The Mafia Weakness - 4 Goyal Khushi द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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The Mafia Weakness - 4

महल की हवा अब और भी भारी हो चुकी थी। अरमान के जाने के बाद ऐशा अपने कमरे में बंद तो थी, लेकिन उसका दिमाग उस 'निषिद्ध गलियारे' में अटका हुआ था। अरमान की वह चेतावनी—"जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ किसी को आने की इजाज़त नहीं होती"—उसके कानों में किसी चुनौती की तरह गूँज रही थी। ऐशा जानती थी कि अगर वह पकड़ी गई, तो अंजाम बुरा होगा, लेकिन जिज्ञासा (Curiosity) एक ऐसा ज़हर है जो डर को मार देता है।
उसने दबे पांव अपने कमरे का दरवाज़ा खोला। बाहर सन्नाटा था, पर वह सन्नाटा सुकून देने वाला नहीं, बल्कि डराने वाला था। वह धीरे-धीरे उसी गलियारे की ओर बढ़ी जहाँ अरमान उसे ले गया था। दीवारों पर लगे पूर्वजों के पोर्ट्रेट्स उसे ऐसे देख रहे थे जैसे वे उसे वापस जाने के लिए कह रहे हों।
वह उस भारी, काले लोहे के दरवाज़े के सामने आकर रुक गई। नीचे से वही नीली रोशनी अभी भी झिलमिला रही थी। ऐशा का दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उसे डर था कि कहीं सुरक्षा कैमरों में उसकी धड़कनें रिकॉर्ड न हो जाएं। उसने कांपते हाथों से कुंडी को छुआ। उसे लगा था कि यह लॉक होगा, लेकिन शायद जल्दबाज़ी में या किसी अनजाने भरोसे में, अरमान उसे बंद करना भूल गया था।
चर्रर्र... दरवाज़ा एक धीमी कराह के साथ खुला।
अंदर कदम रखते ही ऐशा को महसूस हुआ कि वह किसी दूसरी ही दुनिया में आ गई है। यह कमरा महल के बाकी हिस्सों जैसा आलीशान नहीं था। यहाँ की दीवारें कंक्रीट की थीं और छत से अनगिनत तारें लटक रही थीं। कमरे के चारों ओर विशाल डिजिटल स्क्रीन्स लगी थीं, जिन पर कोड्स और नक्शों का अंतहीन सिलसिला चल रहा था।
पर जो चीज़ सबसे ज्यादा डरावनी थी, वह कमरे के बीचों-बीच रखा एक कांच का विशाल चैम्बर था। उसके अंदर एक छोटा सा मेटल डिवाइस रखा था, जिससे वह नीली रोशनी निकल रही थी। उस डिवाइस पर अंग्रेज़ी के दो अक्षर खुदे थे: V.K.
"V.K.? वीर खान?" ऐशा ने फुसफुसाते हुए कहा। उसे याद आया कि अरमान ने वीर का नाम लेते वक्त अपनी मुट्ठियाँ कस ली थीं।
अचानक, दाईं ओर की एक स्क्रीन पर हलचल हुई। एक वीडियो फाइल अपने आप प्ले होने लगी। ऐशा की सांसें थम गईं। वीडियो में अरमान खान था। लेकिन यह वह अरमान नहीं था जो कल रात उसे गली में मिला था। वीडियो वाला अरमान घायल था, उसके सफेद शर्ट पर खून के धब्बे थे। वह किसी छिपे हुए कैमरे की ओर देखकर चिल्ला रहा था:
"वीर! तुम पागल हो चुके हो। यह डिवाइस कोई खिलौना नहीं है। अगर यह एक्टिवेट हो गया, तो यह पूरे शहर का डिजिटल ग्रिड तबाह कर देगा। मैं इसे तुम्हारी सनक की भेंट नहीं चढ़ने दूँगा!"
ऐशा को अब पूरी तस्वीर साफ होने लगी थी। यह 'V.K.' डिवाइस कोई आम गैजेट नहीं, बल्कि एक साइनैप्टिक वायरस (Synaptic Virus) था—एक ऐसा हथियार जो पूरे शहर की बिजली, बैंक और सुरक्षा प्रणालियों को एक पल में राख कर सकता था। और अरमान? अरमान उसे कैद नहीं कर रहा था, बल्कि वह इस तबाही को वीर से बचा रहा था।
"तो क्या अरमान वाकई मुझे बचा रहा है... या वह खुद इसे इस्तेमाल करना चाहता है?" ऐशा के मन में शक का बीज पनपने लगा।
तभी, कमरे के तापमान में अचानक गिरावट महसूस हुई। पीछे से एक ठंडी आवाज़ आई, जिसने ऐशा की रीढ़ की हड्डी में सिहरन पैदा कर दी।
"खूबसूरत चीज़ें अक्सर खतरनाक होती हैं, है ना ऐशा?"
