हथकड़ी - 3 Ashish Bagerwal द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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हथकड़ी - 3

हीरालाल जी जब गोदाम पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनके स्वप्न में जो नज़ारा था, गोदाम में वैसा कुछ भी नहीं था। एक बल्ब प्रज्वलित हो रहा था जैसे कि अंधेरी रात में उम्मीद की किरण सवेरा जरूर होगा ये गुनगुना रही हो, उन्होंने राहत भरी लम्बी श्वास ली और मटकी में से शीतल जल ग्रहण किया और छड़ी लेके घर लौट आये। बच्चे सो रहे थे सुप्रभात होने में अभी समय था, उन्होंने बिस्तर में जाने के बजाय माला जपना उचित समझा और रामधुन में मगन हो गए।

पिताजी उठिए एक उच्च स्वर में वाणी ने हीरालाल जी को जगाया, चाय नाश्ता तैयार है और आप यहां क्यों सो रहे हैं, आपसे मिलने विनायक चाचा आए हैं।

हीरालाल जी - वो माला जपते - जपते पता नहीं कब आंख लग गई और में यहीं सो गया, उनसे कहो में आ रहा हूं।

विनायक जी मन ही मन कुछ बडबडा रहे थे, मानो कुछ कहने को आतुर हो लेकिन कह भी नहीं पा रहे हो, चाय ठंडी हो गईं है चाचा जी वाणी हंसते हुए कहती है। 

विनायक जी - हां बिटिया, में अपने विचारों में खो गया था, सो ध्यान नहीं रहा , और बताओ कैसी है तुम्हारी व्यापार मंडल की जिम्मेदारियां।

वाणी - अद्भुत हंसते हुए , जिम्मेदारियों से बहुत कुछ सिखने को मिलता है, अनुशासनात्मक रुप से व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा सकता हैं, जब कोई व्यक्ति नियम बनाता है तो उन्हें पालन करने से कतराता क्यों है, ये बात मुझे आज तक भलीभांति समझ नहीं आईं है।

विनायक जी - ऐसे नियम जो व्यक्ति की जीवनशैली में अनावश्यक परिवर्तन का कारण बने उन्हें वह सदैव त्यागने की कोशिश करता है, भले ही वो उसके अहित का कारण बने।

वाणी - अच्छा, अब समझ आया, धन्यवाद चाचा जी।

हीरालाल जी बरामदे में दाखिल होते हैं और विनायक जी को प्रणाम करते है, वाणी वहां से चली जाती हैं, कुछ देर इधर उधर की बाते करने के पश्चात हीरालाल जी अपने स्वप्न का जिक्र विनायक जी से करते हैं, विनायक जी बड़ी विनम्रता से उनकी बातें सुनते हैं और कुछ देर सोच मैं पड़ जाते हैं। फिर एकाएक बोलते हैं देखिए हीरालाल जी आपने जो स्वप्न देखा वो वास्तव मे सत्य है किन्तु उनमें जो किरदार थे वो आप नहीं हैं कोई ओर है।

हीरालाल जी चौंकते हुए!- ऐसा कैसे हो सकता है मेरे स्वप्न में स्वयं को नहीं पहचानूंगा क्या?

विनायक जी - आप विचलित क्यों हो रहे हैं पहले मेरी पुरी बात तो सुनिए, फिर विचार कीजियेगा कि मैं सही हु या गलत।

हीरालाल जी हंसते हुए - ठीक हैं आपको भी सुन लेते है महाजन जी ।

विनायक जी - आप सदैव इस बात से रुष्ठ रहते थे , की आपके कोई पुत्री नहीं है, मगर आपको इस बात की खुशी है की आपको पुत्री स्वरूप बहुएं मिली हैं, जो अपनी जिम्मेदारियो को बखूबी समझती हैं, आप हर उस नई सोच की प्रेरणा है जो उन बेड़ियों को पांव में ओर उन हथकड़ियों को हाथ में पहनना नहीं चाहती जो उनके पंखों की उड़ान रोके। आप के स्वप्न में जो हथकड़ी आई थी वो आपको बंदी बनाने नहीं बल्कि आपके विचारों से प्रभावित होकर स्वयं को आपको समर्पित करने आई थी।

हीरालाल जी बात समझ गए थे दोनों बड़े जोर जोर से हंसने लगते हैं।

। समाप्त।