जैसे ही पिछे मुड़ता है तो सामने शमिता को खड़ा दैखता है , शमकिा को अपने सामने खज़ा दैखकर विक्की की सांस जैसे अटक गया । विक्की को लगा जैसे शमिका ने मोनिका से किया सारी बात सुन लिया है । 

विक्की के माथे पर पसीना आ गया था , विक्की शमिका से घबराते हूए कहता है ---

विक्की :- श.... शमिका त...त...तुम यहां?

विक्की की हालत शमिका को दैखकर खराब हो रहा था , विक्की के मुह से अब एक शब्द भी नही निकल रहा था , शमिका विक्की को ऐसे घबराते दैखकर हैरान थी , वो तो यहां पर इसिलिए आयी थी क्योकी विक्की को आने मे दैर हो रहा था । शमिका विक्की को दैखकर मन ही मन सौचती है --

शमिका :- ये विक्की इतना घबरा क्यों रहा है , कही ये मुझसे कुछ छुपा तो नही रहा है । 

इतना सौचती हूई शमिका विक्की से सवाल करती है --

शमिका :- क्या बात है ? तुम इतना परेशान क्यों हो , कुछ कहा है क्या तुम्हारे दोस्त ने ?

शमिका की बात को सुनकर विक्की समझ गया था से शमिका ने कुछ भी नही सुना , विक्की एक राहत की सांस लेता है और कहता है --

विक्की :- हां वो मेरे दोस्त को पापा बहोत बिमार है , और उसे कुछ पैसे चाहिए , तो इसिलिए बस ।

शमिका :- पर मैने तो सुना के तुम उससे कह रहे थे को इस प्रॉब्लम मे तुम खुद फसी हो तो तुम खुद बाहर आना और मुझे दुबारा कॉल मत करना ?

शमिका की बात को सुनकर विक्की अब स्तब्ध था । उसे समझ नही आ रहा था के अब वो क्या बोले । शमिका भी विक्की को जवाब का इंतेजार कर रही थी , तब विक्की फिर कहता है --

विक्की :- अ....हां .... वो मैने इसिलिए कहा क्योंकी उसे मैं पहले ही बहोत पैसा दे चुका हूँ , पर अब और नही दो सकता , हर बार वो मुझसे पैसे मांगने के लिए परेशान करता है , इसिलिए मैने उसे ऐसा कहा ।

शमिका :- हां तो क्या हूआ ? तुम दे सकते हो और वो तुम्हारा दोस्त है इसिलिए मांग रहा है ।

विक्की के जान मे जान आया , विक्की मन ही मन कहता है --


" आज तो बच गया , उस मोनिका का कुछ करना पड़ेगा , वरना वो उसको साथ - साथ मुझे भी डुबोके मानेगी ।


डिनर टेबल पर शमिका विक्की से पूछती है --

शमिका :- विक्की , तुम जिससे बात कर रहे थे वो एक लड़की थी ना ?

विक्की अपने मुह मे निवाला लोने ही वाला था के शमिका नो विक्की से ये सवाल पूछ लिया , विक्की ऑये सवाल सुनकर घबरा जाता है , और निवाले को प्लेट मे रख कर कहता है --

विक्की :- तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो शमिका ?

शमिका :- बस मुझे लगा के पूछना चाहिए तो ... मैने पूछ लिया । 

विक्की चुप हो जाता है , वो क्या बोलता ये समझ मे नही आ रहा था । तभी शमिका कहती है --

शमिका :- मैने बस ऐसे ही पूछा था , पर तुम्हारी चुप्पी मुझे समझ नही आ रही है ।  

विक्की ने बिना वजह कहा—

विक्की :- तुम मुझ पर भरोसा तो करती हो ना?”