ऐशा बिजली की फुर्ती से पलटी। दरवाज़े की चौखट पर अरमान खड़ा था। उसकी परछाईं पूरे कमरे पर भारी पड़ रही थी। उसकी आँखें गुस्से से लाल थीं, लेकिन उनमें एक अजीब सी उदासी भी थी। वह धीरे-धीरे ऐशा की तरफ बढ़ने लगा। उसके हर कदम के साथ फर्श गूँज रहा था।
"अरमान... मैं... मैं बस..." ऐशा हकलाने लगी। वह पीछे हटी, यहाँ तक कि उसकी पीठ उस कांच के चैम्बर से जा टकराई।
अरमान उसके बिल्कुल करीब आकर रुका। उसने अपने दोनों हाथ कांच पर रख दिए, जिससे ऐशा उसके और उस रहस्यमयी डिवाइस के बीच कैद हो गई। अरमान के शरीर की गर्माहट और उसके सिगार की खुशबू ऐशा के होश उड़ा रही थी।
"मैंने तुमसे कहा था कि यहाँ मत आना," अरमान की आवाज़ किसी फुसफुसाहट जैसी थी, लेकिन उसमें मौत जैसी ठंडक थी। "तुमने वह देख लिया है जो मेरी मौत की वजह बन सकता है। अब मैं तुम्हें चाहकर भी इस महल से बाहर नहीं भेज सकता।"
उसने अपनी एक उंगली से ऐशा के चेहरे को छुआ। उसका स्पर्श आग जैसा था। "वीर खान मेरा भाई है, लेकिन वह एक साया है जो मुझे मिटाना चाहता है। यह डिवाइस उसकी सबसे बड़ी चाहत है। और अब, जब तुमने इसे देख लिया है, वीर तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ेगा। तुम अब मेरी मजबूरी बन गई हो, ऐशा।"
ऐशा की आँखों में आँसू आ गए। "तुमने मुझे फँसा दिया, अरमान! तुमने मुझे इस लड़ाई के बीच में लाकर खड़ा कर दिया!"
अरमान ने उसके चेहरे को अपनी दोनों हथेलियों में कसकर थाम लिया। "नहीं! मैंने तुम्हें बचाया है। अगर कल रात मैं तुम्हें उस गली से नहीं उठाता, तो वीर के आदमी तुम्हारी लाश भी नहीं छोड़ते। तुम उस रात उस गोदाम के पास क्या कर रही थी, यह मैं जानता हूँ।"
ऐशा का चेहरा सफेद पड़ गया। अरमान को सब पता था। उसे पता था कि ऐशा उस रात वहां सिर्फ कॉलेज से नहीं लौट रही थी, बल्कि वह अनजाने में एक ऐसी डील की गवाह बन गई थी जो उसे कभी नहीं देखनी चाहिए थी।
अचानक, पूरे महल में एक ज़ोरदार धमाका हुआ। फर्श कांप उठा और छत से धूल गिरने लगी। सायरन की चीखती आवाज़ों ने पूरे महल को हिलाकर रख दिया।
अरमान की आँखों में तुरंत एक शिकारी वाली सतर्कता आ गई। उसने ऐशा की कलाई को इतनी मजबूती से पकड़ा कि वह कराह उठी। "वह आ गया। वीर ने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया है।"
"क्या? वीर यहाँ है?" ऐशा घबराकर चिल्लाई।
अरमान ने उसे अपने सीने से लगा लिया और अपनी जेब से एक लोडेड पिस्टल निकाली। "घबराओ मत। जब तक मेरे शरीर में खून की आखिरी बूंद है, वह तुम्हें छू भी नहीं पाएगा। लेकिन याद रखना, आज के बाद तुम्हारी पुरानी ज़िंदगी खत्म हो चुकी है। अब तुम सिर्फ मेरी हो।"
रेड इमरजेंसी लाइट्स जलने लगीं, जिससे पूरा कमरा खूनी रंग में नहा गया। अरमान ने ऐशा को खींचते हुए बाहर निकाला। गलियारे में धुएं के गुबार उठ रहे थे और गोलियों की आवाज़ें नज़दीक आ रही थीं। सस्पेंस और डर अपनी चरम सीमा पर था। ऐशा को समझ नहीं आ रहा था कि वह अरमान का हाथ छोड़ दे या उसे और कसकर पकड़ ले।
महल अब एक जन्नत नहीं, बल्कि एक खूनी खेल का मैदान बन चुका था, जहाँ ऐशा वह इनाम थी जिसे वीर और अरमान दोनों हासिल करना चाहते थे।