शमिका ने चम्मच रोक लिया और कहा --

शमिका :- जो इंसान सच्चा होता है, वो भरोसे का सवाल
खुद नहीं उठाता।

शमकिा की बात पर विक्की बात करते वक्त सीधे आँखों में नहीं देख पा रहा था , शमिका ने महसूस किया के उसकी आँखें कुछ छुपा रही हैं। वो विक्की की और दैखकर मुस्कुराई…पर वो मुस्कान सवाल थी।

शमिका कहती है --

शमिका :- विक्की , मुझे तुम पर भरोसा है इसिलिए मैं तुम्हारे साथ हूँ , पर एक बात बात रखना , अगर तुमने धोका दिया या देने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नही होगा ।

शमिका की बात पर विक्की घबरा जाता है और चुप चाप होकर खाने लगता है ।

दुसरे दिन विकास जानवी के घर चला आता है , जहां पर अशोक विकास को दैखकर उसे वही पर रौक लेता है और कहता है --

अशोक :- तुम यहां ? तुम्हारी इतनी हिम्मत के मोरे घर तक आ जाओ ।

विकास :- सॉरी ससुर जी , पर मैं यहां पर खुद की मर्जी से नही आया हूँ , आपकी बेटी ने मुझे खुद बलायी है । 

ये सुनकर अशोक दंग रह गया , तभी विकास अशोक को जलाने के लिए कहता है --

विकास :- क्या करु ससुर जी , मैने तो बहोत कोशिश किया के जानवी से दुर रहूँ । पर वो क्या है ना जानवी मुझसे दुर नही रह पाती । तो अब आप बताए ससुर जी , गलती मेरी कहां पर है !

अशोक: - तुम मेरी बेटी से दुर रहो, तो यही तुम्हारे लिए बेहतर होगा । वरना कही ऐसा ना हो के तुम्हें बाद मे पछताना पड़े ।

विकास अशोक के बातो का मजाक उड़ाते हूए कहता है --

विकास :- धमकी , ससुर जी , ससुर जी , ये बात आप जानवी से क्यों नही कहते , मैं तो पराया हूँ , पर जानवी तो आपकी बेटी है , आप ना ये सब बाते उससे करिए ।

विकास की बात पर अशोक फिर से चुप हो जाता है क्योंकी अशोक जानता था के विकास ये सब उससे जानबूझकर कर रहा है क्योकी विकास जानता है के जानवी अपने पापा की बात को नही मानती है।

विकास फिर से कहता है --

विकास :- क्या बात है ससुर जी , जानवी से आप ये सब बातो नही कर सकते , ओ... जानवी आपकी बात मानती कहां है , बेचारी .. जब आपकी बेटी ही आपकी बात नही मानती तो फिर आपकी हिम्मत कैसे होती है मुझसे ये सब कहने की ।

विकास की बात पर अशोक को बहोत गुस्सा आता है अशेक विकास से कुछ कहता उससे पहले वहां पर जानवी आ जाती है और कहती है --

जानवी :- अरे विकास , तुम आ गए ।

जानवी ती आवाज को सुनकर अशोक रुक जाता है , जानवी की बात का जवाब देते हूए विकास कहता है --

विकास :- हां बस अभी कुछ दैर ही हूआ , वो मैं पापा से बात कर रहा था के हम शादी कहां पर करेगें , ऐसे सिंपल या डेस्टिनेशन । बस यही बाते चल रही थी के तुम आ गई ।

शादी की बात को सुनकर जानवी कुछ जवाब नही देती क्योंकी जानवी खुद कंफ्यूजन मे थी के उसके दिल मे जो फिलिंग्स है वो किसके लिए है ।

जानवी :- आओ , तुमसे कुछ काम है । 

इतना बोलकर जानवी विकास को अपने कमरे की तरफ लेकर जा रही थी । अशोक को ये दैखकर बहोत गुस्सा आ रहा था पर अशोक बेचारा तरता भी क्या , अपनी बेटी के याददाश्त जाने और जिद के आगे अशोक मजबूर था । विकास जाते - जाते अपने चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान देकर अशोक की और दैखता है और वहां चला जाता है ।

अशोक को ये दैखकर बहोत बुरा लगा के जिससे अशोक अपनी बेटी को दुर रखना चाहता है वही उसके सामने इसके बेटी के साथ है ।

कमरे मे जानवी अलमारी से कुछ फाईले निकाल रही थी और विकास वही पर बैठकर जानवी के कमर को दैख रहा था । जानवी जींस और एक टॉप पहनी थी जिस कारण जब जानवी अपना हाथ उपर उठाती तो जानवी का टॉप भी उपर हो जाता और कमर दिखने लगता , विकास अपनी नजरे जानवी के कमर पर ही टिकाए रखा था ।

विकास के मन मे लालच आ गया और विकास अब जानवी को छुना चाहता था । विकास के माथे पर पसीना की बूदें आ जाती है , विकास वहां से उठता है और अपनी नजरे इधर - उधर करता है , जब विकास देखता है के आस - पास कोई नही है तब विकास धिरे - धिरे जानवी की और पड़ता है , अब विकास जानवी के बिल्कुल पास खड़ा था , जानवी इस बात से अनजान थी , विकास अपनी नजर जानवी के कमर पर गड़ाए रखा था ।

विकास अपना हाथ जानवी के कमर की और बड़ाता है , अब जैसे ही विकास का हाथ जानवी के कमर को छुने जाता , जानवी पलट जाती है और अपने बहोत करीब विकास को दैखकर चोंक जाती है और लड़खड़ाते हूए दो कमद पिछे चली जाती है ।

जानवी अपने आप को किसी तरह संभालती है और विकास से कहती है --

जानवी :- विकास .. तुम मेरे पिछे क्या कर रहे थे ?

जानवी के सवाल से विकास घबरा जाता है और चुप रहता है । जानवी को विकास पर शक होने लगता है पर जानवी इग्नोर कर देती है और कहती है --

जानवी :- तुम्हें पता है विकास ......

जानवी इतना बोलती ही है के विकास झट से जानवी के करीब आता है और उसके कमर पर हाथ रख देता है और जानवी को दिवार पर सटा देता है । जानवी विकास के इस हरकत से बिल्कुल अनजान थी क्योकी विकास ने ये अचानक से कर दिया । 

विकास जानवी के कमर पर अपना हाथ उेरने लगता है , जानवी विकास की मनसा को भांप लेती है और विकास से अलग हेने के लिए वहां से निकलना चाहती थी पर विकास जानवी को निकलने नही देता है और जानवी को किस करने के लिए अपने होंट को जानवी के करीब लेकर जाता है ।

जानवी विकास के इस हरकत से घबरा जाती है और जानवी ते मन मे उस समय आदित्य का ख्याल आता है , जानवी अपनी आंखे बंद करती है और विकास को जौर से घक्का देती है जिससे विकास जानवी से दुर लड़खड़ा जाता है । 

विकास जानवी की और हैरानी से दैखता है तो जानवी विकास से गुस्से से कहता है --

जानवी :- ये क्या था विकास ? तुम क्या करने की कोशिश कर लहे थे ? और ... और तुमने ये सोचा भी कैसे के मैं ये सबके लिए तैयार हूँ ।

विकास :- पर जानवी तुम क्यों तैयार नही हो ? आखिर हम दोनो एक दुसरे से प्यार करते है तो क्या मेरा इतना भी हक नही को मैं तुम्हें किस करु ।

जानवी :- नही कर सकते तुम , मुझसे पूछे बिना तुम्हारी हिम्मत कैसे हूई । आगे से ये सब नही होना चाहिए , वरना बहोत बुरा होगा ।

विकास जानवी के करिब आता है और कहता है --

विकास :- तुम मेरी बोने वाली बीवी हो , हमारी शादी होने वाली है और हम एक दुसरे ये प्यार करते है , तो फिर ये सब करने मे बुराई ही क्या है ?

जानवी :- मुझे नही पता पर मैं अभी ये सब नही कर सकती ।

विकास :- नही कर सकती या करना नही चाहती । 

जानवी हैरानी से पूछती है --

जानवी :- क्या मतलब है तुम्हारा ?

विकास :- मतलब साफ है जानवी , तुम्हारे दिल मे मेरे लिए प्यार है ही नही । मुझे तो लगता है के तुम उस आदित्य से प्यार करती हो ।

विकास से इतना सुनकर जानवी अब दुविधा मे थी । जानवी विकास के बात का कोई जवाब नही दे पाता है । और जब से जानवी आदित्य के घर से वापिस आई है तब से जानवी को बहोत अकेला पन सा लगने लगा था ।

To be continue.....807